5जी टेक्नोलॉजी पर सभी के अपने-अपने ‘दावे’
Thursday - January 2, 2020 11:17 am ,
Category : WTN HINDI
‘परिवर्तनकारी’ साबित हो सकती है 5जी टेक्नोलॉजी
दावों और संशय के बीच 5जी टेक्नोलॉजी का सभी को ‘इन्तज़ार’
JAN 02 (WTN) – आज से क़रीब 20 साल पहले की दुनिया की ज़रा कल्पना कीजिए, जब आपको छोटे से लेकर बड़े तक लगभग हर काम के लिए लाइनों में लगना पड़ता था। बैंकिंग सम्बन्धित कामों से लेकर बिल भरने और रेल टिकिट आदि कामों के लिए आपको घण्टों लाइनों में लगना पड़ता था, जिसके कारण आपका क़ीमती वक़्त बर्बाद होता था। लेकिन टेक्नोलॉजी ने आपके हाथों में मोबाइल फ़ोन दे दिया और इसके बाद आपकी ज़िन्दगी पहले से काफ़ी आरामदायक हो गई। पहले जिन कामों के लिए आपको घण्टों लाइनों में लगना पड़ता था आजकल वहीं काम स्मार्टफ़ोन के ज़रिये सेकेण्डों में हो जाते हैं। यानी साफ़ है कि मोबाइल क्रान्ति ने टेक्नोलॉजी से जुड़े कामों को करना सरल और ज़िन्दगी को आसान बना दिया है।
आज के दौर में भारत में करोड़ों लोगों के पास स्मार्टफ़ोन हैं और 4जी नेटवर्क टेक्नोलॉजी के दौर में लोग स्मार्टफ़ोन की मदद से अपने कामों को अन्जाम दे रहे हैं। स्मार्टफ़ोन पर 4जी नेटवर्क के इस्तेमाल से आपके ऱोजमर्रा के काम बड़ी ही आसानी से होने लगे हैं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के बाद यही काम और भी तेज़ी से होने लगेंगे तो आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर 5जी टेक्नोलॉजी क्या है और इससे तकनीक से सम्बन्धित काम और भी तेज़ी से कैसे होंगे?
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में 5जी टेक्नोलॉजी लॉन्चिंग की प्रक्रिया ज़ोरों पर हैं। दरअसल, 5जी टेक्नोलॉजी को लेकर टेलीकॉम कम्पनियों और दूरसंचार विभाग के बीच इसके ट्रायल को लेकर सहमति बन गई है। इसी के चलते दूरसंचार विभाग, टेलीकॉम कम्पनियों को स्पेक्ट्रम का आवंटन करेगा। जानकारी के लिए बता दें कि ट्रायल के लिए कम्पनियों को एक साल के लिए स्पेक्ट्रम दिया जाएगा। इसी कड़ी में चीन की विश्व प्रसिद्ध मोबाइल कम्पनी हुवावे (Huawei) को भी ट्रायल के लिए मन्ज़ूरी मिली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में जासूसी के आरोप लगने के बाद चाइनीज़ कम्पनी हुवावे के भारत में 5जी ट्रायल में शामिल होने पर विवाद था।
गौरतलब है कि आने वाले मार्च-अप्रैल में 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी की डेडलाइन है और इसी को देखते हुए जल्द ही 5जी का ट्रायल शुरू होने जा रहा है। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी भारत में लॉन्च होने पर स्मार्टफ़ोन से होने वाले काम और भी तेज़ी से और सुरक्षित तरीक़े से हो सकेंगे, लेकिन वहीं 5जी टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग से पहले ही इस पर विवाद शुरू हो गया है। जहां टेक्नोलॉजी के जानकारों का मानना है कि 5जी तकनीक से भारत में एक नई संचार क्रान्ति शुरू होगी, वहीं 5जी टेक्नोलॉजी के समीक्षकों का तर्क है कि मनुष्यों के साथ-साथ पक्षियों और जीव जन्तुओं के लिए 5जी टेक्नोलॉजी हानिकारक साबित हो सकती है।
