ईरान को 100 से ज़्यादा सैन्य ठिकानों से घेरे है अमेरिका
Wednesday - January 8, 2020 3:42 pm ,
Category : WTN HINDI
ईरान के चारों तरफ़ कई देशों में हैं अमेरिका के सैन्य ठिकाने
अमेरिका से युद्ध की भारी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है ईरान को
JAN 08(WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि अमेरिका इस समय दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है। समय-समय पर अमेरिका अपनी सैन्य ताक़त का नज़ारा पूरी दुनिया को दिखा चुका है। लेकिन इस समय अमेरिकी की सैन्य ताक़त को खाड़ी का देश ईरान चुनौती दे रहा है। अमेरिका ने ड्रोन हमले में ईरान के प्रमुख सैन्य अधिकारी क़ासिम सुलेमानी की हत्या कर दी, जिसके बाद ईरान ने अमेरिका से बदले लेने की बात कही थी। सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान का दावा है कि उसने इराक़ में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किये हैं जिसमें 80 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है।
अब जबकि अमेरिकी के सैन्य ठिकानों पर ईरान ने हमला करना शुरू कर दिया है, तो ऐसे में पूरी दुनिया आशंकित है कि दोनों देशों के बीच कहीं युद्ध ना छिड़ जाए, क्योंकि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ता है तो यह विश्व युद्ध में भी तब्दील हो सकता है। वैसे समारिक दृष्टि से अमेरिका के सामने ईरान काफ़ी कमज़ोर है। ईरान की तुलना में अमेरिका की सैन्य शक्ति काफ़ी ज़्यादा है। वहीं इतना भी तय है कि यदि ईरान ने अमेरिका की ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किया तो इस युद्ध को शुरू तो ईरान करेगा, लेकिन इस युद्ध को ख़त्म अमेरिका करेगा वो भी अपने शर्तों पर।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने काफ़ी बड़ी प्लानिंग के साथ ईरान को चारों तरफ़ से अपने सैन्य ठिकानों से घेरे रखा है। दरअसल, अमेरिका के सैन्य बेस पूरी दुनिया में फैले हैं, और इसी के दम पर अमेरिका इस समय ईरान पर चारों तरफ़ से हमला कर सकता है।
कहा जा रहा है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन इस समय खाड़ी देशों में क़रीब 1.20 लाख जवान भेजने की योजना बना रहा है। हाल ही में अमेरिका ने अभी 3,500 सैनिकों को खाड़ी की ओर रवाना किया है।
बता दें कि पूरी दुनिया में अमेरिका के 800 के क़रीब सैन्य बेस हैं, और इन सभी सैन्य बेसों से ही अमेरिका पूरी दुनिया की रक्षा रणनीति तय करता है। यदि ज़रूरत पड़ती है तो इन्हीं सैन्य बेसों को इस्तेमाल कर अमेरिका हमला करता है, नहीं तो इन्हीं सैन्य बैसों से निगरानी या जासूसी करता है। जैसा कि आप जानते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कूटनीतिक और आर्थिक हित ज़्यादा हैं, इसलिए खाड़ी देशों में ही अमेरिका के 100 से ज़्यादा सैन्य बेस हैं। इन सैन्य बेसों पर क़रीब 70,000 अमेरिकी जवान तैनात हैं।
खाड़ी और उसके आसपास के देशों जैसे इराक़, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ओमान, सऊदी अरब, क़तर, तुर्की, सीरिया, अफगानिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिका के सैन्य बेस हैं। इराक़ में जहां पर अमेरिका ने क़ासिम सुलेमानी की हत्या की थी वहां पर अमेरिका के 5,200 सैनिक तैनात हैं। अमेरिका ने इन्हें यहां पर आईएसआईएस से लड़ने के लिए तैनात किया है। वहीं खाड़ी के देश बहरीन में अमेरिका के 7,000 जवान तैनात हैं जिनमें अधिकतर नौसेना के हैं, और यह फारस की खाड़ी में शेख ईसा एयर बेस और खलीफ़ा इब्न सलमान पोर्ट पर तैनात हैं।
वहीं कुवैत में 1,300 अमेरिकी जवान अग्रिम सैन्य हेडक्वॉटर्स में तैनात हैं। बता दें कि आईएसआईएस के ख़तरे के कारण खाड़ी के ही देश जॉर्डन में अमेरिका ने क़रीब 2,800 सैनिकों को तैनात किया है। बात करें ओमान की, तो यहां पर पिछले कई सालों से 200 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अभी यह सैनिक आईएसआईएस से लड़ने के लिए साल्लाह और ड्यूक पोर्ट पर मौजूद हैं।
