मोदी सरकार की ‘इस नीति’ से कम होगा प्रदूषण और बढ़ेगी वाहनों की बिक्री
Tuesday - December 31, 2019 3:56 pm ,
Category : WTN HINDI
जल्द घोषित हो सकती है स्क्रैपेज पॉलिसी
पुराने वाहनों की ख़रीदी को ‘हतोत्साहित’ करेगी सरकार, ऑटो इण्डस्ट्री में बढ़ेगी डिमाण्ड
DEC 31 (WTN) – दिनों दिन गाड़ियों के कारण बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण किसी भी देश के लिए चिन्ता का एक बड़ा कारण है। भारत में बढ़ती जनसंख्या और उसी तादात में बढ़ते वाहनों के कारण वायु प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। किसी भी देश की सरकार वाहनों के कारण बढ़ते वायु प्रदूषण को नज़रअन्दाज़ नहीं कर सकती है। इस कड़ी में मोदी सरकार भी एक दीर्घकालीन योजना बनाकर वायु प्रदूषण से निपटने और उसे कम करने के लिए कुछ नीतियों पर काम कर रही है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्रीय कैबिनेट ने अभी तक स्क्रैपेज पॉलिसी को मन्ज़ूरी नहीं दी है, लेकिन केन्द्र सरकार इस पॉलिसी की मदद से वायु प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों को हटाने की तैयारी कर रही है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्विक आर्थिक मंदी का असर है। आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले 18 महीनों से ऑटो इण्डस्ट्री वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण मंदी पड़ी हुई है। उत्पादन कम करने से लेकर उत्पादन कुछ दिनों के लिए बन्द करने तक की नौबत ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री में आ चुकी है।
ऑटो सेक्टर की बेहाली से चिन्तित मोदी सरकार अब स्क्रैपेज पॉलिसी की मदद से कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री को आर्थिक सुस्ती से उबारने की कोशिश में है। जानकारों के मुताबिक़ यदि मोदी सरकार ऐसा क़दम उठाती है तो इससे ऑटो सेक्टर को काफ़ी राहत मिल सकती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत तय समय से ज़्यादा चल चुकीं पुरानी कॉमर्शियल गाड़ियों पर पाबंदी लगाने की तैयारी में है, जो प्रदूषण फैलाती हैं। दरअसल, सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत पुरानी गाड़ियों के बेचने के बाद नयी गाड़ी ख़रीदने पर रजिस्ट्रेशन फीस में छूट देने की नीति पर भी विचार कर रही है।
वहीं स्क्रैपेज पॉलिसी लागू हो जाने के बाद उन गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल फीस में वृद्धि होगी जो 15 साल से ज़्यादा पुरानी हैं। सरकार इस नीति के तहत पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी को हतोत्साहित करना चाह रही है। यदि पुरानी गाड़ियां रिसेल नहीं होंगी तो स्वाभाविक है कि उनसे वायु प्रदूषण नहीं होगा। वैसे जानकारी के लिए बता दें कि सरकार कमर्शियल वाहनों के साथ-साथ पैसेंजर व्हीकल्स पर भी यही नीति लागू करने की तैयारी में है।
दरअसल, सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी से एक साथ दो काम करने की नीति पर काम कर रही है। एक तो स्क्रैपेज पॉलिसी से पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी कम होगी और जब पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी कम होगी तो वे रोड पर नहीं चलेंगी। वहीं जब पुरानी गाड़ियां रोड पर नहीं चलेंगी तो इससे प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। वहीं पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी हतोत्साहित करने से नयी गाड़ियों की बिक्री में इज़ाफ़ा होगा। यदि गाड़ियों की बिक्री में इज़ाफ़ा होता है तो इससे आर्थिक सुस्ती से बेहाल ऑटोमोबाइल सेक्टर को काफ़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि स्क्रैपेज पॉलिसी के ज़रिये मोदी सरकार पुराने वाहनों के स्क्रैपेज पर नये वाहन की ख़रीदी पर रजिस्ट्रेशन में छूट देने जा रही है। वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर की कम्पनियां भी आर्थिक सुस्ती की मार से बचने के लिए वाहनों की ख़रीदी पर भारी छूट देने जा रही हैं। कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की स्क्रैपेज पॉलिसी से जहां एक तरफ़ प्रदूषण कम होगा, वहीं दूसरी तरफ़ वाहनों की बिक्री में इज़ाफ़ा होगा जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर को काफ़ी राहत मिलेगी।
