जानिये आख़िर क्यों अमेरिका से चीन वापस लौट रहे हैं चीनी वैज्ञानिक?
Saturday - January 4, 2020 3:54 pm ,
Category : WTN HINDI
चीनी वैज्ञानिकों की ‘घर वापसी’
चीन को विज्ञान में सुपर पावर बनने घर वापसी कर रहे चीनी वैज्ञानिक
JAN 04 (WTN) – पूंजीवादी देश अमेरिका और वामपंथी और विस्तारवादी मानसिकता वाले देश चीन के बीच प्रतिस्पर्धा किसी से भी छिपी नहीं है। दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विश्व राजनीति में दबदबा कायम करने के लिए दोनों देशों के बीच स्पर्धा लगातार जारी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका और चीन क्रमश: दुनिया की सबसे बड़ी और दूसरे नम्बर की अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में आर्थिक वर्चस्व स्थापित करने के लिए दोनों ही देशों के बीच काफ़ी समय से ट्रेड वॉर जारी है। लेकिन इस ट्रेड वार का ज़्यादा नुकसान चीन को उठाना पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेड वॉर के कारण चीन की औद्योगिक उत्पादन दर पिछले 17 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
तो साफ़ ज़ाहिर है कि अमेरिका और चीन के बीच हर मोर्चे पर एक दूसरे को मात देने की कोशिशें जारी रहती हैं, इसी कड़ी में चीन ने अमेरिका को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, अमेरिका समेत अन्य देशों में काम कर रहे चीनी वैज्ञानिकों को वापस अपने देश बुलाने के लिए चीन एक रणनीति पर काम कर रहा है। चीन की इस पूरी कवायद को वैज्ञानिकों की घर वापसी कहा जा रहा है। कहा जा रहा है कि चीन के वैज्ञानिकों के वापस चीन लौ़टने के पीछे का मुख्य और बड़ा मक़सद यही है कि इन वैज्ञानिकों के दम पर चीन विज्ञान के क्षेत्र में और भी ज़्यादा शक्तिशाली बन सके।
दरअसल, अमेरिका की ओहायो यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में खुलासा हुआ कि अकेले अमेरिका से ही पिछले कुछ सालों में क़रीब 16 हज़ार से ज़्यादा प्रशिक्षित चीनी वैज्ञानिक वापस अपने देश चीन लौट चुके हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में 4,500 चीनी वैज्ञानिकों से अमेरिका को छोड़ा था। वैज्ञानिकों की अमेरिका छोड़ने की यह संख्या साल 2010 की तुलना में दोगुनी थी। चीन योजनाबद्ध तरीक़े से अपने वैज्ञानिकों को अमेरिका और अन्य देशों से वापस बुलाने और चीन में ही काम करने के लिए उन्हें विश्वस्तर की सुविधाएं दे रहा है।
विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनने के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में दबदबा कायम रखने के लिए चीन विदेशों से आने वाले अपने वैज्ञानिकों को बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में शामिल कर रहा है। इतना ही नहीं, चीन में कई देशों के सहयोग से चल रही वैज्ञानिक परियोजनाओं में चीन विदेश से वापस लौटे वैज्ञानिकों को काम दे रहा है। अपने वैज्ञानिकों को चीन वापस बुलाने और उन्हें चीन में ही रोकने के लिए चीनी सरकार अपने वैज्ञानिकों को वो सभी सुविधाएं दे रही है, जो कि चीनी वैज्ञानिकों को दूसरे देशों में मिलती हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में एशिया से जाकर काम करने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संख्या बहुत ज़्यादा है, और अमेरिका में चीनी और भारतीय वैज्ञानिक बड़ी तादात में काम करते हैं। कहा जा रहा है कि यदि इसी तरह से चीन के वैज्ञानिक अमेरिका से पलायन कर चीन वापस जाते रहे, तो इससे अमेरिकी विज्ञान पर बुरा असर पड़ेगा। दरअसल, आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस और मटेरियल साइंस में चीनी वैज्ञानिक काफ़ी जानकार हैं, और पूरी दुनिया में इनका मुक़ाबला कोई नहीं कर सकता है। चीनी वैज्ञानिक अमेरिका में रहकर कई तरह के अनुसंधान कर रहे थे, जिसका फ़ायदा अमेरिका को हो रहा था। लेकिन चीनी वैज्ञानिकों के चीन वापस लौटने के क्रम से अमेरिकी की चिन्ता बढ़ गई है।
चीनी वैज्ञानिकों की चीन वापसी हो रही है, इसका सबसे पड़ा सबूत यह है कि साल 2016 में सबसे ज़्यादा साइंस जरनल चीन में ही प्रकाशित हुए हैं। अपने देश में विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए चीन की सरकार ने काफ़ी कुछ क़दम उठाए हैं। चीन की सरकार ने पिछले कुछ सालों में विज्ञान में होने वाले रिसर्च के बजट को दस गुना तक बढ़ा दिया है। विदेश में रह रहे टेलेण्टेट चीनी वैज्ञानिकों की चीन सरकार घर वापसी करा रही है, जिससे इन वैज्ञानिकों की मदद से चीन पूरी दुनिया में सुपर पावर बन सके।
