जानिए किस ग्रह पर हमेशा रहता है सूर्य ग्रहण का आभास!
Thursday - December 26, 2019 3:51 pm ,
Category : WTN HINDI
शनि ग्रह पर रिंग्स के कारण कई हिस्सों तक नहीं पहुंच पाती सूर्य की रोशनी
शनि ग्रह पर वलयों के कारण होता है हर समय सूर्य ग्रहण का ‘आभास’
DEC 26 (WTN) – खगोलीय घटनाएं हमेशा से ही मनुष्यों के लिए आश्चर्य का कारण रही हैं। अनंत ब्रह्माण्ड में हर समय इतनी खलोगीय घटनाएं घटित होती रहती हैं कि इनसे मनुष्य अनजान ही है। अनंत ब्रह्माण्ड में घटित होने वाली अनंत घटनाओं के बारे में ना तो मनुष्य जानता है, और थोड़ी बहुत जिन घटनाओं के बारे में जानता भी है तो उन काफ़ी कुछ घटनाओं के पीछे के वैज्ञानिक कारणों से मनुष्य अनजान है। दरअसल, ब्रह्माण्ड में घटने वाली कुछ ही घटनाओं के बारे में मनुष्य थोड़ा बहुत जानता है और उन घटनाओं में से एक घटना है ग्रहण।
आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से मनुष्य सूर्य और चन्द्र ग्रहण के बारे में बहुत कुछ जानने लगा है। दरअसल, हमेशा से ही सूर्य और चन्द्र ग्रहण मनुष्य के लिए आश्चर्य का विषय रहे हैं। वैज्ञानिक समझ नहीं होने के कारण पहले जहां मनुष्य सूर्य और चन्द्र ग्रहण से घबराया करता था, वहीं अब ग्रहण के बारे में जानकारी हासिल होने के बाद लोग अब सूर्य और चन्द्र ग्रहण से डरते नहीं हैं। वैज्ञानिकों से लेकर ग्रहण के बारे में दिलचस्पी रखने वाले सभी लोगों के लिए ग्रहण का काफ़ी इन्तज़ार रहता है। वैसे सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण के बीच तुलना की जाए, तो सूर्य ग्रहण के प्रति मनुष्य का ज़रा ज़्यादा लगाव रहा है।
सूर्य पर ग्रहण लगना और उसके बाद सूर्य का चन्द्रमा के पीछे छिपना और दिन में पृथ्वी पर अंधेरा होना, दरअसल यह सभी कुछ हमेशा से ही मनुष्य के लिए कौतुहल का विषय रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि पृथ्वी पर हर साल किसी ना किसी कोने में सूर्य ग्रहण लगता ही रहता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हमारे सौर मण्डल में शनि ही इकलौता ग्रह ही जहां हमेशा सूर्य ग्रहण का आभास होता रहता है। यह पढ़कर आपको बेहद आश्चर्यजनक हुआ होगा, लेकिन क्या यह पूरा मामला आपको विस्तार से बताते हैं।
जैसा कि आप जानते ही होंगे कि सौर मण्डल का एक महत्वपूर्ण ग्रह शनि वलयों यानी रिंग्स से घिरा हुआ है। वहीं आप यह भी जानते ही होंगे कि पृथ्वी का सिर्फ़ एक ही प्राकृतिक उपग्रह है और वो है चन्द्रमा। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शनि ग्रह के 62 प्राकृतिक उपग्रह हैं यानी शनि ग्रह के पास 62 चन्द्रमा हैं और यह शनि ग्रह के सभी 62 चन्द्रमा पूर्ण सूर्य ग्रहण बनाने में सक्षम हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि शनि ग्रह के पास 62 चन्द्रमा हैं तो शनि ग्रह पर सालभर में बहुत ज़्यादा सूर्य ग्रहण होते होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है और शनि ग्रह पर 15 साल में एक बार ही सूर्य ग्रहण होता है। शनि ग्रह पर आख़िरी बार सूर्य ग्रहण 15 सितम्बर 2006 को हुआ था।
शनि ग्रह हमेशा से ही मनुष्य के लिए आश्चर्य का विषय रहा है। इसी कारण से शनि ग्रह के अध्ययन के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 15 अक्टूबर 1997 को कैसिनी नाम का एक सैटेलाइट शनि ग्रह के अध्ययन के लिए लॉन्च किया था। नासा का कैसिनी सैटेलाइट 8 साल की लम्बी यात्रा के बाद 1 जुलाई 2004 को शनि ग्रह की कक्षा में स्थापित हुआ था। शनि ग्रह की कक्षा में स्थापित होने के बाद कैसिनी सैटेलाइट ने शनि ग्रह की तस्वीरें भेजना शुरू की थीं। नासा के कैसिनी यान ने 13 सालों तक शनि की तस्वीरें भेजीं, जिसमें सबसे ज़्यादा ख़ास तस्वीरें थीं शनि पर होने वाले सूर्य ग्रहण की।
शनि ग्रह पर 15 सितम्बर 2006 को पड़े सूर्य ग्रहण के वक़्त नासा का कैसिनी सैटेलाइट शनि ग्रह के पास ही था और उस वक़्त कैसिनी ने शनि ग्रह पर सूर्य ग्रहण से बनने वाले रिंग ऑफ़ फायर की शानदार तस्वीरें भेजी थीं। दरअसल, शनि ग्रह के चारों तरफ़ बने रिंग्स यानी वलयों के कारण ही शनि ग्रह के ऊपर हमेशा कहीं ना कहीं सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती है। यानी इन रिंग्स की परछाई के कारण ही शनि ग्रह के किसी ना किसी हिस्से में हमेशा सूर्य ग्रहण यानी कि सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचने का आभास होता रहता है।
शनि ग्रह के इन्हीं रिंग्स के कारण हर समय शनि ग्रह के किसी ना किसी कोने पर सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती है और इसी कारण से कहा जा सकता है कि शनि ग्रह का वह हिस्सें जहां सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती हैं, वहां पर सूर्य ग्रहण का आभास होता है।
DEC 26 (WTN) – खगोलीय घटनाएं हमेशा से ही मनुष्यों के लिए आश्चर्य का कारण रही हैं। अनंत ब्रह्माण्ड में हर समय इतनी खलोगीय घटनाएं घटित होती रहती हैं कि इनसे मनुष्य अनजान ही है। अनंत ब्रह्माण्ड में घटित होने वाली अनंत घटनाओं के बारे में ना तो मनुष्य जानता है, और थोड़ी बहुत जिन घटनाओं के बारे में जानता भी है तो उन काफ़ी कुछ घटनाओं के पीछे के वैज्ञानिक कारणों से मनुष्य अनजान है। दरअसल, ब्रह्माण्ड में घटने वाली कुछ ही घटनाओं के बारे में मनुष्य थोड़ा बहुत जानता है और उन घटनाओं में से एक घटना है ग्रहण।
आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से मनुष्य सूर्य और चन्द्र ग्रहण के बारे में बहुत कुछ जानने लगा है। दरअसल, हमेशा से ही सूर्य और चन्द्र ग्रहण मनुष्य के लिए आश्चर्य का विषय रहे हैं। वैज्ञानिक समझ नहीं होने के कारण पहले जहां मनुष्य सूर्य और चन्द्र ग्रहण से घबराया करता था, वहीं अब ग्रहण के बारे में जानकारी हासिल होने के बाद लोग अब सूर्य और चन्द्र ग्रहण से डरते नहीं हैं। वैज्ञानिकों से लेकर ग्रहण के बारे में दिलचस्पी रखने वाले सभी लोगों के लिए ग्रहण का काफ़ी इन्तज़ार रहता है। वैसे सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण के बीच तुलना की जाए, तो सूर्य ग्रहण के प्रति मनुष्य का ज़रा ज़्यादा लगाव रहा है।
