आर्थिक रूप से काफ़ी नुकसानदायक होता है इंटरनेट शटडाउन
Monday - December 30, 2019 3:43 pm ,
Category : WTN HINDI
इंटरनेट शटडाउन से हर मिनट लगती है लाखों की चपत
CAA विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट बंद होने से सरकार को हुआ राजस्व का तगड़ा नुकसान
DEC 30 (WTN) – टेक्नोलॉजी के इस दौर में हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन है और वह इंटरनेट के ज़रिये अपने कामों का अन्जाम देता है। जब कभी भी आपको मोबाइल फ़ोन डिस्चार्ज हो जाता है या फ़िर उसमें इंटरनेट कनेक्शन बंद हो जाता है, तो ऐसे में आपको परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक रिसर्च के अनुसार, मोबाइल में इंटरनेट ना होने पर कई लोगों को बेचैनी तक होने लगती है। वैसे आजकल लगभग हर काम इंटरनेट पर ही निर्भर हो गये हैं और मोबाइल नेटवर्क कम्पनियां निर्बाध रूप से इंटरनेट की सेवाएं जारी रखती हैं। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि समय-समय पर सरकार के आदेश पर मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों को इंटरनेट शटडाउन करना पड़ता है। पर क्या आपने कभी विचार किया है कि इंटरनेट शटडाउन होने से मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों और सरकार को कितना नुकसान उठाना पड़ता है?
जैसा कि आप जानते हैं कि विपक्षी पार्टियों की नासमझी के कारण नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में पूरे देश में कई जगहों पर कुछ चुनिंदा लोगों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किये, जिसके कारण कई राज्यों की सरकारों ने एक्शन लेते हुए और एहतियातन कई जगहों पर सोशल मीडिया और मैसेज के ज़रिये अफ़वाहों और ग़लत जानकारी को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन किया यानी उन जगहों पर इंटरनेट सेवा रोक दी।
देखा गया है कि विरोध प्रदर्शन के समय कई बार ग़लत और भ्रामक ख़बरें फैलाई जाती हैं, जिससे हिंसा भड़क सकती है और ऐसे में ऐसी ख़बरों को इंटरनेट के ज़रिये फैलने से रोकने के लिए सरकार सबसे पहला क़दम उठाती है कि उस प्रभावित इलाक़े में इंटरनेट सेवा बंद कर देती है। एक रिसर्च के मुताबिक़, सबसे ज़्यादा अफ़वाह व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर से फैलती हैं। इन्हीं के ज़रिये लोगों को भड़काने का काम किया जाता है। इसलिए सरकार विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने पर या हिंसा की आशंका होने पर प्रभावित इलाक़े में इंटरनेट सेवा रोक देती है।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेट शटडाउन करने यानी इंटरनेट सेवाएं रोकने से इंटरनेट सर्विस प्रोवाइड करने वाली कम्पनी से लेकर सरकार तक को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। यदि आप सोच रहे हैं कि यह आर्थिक नुकसान कुछ ज़्यादा नहीं होता है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपका यह सोचना पूरी तरह से ग़लत है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट शटडाउन के कारण इंटरनेट सर्विस प्रदान करने वाली कम्पनियों को हर घण्टे क़रीब 2 करोड़ 45 लाख रुपये का नुकसान होता है, वहीं सरकार को भी इंटरनेट बंद होने से बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
आंकड़ों की मानें तो भारत के लोग पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा इंटरनेट डाटा का इस्तेमाल करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय इंटरनेट यूज़र्स हर महीने 9.8 गीगा बाईट इंटरनेट डाटा का इस्तेमाल करते हैं, जो कि पूरी दुनिया के किसी भी हिस्से में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट डाटा से अधिक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिलायंस जियो की लॉन्चिग के बाद से देश में फ्री कॉलिंग और सस्ते इंटरनेट डाटा क्रान्ति शुरू हुई थी, जिसके बाद बाक़ी अन्य मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों को भी अपने टैरिफ प्लान में भारी कटौती करना पड़ी थी। यानी फ्री कॉलिंग और सस्ते इंटरनेट डाटा के कारण भारत में तेज़ी से स्मार्टफ़ोन की बिक्री के कारण भारत दुनिया का सबसे ज़्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाला देश बन गया।
भारत में समय-समय पर किसी ना किसी कारण से हिंसा या विरोध प्रदर्शनों की आशंका के चलते पिछले 5 सालों में क़रीब 16 हज़ार घण्टों के लिए इंटरनेट शटडाउन रहा है। इंटरनेट शटडाउन रहने से मोबाइल नेटवर्किंग कम्पनियों और सरकार को क़रीबन 3.04 बिलियन डॉलर यानी क़रीब 21,584 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है। आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर है कि इंटरनेट बंद होने से मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों और सरकार को काफ़ी घाटा उठाना पड़ता है लेकिन यदि यह घाटा ना हो तो इससे मिलने वाले टैक्स से विकास की कई परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं।
DEC 30 (WTN) – टेक्नोलॉजी के इस दौर में हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन है और वह इंटरनेट के ज़रिये अपने कामों का अन्जाम देता है। जब कभी भी आपको मोबाइल फ़ोन डिस्चार्ज हो जाता है या फ़िर उसमें इंटरनेट कनेक्शन बंद हो जाता है, तो ऐसे में आपको परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक रिसर्च के अनुसार, मोबाइल में इंटरनेट ना होने पर कई लोगों को बेचैनी तक होने लगती है। वैसे आजकल लगभग हर काम इंटरनेट पर ही निर्भर हो गये हैं और मोबाइल नेटवर्क कम्पनियां निर्बाध रूप से इंटरनेट की सेवाएं जारी रखती हैं। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि समय-समय पर सरकार के आदेश पर मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों को इंटरनेट शटडाउन करना पड़ता है। पर क्या आपने कभी विचार किया है कि इंटरनेट शटडाउन होने से मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों और सरकार को कितना नुकसान उठाना पड़ता है?
