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20 साल के लम्बे ‘इन्तज़ार’ के बाद देश को मिला पहला चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ

Tuesday - December 31, 2019 11:10 am , Category : WTN HINDI
देश के पहले चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ होंगे बिपिन रावत
देश के पहले चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ होंगे बिपिन रावत

तीनों सेनाओं के प्रमुख के रूप में अब होगी बिपिन रावत की ‘अग्निपरीक्षा’
 

DEC 31 (WTN) – 20 साल के लम्बे इन्तज़ार के बाद आख़िरकार देश को बिपिन रावत के रूप में पहला चीफ ऑफ़ डिफेस स्टाफ मिल ही गया। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर 20 साल के लम्बे इन्तज़ार का क्या मामला है। इसके बारे में आपको बताने से पहले आपको यह बताते हैं कि आख़िर चीफ ऑफ़ डिफेस स्टाफ का पद होता क्या है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (CDS) एक ऐसा पद है, जिसपर रहने वाला अधिकारी तीनों सेनाओं का प्रमुख होता है और चार स्टार जनरल रैंक के अधिकारी को इस पद पर नियुक्त किया जाता है। भारत में इस नये पद के सृजन के बाद जल्द ही सैन्य मामलों का विभाग (Department Of Military Affairs) का गठन किया जाएगा और चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) इसके प्रमुख होंगे।
 
सीडीएस की सबसे प्रमुख ज़िम्मेदारी होगी कि वह तीनों सेनाओं यानी थल सेना, जल सेना और वायु सेना के बीच बेहतर सामंजस्य बैठाये। इस पद पर बैठे व्यक्ति को सैन्य प्रबन्धन में विशेष योग्यता हासिल होना चाहिए। चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं से जुड़े मामलों में बिना रक्षा सचिव की अनुमति के रक्षा मंत्री से मिल सकता है और उन्हें सैन्य प्रबंधन और तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य के बारे में सलाह दे सकता है। यानी कि सीडीएस रक्षा मंत्री का प्रधान सैन्य सलाहकार होगा। भारत के मामले में सीडीएस सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों की तरह ही चार स्टार वाले एक अधिकारी होगा, लेकिन प्रोटोकॉल में वह उन तीनों से आगे होगा।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल 15 अगस्त को लाल किले से दिये अपने भाषण में कहा था कि जल्द ही भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति की जाएगी। अब आपको बताते हैं कि आख़िरकार इस पद के सृजन की भारत को क्यों ज़रूरत पड़ी। दरअसल, साल 1999 में हुए करगिल युद्ध में सेनाओं के बीच बेहतर सामंजस्य नहीं रह पाया था। करगिल युद्ध के बाद साल 2001 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में गठित ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स (GOM) ने समीक्षा के बाद पाया था कि युद्ध के दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी रही, और यदि तीनों सेनाओं के बीच सही तरीक़े से समन्वय होता तो जनहानि और धनहानि को काफ़ी कम किया जा सकता था। उसी वक़्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद बनाने का सुझाव दिया गया था।

वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत से पहले दुनिया के कई देशों में चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ का पद है। NATO (North Atlantic Treaty Organization) से जुड़े 29 देशों में से ज़्यादातर देश इस व्यवस्था के तहत अपनी सेनाओं के सर्वोच्च पद पर चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ को नियुक्त करते हैं। भारत के अलावा इस समय यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इटली, फ्रांस समेत क़रीब दस देशों में चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ का पद है। जानकारी के लिए बता दें कि हर देश अपने यहां सीडीएस को अलग-अलग शक्तियां प्रदान करता है, जिससे तीनों सेनाओं के बीच समन्वय मज़बूत हो सके और सैन्य ऑपरेशन की स्थिति में रणनीति पर तेज़ी से अमल हो सके।

जनरल के रूप में देश को सेवाएं देने के बाद बिपिन रावत चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं देने जा रहे हैं। इस पद पर उनकी सबसे अहम ज़िम्मेदारी तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और भी बेहतर बनाने की होगी। वहीं सीडीएस के रूप में बिपिन रावत की भूमिका चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (Chiefs Of staff Committee) के स्थायी अध्यक्ष की भी होगी, जिसमें सीडीएस की भूमिका सशस्त्र सेनाओं के ऑपरेशंस में आपसी समन्वय और उसके लिए वित्त प्रबन्धन की होगी। इन नये पद के सृजन के बाद इसमें शर्त रखी गई है कि इस पर नियुक्त व्यक्ति भविष्य में कोई भी सरकारी पद नहीं ले पाएगा। कहा यह भी जा रहा है कि सीडीएस के पास तीनों सेनाओं के प्रशासनिक मुद्दों पर निर्णय लेने की तो शक्ति होगी, लेकिन सीडीएस कोई भी मिलिट्री कमाण्ड नहीं दे पाएंगे।

नव नियुक्त सीडीएस बिपिन रावत 65 साल की उम्र तक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद पर बने रह सकते हैं। यानी जनरल रावत अगले तीन साल तक इस पद पर बने रह सकते हैं क्योंकि उनकी आयु इस समय 62 साल है।सरकार ने सीडीएस के पद के लिए शनिवार को ही आर्मी के नियमों में बदलाव करते हुए सीडीएस के लिए 65 साल की अधिकतम उम्र घोषित कर दी थी। जानकारी के लिए बता दें कि जाबांज सैन्य अधिकारी जनरल बिपिन रावत ने अपने तीन साल के कार्यकाल में ना केवल पाकिस्तान और उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद पर नियंत्रण बनाये रखा बल्कि जनरल रावत ने इस दौरान चीन की भी नापाक चालों को नाकाम किया है। अब देखना होगा कि चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ के रूप में बिपिन रावत तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य बनाने के लिए किस तरह के प्रबन्धन और रणनीति को अपनाते हैं।
 
दरअसल, करगिल युद्ध से सबक लेने के बाद भारत में तुरन्त ही चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ का पद बनाकर उसपर किसी की नियुक्ति करना चाहिये थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी के कारण इस पद के गठन के सुझाव के 20 साल बाद इस पद का सृजन हुआ। पाकिस्तान, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और विस्तावरवादी मानसिकता वाले देश चीन से सम्भावित ख़तरों के देखते हुए इस पद का काफ़ी पहले ही गठन हो जाना चाहिए था। लेकिन देर से ही सही, चीफ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ के पद का गठन होने से भारत की तीनों सेनाओं के बीच अब पहले से बेहतर सामंजस्य देखने को मिलेगा। वहीं युद्ध की स्थिति में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और युद्ध के दौरान कुशल रणनीति और प्रबन्धन से भारत फ़ायदे में रह सकता है।