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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आएगा नया साल

Monday - December 30, 2019 11:20 am , Category : WTN HINDI
जल्द तेज़ी पकड़ेगी देश की अर्थव्यवस्था
जल्द तेज़ी पकड़ेगी देश की अर्थव्यवस्था

ख़त्म होने को है वैश्विक आर्थिक सुस्ती, उद्योगों में डिमाण्ड बढ़ने से दूर होगी बेरोज़गारी
 
DEC 30 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने तेज़ी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। चालू वित्त वर्ष में अभी तक की तिमाहियों की जीडीपी ग्रोथ रेट बता रही है कि आर्थिक सुस्ती के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका-चीन ट्रेड वार समेत कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था की जीडीपी ग्रोथ रेट इस चालू वित्त वर्ष में उम्मीद से काफ़ी कम रहने वाली है। लेकिन अर्थशास्त्र के जानकारों के मुताबिक़, आर्थिक सुस्ती का असर अब कुछ ही दिनों बाद ख़त्म होने लगेगा और भारत समेत दुनियाभर की तमाम बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तेज़ी देखने को मिलेगी।

आर्थिक सुस्ती ने भारत की विकास दर को धीमा ज़रूर कर दिया है, लेकिन विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाला समय काफ़ी अच्छा रहने वाला है। आर्थिक सुस्ती का असर ख़त्म होने के बाद यदि भारतीय अर्थव्यवस्था ने आशा के अनुसार काम किया तो साल 2026 तक भारत, यूरोप के विकसित देश जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। वहीं यदि 2026 तक भारत ने जर्मनी को पछाड़ दिया तो साल 2034 तक भारतीय अर्थव्यवस्था जापान की अर्थव्यवस्था को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्रिटेन स्थित सेन्टर फॉर इकोनॉमिक्स एण्ड बिजनेस रिसर्च (Center for Economics & Business Research) की रिपोर्ट ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक लीग टेबल 2020’ (World Economic League Table 2020) के अनुसार साल 2019 में आर्थिक सुस्ती के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने ब्रिटेन और फ्रांस की अर्थव्यवस्थाओं को पछाड़ दिया है और भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत साल 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर यानी पांच हज़ार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। हालांकि, मोदी सरकार ने साल 2024 तक भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है।

CEBR ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आने वाले 15 साल तक जापान, जर्मनी और भारत के बीच दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिस्पर्धा जारी रहेगी। जानकारी के लिए बता दें कि इस समय अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वहीं चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ज़ाहिर है कि भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक मंदी ने काफ़ी बड़ा झटका दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, तेज़ी से बढ़ती भारत और ब्राजील जैसी अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक सुस्ती ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जितने तेज़ी से यह दोनों अर्थव्यवस्थाएं पिछड़ी हैं, आर्थिक सुस्ती का असर ख़त्म होने के बाद यह दोनों ही अर्थव्यवस्थाएं उतनी ही तेज़ी से आगे बढ़ेंगी।

अनुमान लगाया जा रहा है कि अमेरिका-चीन ट्रेड वार समेत अन्य वैश्विक व्यापारिक तनावों में कमी आने के साथ ही मोदी सरकार और भारत की केन्द्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया द्वारा उठाये गये सुधारात्मक और सकारात्मक उपायों से साल 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है। हालांकि, हर बार की तरह आने वाले समय में भी बढ़ता हुआ राजकोषीय घाटा सरकार के लिए चिन्ता का कारण बना रहेगा। वैसे कुछ व्यापारिक संगठनों का सुझाव है कि सरकार को लचीली राजकोषीय नीति को अपनाना चाहिए जिसमें केन्द्र सरकार के राजकोषीय घाटे के लिये लक्ष्य में 0.5 प्रतिशत से 0.75 प्रतिशत का दायरा तय किया जाना चाहिये।

लम्बी आर्थिक सुस्ती का सामना करने के बाद व्यापारिक संगठनों का मानना है कि अर्थव्यवस्था के लिए जो बुरा वक़्त था वो जल्द ही ख़त्म ही होने वाला है और साल 2020 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतरीन साबित होगा। यदि केन्द्र सरकार और रिज़र्व बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए उठाये गये उपायों का समय पर सकारात्मक परिणाम मिला तो आगामी 4 वित्त वर्ष तक भारतीय अर्थव्यवस्था काफ़ी तेज़ी से विकास करेगी और इस आधार पर 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

चालू वित्त वर्ष की लगातार तीन तिमाहियों में अर्थव्यवस्था से जुड़े लगभग सभी सेक्टर्स में नरमी देखी गई है। सेवा क्षेत्र के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में भी इस दौरान सुस्ती के कारण बड़ी तादात में बेरोज़गारी बढ़ी। वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर को तो आर्थिक सुस्ती के कारण सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि आर्थिक सुस्ती का सबसे बड़ा और लम्बा असर भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा है। वहीं जीडीपी कलेक्शन में इस वित्त वर्ष में आशा के अनुसार नहीं रहा है, जिससे सरकार का बजट घाटा बढ़ गया।
 
लेकिन आर्थिक सुस्ती का दौर ख़त्म होने की कगार पर ही है। जल्द ही विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेज़ी आने के आसार हैं और इससे रोज़गार में वृद्धि भी देखी जाएगी। रोज़गार बढ़ने और काम करने वालों के वेतन में वृद्धि होने से लोग ख़रीदी करेंगे और इससे पैसा मार्केट में आएगा। मार्केट में नक़दी आने से वस्तुओं और सेवाओं की डिमाण्ड बढ़ेगी और डिमाण्ड बढ़ने से उद्योगों और कम्पनियों में नये और ज़्यादा ऑर्डर आने से उत्पादन बढ़ेगा। ज़ाहिर है कि जब उत्पादन बढ़ेगा और बाज़ार में बिक्री में तेज़ी आएगी तो अर्थव्यवस्था को इससे काफ़ी सहारा मिलेगा और जीडीपी ग्रोथ रेट में वृद्धि होगी। यानी आशा की जानी चाहिए कि जल्द ही आर्थिक सुस्ती के बुरे असर से भारत निजात पाएगा और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के साथ ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए जापान और जर्मनी के साथ प्रतिस्पर्धा करेगा।