यदि ईरान ने शुरू किया युद्ध, तो फ़िर ख़त्म करेगा अमेरिका!
Monday - January 6, 2020 1:52 pm ,
Category : WTN HINDI
ईरान से काफ़ी ज़्यादा शक्तिशाली है अमेरिका
अमेरिका से युद्ध के पहले कई बार सोचना है ईरान की मजबूरी
JAN 06 (WTN) – तो क्या आख़िर तीसरे विश्व युद्ध की उलटी गिनती शुरू हो गई है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अमेरिका द्वारा ईरान की सेना के विदेशी यूनिट कुद्स के प्रमुख क़ासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में हत्या के बाद यही क़यास लगाये जा रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से यदि दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ता है, तो यह युद्ध सिर्फ़ अमेरिका और ईरान के बीच सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं, और अमेरिका-ईरान युद्ध बाद में विश्व युद्ध में तब्दील हो सकता है।
क़ासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद ईरान ने अमेरिका को इसका अन्जाम भुगतने की चेतावनी दी है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, अमेरिकी प्रतिबन्धों से परेशान ईरान एक बड़ी कार्रवाई में अमेरिका पर हमला तक कर सकता है। लेकिन बड़ा सवाल है कि यदि ईरान, अमेरिका पर हमला करता है, तो क्या ईरान की सैन्य शक्ति अमेरिकी सैन्य शक्ति का सामना कर पायेगी। आइये आपको विस्तार से बताते हैं कि अमेरिका के सामने ईरान की सैन्य क्षमता कितनी ताक़तवर है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताक़तवर और विशाल सेना है। दुनियाभर के देशों की सैन्य क्षमताओं की रैंकिंग करने वाली वेबसाइट ग्लोबल फायर पावर ने 137 देशों में अमेरिका की सैन्य क्षमता को पूरी दुनिया में नम्बर वन पर रखा है। वहीं इस वेबसाइट की रैकिंग में ईरान की रैंक 14वीं है। जैसा कि हमने आपको बताया कि सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान, अमेरिका से किसी भी तरह से बदला लेना चाहता है। अब ईरान चाहे तो सीधे अमेरिका पर हमला कर दे, या फ़िर ईरान अन्य तरीक़ों से अमेरिकी हितों पर हमला कर सकता है। यह अन्य तरीक़े प्रॉक्सी वार और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सहयोगियों पर हमले आदि हो सकते हैं।
वैसे ईरान जानता है कि यदि उसने अमेरिका के ख़िलाफ़ युद्ध की शुरूआत की, तो युद्ध का ख़ात्मा अमेरिका ही करेगा, क्योंकि सैन्य क्षमता के मामले में ईरान से कई गुना ज़्यादा शक्तिशाली अमेरिका है। बता दें कि अमेरिका के सामने ईरान की सैन्य क्षमता काफ़ी कम और तुलनात्मक रूप से काफ़ी कमज़ोर है। वैसे अमेरिका से पुरानी शत्रुता के चलते ईरान अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा था, लेकिन साल 2006 में अमेरिकी प्रतिबन्धों के बाद से ईरान के लिए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ने के लिए सैन्य साजो सामान और हथियारों का आयात करना मुश्किल हो गया है, इसलिए अब ईरान इसके लिए स्वदेशी निर्माण पर ही काफ़ी हद तक निर्भर है।
जहां तक सिर्फ़ सैनिकों की बात हैं, तो बता दें कि अमेरिका की जनसंख्या क़रीब 30 करोड़ है, और अमेरिका के पास क़रीब 13 लाख सैनिकों की दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। वहीं ईरान की जनसंख्या क़रीब 8 करोड़ है, और ईरान की थल सेना, जल सेना, वायु सेना और ईरान रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स के सभी सैनिक मिलाकर कुल 5 लाख 23 हज़ार सैनिक हैं। वहीं यदि दोनों देशों के रक्षा बजट की बात की जाए, तो अमेरिका का रक्षा बजट ईरान से कई गुना ज़्यादा है। जहां ईरान का सालाना रक्षा बजट सिर्फ़ 6.3 बिलियन डॉलर है, वहीं अमेरिका का सालाना रक्षा बजट क़रीब 716 बिलियन डॉलर है।
