BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

तो अब चीन के ‘इस नुकसान’ से भारत को होगा ‘फ़ायदा’!

Saturday - January 4, 2020 11:36 am , Category : WTN HINDI
चीन में औद्योगिक उत्पादन में आई ऐतिहासिक गिरावट
चीन में औद्योगिक उत्पादन में आई ऐतिहासिक गिरावट

ट्रेड वॉर से प्रभावित हुई चीन की अर्थव्यवस्था, कई चीनी कम्पनियां भारत में शुरू कर सकती हैं प्लांट

JAN 04 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को किसी ना किसी तरह से प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक सुस्ती से किसी ना किसी रूप में प्रभावित हुई हैं। जानकारी के लिए बता दें कि वैसे तो आर्थिक सुस्ती के लिए कई कारण ज़िम्मेदार हैं, लेकिन अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर भी आर्थिक सुस्ती के मुख्य कारणों में एक है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन इस समय दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन विस्तारवादी मानसिकता वाले देश चीन की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वॉर से चीन को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा है, और चीन में इण्डस्ट्रियल प्रोडक्शन 17 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, चीन में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर पिछले साल अगस्त महीने में साढ़े 17 साल के निचले स्तर पर आ गई थी। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जुलाई के महीने में चीन के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रही थी, जो कि फरवरी 2002 के बाद सबसे निचला स्तर है।
 
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के जानकारों के मुताबिक़, चीन में औद्योगिक उत्पादन में कमी का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन की इण्डस्ट्रीज के उत्पादन की पूरी दुनिया में डिमाण्ड है और सप्लाई है। इतना ही नहीं, चीन स्थित उद्योगों के लिए दुनिया के कई देशों से कच्चा माल सप्लाई होता है। ऐसे में चीन में उत्पादों के उत्पादन और बिक्री में कमी यह दिखाती है कि आर्थिक सुस्ती का असर कितना गहरा है। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसी कारण से दुनिया की आर्थिक गतिविधि में साल 2000 तक चीन की हिस्सेदारी क़रीब 7 प्रतिशत थी। लेकिन अब अनुमान लगाया जा रहा है कि दुनिया की आर्थिक गतिविधि में चीन की हिस्सेदारी क़रीब 19 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

दरअसल, चीनी उत्पादों की पूरी दुनिया के देशों में इतनी पहुंच है कि चीन की अर्थव्यवस्था से ही दुनिया में कई उत्पादों की क़ीमतें तय होती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया में उत्पादित होने वाला क़रीब आधा स्टील, ताम्बा, कोयला और सीमेंट चीन चला जाता है। ऐसे में यदि चीन इस कच्चे माल की ख़रीदी कम कर दे तो या बंद कर दे, तो इनकी क़ीमतों पर असर पड़ेगा और इनकी क़ीमतें लुढ़कना शुरू हो जाएंगी।
 
जैसा की आप जानते ही हैं कि चीन और भारत पड़ोसी देश हैं, और भारत काफ़ी बड़ी तादात में चीन से सामान आयात करता है। जानकारी के लिए बता दें कि भारत के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी क़रीब 16 प्रतिशत है। वहीं चीन, भारत के लिए निर्यात का चौथा बड़ा बाज़ार है। जहां तक चीन को भारत के निर्यात की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 4.39 प्रतिशत है। ऐसे में चीन में औद्योगिक उत्पादन कम होने का ज़्यादा असर भारत पर नहीं पड़ने वाला है।
 
लेकिन चीन में औद्योगिक उत्पादन दर कम होने का बड़ा फ़ायदा भारत को मिल सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन में उत्पादन प्रभावित होने से चीन में फैक्ट्री लगाकर माल उत्पादन करने वाली कई विदेशी और चीनी कम्पनियां घाटे के चलते भारत की तरफ़ रूख कर सकती हैं। जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के दौरान कई विदेशी कम्पनियों ने अपने व्यापार पर असर पड़ता देख चीन की जगह पर भारत में अपनी फैक्ट्री लगाने का फ़ैसला लिया है। स्वाभाविक है कि यदि यह कम्पनियां भारत आएंगी, तो एक तो इनके उत्पाद भारत में सस्ते में बिकेंगे वहीं दूसरी तरफ़ इससे काफ़ी लोगों को रोज़गार भी हासिल होगा।

विदेशी कम्पनियां ही नहीं बल्कि चीन की वे कम्पनियां जो भारत में अपने उत्पाद बेचती हैं, ट्रेड वॉर के कारण उनका उत्पादन वे भारत में शुरू कर सकती हैं। इतना ही नहीं, यदि चीन और अन्य देशों की कम्पनियां भारत में आती हैं, तो इससे ढांचागत सुविधाओं के मामले में भारत को मदद मिलेगी। वैसे तो यह सब भविष्य की परिस्थितियों पर निर्भर है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, जल्द ही भारतीय अर्थव्यवस्था चीन की अर्थव्यवस्था से भी तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि कॉरपोरेट और पर्यावरणीय नियामक की अनिश्चितता और कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों की कमज़ोरियों के कारण भारत में चालू वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट काफ़ी कम है, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से गति पकड़ेगी, और भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी।