तो क्या सही में ज़रूरी था रेल यात्री किराया बढ़ाना?
Thursday - January 2, 2020 1:19 pm ,
Category : WTN HINDI
रेलवे ने की यात्री किराये में वृद्धि
यात्री किराये में मामूली वृद्धि के बाद यात्री सुविधाओं में बेहतरी का रेलवे का दावा
JAN 02 (WTN) – तो आख़िरकार भारतीय रेलवे ने यात्री किराये में वृद्धि कर ही दी है। जी हां नये साल में रेलवे ने यात्री किराये में वृद्धि कर यात्रियों को झटका दिया है। हालांकि, रेलवे का दावा है कि किराये में वृद्धि मामूली है और यह काफ़ी समय के बाद की गई है। चलिये आपको बताते हैं कि आख़िरकार रेलवे ने यात्री किराये में कितनी वृद्धि हुई है और किराया बढ़ाये जाने के पीछे रेलवे का क्या तर्क है?
जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे ने विभिन्न श्रेणियों के किराये में 1 पैसे से लेकर 4 पैसे प्रति किलोमीटर तक की वृद्धि की है। किराये में हुई इस वृद्धि से रेलवे को क़रीब 2,300 करोड़ रुपये की वार्षिक अतिरिक्त आमदनी का अनुमान लगाया जा रहा है। बढ़ा हुआ यात्री किराया एक जनवरी से लागू हो गया है। रेलवे ने मेल और एक्सप्रेस ट्रेन के लिए 2 पैसे प्रति किलोमीटर और एसी ट्रेन के किराए में 4 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की है। हालांकि, उपनगरीय किराये में कोई बढ़त नहीं की गई है। रेलवे द्वारा किराया बढ़ाये जाने के बाद IRCTC (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) यानी इण्डियन रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉरपोरेशन के शेयर चढ़ गए।
रेलवे द्वारा यात्री किराया बढ़ाये जाने की जहां विपक्ष ने आलोचना की है वहीं यात्री किराया बढ़ाये जाने के पीछे रेलवे का तर्क है कि ट्रेनों और स्टेशनों पर यात्री सुख-सुविधाओं को बढ़ाने के लिए यात्री किराये में वृद्धि करना अपरिहार्य हो गया था। हालांकि, किराया बढ़ाने के बाद रेलवे का कहना है कि यात्री किराये में मामूली वृद्धि की गई है और इससे किसी भी वर्ग पर बोझ नहीं डाला गया है। बढ़े किराये पर रेलवे का तर्क है कि इससे मिले पैसों से रेलवे के आधुनिकीकरण के कामों में तेज़ी आएगी।
बढ़े हुए किराये के बाद आइये आपको समझाते हैं कि आपको कितना ज़्यादा पैसा किराये पर ख़र्च करना होगा। यदि किन्हीं दो रेलवे स्टेशन के बीच 500 किलोमीटर की दूरी है और इन दोनों स्टेशनों के बीच आप सामान्य नॉन एसी ट्रेन में यात्रा करते हैं तो बढ़े हुए किराये के हिसाब से आपको 5 रुपये ज़्यादा देने होंगे। वहीं यदि आप इन दोनों स्टेशनों के बीच नॉन एसी मेल/एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करते हैं तो आपको 2 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि के हिसाब से 10 रुपये ज़्यादा किराया देना होगा। वहीं यदि आप इन दोनों स्टेशनों के बीच एसी क्लास में यात्रा करते हैं तो आपको 20 रुपये ज़्यादा किराया देना होगा।
दरअसल, किराया बढ़ाये जाने के पीछे रेलवे का तर्क है कि यदि किराया नहीं बढ़ाया जाता तो रेलवे का घाटा बढ़ता ही जाता। जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे के मुताबिक़, इस वित्त वर्ष में नवम्बर के महीने तक ही रेलवे को क़रीब 20,000 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। हालत यह है कि रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो बढ़कर 121 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यानी रेलवे को 100 रुपये कमाने के लिए 121 रुपये ख़र्च करने पड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन सालों में रेलवे को क़रीब 78 हज़ार करोड़ रुपयों से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है कि यात्रियों को बेचे गये टिकट से संचालन की लागत ही वसूल नहीं हो सकी।
इस बारे में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ख़ुद लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि पिछले तीन सालों के दौरान परिचालन लागत से कम यात्री किराया होने के कारण रेलवे को नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि वित्त वर्ष 2015-16 में रेलवे को 22,262 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है वहीं वित्त वर्ष 2016-17 में 25,561 करोड़ रुपयों का और वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे को 31,128 करोड़ रुपये की हानि हुई है।
स्वाभाविक है कि रेलवे को घाटा इसलिए उठाना पड़ रहा है क्योंकि परिचालन लागत से काफ़ी कम किराया यात्रियों से वसूला जा रहा है। लेकिन यह भी तय है कि रेलवे परिचालन लागत के बराबर किराया यदि यात्रियों से वसूल करेगा तो यात्री किराये में बेतहाशा वृद्धि हो जाएगी। ऐसे में रेलवे को चाहिए कि सबसे पहले तो वह फिज़ूलख़र्ची पर रोक लगाए। वहीं रेलवे को चाहिए कि जो सुविधाएं उसके द्वारा यात्रियों को दी जा रही हैं उसमें नियमतता और निरन्तरता लायी जाना चाहिए, क्योंकि जब रेलवे की सुविधाओं से यात्री संतुष्ट होगा तभी वो बढ़े हुए किराये का विरोध और आलोचना नहीं कर पाएगा।
JAN 02 (WTN) – तो आख़िरकार भारतीय रेलवे ने यात्री किराये में वृद्धि कर ही दी है। जी हां नये साल में रेलवे ने यात्री किराये में वृद्धि कर यात्रियों को झटका दिया है। हालांकि, रेलवे का दावा है कि किराये में वृद्धि मामूली है और यह काफ़ी समय के बाद की गई है। चलिये आपको बताते हैं कि आख़िरकार रेलवे ने यात्री किराये में कितनी वृद्धि हुई है और किराया बढ़ाये जाने के पीछे रेलवे का क्या तर्क है?
जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे ने विभिन्न श्रेणियों के किराये में 1 पैसे से लेकर 4 पैसे प्रति किलोमीटर तक की वृद्धि की है। किराये में हुई इस वृद्धि से रेलवे को क़रीब 2,300 करोड़ रुपये की वार्षिक अतिरिक्त आमदनी का अनुमान लगाया जा रहा है। बढ़ा हुआ यात्री किराया एक जनवरी से लागू हो गया है। रेलवे ने मेल और एक्सप्रेस ट्रेन के लिए 2 पैसे प्रति किलोमीटर और एसी ट्रेन के किराए में 4 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की है। हालांकि, उपनगरीय किराये में कोई बढ़त नहीं की गई है। रेलवे द्वारा किराया बढ़ाये जाने के बाद IRCTC (Indian Railway Catering and Tourism Corporation) यानी इण्डियन रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉरपोरेशन के शेयर चढ़ गए।
रेलवे द्वारा यात्री किराया बढ़ाये जाने की जहां विपक्ष ने आलोचना की है वहीं यात्री किराया बढ़ाये जाने के पीछे रेलवे का तर्क है कि ट्रेनों और स्टेशनों पर यात्री सुख-सुविधाओं को बढ़ाने के लिए यात्री किराये में वृद्धि करना अपरिहार्य हो गया था। हालांकि, किराया बढ़ाने के बाद रेलवे का कहना है कि यात्री किराये में मामूली वृद्धि की गई है और इससे किसी भी वर्ग पर बोझ नहीं डाला गया है। बढ़े किराये पर रेलवे का तर्क है कि इससे मिले पैसों से रेलवे के आधुनिकीकरण के कामों में तेज़ी आएगी।
बढ़े हुए किराये के बाद आइये आपको समझाते हैं कि आपको कितना ज़्यादा पैसा किराये पर ख़र्च करना होगा। यदि किन्हीं दो रेलवे स्टेशन के बीच 500 किलोमीटर की दूरी है और इन दोनों स्टेशनों के बीच आप सामान्य नॉन एसी ट्रेन में यात्रा करते हैं तो बढ़े हुए किराये के हिसाब से आपको 5 रुपये ज़्यादा देने होंगे। वहीं यदि आप इन दोनों स्टेशनों के बीच नॉन एसी मेल/एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करते हैं तो आपको 2 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि के हिसाब से 10 रुपये ज़्यादा किराया देना होगा। वहीं यदि आप इन दोनों स्टेशनों के बीच एसी क्लास में यात्रा करते हैं तो आपको 20 रुपये ज़्यादा किराया देना होगा।
दरअसल, किराया बढ़ाये जाने के पीछे रेलवे का तर्क है कि यदि किराया नहीं बढ़ाया जाता तो रेलवे का घाटा बढ़ता ही जाता। जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे के मुताबिक़, इस वित्त वर्ष में नवम्बर के महीने तक ही रेलवे को क़रीब 20,000 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। हालत यह है कि रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो बढ़कर 121 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यानी रेलवे को 100 रुपये कमाने के लिए 121 रुपये ख़र्च करने पड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन सालों में रेलवे को क़रीब 78 हज़ार करोड़ रुपयों से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है कि यात्रियों को बेचे गये टिकट से संचालन की लागत ही वसूल नहीं हो सकी।
इस बारे में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ख़ुद लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि पिछले तीन सालों के दौरान परिचालन लागत से कम यात्री किराया होने के कारण रेलवे को नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि वित्त वर्ष 2015-16 में रेलवे को 22,262 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है वहीं वित्त वर्ष 2016-17 में 25,561 करोड़ रुपयों का और वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे को 31,128 करोड़ रुपये की हानि हुई है।
स्वाभाविक है कि रेलवे को घाटा इसलिए उठाना पड़ रहा है क्योंकि परिचालन लागत से काफ़ी कम किराया यात्रियों से वसूला जा रहा है। लेकिन यह भी तय है कि रेलवे परिचालन लागत के बराबर किराया यदि यात्रियों से वसूल करेगा तो यात्री किराये में बेतहाशा वृद्धि हो जाएगी। ऐसे में रेलवे को चाहिए कि सबसे पहले तो वह फिज़ूलख़र्ची पर रोक लगाए। वहीं रेलवे को चाहिए कि जो सुविधाएं उसके द्वारा यात्रियों को दी जा रही हैं उसमें नियमतता और निरन्तरता लायी जाना चाहिए, क्योंकि जब रेलवे की सुविधाओं से यात्री संतुष्ट होगा तभी वो बढ़े हुए किराये का विरोध और आलोचना नहीं कर पाएगा।