पर्यावरण संरक्षण और बिजली बचत के लिए मोदी सरकार का ‘बड़ा फ़ैसला’
Wednesday - January 8, 2020 10:33 am ,
Category : WTN HINDI
एसी (AC) में अब तापमान डिफॉल्ट 24 डिग्री रहेगा सेट
बढ़ते तापमान पर नियंत्रण के लिए एसी का टेम्परेचर रहेगा डिफॉल्ट सेट
JAN 08 (WTN) – प्रकृति का संरक्षण करना हम सभी का पहला कर्तव्य है। मानव ने अपने स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का जमकर दोहन किया है, और इसी का परिणाम है कि हर साल मौसम अप्रत्याक्षित रूप से बदल रहा है। पिछले काफ़ी सालों से यह नोटिस किया गया है कि गर्मी, बारिश और ठण्ड अपने सीजन से आगे-पीछे पड़ रही हैं, और जो पड़ रही है, तो कभी बहुत ज़्यादा है तो कभी बहुत कम। वैसे मौसम वैज्ञानिकों का इस बारे में कहना है कि प्रकृति के अप्रत्याक्षित व्यवहार के लिए मानव की अप्राकृतिक गतिविधियां ही ज़िम्मेदार हैं।
दरअसल, मानव ने अपनी सुविधा के लिए विज्ञान के दम पर कई तरह के ऐसे उपकरण बना लिये हैं, जिनसे प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है। गर्मियों के दिनों में इस्तेमाल किया जाने वाला AC (Air Conditioner) यानी एयरकण्डीशनर धरती का तापमान बढ़ाने के लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है। जानकारी के लिए बता दें कि एक एसी के इस्तेमाल से आसपास के वातावरण में गर्मी बढ़ती है। समय-समय पर मौसम वैज्ञानिक एसी के बढ़ते प्रचलन पर चिन्ता ज़ाहिर कर चुके हैं कि यदि एसी की खपत बढ़ती रही, तो इसका मौसम पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
धीरे-धीरे एसी के बढ़ते इस्तेमाल, और एसी के इस्तेमाल से धरती के तापमान पर पड़ने वाले असर को देखते हुए केन्द्र की मोदी सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है। दरअसल, ऊर्जा मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है कि नया एयरकण्डीशनर (AC) ख़रीदने पर अब वह 24 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही शुरू होगा। यानी सभी कम्पनियों के सभी तरीक़ों के एसी (AC) में डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री सेट रहेगा।
बता दें कि नये साल में नई सेटिंग्स के साथ ही एसी की मैन्युफैक्चरिंग होगी। ऊर्जा मंत्रालय ने सभी ब्रांड के स्टार रेटिंग वाले एसी के लिए इससे सम्बन्धित नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह नये नियम 1 जनवरी, 2020 से लागू हो गये हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार के इस फ़ैसले से जहां एक तरफ़ एसी के ज़रिये होने वाली बिजली की खपत कम होगी वहीं दूसरी तरफ़ इससे आपका हर महीने का बिजली बिल कम होगा।
दरअसल, ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशियंसी (BEE) के साथ मिलकर सरकार ने रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए एनर्जी परफॉरमेंस स्टैण्डर्ड तय किये हैं। BEE से स्टार रेटिंग पाने वाने सभी रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए 24 डिग्री की डिफॉल्ट सेटिंग अनिवार्य की गई है। नये नियमों के अनुसार, एसी शुरू करने पर उसकी डिफॉल्ट सेटिंग 24 डिग्री ही होगी, जिसके बाद आप अपनी सहूलियत के हिसाब से उसमें बदलाव कर सकते हैं।
बता दें कि BEE ने फिक्स्ड-स्पीड रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए साल 2006 में स्टार लेबलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया था जिसे 12 जनवरी 2009 को अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद साल 2015 में इनवर्टर रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए वॉलेन्टरी स्टार लेबलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया गया था, और इसे 1 जनवरी 2018 को लागू किया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए स्टार लेबलिंग प्रोग्राम से अकेले वित्त वर्ष 2017-18 में ही 4.6 अरब यूनिट ऊर्जा की बचत हुई थी।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि भारत दुनिया की तेज़ी से विकास करती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसी कारण से भारत में धीरे-धीरे एसी की ख़पत बढ़ती ही जा रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया में एसी की सबसे ज़्यादा डिमाण्ड भारत में ही होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एसी की ख़रीद में 4206% की वृद्धि देखने को मिल सकती है। स्वाभाविक है कि एसी की डिमाण्ड बढ़ेगी, तो इससे बिजली की खपत भी बढ़ेगी, ऐसे में बिजली की खपत को कम करने के लिए ही सरकार ने एसी में तापमान को डिफॉल्ट 24 डिग्री ही रखने का फ़ैसला लिया है। स्वाभाविक है कि एसी का तापमान डिफॉल्ट 24 डिग्री रखने से बहुत कुछ पर्यावरण संरक्षण हो सकेगा, और वहीं इससे बिजली की बचत भी होगी।