सैनिक और सालाना रक्षा बजट के अलावा अत्याधुनिक हथियारों के मामले में भी अमेरिका, ईरान से काफ़ी आगे है। एक आंकड़े के अनुसार, ईरान के पास 407 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं। वहीं अमेरिका के पास इससे 8 गुना ज़्यादा क़रीब 3,318 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं। ईरान के पास अटैक करने वाले हेलिकॉप्टर की संख्या सिर्फ़ 100 है, तो अमेरिका के पास अटैक करने वाले हेलिकॉप्टर की संख्या 6,417 है। बात करें टैंकों की, तो ईरान पास सिर्फ़ 2,895 टैंक हैं। वहीं अमेरिका के पास करीब 8,725 टैंक हैं।
बात करें मिसाइलों की, तो जानकारी के लिए बता दें ईरान की सेना की ताक़त उसकी मिसाइलें ही हैं। जानकारी के मुताबिक़, मिसाइलों के मामले में ईरान अपने क्षेत्रीय दुश्मनों इज़रायल और सऊदी अरब से काफ़ी ज़्यादा आगे है। अमेरिकी की एक डिफेंस रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य-पूर्व के देशों में ईरान की मिसाइल क्षमता सबसे ज़्यादा है। ईरान के पास इस समय ज़्यादातर छोटी और मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं, जो कि उसके क्षेत्रीय दुश्मनों सऊदी अरब और इज़रायल के हर कोने तक मार करने में सक्षम हैं। कहा जा रहा है कि ईरान इंटरकॉन्टिनेंटल मारक क्षमता वाली मिसाइल टेक्नोलॉजी हासिल करने में जुटा है, लेकिन साल 2015 में लगे प्रतिबंधों के कारण से ईरान लम्बी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें नहीं बना पाया है।
वैसे मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, तमाम तरह के प्रतिबन्धों के बाद भी ईरान ने ड्रोन तकनीक वाले गैर पारम्परिक हथियार बना लिए हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ईरान ने साल 2016 में आतंकी संगठन आईएसआईएस के ख़िलाफ़ इराक़ में ड्रोन हमले किए थे। वहीं ईरान के ड्रोन विमान इज़रायल के भीतर तक भी घुस चुके हैं। पिछले साल जून के महीने में ईरान ने अमेरिका के एक सर्विलांस ड्रोन को यह कहकर मार गिराया था कि उसने अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है।
यानी हक़ीक़त यही है कि अमेरिकी सैन्य क्षमता के सामने ईरान की सैन्य क्षमता काफ़ी कम है, और यदि युद्ध होता भी है तो ईरान के पास इतनी शक्ति नहीं है कि वो अमेरिका की ज़मीन तक अपनी मिसाइलों के ज़रिये हमला कर सके। वहीं आप जानते ही होंगे कि अमेरिका परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है, और दूसरे विश्वयुद्ध में जापान के ख़िलाफ़ अमेरिका परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका है।
ईरान जानता है कि वो अमेरिका के सामने कमज़ोर है, इसलिए ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा सकता है, और अमेरिकी के सहयोगियों इज़रायल और सऊदी अरब को निशाना बना सकता है। वैसे यदि ईरान, इज़रायल और सऊदी अरब को निशाना बनाता है, तो इससे अमेरिका शान्त रहने वाला नहीं है और अमेरिका भी इस युद्ध में कूद पड़ेगा। और जैसा कि हमने आपको बताया कि यदि ईरान ने युद्ध शुरू किया, तो ईरान से काफी ज़्यादा शक्तिशाली अमेरिका अपनी शर्त पर ही इस युद्ध को ख़त्म करेगा, और वो भी ईरान को बुरी तरह से तहस नहस करने के बाद।