सूर्य पर ग्रहण लगना और उसके बाद सूर्य का चन्द्रमा के पीछे छिपना और दिन में पृथ्वी पर अंधेरा होना, दरअसल यह सभी कुछ हमेशा से ही मनुष्य के लिए कौतुहल का विषय रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि पृथ्वी पर हर साल किसी ना किसी कोने में सूर्य ग्रहण लगता ही रहता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हमारे सौर मण्डल में शनि ही इकलौता ग्रह ही जहां हमेशा सूर्य ग्रहण का आभास होता रहता है। यह पढ़कर आपको बेहद आश्चर्यजनक हुआ होगा, लेकिन क्या यह पूरा मामला आपको विस्तार से बताते हैं।
जैसा कि आप जानते ही होंगे कि सौर मण्डल का एक महत्वपूर्ण ग्रह शनि वलयों यानी रिंग्स से घिरा हुआ है। वहीं आप यह भी जानते ही होंगे कि पृथ्वी का सिर्फ़ एक ही प्राकृतिक उपग्रह है और वो है चन्द्रमा। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शनि ग्रह के 62 प्राकृतिक उपग्रह हैं यानी शनि ग्रह के पास 62 चन्द्रमा हैं और यह शनि ग्रह के सभी 62 चन्द्रमा पूर्ण सूर्य ग्रहण बनाने में सक्षम हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि शनि ग्रह के पास 62 चन्द्रमा हैं तो शनि ग्रह पर सालभर में बहुत ज़्यादा सूर्य ग्रहण होते होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है और शनि ग्रह पर 15 साल में एक बार ही सूर्य ग्रहण होता है। शनि ग्रह पर आख़िरी बार सूर्य ग्रहण 15 सितम्बर 2006 को हुआ था।
शनि ग्रह हमेशा से ही मनुष्य के लिए आश्चर्य का विषय रहा है। इसी कारण से शनि ग्रह के अध्ययन के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 15 अक्टूबर 1997 को कैसिनी नाम का एक सैटेलाइट शनि ग्रह के अध्ययन के लिए लॉन्च किया था। नासा का कैसिनी सैटेलाइट 8 साल की लम्बी यात्रा के बाद 1 जुलाई 2004 को शनि ग्रह की कक्षा में स्थापित हुआ था। शनि ग्रह की कक्षा में स्थापित होने के बाद कैसिनी सैटेलाइट ने शनि ग्रह की तस्वीरें भेजना शुरू की थीं। नासा के कैसिनी यान ने 13 सालों तक शनि की तस्वीरें भेजीं, जिसमें सबसे ज़्यादा ख़ास तस्वीरें थीं शनि पर होने वाले सूर्य ग्रहण की।
शनि ग्रह पर 15 सितम्बर 2006 को पड़े सूर्य ग्रहण के वक़्त नासा का कैसिनी सैटेलाइट शनि ग्रह के पास ही था और उस वक़्त कैसिनी ने शनि ग्रह पर सूर्य ग्रहण से बनने वाले रिंग ऑफ़ फायर की शानदार तस्वीरें भेजी थीं। दरअसल, शनि ग्रह के चारों तरफ़ बने रिंग्स यानी वलयों के कारण ही शनि ग्रह के ऊपर हमेशा कहीं ना कहीं सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती है। यानी इन रिंग्स की परछाई के कारण ही शनि ग्रह के किसी ना किसी हिस्से में हमेशा सूर्य ग्रहण यानी कि सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचने का आभास होता रहता है।
शनि ग्रह के इन्हीं रिंग्स के कारण हर समय शनि ग्रह के किसी ना किसी कोने पर सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती है और इसी कारण से कहा जा सकता है कि शनि ग्रह का वह हिस्सें जहां सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती हैं, वहां पर सूर्य ग्रहण का आभास होता है।