किसी भी सुविधा के दो पक्ष होते हैं, एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक। यदि हम 5जी टेक्नोलॉजी के सकारात्मक पक्ष की बात करें तो कहा जा रहा है कि इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से भारतीय लोगों को काफ़ी फ़ायदा होने वाला है। 5जी टेक्नोलॉजी के जानकारों का मानना है कि इस तकनीक की मदद से टेलीमेडिसिन फील्ड में काफ़ी बड़े बदलाव होंगे, क्योंकि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से रोबोटिक सर्जरी की जा सकेगी। दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से सर्जर करने पर ग़लती की आशंका लगभग शून्य हो जाएगी।
वहीं दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से खेती के क्षेत्र में भी भारत को काफ़ी फ़ायदा मिल सकता है। कहा जा रहा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से काफ़ी सटीकता से खेत की मिट्टी के बारे में पता लगाया जा सकेगा, जिससे मिट्टी की प्रकृति के बारे में सही तरीक़े से पता चलने से उसमें ज़रूरत के मुताबिक़ खाद, पानी और दवाइयों का इस्तेमाल हो सकेगा। यानी मिट्टी की प्रकृति के मुताबिक़ सही खाद, पानी और दवाइयों का इस्तेमाल होगा तो इससे पैदावार बढ़ाई जा सकेगी।
5जी टेक्नोलॉजी का एक बढ़िया इस्तेमाल ट्रैफिक नियंत्रण में मिल सकता है। जानकारों के मुताबिक़, 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से भारत में सेल्फ ड्राइविंग कार की लॉन्चिंग में मदद मिलेगी, क्योंकि डाटा की स्पीड काफ़ी तेज़ होने से दुर्घटना होने की आशंका बहुत कम होगी। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत इस समय दुनिया में आईटी पावर सेन्टर के रूप में जाना जाता है। आईटी सर्विस सेक्टर में काफ़ी लोगों को रोज़गार मिल रहा है और इस सेक्टर का भारत की जीडीपी ग्रोथ में काफ़ी बड़ा योगदान है, ऐसे में यहां पर भी 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होने से इस सेक्टर में रोज़गार बढ़ने की सम्भावना है।
कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से कनेक्टिविटी तेज़ी से होगी और संचार माध्यमों का विकास होने से भारत की जीडीपी में वृद्दि होगी। वहीं 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से AI (Artificial intelligence) यानी आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस का दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने से लोगों के तकनीक से सम्बन्धित काफ़ी काम तेज़ी से हो सकेंगे।
ख़ैर वैसे भारत में 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल आम इंसान कब से कर पाएगा इसके बारे में अभी कुछ भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल पूरी दुनिया में ही यह टेक्नोलॉजी अभी अनुसंधान के दौर से गुजर रही है और व्यवहारिकता में यह कितनी सफ़ल साबित हो पाती है यह तो इसके इस्तेमाल से ही पता चल सकेगा। समीक्षकों का कहना है इस टेक्नोलॉजी की जिस गति के दावे किया जा रहे हैं, उसे व्यवहारिकता में पूरी तरह से हासिल कर पाना काफ़ी मुश्किल है।
बता दें कि जिन लोगों को भी 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना है उसके लिए स्मार्टफ़ोन और सम्बन्धित उपकरणों की क़ीमती काफ़ी ज़्यादा होगी। वैसे हो सकता है कि 5जी टेक्नोलॉजी लॉन्च भी हो जाए, लेकिन अभी काफ़ी समय तक यह सीमित दायरे में ही अपनी सेवा दे सकेगी, क्योंकि इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बहुत बड़े निवेश की ज़रूरत पड़ेगी। वहीं 5जी टेक्नोलॉजी से सम्बन्धित सुरक्षा और गोपनीयता की समस्या का क्या समाधान होगा, इसका हल भी अभी तक नहीं निकल सका है।