JAN 06 (WTN) – तो क्या आख़िर तीसरे विश्व युद्ध की उलटी गिनती शुरू हो गई है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अमेरिका द्वारा ईरान की सेना के विदेशी यूनिट कुद्स के प्रमुख क़ासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में हत्या के बाद यही क़यास लगाये जा रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से यदि दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ता है, तो यह युद्ध सिर्फ़ अमेरिका और ईरान के बीच सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इस युद्ध में शामिल हो सकते हैं, और अमेरिका-ईरान युद्ध बाद में विश्व युद्ध में तब्दील हो सकता है।
क़ासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद ईरान ने अमेरिका को इसका अन्जाम भुगतने की चेतावनी दी है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, अमेरिकी प्रतिबन्धों से परेशान ईरान एक बड़ी कार्रवाई में अमेरिका पर हमला तक कर सकता है। लेकिन बड़ा सवाल है कि यदि ईरान, अमेरिका पर हमला करता है, तो क्या ईरान की सैन्य शक्ति अमेरिकी सैन्य शक्ति का सामना कर पायेगी। आइये आपको विस्तार से बताते हैं कि अमेरिका के सामने ईरान की सैन्य क्षमता कितनी ताक़तवर है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताक़तवर और विशाल सेना है। दुनियाभर के देशों की सैन्य क्षमताओं की रैंकिंग करने वाली वेबसाइट ग्लोबल फायर पावर ने 137 देशों में अमेरिका की सैन्य क्षमता को पूरी दुनिया में नम्बर वन पर रखा है। वहीं इस वेबसाइट की रैकिंग में ईरान की रैंक 14वीं है। जैसा कि हमने आपको बताया कि सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान, अमेरिका से किसी भी तरह से बदला लेना चाहता है। अब ईरान चाहे तो सीधे अमेरिका पर हमला कर दे, या फ़िर ईरान अन्य तरीक़ों से अमेरिकी हितों पर हमला कर सकता है। यह अन्य तरीक़े प्रॉक्सी वार और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सहयोगियों पर हमले आदि हो सकते हैं।
वैसे ईरान जानता है कि यदि उसने अमेरिका के ख़िलाफ़ युद्ध की शुरूआत की, तो युद्ध का ख़ात्मा अमेरिका ही करेगा, क्योंकि सैन्य क्षमता के मामले में ईरान से कई गुना ज़्यादा शक्तिशाली अमेरिका है। बता दें कि अमेरिका के सामने ईरान की सैन्य क्षमता काफ़ी कम और तुलनात्मक रूप से काफ़ी कमज़ोर है। वैसे अमेरिका से पुरानी शत्रुता के चलते ईरान अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा था, लेकिन साल 2006 में अमेरिकी प्रतिबन्धों के बाद से ईरान के लिए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ने के लिए सैन्य साजो सामान और हथियारों का आयात करना मुश्किल हो गया है, इसलिए अब ईरान इसके लिए स्वदेशी निर्माण पर ही काफ़ी हद तक निर्भर है।
जहां तक सिर्फ़ सैनिकों की बात हैं, तो बता दें कि अमेरिका की जनसंख्या क़रीब 30 करोड़ है, और अमेरिका के पास क़रीब 13 लाख सैनिकों की दुनिया की सबसे बड़ी सेना है। वहीं ईरान की जनसंख्या क़रीब 8 करोड़ है, और ईरान की थल सेना, जल सेना, वायु सेना और ईरान रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स के सभी सैनिक मिलाकर कुल 5 लाख 23 हज़ार सैनिक हैं। वहीं यदि दोनों देशों के रक्षा बजट की बात की जाए, तो अमेरिका का रक्षा बजट ईरान से कई गुना ज़्यादा है। जहां ईरान का सालाना रक्षा बजट सिर्फ़ 6.3 बिलियन डॉलर है, वहीं अमेरिका का सालाना रक्षा बजट क़रीब 716 बिलियन डॉलर है।
सैनिक और सालाना रक्षा बजट के अलावा अत्याधुनिक हथियारों के मामले में भी अमेरिका, ईरान से काफ़ी आगे है। एक आंकड़े के अनुसार, ईरान के पास 407 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं। वहीं अमेरिका के पास इससे 8 गुना ज़्यादा क़रीब 3,318 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं। ईरान के पास अटैक करने वाले हेलिकॉप्टर की संख्या सिर्फ़ 100 है, तो अमेरिका के पास अटैक करने वाले हेलिकॉप्टर की संख्या 6,417 है। बात करें टैंकों की, तो ईरान पास सिर्फ़ 2,895 टैंक हैं। वहीं अमेरिका के पास करीब 8,725 टैंक हैं।
बात करें मिसाइलों की, तो जानकारी के लिए बता दें ईरान की सेना की ताक़त उसकी मिसाइलें ही हैं। जानकारी के मुताबिक़, मिसाइलों के मामले में ईरान अपने क्षेत्रीय दुश्मनों इज़रायल और सऊदी अरब से काफ़ी ज़्यादा आगे है। अमेरिकी की एक डिफेंस रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य-पूर्व के देशों में ईरान की मिसाइल क्षमता सबसे ज़्यादा है। ईरान के पास इस समय ज़्यादातर छोटी और मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं, जो कि उसके क्षेत्रीय दुश्मनों सऊदी अरब और इज़रायल के हर कोने तक मार करने में सक्षम हैं। कहा जा रहा है कि ईरान इंटरकॉन्टिनेंटल मारक क्षमता वाली मिसाइल टेक्नोलॉजी हासिल करने में जुटा है, लेकिन साल 2015 में लगे प्रतिबंधों के कारण से ईरान लम्बी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें नहीं बना पाया है।
वैसे मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, तमाम तरह के प्रतिबन्धों के बाद भी ईरान ने ड्रोन तकनीक वाले गैर पारम्परिक हथियार बना लिए हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ईरान ने साल 2016 में आतंकी संगठन आईएसआईएस के ख़िलाफ़ इराक़ में ड्रोन हमले किए थे। वहीं ईरान के ड्रोन विमान इज़रायल के भीतर तक भी घुस चुके हैं। पिछले साल जून के महीने में ईरान ने अमेरिका के एक सर्विलांस ड्रोन को यह कहकर मार गिराया था कि उसने अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है।
यानी हक़ीक़त यही है कि अमेरिकी सैन्य क्षमता के सामने ईरान की सैन्य क्षमता काफ़ी कम है, और यदि युद्ध होता भी है तो ईरान के पास इतनी शक्ति नहीं है कि वो अमेरिका की ज़मीन तक अपनी मिसाइलों के ज़रिये हमला कर सके। वहीं आप जानते ही होंगे कि अमेरिका परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है, और दूसरे विश्वयुद्ध में जापान के ख़िलाफ़ अमेरिका परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका है।
ईरान जानता है कि वो अमेरिका के सामने कमज़ोर है, इसलिए ईरान खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा सकता है, और अमेरिकी के सहयोगियों इज़रायल और सऊदी अरब को निशाना बना सकता है। वैसे यदि ईरान, इज़रायल और सऊदी अरब को निशाना बनाता है, तो इससे अमेरिका शान्त रहने वाला नहीं है और अमेरिका भी इस युद्ध में कूद पड़ेगा। और जैसा कि हमने आपको बताया कि यदि ईरान ने युद्ध शुरू किया, तो ईरान से काफी ज़्यादा शक्तिशाली अमेरिका अपनी शर्त पर ही इस युद्ध को ख़त्म करेगा, और वो भी ईरान को बुरी तरह से तहस नहस करने के बाद।