JAN 08 (WTN) – प्रकृति का संरक्षण करना हम सभी का पहला कर्तव्य है। मानव ने अपने स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का जमकर दोहन किया है, और इसी का परिणाम है कि हर साल मौसम अप्रत्याक्षित रूप से बदल रहा है। पिछले काफ़ी सालों से यह नोटिस किया गया है कि गर्मी, बारिश और ठण्ड अपने सीजन से आगे-पीछे पड़ रही हैं, और जो पड़ रही है, तो कभी बहुत ज़्यादा है तो कभी बहुत कम। वैसे मौसम वैज्ञानिकों का इस बारे में कहना है कि प्रकृति के अप्रत्याक्षित व्यवहार के लिए मानव की अप्राकृतिक गतिविधियां ही ज़िम्मेदार हैं।
दरअसल, मानव ने अपनी सुविधा के लिए विज्ञान के दम पर कई तरह के ऐसे उपकरण बना लिये हैं, जिनसे प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है। गर्मियों के दिनों में इस्तेमाल किया जाने वाला AC (Air Conditioner) यानी एयरकण्डीशनर धरती का तापमान बढ़ाने के लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार है। जानकारी के लिए बता दें कि एक एसी के इस्तेमाल से आसपास के वातावरण में गर्मी बढ़ती है। समय-समय पर मौसम वैज्ञानिक एसी के बढ़ते प्रचलन पर चिन्ता ज़ाहिर कर चुके हैं कि यदि एसी की खपत बढ़ती रही, तो इसका मौसम पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
धीरे-धीरे एसी के बढ़ते इस्तेमाल, और एसी के इस्तेमाल से धरती के तापमान पर पड़ने वाले असर को देखते हुए केन्द्र की मोदी सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला लिया है। दरअसल, ऊर्जा मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है कि नया एयरकण्डीशनर (AC) ख़रीदने पर अब वह 24 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही शुरू होगा। यानी सभी कम्पनियों के सभी तरीक़ों के एसी (AC) में डिफॉल्ट तापमान 24 डिग्री सेट रहेगा।
बता दें कि नये साल में नई सेटिंग्स के साथ ही एसी की मैन्युफैक्चरिंग होगी। ऊर्जा मंत्रालय ने सभी ब्रांड के स्टार रेटिंग वाले एसी के लिए इससे सम्बन्धित नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह नये नियम 1 जनवरी, 2020 से लागू हो गये हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार के इस फ़ैसले से जहां एक तरफ़ एसी के ज़रिये होने वाली बिजली की खपत कम होगी वहीं दूसरी तरफ़ इससे आपका हर महीने का बिजली बिल कम होगा।
दरअसल, ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशियंसी (BEE) के साथ मिलकर सरकार ने रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए एनर्जी परफॉरमेंस स्टैण्डर्ड तय किये हैं। BEE से स्टार रेटिंग पाने वाने सभी रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए 24 डिग्री की डिफॉल्ट सेटिंग अनिवार्य की गई है। नये नियमों के अनुसार, एसी शुरू करने पर उसकी डिफॉल्ट सेटिंग 24 डिग्री ही होगी, जिसके बाद आप अपनी सहूलियत के हिसाब से उसमें बदलाव कर सकते हैं।
बता दें कि BEE ने फिक्स्ड-स्पीड रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए साल 2006 में स्टार लेबलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया था जिसे 12 जनवरी 2009 को अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद साल 2015 में इनवर्टर रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए वॉलेन्टरी स्टार लेबलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया गया था, और इसे 1 जनवरी 2018 को लागू किया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि रूम एयर कण्डीशनर्स के लिए स्टार लेबलिंग प्रोग्राम से अकेले वित्त वर्ष 2017-18 में ही 4.6 अरब यूनिट ऊर्जा की बचत हुई थी।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि भारत दुनिया की तेज़ी से विकास करती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसी कारण से भारत में धीरे-धीरे एसी की ख़पत बढ़ती ही जा रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया में एसी की सबसे ज़्यादा डिमाण्ड भारत में ही होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एसी की ख़रीद में 4206% की वृद्धि देखने को मिल सकती है। स्वाभाविक है कि एसी की डिमाण्ड बढ़ेगी, तो इससे बिजली की खपत भी बढ़ेगी, ऐसे में बिजली की खपत को कम करने के लिए ही सरकार ने एसी में तापमान को डिफॉल्ट 24 डिग्री ही रखने का फ़ैसला लिया है। स्वाभाविक है कि एसी का तापमान डिफॉल्ट 24 डिग्री रखने से बहुत कुछ पर्यावरण संरक्षण हो सकेगा, और वहीं इससे बिजली की बचत भी होगी।