वर्ल्ड बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर जताई सकारात्मकता
Friday - January 10, 2020 4:01 pm ,
Category : WTN HINDI
आने वाले वित्त वर्ष में तेज़ी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
वैश्विक आर्थिक सुस्ती से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था, विकास दर में जल्द आएगी तेज़ी
JAN 10 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने किसी ना किसी रूप में नुकसान पहुंचाया है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण ही चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पर काफ़ी असर पड़ा है और यह अनुमान से काफ़ी कम रही है। इस सबके बीच, वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के कम होकर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
हालांकि, वर्ल्ड बैंक को उम्मीद है कि आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, और भारत की विकास दर वित्त वर्ष 2020-21 में 5.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही और सितम्बर तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर क्रमश: 5 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत रही है जो कि साल 2013 के बाद सबसे निम्न स्तर है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (एनबीएफसी) के क़र्ज़ वितरण में नरमी जारी रहने का अनुमान है, और इसी कारण से भारत की जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 5 प्रतिशत तक सिमट सकती है।
लेकिन वहीं वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि आर्थिक सुस्ती का धीरे-धीरे भारत समेत दुनिया के अन्य देशों पर असर कम होता जा रहा है, और वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रह सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी सप्ताह मंगलवार को जारी आंकड़ों में सरकार ने चालू वित वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर के 5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। सरकार का मानना है कि विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र के ख़राब प्रदर्शन के कारण ही आर्थिक विकास दर इतनी कम रहने वाली है। बता दें कि यदि आर्थिक विकास दर की 5 प्रतिशत रहती है, तो यह 11 साल की सबसे धीमी वृद्धि दर होगी।
इधर वर्ल्ड बैंक का मानना है कि ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र के ऋण वितरण में नरमी से भारत में घरेलू मांग पर पर काफ़ी असर पड़ रहा है। साथ ही भारत में क़र्ज़ की अपर्याप्त उपलब्धता और निजी उपभोग में नरमी से आर्थिक गतिविधियां संकुचित हुई हैं और इसी कारण से साल 2019 में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, चालू वित्त वर्ष में विनिर्माण और कृषि क्षेत्र में सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज़ की गई है जिससे भारत की आर्थिक विकास दर को झटका लगा है।
वर्ल्ड बैंक का मानना है कि लोगों द्वारा उपभोग में कमी और निवेश में नरमी ने सरकारी खर्च के प्रभाव को नगण्य बना दिया है। वहीं वर्ल्ड बैंक का मानना है कि चालू वित्त वर्ष के बाक़ी बचे समय में भी आर्थिक गतिविधियों के कमज़ोर बने रहने की आशंका है। यानी साफ़ है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण भी दुनिया के कई देशों को आर्थिक सुस्ती का सामना करना पड़ा है। ट्रेड वॉर के कारण ख़ुद चीन को काफ़ी बड़ा झटका लगा है और 17 साल में पहली बार चीन में औद्योगिक विकास दर निम्नतम स्तर पर पहुंच गई है।
वैसे आर्थिक सुस्ती का दौर और असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, और अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से तेज़ी के साथ आगे बढ़ेगी। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मोदी सरकार को काफ़ी प्रयत्न करने होंगे, जैसे बाज़ार में क़र्ज़ की सुलभता, इनकम टैक्स में कमी जिससे लोगों के हाथ में ज़्यादा पैसा आये और वे ख़र्च करें, और रोज़गार बढ़ाने के अवसर। यदि मोदी सरकार इन उपायों को करने में सफ़ल हो जाती है, तो आर्थिक सुस्ती से उबर कर भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से तेज़ी से आगे बढ़ने लगेगी।
JAN 10 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने किसी ना किसी रूप में नुकसान पहुंचाया है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण ही चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पर काफ़ी असर पड़ा है और यह अनुमान से काफ़ी कम रही है। इस सबके बीच, वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के कम होकर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
हालांकि, वर्ल्ड बैंक को उम्मीद है कि आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, और भारत की विकास दर वित्त वर्ष 2020-21 में 5.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही और सितम्बर तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर क्रमश: 5 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत रही है जो कि साल 2013 के बाद सबसे निम्न स्तर है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (एनबीएफसी) के क़र्ज़ वितरण में नरमी जारी रहने का अनुमान है, और इसी कारण से भारत की जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 5 प्रतिशत तक सिमट सकती है।
लेकिन वहीं वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि आर्थिक सुस्ती का धीरे-धीरे भारत समेत दुनिया के अन्य देशों पर असर कम होता जा रहा है, और वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रह सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी सप्ताह मंगलवार को जारी आंकड़ों में सरकार ने चालू वित वर्ष 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर के 5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। सरकार का मानना है कि विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र के ख़राब प्रदर्शन के कारण ही आर्थिक विकास दर इतनी कम रहने वाली है। बता दें कि यदि आर्थिक विकास दर की 5 प्रतिशत रहती है, तो यह 11 साल की सबसे धीमी वृद्धि दर होगी।
इधर वर्ल्ड बैंक का मानना है कि ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र के ऋण वितरण में नरमी से भारत में घरेलू मांग पर पर काफ़ी असर पड़ रहा है। साथ ही भारत में क़र्ज़ की अपर्याप्त उपलब्धता और निजी उपभोग में नरमी से आर्थिक गतिविधियां संकुचित हुई हैं और इसी कारण से साल 2019 में आर्थिक गतिविधियों में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक़, चालू वित्त वर्ष में विनिर्माण और कृषि क्षेत्र में सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज़ की गई है जिससे भारत की आर्थिक विकास दर को झटका लगा है।
वर्ल्ड बैंक का मानना है कि लोगों द्वारा उपभोग में कमी और निवेश में नरमी ने सरकारी खर्च के प्रभाव को नगण्य बना दिया है। वहीं वर्ल्ड बैंक का मानना है कि चालू वित्त वर्ष के बाक़ी बचे समय में भी आर्थिक गतिविधियों के कमज़ोर बने रहने की आशंका है। यानी साफ़ है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के कारण भी दुनिया के कई देशों को आर्थिक सुस्ती का सामना करना पड़ा है। ट्रेड वॉर के कारण ख़ुद चीन को काफ़ी बड़ा झटका लगा है और 17 साल में पहली बार चीन में औद्योगिक विकास दर निम्नतम स्तर पर पहुंच गई है।
वैसे आर्थिक सुस्ती का दौर और असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, और अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से तेज़ी के साथ आगे बढ़ेगी। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मोदी सरकार को काफ़ी प्रयत्न करने होंगे, जैसे बाज़ार में क़र्ज़ की सुलभता, इनकम टैक्स में कमी जिससे लोगों के हाथ में ज़्यादा पैसा आये और वे ख़र्च करें, और रोज़गार बढ़ाने के अवसर। यदि मोदी सरकार इन उपायों को करने में सफ़ल हो जाती है, तो आर्थिक सुस्ती से उबर कर भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से तेज़ी से आगे बढ़ने लगेगी।