धीरे-धीरे ऑनलाइन शॉपिंग बन रही है एक ‘लत’!
Saturday - December 28, 2019 10:57 am ,
Category : WTN HINDI
ज़रूरत से ज़्यादा ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं लोग
बिना प्लानिंग की ऑनलाइन शॉपिंग से बढ़ सकता है क़र्ज़ और मानसिक तनाव
DEC 28 (WTN) – टेक्नोलॉजी के इस दौर में आप स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल तो ज़रूर करते हो होंगे। वहीं यदि आप स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करते हैं तो ऑनलाइन शॉपिंग भी आप करते ही होंगे। लेकिन यदि आप अपनी आर्थिक ज़रूरत से ज़्यादा ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो आप धीरे-धीरे एक लत का शिकार होते जा रहे हैं और यह लत है ऑनलाइन शॉपिंग की लत। दरअसल, ऑनलाइन शॉपिंग की यह लत आपको आने वाले समय में समस्याएं पैदा कर सकती है। यह सब पढ़कर आपको आश्चर्य ज़रूर हुआ होगा, लेकिन क्या है यह पूरा मामला आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, रिसर्च फर्म गार्टनर (Gartner) ने दावा किया है कि ऑनलाइन शॉपिंग की आदत लोगों में धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है और धीरे-धीरे यह इतनी बढ़ जाएगी की साल 2024 में WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन इस आदत को लत या फ़िर विकार घोषित कर देगा। रिपोर्ट के मुताबिक़, तेज़ी से बढ़ रही ऑनलाइन ख़रीददारी की आदत एक मनोवैज्ञानिक विकार का रूप ले सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि साल 2022 तक हर साल ऑनलाइन शॉपिंग में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज़ की जाएगी।
अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों के अध्ययन के मुताबिक़, दिखावे और घर बैठे शॉपिंग की सहूलियत के कारण ऑनलाइन शॉपिंग के ज़रिये लोग अपनी ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीददारी करने लगे हैं और यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। ऑनलाइन शॉपिंग के वक्त लोग अपनी इनकम को भूल जाते हैं और दूसरों की देखादेखी और दिखावे के लिए उन सामानों की भी ख़रीदी कर लेते हैं जिनकी उनको ज़रूरत ही नहीं होती है। इसी कारण से धीरे-धीरे एक सामान्य व्यक्ति ऑनलाइन शॉपिंग के ज़रिये काफ़ी अधिक शॉपिंग कर लेता है और बिना ज़रूरत के सामान पर अपना पैसा ख़र्च करता रहता है।
अब जबकि व्यक्ति बिना ज़रूरत के सामान ख़रीदता है तो इस कारण से उसे पैसों की तंगी आती है और उसका वित्तीय संकट बढ़ने लगता है। वित्तीय संकट बढ़ने के कारण उसका मानसिक तनाव बढ़ने लगता है और सम्बन्धित व्यक्ति क़र्ज़ लेने लगता है या फ़िर बाज़ार में उसकी उधारी बढ़ने लगती है। इन्हीं सब कारणों से ऑनलाइन शॉपिंग के कारण बढ़ते तनाव और इसकी एक लत लगने की आशंका के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन ऑनलाइन शॉपिंग के लोगों पर पढ़ने वाले दुष्प्रभाव का बारीक़ी से अध्ययन कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक़, ऑनलाइन शॉपिंग की प्रवृत्ति धीरे-धीरे समाज में बढ़ती ही जा रही है, ऐसे में आर्थिक क्षमता से ज़्यादा ख़रीदी के कारण पूरी दुनिया में बढ़ी तादात में लोगों पर वित्तीय संकट और भी बढ़ सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर ऐसा क्या कारण है कि ऑनलाइन शॉपिंग के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता ही जा रहा है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आजकल अधिकतर ऑनलाइन विक्रेता ग्राहकों को लुभाने और अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए AI (Artificial Intelligence) यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेते हैं और ग्राहकों को ख़रीददारी के लिए मज़बूर कर देते हैं। इसी कारण से ग्राहक अपनी आर्थिक क्षमता और ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीददारी कर लेते हैं।
इतना ही नहीं, ऑनलाइन शॉपिंग के कारण पूरी दुनिया में बेरोज़गारी भी बढ़ती जा रही है। दरअसल, लोगों का ज़रूरी पैसा लोग बिना ज़रूरत की ख़रीदी में ख़र्च कर रहे हैं, जिसका सही तरीक़े से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग ज़्यादा होने और पूंजी का सही उपयोग ना होने से कस्बों और शहरों के बाज़ारों में लोग कम ख़रीददारी कर रहे हैं, जिससे छोटे दुकानदार और वहां पर काम करने वाले लोगों की आमदनी पर संकट खड़ा हो गया है।
तो यदि आप भी ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो हमारी आपको सलाह है कि अपनी ज़रूरत के हिसाब से और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही आपको ऑनलाइन शॉपिंग करना चाहिए। क्योंकि यदि आपने अपनी सीमाओं से ज़्यादा ख़रीददारी की तो आपको पैसों की तंगी हो सकती है और आप क़र्ज़ के जाल में फंस सकते हैं और आपका तनाव बढ़ सकता है। इसलिए अपनी ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ही ऑनलाइन शॉपिंग कीजिए और क़र्ज़ और तनाव से मुक्ति पाइये।