अमेरिका के सहयोगी देश और ईरान के क्षेत्रीय प्रतिद्वंदी सऊदी अरब में भी काफ़ी तादात में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। खाड़ी का देश क़तर भी अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों में से एक है। अकेले क़तर में ही अमेरिका के क़रीब 13,000 हज़ार जवान तैनात हैं। अमेरिका के यह जवान क़तर के अलउदीद एयर बेस और सायलीह कैम्प में तैनात हैं।
तुर्की में भी अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी है, लेकिन यहां पर कितने अमेरिकी सैनिक तैनात हैं इसकी पुख्ता जानकारी हासिल नहीं है। तुर्की में अमेरिकी सैनिक इजमिर और इनरलिक एयरबेस पर तैनात हैं। वहीं आईएसआईएस के आतंक से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश सीरिया में भी अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, लेकिन अमेरिकी सेन्ट्रल कमाण्ड ने इन सैनिकों की जानकारी सुरक्षा कारणों से जारी नहीं की है। यदि मीडिया रिपोर्ट्स पर विश्वास करें, तो इस समय सीरिया में क़रीब 2,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अमेरिका ने ईरान के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में क़रीब 14,000 सैनिकों को तैनात कर रखा है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात में स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज के पास अमेरिका ने क़रीब 5,000 जवानों को तैनात कर रखा है।
साफ़ ज़ाहिर है कि अमेरिका ने सैन्य बेसों के सहारे ईरान को चारों तरफ़ से घेर कर रखा है। वहीं अमेरिका की मिसाइल और हवाई हमले की क्षमता ईरान से कहीं ज़्यादा है। ऐसे में यदि ईरान अपनी तरफ़ से अमेरिका के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करता है, तो ईरान के चारों तरफ़ स्थित सैन्य ठिकानों से ईरान पर अमेरिका तबाड़तोड़ हमला करेगा, और इस हमले में अमेरिकी मिसाइलें और अमेरिकी एयरफोर्स ईरान पर क़हर बन सकती हैं। यानी कि तय है कि यदि ईरान ने युद्ध शुरू किया, तो इसे ख़त्म करेगा अमेरिका, और वो भी ईरान को नेस्तानाबूद करने के बाद।
JAN 08(WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि अमेरिका इस समय दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है। समय-समय पर अमेरिका अपनी सैन्य ताक़त का नज़ारा पूरी दुनिया को दिखा चुका है। लेकिन इस समय अमेरिकी की सैन्य ताक़त को खाड़ी का देश ईरान चुनौती दे रहा है। अमेरिका ने ड्रोन हमले में ईरान के प्रमुख सैन्य अधिकारी क़ासिम सुलेमानी की हत्या कर दी, जिसके बाद ईरान ने अमेरिका से बदले लेने की बात कही थी। सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान का दावा है कि उसने इराक़ में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किये हैं जिसमें 80 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है।
अब जबकि अमेरिकी के सैन्य ठिकानों पर ईरान ने हमला करना शुरू कर दिया है, तो ऐसे में पूरी दुनिया आशंकित है कि दोनों देशों के बीच कहीं युद्ध ना छिड़ जाए, क्योंकि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ता है तो यह विश्व युद्ध में भी तब्दील हो सकता है। वैसे समारिक दृष्टि से अमेरिका के सामने ईरान काफ़ी कमज़ोर है। ईरान की तुलना में अमेरिका की सैन्य शक्ति काफ़ी ज़्यादा है। वहीं इतना भी तय है कि यदि ईरान ने अमेरिका की ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किया तो इस युद्ध को शुरू तो ईरान करेगा, लेकिन इस युद्ध को ख़त्म अमेरिका करेगा वो भी अपने शर्तों पर।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका ने काफ़ी बड़ी प्लानिंग के साथ ईरान को चारों तरफ़ से अपने सैन्य ठिकानों से घेरे रखा है। दरअसल, अमेरिका के सैन्य बेस पूरी दुनिया में फैले हैं, और इसी के दम पर अमेरिका इस समय ईरान पर चारों तरफ़ से हमला कर सकता है।