DEC 31 (WTN) – दिनों दिन गाड़ियों के कारण बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण किसी भी देश के लिए चिन्ता का एक बड़ा कारण है। भारत में बढ़ती जनसंख्या और उसी तादात में बढ़ते वाहनों के कारण वायु प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। किसी भी देश की सरकार वाहनों के कारण बढ़ते वायु प्रदूषण को नज़रअन्दाज़ नहीं कर सकती है। इस कड़ी में मोदी सरकार भी एक दीर्घकालीन योजना बनाकर वायु प्रदूषण से निपटने और उसे कम करने के लिए कुछ नीतियों पर काम कर रही है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्रीय कैबिनेट ने अभी तक स्क्रैपेज पॉलिसी को मन्ज़ूरी नहीं दी है, लेकिन केन्द्र सरकार इस पॉलिसी की मदद से वायु प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों को हटाने की तैयारी कर रही है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्विक आर्थिक मंदी का असर है। आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले 18 महीनों से ऑटो इण्डस्ट्री वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण मंदी पड़ी हुई है। उत्पादन कम करने से लेकर उत्पादन कुछ दिनों के लिए बन्द करने तक की नौबत ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री में आ चुकी है।
ऑटो सेक्टर की बेहाली से चिन्तित मोदी सरकार अब स्क्रैपेज पॉलिसी की मदद से कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री को आर्थिक सुस्ती से उबारने की कोशिश में है। जानकारों के मुताबिक़ यदि मोदी सरकार ऐसा क़दम उठाती है तो इससे ऑटो सेक्टर को काफ़ी राहत मिल सकती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत तय समय से ज़्यादा चल चुकीं पुरानी कॉमर्शियल गाड़ियों पर पाबंदी लगाने की तैयारी में है, जो प्रदूषण फैलाती हैं। दरअसल, सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी के तहत पुरानी गाड़ियों के बेचने के बाद नयी गाड़ी ख़रीदने पर रजिस्ट्रेशन फीस में छूट देने की नीति पर भी विचार कर रही है।
वहीं स्क्रैपेज पॉलिसी लागू हो जाने के बाद उन गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल फीस में वृद्धि होगी जो 15 साल से ज़्यादा पुरानी हैं। सरकार इस नीति के तहत पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी को हतोत्साहित करना चाह रही है। यदि पुरानी गाड़ियां रिसेल नहीं होंगी तो स्वाभाविक है कि उनसे वायु प्रदूषण नहीं होगा। वैसे जानकारी के लिए बता दें कि सरकार कमर्शियल वाहनों के साथ-साथ पैसेंजर व्हीकल्स पर भी यही नीति लागू करने की तैयारी में है।
दरअसल, सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी से एक साथ दो काम करने की नीति पर काम कर रही है। एक तो स्क्रैपेज पॉलिसी से पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी कम होगी और जब पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी कम होगी तो वे रोड पर नहीं चलेंगी। वहीं जब पुरानी गाड़ियां रोड पर नहीं चलेंगी तो इससे प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। वहीं पुरानी गाड़ियों की ख़रीदी हतोत्साहित करने से नयी गाड़ियों की बिक्री में इज़ाफ़ा होगा। यदि गाड़ियों की बिक्री में इज़ाफ़ा होता है तो इससे आर्थिक सुस्ती से बेहाल ऑटोमोबाइल सेक्टर को काफ़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि स्क्रैपेज पॉलिसी के ज़रिये मोदी सरकार पुराने वाहनों के स्क्रैपेज पर नये वाहन की ख़रीदी पर रजिस्ट्रेशन में छूट देने जा रही है। वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर की कम्पनियां भी आर्थिक सुस्ती की मार से बचने के लिए वाहनों की ख़रीदी पर भारी छूट देने जा रही हैं। कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की स्क्रैपेज पॉलिसी से जहां एक तरफ़ प्रदूषण कम होगा, वहीं दूसरी तरफ़ वाहनों की बिक्री में इज़ाफ़ा होगा जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर को काफ़ी राहत मिलेगी।