DEC 28 (WTN) – टेक्नोलॉजी के इस दौर में आप स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल तो ज़रूर करते हो होंगे। वहीं यदि आप स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करते हैं तो ऑनलाइन शॉपिंग भी आप करते ही होंगे। लेकिन यदि आप अपनी आर्थिक ज़रूरत से ज़्यादा ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो आप धीरे-धीरे एक लत का शिकार होते जा रहे हैं और यह लत है ऑनलाइन शॉपिंग की लत। दरअसल, ऑनलाइन शॉपिंग की यह लत आपको आने वाले समय में समस्याएं पैदा कर सकती है। यह सब पढ़कर आपको आश्चर्य ज़रूर हुआ होगा, लेकिन क्या है यह पूरा मामला आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, रिसर्च फर्म गार्टनर (Gartner) ने दावा किया है कि ऑनलाइन शॉपिंग की आदत लोगों में धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही है और धीरे-धीरे यह इतनी बढ़ जाएगी की साल 2024 में WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन इस आदत को लत या फ़िर विकार घोषित कर देगा। रिपोर्ट के मुताबिक़, तेज़ी से बढ़ रही ऑनलाइन ख़रीददारी की आदत एक मनोवैज्ञानिक विकार का रूप ले सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि साल 2022 तक हर साल ऑनलाइन शॉपिंग में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज़ की जाएगी।
अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों के अध्ययन के मुताबिक़, दिखावे और घर बैठे शॉपिंग की सहूलियत के कारण ऑनलाइन शॉपिंग के ज़रिये लोग अपनी ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीददारी करने लगे हैं और यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। ऑनलाइन शॉपिंग के वक्त लोग अपनी इनकम को भूल जाते हैं और दूसरों की देखादेखी और दिखावे के लिए उन सामानों की भी ख़रीदी कर लेते हैं जिनकी उनको ज़रूरत ही नहीं होती है। इसी कारण से धीरे-धीरे एक सामान्य व्यक्ति ऑनलाइन शॉपिंग के ज़रिये काफ़ी अधिक शॉपिंग कर लेता है और बिना ज़रूरत के सामान पर अपना पैसा ख़र्च करता रहता है।
अब जबकि व्यक्ति बिना ज़रूरत के सामान ख़रीदता है तो इस कारण से उसे पैसों की तंगी आती है और उसका वित्तीय संकट बढ़ने लगता है। वित्तीय संकट बढ़ने के कारण उसका मानसिक तनाव बढ़ने लगता है और सम्बन्धित व्यक्ति क़र्ज़ लेने लगता है या फ़िर बाज़ार में उसकी उधारी बढ़ने लगती है। इन्हीं सब कारणों से ऑनलाइन शॉपिंग के कारण बढ़ते तनाव और इसकी एक लत लगने की आशंका के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन ऑनलाइन शॉपिंग के लोगों पर पढ़ने वाले दुष्प्रभाव का बारीक़ी से अध्ययन कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक़, ऑनलाइन शॉपिंग की प्रवृत्ति धीरे-धीरे समाज में बढ़ती ही जा रही है, ऐसे में आर्थिक क्षमता से ज़्यादा ख़रीदी के कारण पूरी दुनिया में बढ़ी तादात में लोगों पर वित्तीय संकट और भी बढ़ सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर ऐसा क्या कारण है कि ऑनलाइन शॉपिंग के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता ही जा रहा है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आजकल अधिकतर ऑनलाइन विक्रेता ग्राहकों को लुभाने और अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए AI (Artificial Intelligence) यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेते हैं और ग्राहकों को ख़रीददारी के लिए मज़बूर कर देते हैं। इसी कारण से ग्राहक अपनी आर्थिक क्षमता और ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीददारी कर लेते हैं।
इतना ही नहीं, ऑनलाइन शॉपिंग के कारण पूरी दुनिया में बेरोज़गारी भी बढ़ती जा रही है। दरअसल, लोगों का ज़रूरी पैसा लोग बिना ज़रूरत की ख़रीदी में ख़र्च कर रहे हैं, जिसका सही तरीक़े से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग ज़्यादा होने और पूंजी का सही उपयोग ना होने से कस्बों और शहरों के बाज़ारों में लोग कम ख़रीददारी कर रहे हैं, जिससे छोटे दुकानदार और वहां पर काम करने वाले लोगों की आमदनी पर संकट खड़ा हो गया है।
तो यदि आप भी ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो हमारी आपको सलाह है कि अपनी ज़रूरत के हिसाब से और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही आपको ऑनलाइन शॉपिंग करना चाहिए। क्योंकि यदि आपने अपनी सीमाओं से ज़्यादा ख़रीददारी की तो आपको पैसों की तंगी हो सकती है और आप क़र्ज़ के जाल में फंस सकते हैं और आपका तनाव बढ़ सकता है। इसलिए अपनी ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ही ऑनलाइन शॉपिंग कीजिए और क़र्ज़ और तनाव से मुक्ति पाइये।