कहा जा रहा है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन इस समय खाड़ी देशों में क़रीब 1.20 लाख जवान भेजने की योजना बना रहा है। हाल ही में अमेरिका ने अभी 3,500 सैनिकों को खाड़ी की ओर रवाना किया है।
बता दें कि पूरी दुनिया में अमेरिका के 800 के क़रीब सैन्य बेस हैं, और इन सभी सैन्य बेसों से ही अमेरिका पूरी दुनिया की रक्षा रणनीति तय करता है। यदि ज़रूरत पड़ती है तो इन्हीं सैन्य बेसों को इस्तेमाल कर अमेरिका हमला करता है, नहीं तो इन्हीं सैन्य बैसों से निगरानी या जासूसी करता है। जैसा कि आप जानते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कूटनीतिक और आर्थिक हित ज़्यादा हैं, इसलिए खाड़ी देशों में ही अमेरिका के 100 से ज़्यादा सैन्य बेस हैं। इन सैन्य बेसों पर क़रीब 70,000 अमेरिकी जवान तैनात हैं।
खाड़ी और उसके आसपास के देशों जैसे इराक़, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ओमान, सऊदी अरब, क़तर, तुर्की, सीरिया, अफगानिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिका के सैन्य बेस हैं। इराक़ में जहां पर अमेरिका ने क़ासिम सुलेमानी की हत्या की थी वहां पर अमेरिका के 5,200 सैनिक तैनात हैं। अमेरिका ने इन्हें यहां पर आईएसआईएस से लड़ने के लिए तैनात किया है। वहीं खाड़ी के देश बहरीन में अमेरिका के 7,000 जवान तैनात हैं जिनमें अधिकतर नौसेना के हैं, और यह फारस की खाड़ी में शेख ईसा एयर बेस और खलीफ़ा इब्न सलमान पोर्ट पर तैनात हैं।
वहीं कुवैत में 1,300 अमेरिकी जवान अग्रिम सैन्य हेडक्वॉटर्स में तैनात हैं। बता दें कि आईएसआईएस के ख़तरे के कारण खाड़ी के ही देश जॉर्डन में अमेरिका ने क़रीब 2,800 सैनिकों को तैनात किया है। बात करें ओमान की, तो यहां पर पिछले कई सालों से 200 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अभी यह सैनिक आईएसआईएस से लड़ने के लिए साल्लाह और ड्यूक पोर्ट पर मौजूद हैं।
अमेरिका के सहयोगी देश और ईरान के क्षेत्रीय प्रतिद्वंदी सऊदी अरब में भी काफ़ी तादात में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। खाड़ी का देश क़तर भी अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों में से एक है। अकेले क़तर में ही अमेरिका के क़रीब 13,000 हज़ार जवान तैनात हैं। अमेरिका के यह जवान क़तर के अलउदीद एयर बेस और सायलीह कैम्प में तैनात हैं।
तुर्की में भी अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी है, लेकिन यहां पर कितने अमेरिकी सैनिक तैनात हैं इसकी पुख्ता जानकारी हासिल नहीं है। तुर्की में अमेरिकी सैनिक इजमिर और इनरलिक एयरबेस पर तैनात हैं। वहीं आईएसआईएस के आतंक से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश सीरिया में भी अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं, लेकिन अमेरिकी सेन्ट्रल कमाण्ड ने इन सैनिकों की जानकारी सुरक्षा कारणों से जारी नहीं की है। यदि मीडिया रिपोर्ट्स पर विश्वास करें, तो इस समय सीरिया में क़रीब 2,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अमेरिका ने ईरान के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में क़रीब 14,000 सैनिकों को तैनात कर रखा है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात में स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज के पास अमेरिका ने क़रीब 5,000 जवानों को तैनात कर रखा है।
साफ़ ज़ाहिर है कि अमेरिका ने सैन्य बेसों के सहारे ईरान को चारों तरफ़ से घेर कर रखा है। वहीं अमेरिका की मिसाइल और हवाई हमले की क्षमता ईरान से कहीं ज़्यादा है। ऐसे में यदि ईरान अपनी तरफ़ से अमेरिका के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करता है, तो ईरान के चारों तरफ़ स्थित सैन्य ठिकानों से ईरान पर अमेरिका तबाड़तोड़ हमला करेगा, और इस हमले में अमेरिकी मिसाइलें और अमेरिकी एयरफोर्स ईरान पर क़हर बन सकती हैं। यानी कि तय है कि यदि ईरान ने युद्ध शुरू किया, तो इसे ख़त्म करेगा अमेरिका, और वो भी ईरान को नेस्तानाबूद करने के बाद।