JAN 02 (WTN) – आज से क़रीब 20 साल पहले की दुनिया की ज़रा कल्पना कीजिए, जब आपको छोटे से लेकर बड़े तक लगभग हर काम के लिए लाइनों में लगना पड़ता था। बैंकिंग सम्बन्धित कामों से लेकर बिल भरने और रेल टिकिट आदि कामों के लिए आपको घण्टों लाइनों में लगना पड़ता था, जिसके कारण आपका क़ीमती वक़्त बर्बाद होता था। लेकिन टेक्नोलॉजी ने आपके हाथों में मोबाइल फ़ोन दे दिया और इसके बाद आपकी ज़िन्दगी पहले से काफ़ी आरामदायक हो गई। पहले जिन कामों के लिए आपको घण्टों लाइनों में लगना पड़ता था आजकल वहीं काम स्मार्टफ़ोन के ज़रिये सेकेण्डों में हो जाते हैं। यानी साफ़ है कि मोबाइल क्रान्ति ने टेक्नोलॉजी से जुड़े कामों को करना सरल और ज़िन्दगी को आसान बना दिया है।
आज के दौर में भारत में करोड़ों लोगों के पास स्मार्टफ़ोन हैं और 4जी नेटवर्क टेक्नोलॉजी के दौर में लोग स्मार्टफ़ोन की मदद से अपने कामों को अन्जाम दे रहे हैं। स्मार्टफ़ोन पर 4जी नेटवर्क के इस्तेमाल से आपके ऱोजमर्रा के काम बड़ी ही आसानी से होने लगे हैं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के बाद यही काम और भी तेज़ी से होने लगेंगे तो आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर 5जी टेक्नोलॉजी क्या है और इससे तकनीक से सम्बन्धित काम और भी तेज़ी से कैसे होंगे?
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में 5जी टेक्नोलॉजी लॉन्चिंग की प्रक्रिया ज़ोरों पर हैं। दरअसल, 5जी टेक्नोलॉजी को लेकर टेलीकॉम कम्पनियों और दूरसंचार विभाग के बीच इसके ट्रायल को लेकर सहमति बन गई है। इसी के चलते दूरसंचार विभाग, टेलीकॉम कम्पनियों को स्पेक्ट्रम का आवंटन करेगा। जानकारी के लिए बता दें कि ट्रायल के लिए कम्पनियों को एक साल के लिए स्पेक्ट्रम दिया जाएगा। इसी कड़ी में चीन की विश्व प्रसिद्ध मोबाइल कम्पनी हुवावे (Huawei) को भी ट्रायल के लिए मन्ज़ूरी मिली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में जासूसी के आरोप लगने के बाद चाइनीज़ कम्पनी हुवावे के भारत में 5जी ट्रायल में शामिल होने पर विवाद था।
गौरतलब है कि आने वाले मार्च-अप्रैल में 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी की डेडलाइन है और इसी को देखते हुए जल्द ही 5जी का ट्रायल शुरू होने जा रहा है। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी भारत में लॉन्च होने पर स्मार्टफ़ोन से होने वाले काम और भी तेज़ी से और सुरक्षित तरीक़े से हो सकेंगे, लेकिन वहीं 5जी टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग से पहले ही इस पर विवाद शुरू हो गया है। जहां टेक्नोलॉजी के जानकारों का मानना है कि 5जी तकनीक से भारत में एक नई संचार क्रान्ति शुरू होगी, वहीं 5जी टेक्नोलॉजी के समीक्षकों का तर्क है कि मनुष्यों के साथ-साथ पक्षियों और जीव जन्तुओं के लिए 5जी टेक्नोलॉजी हानिकारक साबित हो सकती है।