JAN 04 (WTN) – पूंजीवादी देश अमेरिका और वामपंथी और विस्तारवादी मानसिकता वाले देश चीन के बीच प्रतिस्पर्धा किसी से भी छिपी नहीं है। दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विश्व राजनीति में दबदबा कायम करने के लिए दोनों देशों के बीच स्पर्धा लगातार जारी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका और चीन क्रमश: दुनिया की सबसे बड़ी और दूसरे नम्बर की अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में आर्थिक वर्चस्व स्थापित करने के लिए दोनों ही देशों के बीच काफ़ी समय से ट्रेड वॉर जारी है। लेकिन इस ट्रेड वार का ज़्यादा नुकसान चीन को उठाना पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेड वॉर के कारण चीन की औद्योगिक उत्पादन दर पिछले 17 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
तो साफ़ ज़ाहिर है कि अमेरिका और चीन के बीच हर मोर्चे पर एक दूसरे को मात देने की कोशिशें जारी रहती हैं, इसी कड़ी में चीन ने अमेरिका को एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, अमेरिका समेत अन्य देशों में काम कर रहे चीनी वैज्ञानिकों को वापस अपने देश बुलाने के लिए चीन एक रणनीति पर काम कर रहा है। चीन की इस पूरी कवायद को वैज्ञानिकों की घर वापसी कहा जा रहा है। कहा जा रहा है कि चीन के वैज्ञानिकों के वापस चीन लौ़टने के पीछे का मुख्य और बड़ा मक़सद यही है कि इन वैज्ञानिकों के दम पर चीन विज्ञान के क्षेत्र में और भी ज़्यादा शक्तिशाली बन सके।
दरअसल, अमेरिका की ओहायो यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में खुलासा हुआ कि अकेले अमेरिका से ही पिछले कुछ सालों में क़रीब 16 हज़ार से ज़्यादा प्रशिक्षित चीनी वैज्ञानिक वापस अपने देश चीन लौट चुके हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में 4,500 चीनी वैज्ञानिकों से अमेरिका को छोड़ा था। वैज्ञानिकों की अमेरिका छोड़ने की यह संख्या साल 2010 की तुलना में दोगुनी थी। चीन योजनाबद्ध तरीक़े से अपने वैज्ञानिकों को अमेरिका और अन्य देशों से वापस बुलाने और चीन में ही काम करने के लिए उन्हें विश्वस्तर की सुविधाएं दे रहा है।
विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनने के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में दबदबा कायम रखने के लिए चीन विदेशों से आने वाले अपने वैज्ञानिकों को बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में शामिल कर रहा है। इतना ही नहीं, चीन में कई देशों के सहयोग से चल रही वैज्ञानिक परियोजनाओं में चीन विदेश से वापस लौटे वैज्ञानिकों को काम दे रहा है। अपने वैज्ञानिकों को चीन वापस बुलाने और उन्हें चीन में ही रोकने के लिए चीनी सरकार अपने वैज्ञानिकों को वो सभी सुविधाएं दे रही है, जो कि चीनी वैज्ञानिकों को दूसरे देशों में मिलती हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में एशिया से जाकर काम करने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संख्या बहुत ज़्यादा है, और अमेरिका में चीनी और भारतीय वैज्ञानिक बड़ी तादात में काम करते हैं। कहा जा रहा है कि यदि इसी तरह से चीन के वैज्ञानिक अमेरिका से पलायन कर चीन वापस जाते रहे, तो इससे अमेरिकी विज्ञान पर बुरा असर पड़ेगा। दरअसल, आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस और मटेरियल साइंस में चीनी वैज्ञानिक काफ़ी जानकार हैं, और पूरी दुनिया में इनका मुक़ाबला कोई नहीं कर सकता है। चीनी वैज्ञानिक अमेरिका में रहकर कई तरह के अनुसंधान कर रहे थे, जिसका फ़ायदा अमेरिका को हो रहा था। लेकिन चीनी वैज्ञानिकों के चीन वापस लौटने के क्रम से अमेरिकी की चिन्ता बढ़ गई है।
चीनी वैज्ञानिकों की चीन वापसी हो रही है, इसका सबसे पड़ा सबूत यह है कि साल 2016 में सबसे ज़्यादा साइंस जरनल चीन में ही प्रकाशित हुए हैं। अपने देश में विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए चीन की सरकार ने काफ़ी कुछ क़दम उठाए हैं। चीन की सरकार ने पिछले कुछ सालों में विज्ञान में होने वाले रिसर्च के बजट को दस गुना तक बढ़ा दिया है। विदेश में रह रहे टेलेण्टेट चीनी वैज्ञानिकों की चीन सरकार घर वापसी करा रही है, जिससे इन वैज्ञानिकों की मदद से चीन पूरी दुनिया में सुपर पावर बन सके।