यदि हुआ ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध तो भारत को होगा करोड़ों डॉलर का नुकसान
Friday - January 10, 2020 11:34 am ,
Category : WTN HINDI
खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा की चिन्ता
खाड़ी में जारी तनाव से भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा बड़ा असर
JAN 10 (WTN) – अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। ईरान की कोई भी ग़लती खाड़ी में एक बार फ़िर से युद्ध की शुरूआत कर सकती है। जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका ने ईरान के मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में यह कर हत्या कर दी थी कि सुलेमानी, अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों की हत्या की योजना बनाने में शामिल था। क़ासिम सुलेमानी की हत्या ईरान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने अमेरिका से बदला लेने का प्रण तक ले लिया था।
अमेरिका से सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इराक़ स्थित अमेरिकी एयरबेसों पर निशाना साधते हुए क़रीब दो दर्जन से ज़्यादा मिसाइलें दागी और दावा किया कि इस हमले में अमेरिका के क़रीब 80 सैनिक मारे गये हैं। ईरान के इस दावे के बाद पूरी दुनिया आशंकित हो गई थी कि यदि ईरान के हमले में सच में अमेरिका के 80 सैनिक मारे गये हैं, तो अमेरिका इसका बदला ज़रूर लेगा। हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के दावे को ख़ारिज कर दिया कि मिसाइल हमलों में 80 अमेरिकी सैनिक मारे गये हैं।
वैसे फ़िलहाल इस लेख को लिखे जाने तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, और युद्ध की घोषणा दोनों ही पक्षों की तरफ़ से नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह का तनाव दोनों देशों के बीच है, उससे लगता है कि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध होता है, तो इससे खाड़ी का पूरा इलाक़ा प्रभावित होगा। दरअसल, खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिका के एयरबेस और सैनिक अड्डे हैं। यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है, तो स्वाभाविक है कि इन देशों पर भी ईरान और उसके सहयोगी देश हमला कर सकते हैं। ऐसे में भारत सरकार को खाड़ी में रहने वाला भारतीय लोगों की चिन्ता सताने लगी है। वहीं यदि खाड़ी में एक बार फ़िर से युद्ध होता है, तो इससे भारत को हज़ारों करोड़ डॉलर का नुकसान होना तय है।
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से चिन्तित मोदी सरकार ने अपने ट्रेड रूट को बचाने और खाड़ी इलाक़े में किसी भी तरह की इमरजेंसी से निपटने के लिए अपनी नेवल वारशिप को तैनात कर दिया है। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है, तो इससे भारत का व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो जाएगा। वहीं बता दें कि खाड़ी क्षेत्र में लाखों की तादात में भारतीय लोग रहते हैं, ऐसे में यदि खाड़ी में युद्ध होता है तो इससे लाखों लोग वहां पर फंस सकते हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि एक आंकड़े के मुताबिक़ खाड़ी देशों में भारत के क़रीब 75 लाख लोग रहते हैं। यदि खाड़ी में किसी भी तरह की अस्थिरता होती है, तो इसका असर भारतीय लोगों पर पड़ेगा। बता दें कि 90 के शुरूआती दशक में भी भारत खाड़ी संकट का सामना कर चुका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1990 में अमेरिका ने इराक़ पर हमला कर दिया था, जिसके बाद इराक़ में रह रहे हज़ारों भारतीय वहां पर फंस गये थे। इराक़ में रहने वाले भारतीय लोगों को बचाने के लिए भारत सरकार को एक बड़ा ऑपरेशन चलना पड़ा था, जिसके बाद भारत सरकार ने इराक़ से 1.10 लाख लोगों को सुरक्षित तरीक़े से एयरलिफ्ट किया था।
हालांकि, अमेरिका की सैन्य शक्ति के सामने ईरान बहुत कमजोर है, और आशा की जा रही है कि दोनों देशों के बीच युद्ध नहीं होगा। लेकिन फ़िर भी दोनों देशों के बीच जारी तनाव से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हो रहा है, जो कि इस समय वैश्विक आर्थिक मंदी का सामना कर रही है। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव से कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि हो रही है, जिसका असर भारत पर पड़ रहा है। महंगे तेल के कारण भारत को अपनी बहुमूल्य विदेशी मुद्रा इस पर ख़र्च करना पड़ रही है, ऐसे में खाड़ी में जारी तनाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर विपरित असर पड़ रहा है।
वहीं यदि खाड़ी में युद्ध होता है, तो खाड़ी के देशों में रहने वाले भारतीय लोगों को वापस लौटना पड़ेगा, जिससे भारत पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय लोगों से भारत को हर साल क़रीब 40 बिलियन डॉलर यानी क़रीब 2,859 करोड़ रुपये की विदेशी पूंजी प्राप्त होती है। बता दें कि भारत के कुल विदेशी जमापूंजी का पचास प्रतिशत हिस्सा पश्चिमी एशिया से आता है। स्वाभाविक है कि यदि खाड़ी देशों में रहने वाली भारतीय वापस आते हैं, तो इससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा का नुकसान भारत को उठाना पड़ सकता है।
वहीं यदि खाड़ी में एक बार फ़िर से युद्ध होता है, तो इससे भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आएगी और इससे कच्चे तेल के दाम बहुत ज़्यादा बढ़ जाएंगे। साथ ही यदि युद्ध के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय लोगों ने भारत का रुख किया, तो ऐसे समय में भारत को विदेशी मुद्रा की भी हानि होगी। यानी साफ़ है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध होता है, तो पहले से ही वैश्विक आर्थिक सुस्ती का सामना कर रही भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा।
JAN 10 (WTN) – अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। ईरान की कोई भी ग़लती खाड़ी में एक बार फ़िर से युद्ध की शुरूआत कर सकती है। जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका ने ईरान के मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में यह कर हत्या कर दी थी कि सुलेमानी, अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों की हत्या की योजना बनाने में शामिल था। क़ासिम सुलेमानी की हत्या ईरान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने अमेरिका से बदला लेने का प्रण तक ले लिया था।
अमेरिका से सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इराक़ स्थित अमेरिकी एयरबेसों पर निशाना साधते हुए क़रीब दो दर्जन से ज़्यादा मिसाइलें दागी और दावा किया कि इस हमले में अमेरिका के क़रीब 80 सैनिक मारे गये हैं। ईरान के इस दावे के बाद पूरी दुनिया आशंकित हो गई थी कि यदि ईरान के हमले में सच में अमेरिका के 80 सैनिक मारे गये हैं, तो अमेरिका इसका बदला ज़रूर लेगा। हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के दावे को ख़ारिज कर दिया कि मिसाइल हमलों में 80 अमेरिकी सैनिक मारे गये हैं।
वैसे फ़िलहाल इस लेख को लिखे जाने तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, और युद्ध की घोषणा दोनों ही पक्षों की तरफ़ से नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह का तनाव दोनों देशों के बीच है, उससे लगता है कि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध होता है, तो इससे खाड़ी का पूरा इलाक़ा प्रभावित होगा। दरअसल, खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिका के एयरबेस और सैनिक अड्डे हैं। यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है, तो स्वाभाविक है कि इन देशों पर भी ईरान और उसके सहयोगी देश हमला कर सकते हैं। ऐसे में भारत सरकार को खाड़ी में रहने वाला भारतीय लोगों की चिन्ता सताने लगी है। वहीं यदि खाड़ी में एक बार फ़िर से युद्ध होता है, तो इससे भारत को हज़ारों करोड़ डॉलर का नुकसान होना तय है।
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से चिन्तित मोदी सरकार ने अपने ट्रेड रूट को बचाने और खाड़ी इलाक़े में किसी भी तरह की इमरजेंसी से निपटने के लिए अपनी नेवल वारशिप को तैनात कर दिया है। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है, तो इससे भारत का व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो जाएगा। वहीं बता दें कि खाड़ी क्षेत्र में लाखों की तादात में भारतीय लोग रहते हैं, ऐसे में यदि खाड़ी में युद्ध होता है तो इससे लाखों लोग वहां पर फंस सकते हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि एक आंकड़े के मुताबिक़ खाड़ी देशों में भारत के क़रीब 75 लाख लोग रहते हैं। यदि खाड़ी में किसी भी तरह की अस्थिरता होती है, तो इसका असर भारतीय लोगों पर पड़ेगा। बता दें कि 90 के शुरूआती दशक में भी भारत खाड़ी संकट का सामना कर चुका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1990 में अमेरिका ने इराक़ पर हमला कर दिया था, जिसके बाद इराक़ में रह रहे हज़ारों भारतीय वहां पर फंस गये थे। इराक़ में रहने वाले भारतीय लोगों को बचाने के लिए भारत सरकार को एक बड़ा ऑपरेशन चलना पड़ा था, जिसके बाद भारत सरकार ने इराक़ से 1.10 लाख लोगों को सुरक्षित तरीक़े से एयरलिफ्ट किया था।
हालांकि, अमेरिका की सैन्य शक्ति के सामने ईरान बहुत कमजोर है, और आशा की जा रही है कि दोनों देशों के बीच युद्ध नहीं होगा। लेकिन फ़िर भी दोनों देशों के बीच जारी तनाव से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान हो रहा है, जो कि इस समय वैश्विक आर्थिक मंदी का सामना कर रही है। दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव से कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि हो रही है, जिसका असर भारत पर पड़ रहा है। महंगे तेल के कारण भारत को अपनी बहुमूल्य विदेशी मुद्रा इस पर ख़र्च करना पड़ रही है, ऐसे में खाड़ी में जारी तनाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर विपरित असर पड़ रहा है।
वहीं यदि खाड़ी में युद्ध होता है, तो खाड़ी के देशों में रहने वाले भारतीय लोगों को वापस लौटना पड़ेगा, जिससे भारत पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय लोगों से भारत को हर साल क़रीब 40 बिलियन डॉलर यानी क़रीब 2,859 करोड़ रुपये की विदेशी पूंजी प्राप्त होती है। बता दें कि भारत के कुल विदेशी जमापूंजी का पचास प्रतिशत हिस्सा पश्चिमी एशिया से आता है। स्वाभाविक है कि यदि खाड़ी देशों में रहने वाली भारतीय वापस आते हैं, तो इससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा का नुकसान भारत को उठाना पड़ सकता है।
वहीं यदि खाड़ी में एक बार फ़िर से युद्ध होता है, तो इससे भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आएगी और इससे कच्चे तेल के दाम बहुत ज़्यादा बढ़ जाएंगे। साथ ही यदि युद्ध के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय लोगों ने भारत का रुख किया, तो ऐसे समय में भारत को विदेशी मुद्रा की भी हानि होगी। यानी साफ़ है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध होता है, तो पहले से ही वैश्विक आर्थिक सुस्ती का सामना कर रही भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा।