क्या आप जानते हैं कि आख़िर क्यों ज़रूरी होते हैं डिटेंशन सेन्टर?
Saturday - December 28, 2019 3:59 pm ,
Category : WTN HINDI
दुनिया के कई देशों में हैं डिटेंशन सेन्टर
घुसपैठियों को नज़रबंद रखने की जगह है डिटेंशन सेन्टर
DEC 28 (WTN) - जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय देश में CAA, NRC और NPA की चर्चा ज़ोरों पर है। वहीं इन्हीं के साथ भारत में डिटेंशन सेन्टर (Detention Centre) के बारे में भी लोग बातें कर रहे हैं। मीडिया में इन दिनों ख़बरें चल रही है कि असम में एक डिटेंशन सेन्टर है, तो कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि भारत में कई डिटेंशन सेन्टर हैं और कई और बनाये जा रहे हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह डिटेंशन सेन्टर होते क्या हैं और क्या यह सिर्फ़ भारत में ही हैं? आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डिटेंशन सेन्टर किसी भी देश में अवैध तौर पर प्रवेश करने वाले व्यक्तियों के रहने की व्यवस्था होती है। दरअसल, यदि कोई व्यक्ति किसी देश में बिना किसी वैध दस्तावेज़ के दाख़िल होता है और सम्बन्धित देश की पुलिस उसे पकड़ लेती है तो उसे डिटेंशन सेन्टर में नज़रबंद करके रखा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि घुसपैठियों को जेल में नहीं रखा जा सकता है, इसलिए उनके लिए डिटेंशन सेन्टर बनाये जाते हैं। घुसपैठियों को यहां पर नज़रबन्द करके रखा जाता है और उन घुसपैठियों के सम्बन्धित देश के दूतावास से चर्चा के बाद उनकी सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जाती है। घुसपैठ की समस्या से परेशान कई देशों ने अपने यहां पर डिटेंशन सेन्टर बनाकर रखे हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि डिटेंशन सेन्टर में रहने वाले लोग किसी सज़ा को भुगतने के लिए वहां पर बंद नहीं रहते हैं, बल्कि ऐसे लोग घुसपैठिये होते हैं और यह लोग किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधियों को अंजाम ने दें सकें इसलिए इन्हें यहां पर रखा जाता है। डिटेंशन सेन्टर में नज़रबंद किये लोगों के देशों से चर्चा करने के बाद ज़रूरी क़ानूनी की जाती है और बिना वैध दस्तावेज़ के प्रवेश करने वालों को उनके देश में वापस भेज दिया जाता है। लेकिन जानकारी के लिए बता दें कि डिटेंशन सेन्टर में रहने वालों के देश में रहने या न रहने का निर्णय होने में काफ़ी वक़्त लग जाता है।
वैसे कहने को तो डिटेंशन सेन्टर में रहने वाले लोगों को रखने के लिए बाक़ायदा नियम बनाये जाते हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ज़्यादातर डिटेंशन सेन्टर्स में नियमों का पालन नहीं किया जाता है और डिटेंशन सेन्टर में बंद लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है और उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी जाती हैं। आरोप तो यह भी है कि डिटेंशन सेन्टर में रहने वाली महिलाओं को यौन हिंसा का सामना तक करना पड़ता है।
मीडिया से मिली एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा डिटेंशन सेन्टर अमेरिका में हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका में बिना वैध दस्तावेज़ के कई देशों के नागरिक आ जाते हैं, ऐसे में इन डिटेंशन सेन्टर्स में बिना दस्तावेज़ के अमेरिका में प्रवेश करने वाले लोगों को रखा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि दक्षिणी अमेरिका के बॉर्डर इलाक़े से बड़े तादात में लोग भागकर अमेरिका आ रहे हैं और इन्हीं लोगों को अमेरिका में डिटेंशन सेन्टर में रखा जाता है।
राष्ट्रपति चुनाव के समय डोनाल्ड ट्रम्प ने वादा किया था कि यदि वे राष्ट्रपति बनते हैं तो वे घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए उपाय करेंगे। अपने इसी वादे को पूरा करने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प के शासनकाल में घुसपैठियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है और इसी कारण से राष्ट्रपति ट्रम्प के शासनकाल में डिटेंशन सेन्टर की संख्या में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में अवैध अप्रवासियों की समस्या इतनी बड़ी हो गई है कि वहां की सरकार ने इसके लिए बाक़ायदा बजट देना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, अवैध अप्रवासियों की व्यवस्था देखने के लिए प्राइवेट कम्पनियों तक से काम कराया जा रहा है, जो कि टेक्नोलॉजी की मदद से डिटेंशन सेन्टर में घुसपैठियों पर नज़र रखती हैं। जानकारी के मुताबिक़, अमेरिका में निजी कम्पनियां डिटेंशन सेन्टर संचालित कर अच्छा खासा लाभ कमा रही हैं।
अब वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारत में 2010 के आसपास असम में पहला डिटेंशन सेन्टर खुला था। लेकिन लगता है कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां बिना कुछ जाने समझे ही डिटेंशन सेन्टर का विरोध कर रही हैं। लेकिन जानकारी के लिए बता दें कि यदि भारत में डिटेंशन सेन्टर हैं तो उनमें अवैध दस्तावेज़ से भारत में दाख़िल होने वाले घुसपैठियों को रखा जाएगा और घुसपैठियों के सम्बन्धित देशों से चर्चा करने और क़ानूनी कार्रवाई के बाद उन्हें उनके देश में वापस भेज दिया जाएगा। किसी भी देश में डिटेंशन सेन्टर इसलिए ज़रूरी होते हैं जिससे घुसपैठियों को यहां पर नज़रबंद करके रखा जा सके, जिससे यह किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधियों को अंजाम ना दे सकें।
DEC 28 (WTN) - जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय देश में CAA, NRC और NPA की चर्चा ज़ोरों पर है। वहीं इन्हीं के साथ भारत में डिटेंशन सेन्टर (Detention Centre) के बारे में भी लोग बातें कर रहे हैं। मीडिया में इन दिनों ख़बरें चल रही है कि असम में एक डिटेंशन सेन्टर है, तो कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि भारत में कई डिटेंशन सेन्टर हैं और कई और बनाये जा रहे हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह डिटेंशन सेन्टर होते क्या हैं और क्या यह सिर्फ़ भारत में ही हैं? आइये इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डिटेंशन सेन्टर किसी भी देश में अवैध तौर पर प्रवेश करने वाले व्यक्तियों के रहने की व्यवस्था होती है। दरअसल, यदि कोई व्यक्ति किसी देश में बिना किसी वैध दस्तावेज़ के दाख़िल होता है और सम्बन्धित देश की पुलिस उसे पकड़ लेती है तो उसे डिटेंशन सेन्टर में नज़रबंद करके रखा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि घुसपैठियों को जेल में नहीं रखा जा सकता है, इसलिए उनके लिए डिटेंशन सेन्टर बनाये जाते हैं। घुसपैठियों को यहां पर नज़रबन्द करके रखा जाता है और उन घुसपैठियों के सम्बन्धित देश के दूतावास से चर्चा के बाद उनकी सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जाती है। घुसपैठ की समस्या से परेशान कई देशों ने अपने यहां पर डिटेंशन सेन्टर बनाकर रखे हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि डिटेंशन सेन्टर में रहने वाले लोग किसी सज़ा को भुगतने के लिए वहां पर बंद नहीं रहते हैं, बल्कि ऐसे लोग घुसपैठिये होते हैं और यह लोग किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधियों को अंजाम ने दें सकें इसलिए इन्हें यहां पर रखा जाता है। डिटेंशन सेन्टर में नज़रबंद किये लोगों के देशों से चर्चा करने के बाद ज़रूरी क़ानूनी की जाती है और बिना वैध दस्तावेज़ के प्रवेश करने वालों को उनके देश में वापस भेज दिया जाता है। लेकिन जानकारी के लिए बता दें कि डिटेंशन सेन्टर में रहने वालों के देश में रहने या न रहने का निर्णय होने में काफ़ी वक़्त लग जाता है।
वैसे कहने को तो डिटेंशन सेन्टर में रहने वाले लोगों को रखने के लिए बाक़ायदा नियम बनाये जाते हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ज़्यादातर डिटेंशन सेन्टर्स में नियमों का पालन नहीं किया जाता है और डिटेंशन सेन्टर में बंद लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है और उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नहीं दी जाती हैं। आरोप तो यह भी है कि डिटेंशन सेन्टर में रहने वाली महिलाओं को यौन हिंसा का सामना तक करना पड़ता है।
मीडिया से मिली एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा डिटेंशन सेन्टर अमेरिका में हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका में बिना वैध दस्तावेज़ के कई देशों के नागरिक आ जाते हैं, ऐसे में इन डिटेंशन सेन्टर्स में बिना दस्तावेज़ के अमेरिका में प्रवेश करने वाले लोगों को रखा जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि दक्षिणी अमेरिका के बॉर्डर इलाक़े से बड़े तादात में लोग भागकर अमेरिका आ रहे हैं और इन्हीं लोगों को अमेरिका में डिटेंशन सेन्टर में रखा जाता है।
राष्ट्रपति चुनाव के समय डोनाल्ड ट्रम्प ने वादा किया था कि यदि वे राष्ट्रपति बनते हैं तो वे घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए उपाय करेंगे। अपने इसी वादे को पूरा करने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प के शासनकाल में घुसपैठियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है और इसी कारण से राष्ट्रपति ट्रम्प के शासनकाल में डिटेंशन सेन्टर की संख्या में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में अवैध अप्रवासियों की समस्या इतनी बड़ी हो गई है कि वहां की सरकार ने इसके लिए बाक़ायदा बजट देना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, अवैध अप्रवासियों की व्यवस्था देखने के लिए प्राइवेट कम्पनियों तक से काम कराया जा रहा है, जो कि टेक्नोलॉजी की मदद से डिटेंशन सेन्टर में घुसपैठियों पर नज़र रखती हैं। जानकारी के मुताबिक़, अमेरिका में निजी कम्पनियां डिटेंशन सेन्टर संचालित कर अच्छा खासा लाभ कमा रही हैं।
अब वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारत में 2010 के आसपास असम में पहला डिटेंशन सेन्टर खुला था। लेकिन लगता है कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां बिना कुछ जाने समझे ही डिटेंशन सेन्टर का विरोध कर रही हैं। लेकिन जानकारी के लिए बता दें कि यदि भारत में डिटेंशन सेन्टर हैं तो उनमें अवैध दस्तावेज़ से भारत में दाख़िल होने वाले घुसपैठियों को रखा जाएगा और घुसपैठियों के सम्बन्धित देशों से चर्चा करने और क़ानूनी कार्रवाई के बाद उन्हें उनके देश में वापस भेज दिया जाएगा। किसी भी देश में डिटेंशन सेन्टर इसलिए ज़रूरी होते हैं जिससे घुसपैठियों को यहां पर नज़रबंद करके रखा जा सके, जिससे यह किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधियों को अंजाम ना दे सकें।