जैसा कि आप जानते हैं कि विपक्षी पार्टियों की नासमझी के कारण नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में पूरे देश में कई जगहों पर कुछ चुनिंदा लोगों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किये, जिसके कारण कई राज्यों की सरकारों ने एक्शन लेते हुए और एहतियातन कई जगहों पर सोशल मीडिया और मैसेज के ज़रिये अफ़वाहों और ग़लत जानकारी को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट शटडाउन किया यानी उन जगहों पर इंटरनेट सेवा रोक दी।
देखा गया है कि विरोध प्रदर्शन के समय कई बार ग़लत और भ्रामक ख़बरें फैलाई जाती हैं, जिससे हिंसा भड़क सकती है और ऐसे में ऐसी ख़बरों को इंटरनेट के ज़रिये फैलने से रोकने के लिए सरकार सबसे पहला क़दम उठाती है कि उस प्रभावित इलाक़े में इंटरनेट सेवा बंद कर देती है। एक रिसर्च के मुताबिक़, सबसे ज़्यादा अफ़वाह व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर से फैलती हैं। इन्हीं के ज़रिये लोगों को भड़काने का काम किया जाता है। इसलिए सरकार विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने पर या हिंसा की आशंका होने पर प्रभावित इलाक़े में इंटरनेट सेवा रोक देती है।
लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेट शटडाउन करने यानी इंटरनेट सेवाएं रोकने से इंटरनेट सर्विस प्रोवाइड करने वाली कम्पनी से लेकर सरकार तक को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। यदि आप सोच रहे हैं कि यह आर्थिक नुकसान कुछ ज़्यादा नहीं होता है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपका यह सोचना पूरी तरह से ग़लत है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट शटडाउन के कारण इंटरनेट सर्विस प्रदान करने वाली कम्पनियों को हर घण्टे क़रीब 2 करोड़ 45 लाख रुपये का नुकसान होता है, वहीं सरकार को भी इंटरनेट बंद होने से बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
आंकड़ों की मानें तो भारत के लोग पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा इंटरनेट डाटा का इस्तेमाल करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय इंटरनेट यूज़र्स हर महीने 9.8 गीगा बाईट इंटरनेट डाटा का इस्तेमाल करते हैं, जो कि पूरी दुनिया के किसी भी हिस्से में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट डाटा से अधिक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिलायंस जियो की लॉन्चिग के बाद से देश में फ्री कॉलिंग और सस्ते इंटरनेट डाटा क्रान्ति शुरू हुई थी, जिसके बाद बाक़ी अन्य मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों को भी अपने टैरिफ प्लान में भारी कटौती करना पड़ी थी। यानी फ्री कॉलिंग और सस्ते इंटरनेट डाटा के कारण भारत में तेज़ी से स्मार्टफ़ोन की बिक्री के कारण भारत दुनिया का सबसे ज़्यादा डेटा इस्तेमाल करने वाला देश बन गया।
भारत में समय-समय पर किसी ना किसी कारण से हिंसा या विरोध प्रदर्शनों की आशंका के चलते पिछले 5 सालों में क़रीब 16 हज़ार घण्टों के लिए इंटरनेट शटडाउन रहा है। इंटरनेट शटडाउन रहने से मोबाइल नेटवर्किंग कम्पनियों और सरकार को क़रीबन 3.04 बिलियन डॉलर यानी क़रीब 21,584 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ है। आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर है कि इंटरनेट बंद होने से मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों और सरकार को काफ़ी घाटा उठाना पड़ता है लेकिन यदि यह घाटा ना हो तो इससे मिलने वाले टैक्स से विकास की कई परियोजनाएं शुरू की जा सकती हैं।