किसी भी सुविधा के दो पक्ष होते हैं, एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक। यदि हम 5जी टेक्नोलॉजी के सकारात्मक पक्ष की बात करें तो कहा जा रहा है कि इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से भारतीय लोगों को काफ़ी फ़ायदा होने वाला है। 5जी टेक्नोलॉजी के जानकारों का मानना है कि इस तकनीक की मदद से टेलीमेडिसिन फील्ड में काफ़ी बड़े बदलाव होंगे, क्योंकि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से रोबोटिक सर्जरी की जा सकेगी। दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से सर्जर करने पर ग़लती की आशंका लगभग शून्य हो जाएगी।
वहीं दावा किया जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से खेती के क्षेत्र में भी भारत को काफ़ी फ़ायदा मिल सकता है। कहा जा रहा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से काफ़ी सटीकता से खेत की मिट्टी के बारे में पता लगाया जा सकेगा, जिससे मिट्टी की प्रकृति के बारे में सही तरीक़े से पता चलने से उसमें ज़रूरत के मुताबिक़ खाद, पानी और दवाइयों का इस्तेमाल हो सकेगा। यानी मिट्टी की प्रकृति के मुताबिक़ सही खाद, पानी और दवाइयों का इस्तेमाल होगा तो इससे पैदावार बढ़ाई जा सकेगी।
5जी टेक्नोलॉजी का एक बढ़िया इस्तेमाल ट्रैफिक नियंत्रण में मिल सकता है। जानकारों के मुताबिक़, 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से भारत में सेल्फ ड्राइविंग कार की लॉन्चिंग में मदद मिलेगी, क्योंकि डाटा की स्पीड काफ़ी तेज़ होने से दुर्घटना होने की आशंका बहुत कम होगी। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत इस समय दुनिया में आईटी पावर सेन्टर के रूप में जाना जाता है। आईटी सर्विस सेक्टर में काफ़ी लोगों को रोज़गार मिल रहा है और इस सेक्टर का भारत की जीडीपी ग्रोथ में काफ़ी बड़ा योगदान है, ऐसे में यहां पर भी 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होने से इस सेक्टर में रोज़गार बढ़ने की सम्भावना है।
कहा जा रहा है कि 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से कनेक्टिविटी तेज़ी से होगी और संचार माध्यमों का विकास होने से भारत की जीडीपी में वृद्दि होगी। वहीं 5जी टेक्नोलॉजी की मदद से AI (Artificial intelligence) यानी आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस का दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने से लोगों के तकनीक से सम्बन्धित काफ़ी काम तेज़ी से हो सकेंगे।
ख़ैर वैसे भारत में 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल आम इंसान कब से कर पाएगा इसके बारे में अभी कुछ भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल पूरी दुनिया में ही यह टेक्नोलॉजी अभी अनुसंधान के दौर से गुजर रही है और व्यवहारिकता में यह कितनी सफ़ल साबित हो पाती है यह तो इसके इस्तेमाल से ही पता चल सकेगा। समीक्षकों का कहना है इस टेक्नोलॉजी की जिस गति के दावे किया जा रहे हैं, उसे व्यवहारिकता में पूरी तरह से हासिल कर पाना काफ़ी मुश्किल है।
बता दें कि जिन लोगों को भी 5जी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना है उसके लिए स्मार्टफ़ोन और सम्बन्धित उपकरणों की क़ीमती काफ़ी ज़्यादा होगी। वैसे हो सकता है कि 5जी टेक्नोलॉजी लॉन्च भी हो जाए, लेकिन अभी काफ़ी समय तक यह सीमित दायरे में ही अपनी सेवा दे सकेगी, क्योंकि इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बहुत बड़े निवेश की ज़रूरत पड़ेगी। वहीं 5जी टेक्नोलॉजी से सम्बन्धित सुरक्षा और गोपनीयता की समस्या का क्या समाधान होगा, इसका हल भी अभी तक नहीं निकल सका है।