जानिए आख़िर क्या होता है विदेशी मुद्रा भण्डार?
Saturday - December 28, 2019 1:09 pm ,
Category : WTN HINDI
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार
किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का ‘आईना’ होता है विदेशी मुद्रा भण्डार
DEC 28 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती और घरेलू स्तर पर तमाम तरह की आर्थिक चुनौतियों और बाधाओं के बीच मोदी सरकार के लिए विदेशी मुद्रा भण्डार के मोर्चे पर एक सुखद ख़बर आई है। जानकारी के लिए बता दें कि देश का विदेशी मुद्रा भण्डार 20 दिसम्बर, 2019 को समाप्त हुए सप्ताह में 45.6 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 454.948 अरब डॉलर की नयी सर्वकालिक ऊंचाई पर पहुंच गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पिछले सप्ताहांत यह 1.070 अरब डॉलर बढ़कर 454.492 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मु्द्रा आस्तियां 31.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 422.732 अरब डॉलर हो गईं हैं। वहीं इसी सप्ताह के दौरान रिज़र्व बैंक के पास आरक्षित सोने का भण्डार 16.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 27.132 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, इस दौरान IMF (International Monetary Fund) यानी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास पड़ा विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10 लाख डॉलर घटकर 1.443 अरब डॉलर के बराबर और IMF के पास पड़ा देश का आरक्षित विदेशी मुद्रा कोष 1.7 करोड़ डॉलर घटकर 3.642 अरब डॉलर रह गया।
यदि आपने विदेशी मुद्रा भण्डार के बारे में सिर्फ़ सुना है या फ़िर उसके बारे में सिर्फ़ पढ़ा है तो आपकी जानकारी के लिए विस्तार से बताते हैं कि आख़िर विदेशी मुद्रा भण्डार क्या होता है और इसकी किसी देश को क्या ज़रूरत होती है? दरअसल, विदेशी मुद्रा भण्डार किसी भी देश के केन्द्रीय बैंक द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसम्पत्तियां हैं और ज़रूरत पड़ने पर जिससे वह देश अपनी देनदारियों का भुगतान कर सके। जानकारी के लिए बता दें कि इस तरह की मुद्राएं सम्बन्धित देश की केन्द्रीय बैंक द्वारा जारी की जाती हैं।
वहीं सरकार और अन्य वित्तीय संस्थानों की ओर से केन्द्रीय बैंक के पास जमा की गई राशि को भी विदेशी मुद्रा भण्डार में गिना जाता है। यह मुद्रा भण्डार एक या एक से अधिक करेंसी में रखे जाते हैं, लेकिन ज़्यादातर अमेरिकी डॉलर और कुछ सीमा तक यूरो को विदेशी मुद्रा भण्डार में शामिल किया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि विदेशी मुद्रा भण्डार को फॉरेक्स रिज़र्व या FX रिज़र्व भी कहा जाता है।
विदेशी मुद्रा भण्डार में केवल विदेशी बैंकनोट, विदेशी बैंक जमा, विदेशी ट्रेजरी बिल और अल्पकालिक और दीर्घकालिक विदेशी सरकारी प्रतिभूतियां शामिल की जाती हैं। हालांकि, बता दें कि सोने के भण्डार, SDR (Special Drawing Rights) यानी विशेष आहरण अधिकार, और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जमा राशि भी विदेशी मुद्रा भण्डार का ही एक हिस्सा होती हैं। चुंकि यह सभी आंकड़ें अधिक आसानी से उपलब्ध होते हैं, इसलिए इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय भण्डार या फ़िर अंतर्राष्ट्रीय भण्डार कहा जाता है।
बता दें कि विदेशी मुद्रा भण्डार को किसी देश के अंतर्राष्ट्रीय निवेश की स्थिति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। आमतौर पर, जब किसी देश के मौद्रिक प्राधिकरण पर किसी प्रकार का दायित्व निकलता है, तो उसे अन्य श्रेणियों जैसे कि अन्य निवेशों में शामिल किया जाता है। वहीं आपकी जानकारी के लए बता दें कि केन्द्रीय बैंक की बैलेंस शीट में घरेलू ऋण के साथ विदेशी मुद्रा भण्डार को सम्पत्ति माना जाता है।
दरअसल, किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का आईना उस देश का विदेशी मुद्रा भण्डार ही होता है। यदि किसी देश की आर्थिक स्थिति अच्छी है तो उस देश से निर्यात निर्बाध रूप से जारी रहेगा, जिससे उस देश को विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती जाएगी। वहीं विदेशी मुद्रा की ज़्यादा प्राप्ति होने से उस देश का विदेशी मुद्रा भण्डार बढ़ता रहेगा और सम्बन्धित देश को आयातित सामान विदेशी मुद्रा भण्डार की अधिकता के कारण आसानी से उपलब्ध हो पाएगा।इसलिए किसी भी देश का विदेशी मुद्रा भण्डार जितना ज़्यादा होता है उस देश की आर्थिक स्थिति उतनी ही ज़्यादा मज़बूत मानी जाती है।
