क्या आप करते हैं घर में रखे सोने का सदुपयोग?
Tuesday - January 7, 2020 11:05 am ,
Category : WTN HINDI
गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम में सोना रखने पर मिलता है ब्याज
जानिये किस तरह से फ़ायदेमंद है गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम?
JAN 07 (WTN) – गोल्ड यानी सोना हर भारतीय महिला की हमेशा से ही कमज़ोरी रहा है। सदियों से ही सोने के आभूषणों के प्रति महिलाओं का लगाव किसी से छिपा नहीं है। दरअसल, गोल्ड यानी सोने में निवेश को एक बढ़िया ज़रिया माना गया है। किसी भी तरह की आर्थिक परेशानी के समय सोने को तुरन्त ही बेच कर उससे आर्थिक परेशानी को दूर किया जा सकता है। इन्हीं सब कारणों से भारतीय लोगों के घरों में काफ़ी तादात में सोने के जेवरात रखे रहते हैं। लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घर में रखा गोल्ड एक तरह से अनुपयोगी ही होता है, क्योंकि इससे किसी भी तरह का रिटर्न हासिल नहीं हो रहा होता है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत में लोगों के घरों में सोने के जेवरात निवेश और स्टेटस सिम्बल के रूप में होते हैं। ऐसे में अब इस सोने के उपयोग के लिए बैंक कोशिश कर रहे हैं कि घर में रखे सोने को बैंकों तक लाया जाये। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे हर तिमाही के हिसाब से लक्ष्य तय करें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के अंतर्गत कितना सोना ग्राहकों से जमा करना है। वहीं वित्त मंत्रालय ने हर तिमाही लक्ष्य तय करने का निर्देश भी दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि मीडिया के मुताबिक़, इस मामले पर वित्त मंत्रालय में बैंक और गोल्ड सेक्टर से जुड़े लोगों की एक बैठक हुई है। कहा जा रहा है कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के लिए एक ख़ास पोर्टल बनाने की भी योजना है। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम का क्या मतलब है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस स्कीम के तहत बैंक के उपभोक्ता घर में पड़े सोने को एक निश्चित अवधि के लिए बैंक में जमा कर सकते हैं। इस स्कीम के तहत इसमें 995 शुद्धता वाला कम से कम 30 ग्राम सोना बैंक में रखना होगा। इसमें आप बैंक गोल्ड-बार, सिक्के और गहने (स्टोन्स रहित और अन्य मेटल रहित) रख सकते हैं।
इस स्कीम के तहत बैंक में जमा सोने पर 2.25 से 2.50 प्रतिशत ब्याज मिलता है। बता दें कि इस योजना के तहत अभी तक कई लोग और संस्थान बैंक में सोना जमा कर चुके हैं। इतना ही नहीं, कुछ बड़े मन्दिरों ने भी इस स्कीम के तहत बैंकों में सोना जमा कराया है। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम मन्दिर ने गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत 2,780 किलो ग्राम सोना जमा कराया है, और इस स्कीम के तहत मन्दिर को हर साल गोल्ड के बदले 807 करोड़ रुपये मिलेंगे।
जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम को साल 2015 में मोदी सरकार ने शुरू किया था। वहीं अब ज़्यादा से ज़्यादा लोग गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम का फ़ायदा उठा सकें, इसके लिए भारत के केन्द्रीय बैंक आरबीआई यानी भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस स्कीम के नियमों में बदलाव किया है। इस स्कीम के नियमों में बदलाव के बाद जमाकर्ता अपना गोल्ड सीधे बैंकों, रिफाइनरों, या कलेक्शन और प्योरिटी टेस्टिंग सेन्टर (CPTCs) में जमा कर सकते हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत सोना जमा कराने से पहले CPTCs (Collection and Purity Verification Centers) ही सोने की शुद्धता का सर्टिफिकेट देते हैं। दरअसल, बैंकों को सोने की शुद्धता की जांच के केन्द्रों (CPTCs) के साथ व्यवहार में कुछ दिक्कतें आ रही थीं। ऐसा इसलिए, क्योंकि CPTCs द्वारा जांचे गये सोने की विश्वसनीयता पर बैंक कई तरह के प्रश्न खड़े कर रहे थे। लेकिन अब नये नियमों के तहत खाता खुलवाकर उपभोक्ता अपने सोने को क्रेडिट भी करा सकते हैं। सोने की जांच के बाद CPTC द्वारा सोने को रिफाइनरी भेजा जाता है, जहां से सोने की शुद्धता के बारे में अन्तिम सर्टिफिकेट मिलता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम की ख़ास बात यह भी है कि पहले आप अपने गोल्ड को बैंक के लॉकर में रखते थे, लेकिन अब इस स्कीम के तहत गोल्ड को लॉकर लेकर उसमें रखने की ज़रूरत नहीं है। वहीं लॉकर में सोना रखने पर आपको ब्याज नहीं मिलता है, और उल्टा आपको लॉकर का किराया देना पड़ता है। लेकिन गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत बैंक में सोना रखने पर लॉकर लेने की ज़रूरत नहीं है, वहीं सोने को इस स्कीम के तहत बैंक में रखने पर आपको ब्याज भी मिलता है।