DEC 28 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती और घरेलू स्तर पर तमाम तरह की आर्थिक चुनौतियों और बाधाओं के बीच मोदी सरकार के लिए विदेशी मुद्रा भण्डार के मोर्चे पर एक सुखद ख़बर आई है। जानकारी के लिए बता दें कि देश का विदेशी मुद्रा भण्डार 20 दिसम्बर, 2019 को समाप्त हुए सप्ताह में 45.6 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 454.948 अरब डॉलर की नयी सर्वकालिक ऊंचाई पर पहुंच गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पिछले सप्ताहांत यह 1.070 अरब डॉलर बढ़कर 454.492 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मु्द्रा आस्तियां 31.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 422.732 अरब डॉलर हो गईं हैं। वहीं इसी सप्ताह के दौरान रिज़र्व बैंक के पास आरक्षित सोने का भण्डार 16.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 27.132 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, इस दौरान IMF (International Monetary Fund) यानी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास पड़ा विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10 लाख डॉलर घटकर 1.443 अरब डॉलर के बराबर और IMF के पास पड़ा देश का आरक्षित विदेशी मुद्रा कोष 1.7 करोड़ डॉलर घटकर 3.642 अरब डॉलर रह गया।
यदि आपने विदेशी मुद्रा भण्डार के बारे में सिर्फ़ सुना है या फ़िर उसके बारे में सिर्फ़ पढ़ा है तो आपकी जानकारी के लिए विस्तार से बताते हैं कि आख़िर विदेशी मुद्रा भण्डार क्या होता है और इसकी किसी देश को क्या ज़रूरत होती है? दरअसल, विदेशी मुद्रा भण्डार किसी भी देश के केन्द्रीय बैंक द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसम्पत्तियां हैं और ज़रूरत पड़ने पर जिससे वह देश अपनी देनदारियों का भुगतान कर सके। जानकारी के लिए बता दें कि इस तरह की मुद्राएं सम्बन्धित देश की केन्द्रीय बैंक द्वारा जारी की जाती हैं।
वहीं सरकार और अन्य वित्तीय संस्थानों की ओर से केन्द्रीय बैंक के पास जमा की गई राशि को भी विदेशी मुद्रा भण्डार में गिना जाता है। यह मुद्रा भण्डार एक या एक से अधिक करेंसी में रखे जाते हैं, लेकिन ज़्यादातर अमेरिकी डॉलर और कुछ सीमा तक यूरो को विदेशी मुद्रा भण्डार में शामिल किया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि विदेशी मुद्रा भण्डार को फॉरेक्स रिज़र्व या FX रिज़र्व भी कहा जाता है।
विदेशी मुद्रा भण्डार में केवल विदेशी बैंकनोट, विदेशी बैंक जमा, विदेशी ट्रेजरी बिल और अल्पकालिक और दीर्घकालिक विदेशी सरकारी प्रतिभूतियां शामिल की जाती हैं। हालांकि, बता दें कि सोने के भण्डार, SDR (Special Drawing Rights) यानी विशेष आहरण अधिकार, और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जमा राशि भी विदेशी मुद्रा भण्डार का ही एक हिस्सा होती हैं। चुंकि यह सभी आंकड़ें अधिक आसानी से उपलब्ध होते हैं, इसलिए इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय भण्डार या फ़िर अंतर्राष्ट्रीय भण्डार कहा जाता है।
बता दें कि विदेशी मुद्रा भण्डार को किसी देश के अंतर्राष्ट्रीय निवेश की स्थिति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। आमतौर पर, जब किसी देश के मौद्रिक प्राधिकरण पर किसी प्रकार का दायित्व निकलता है, तो उसे अन्य श्रेणियों जैसे कि अन्य निवेशों में शामिल किया जाता है। वहीं आपकी जानकारी के लए बता दें कि केन्द्रीय बैंक की बैलेंस शीट में घरेलू ऋण के साथ विदेशी मुद्रा भण्डार को सम्पत्ति माना जाता है।
दरअसल, किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का आईना उस देश का विदेशी मुद्रा भण्डार ही होता है। यदि किसी देश की आर्थिक स्थिति अच्छी है तो उस देश से निर्यात निर्बाध रूप से जारी रहेगा, जिससे उस देश को विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती जाएगी। वहीं विदेशी मुद्रा की ज़्यादा प्राप्ति होने से उस देश का विदेशी मुद्रा भण्डार बढ़ता रहेगा और सम्बन्धित देश को आयातित सामान विदेशी मुद्रा भण्डार की अधिकता के कारण आसानी से उपलब्ध हो पाएगा।इसलिए किसी भी देश का विदेशी मुद्रा भण्डार जितना ज़्यादा होता है उस देश की आर्थिक स्थिति उतनी ही ज़्यादा मज़बूत मानी जाती है।