JAN 07 (WTN) – गोल्ड यानी सोना हर भारतीय महिला की हमेशा से ही कमज़ोरी रहा है। सदियों से ही सोने के आभूषणों के प्रति महिलाओं का लगाव किसी से छिपा नहीं है। दरअसल, गोल्ड यानी सोने में निवेश को एक बढ़िया ज़रिया माना गया है। किसी भी तरह की आर्थिक परेशानी के समय सोने को तुरन्त ही बेच कर उससे आर्थिक परेशानी को दूर किया जा सकता है। इन्हीं सब कारणों से भारतीय लोगों के घरों में काफ़ी तादात में सोने के जेवरात रखे रहते हैं। लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घर में रखा गोल्ड एक तरह से अनुपयोगी ही होता है, क्योंकि इससे किसी भी तरह का रिटर्न हासिल नहीं हो रहा होता है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत में लोगों के घरों में सोने के जेवरात निवेश और स्टेटस सिम्बल के रूप में होते हैं। ऐसे में अब इस सोने के उपयोग के लिए बैंक कोशिश कर रहे हैं कि घर में रखे सोने को बैंकों तक लाया जाये। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे हर तिमाही के हिसाब से लक्ष्य तय करें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के अंतर्गत कितना सोना ग्राहकों से जमा करना है। वहीं वित्त मंत्रालय ने हर तिमाही लक्ष्य तय करने का निर्देश भी दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि मीडिया के मुताबिक़, इस मामले पर वित्त मंत्रालय में बैंक और गोल्ड सेक्टर से जुड़े लोगों की एक बैठक हुई है। कहा जा रहा है कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के लिए एक ख़ास पोर्टल बनाने की भी योजना है। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम का क्या मतलब है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस स्कीम के तहत बैंक के उपभोक्ता घर में पड़े सोने को एक निश्चित अवधि के लिए बैंक में जमा कर सकते हैं। इस स्कीम के तहत इसमें 995 शुद्धता वाला कम से कम 30 ग्राम सोना बैंक में रखना होगा। इसमें आप बैंक गोल्ड-बार, सिक्के और गहने (स्टोन्स रहित और अन्य मेटल रहित) रख सकते हैं।
इस स्कीम के तहत बैंक में जमा सोने पर 2.25 से 2.50 प्रतिशत ब्याज मिलता है। बता दें कि इस योजना के तहत अभी तक कई लोग और संस्थान बैंक में सोना जमा कर चुके हैं। इतना ही नहीं, कुछ बड़े मन्दिरों ने भी इस स्कीम के तहत बैंकों में सोना जमा कराया है। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम मन्दिर ने गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत 2,780 किलो ग्राम सोना जमा कराया है, और इस स्कीम के तहत मन्दिर को हर साल गोल्ड के बदले 807 करोड़ रुपये मिलेंगे।
जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम को साल 2015 में मोदी सरकार ने शुरू किया था। वहीं अब ज़्यादा से ज़्यादा लोग गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम का फ़ायदा उठा सकें, इसके लिए भारत के केन्द्रीय बैंक आरबीआई यानी भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस स्कीम के नियमों में बदलाव किया है। इस स्कीम के नियमों में बदलाव के बाद जमाकर्ता अपना गोल्ड सीधे बैंकों, रिफाइनरों, या कलेक्शन और प्योरिटी टेस्टिंग सेन्टर (CPTCs) में जमा कर सकते हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत सोना जमा कराने से पहले CPTCs (Collection and Purity Verification Centers) ही सोने की शुद्धता का सर्टिफिकेट देते हैं। दरअसल, बैंकों को सोने की शुद्धता की जांच के केन्द्रों (CPTCs) के साथ व्यवहार में कुछ दिक्कतें आ रही थीं। ऐसा इसलिए, क्योंकि CPTCs द्वारा जांचे गये सोने की विश्वसनीयता पर बैंक कई तरह के प्रश्न खड़े कर रहे थे। लेकिन अब नये नियमों के तहत खाता खुलवाकर उपभोक्ता अपने सोने को क्रेडिट भी करा सकते हैं। सोने की जांच के बाद CPTC द्वारा सोने को रिफाइनरी भेजा जाता है, जहां से सोने की शुद्धता के बारे में अन्तिम सर्टिफिकेट मिलता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम की ख़ास बात यह भी है कि पहले आप अपने गोल्ड को बैंक के लॉकर में रखते थे, लेकिन अब इस स्कीम के तहत गोल्ड को लॉकर लेकर उसमें रखने की ज़रूरत नहीं है। वहीं लॉकर में सोना रखने पर आपको ब्याज नहीं मिलता है, और उल्टा आपको लॉकर का किराया देना पड़ता है। लेकिन गोल्ड मोनेटाइज़ेशन स्कीम के तहत बैंक में सोना रखने पर लॉकर लेने की ज़रूरत नहीं है, वहीं सोने को इस स्कीम के तहत बैंक में रखने पर आपको ब्याज भी मिलता है।