धीरे-धीरे आर्थिक सुस्ती के असर से 'उबर' रहा है भारत
Saturday - January 11, 2020 11:10 am ,
Category : WTN HINDI
औद्योगिक उत्पादन दर 'निगेटिव' से हुई 'पॉजिटिव'
आगामी वित्त वर्ष में एक बार फ़िर से गति पकड़ेगी देश की विकास दर
JAN 11 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारत जैसी तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था को काफ़ी प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की क़रीब 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने किसी ना किसी रूप से नकारात्मक प्रभाव डाला है। वहीं अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर ने भी दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर डाला है। ट्रेड वॉर का ख़ुद चीन पर भी काफ़ी ज़्यादा असर हुआ है, और पिछले 17 सालों में पहली बार चीन में औद्योगिक विकास दर 17 साल के निम्नतम स्तर पर आ गई है।
जहां तक भारतीय अर्थव्यवस्था की बात है, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर आर्थिक सुस्ती का काफ़ी गहरा असर पड़ा है। चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में आर्थिक विकास की दर काफ़ी कम रही है और इसी कारण से इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट 5 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद लगाई जा रही है जो कि उम्मीद से काफ़ी कम है। विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, और भारतीय रिज़र्व बैंक के अलावा कई रेटिंग एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर के अनुमान को पहले से काफ़ी कम कर दिया है, और इसका सबसे बड़ा कारण है आर्थिक सुस्ती के कारण डिमाण्ड और उत्पादन पर गहरा असर पड़ना।
साफ़ ज़ाहिर है कि आंकड़ें बता रहे हैं कि आर्थिक सुस्ती ने देश की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी नकारात्मक असर डाला है। लेकिन इस सबके बीच, आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को एक राहत की ख़बर मिली है। जानकारी के लिए बता दें कि नवम्बर 2019 में IIP (Index of Industrial Production) यानी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक तीन महीने के बाद पॉजिटिव हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक़, नवम्बर के महीने में IIP -3.80 प्रतिशत से बढ़कर 1.80 प्रतिशत हो गया है। बता दें कि नवम्बर 2019 का IIP नवम्बर 2018 के IIP की तुलना में 0.50 प्रतिशत ज़्यादा रहा है।
आर्थिक सुस्ती के कारण भारत की IIP ग्रोथ पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ रहा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन दर -3.8 प्रतिशत थी, तो वहीं पिछले साल सितम्बर के महीने में यह -5.4 प्रतिशत थी। दरअसल, किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का काफ़ी महत्व होता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक से ही पता चलता है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है।
लेकिन आर्थिक सुस्ती ने भारत के औद्योगिक विकास को काफ़ी प्रभावित किया है। NSO (National Statistical Office) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक़, चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से नवम्बर महीने के दौरान IIP ग्रोथ सिर्फ़ 0.60 प्रतिशत रही है। जबकि, पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में यह 5 प्रतिशत थी। साफ़ ज़ाहिर है कि आर्थिक सुस्ती के कारण डिमाण्ड कम रहने से औद्योगिक उत्पादन पर काफ़ी असर पड़ा है। आर्थिक सुस्ती के कारण कई कारखानों और मिलों को कुछ दिनों के लिए उत्पादन बंद करना पड़ा था, या फ़िर उत्पादन कम करना पड़ा था।
जानकारों के मुताबिक़, औद्योगिक उत्पादन ग्रोट रेट में रिकवरी उत्पादन गतिविधियां बढ़ने से आई है। आंकड़ों के मुताबिक़, साल 2018 की तुलना में उत्पादन ग्रोथ -0.7 से बढ़कर 2.7 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, इलेक्ट्रिसिटी फील्ड में ग्रोथ नहीं आना अभी भी बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। दरअसल, यह इस बात का सन्केत है कि मौजूदा ग्रोथ टिकाऊ नहीं है, और हो सकता है कि आने वाले समय में ग्रोथ रेट में एक बार फ़िर से कमी हो जाये।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर आर्थिक सुस्ती का कितना नकारात्मक असर हुआ है यह आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर होता है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक सुस्ती के भंवरजाल से निकल जायेगी, और जीडीपी ग्रोथ रेट एक बार फ़िर से 6 प्रतिशत के आसपास होगी। जानकारों के मुताबिक़, मार्च और अप्रैल के महीने से आर्थिक सुस्ती का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा, और इसी कारण से भारत में औद्योगिक उत्पादन की दर एक बार फ़िर से गति पकड़ने लगेगी।
JAN 11 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारत जैसी तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था को काफ़ी प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की क़रीब 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं पर वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने किसी ना किसी रूप से नकारात्मक प्रभाव डाला है। वहीं अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर ने भी दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर डाला है। ट्रेड वॉर का ख़ुद चीन पर भी काफ़ी ज़्यादा असर हुआ है, और पिछले 17 सालों में पहली बार चीन में औद्योगिक विकास दर 17 साल के निम्नतम स्तर पर आ गई है।
जहां तक भारतीय अर्थव्यवस्था की बात है, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर आर्थिक सुस्ती का काफ़ी गहरा असर पड़ा है। चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में आर्थिक विकास की दर काफ़ी कम रही है और इसी कारण से इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट 5 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद लगाई जा रही है जो कि उम्मीद से काफ़ी कम है। विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, और भारतीय रिज़र्व बैंक के अलावा कई रेटिंग एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर के अनुमान को पहले से काफ़ी कम कर दिया है, और इसका सबसे बड़ा कारण है आर्थिक सुस्ती के कारण डिमाण्ड और उत्पादन पर गहरा असर पड़ना।
साफ़ ज़ाहिर है कि आंकड़ें बता रहे हैं कि आर्थिक सुस्ती ने देश की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी नकारात्मक असर डाला है। लेकिन इस सबके बीच, आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को एक राहत की ख़बर मिली है। जानकारी के लिए बता दें कि नवम्बर 2019 में IIP (Index of Industrial Production) यानी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक तीन महीने के बाद पॉजिटिव हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक़, नवम्बर के महीने में IIP -3.80 प्रतिशत से बढ़कर 1.80 प्रतिशत हो गया है। बता दें कि नवम्बर 2019 का IIP नवम्बर 2018 के IIP की तुलना में 0.50 प्रतिशत ज़्यादा रहा है।
आर्थिक सुस्ती के कारण भारत की IIP ग्रोथ पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ रहा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन दर -3.8 प्रतिशत थी, तो वहीं पिछले साल सितम्बर के महीने में यह -5.4 प्रतिशत थी। दरअसल, किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का काफ़ी महत्व होता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक से ही पता चलता है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है।
लेकिन आर्थिक सुस्ती ने भारत के औद्योगिक विकास को काफ़ी प्रभावित किया है। NSO (National Statistical Office) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक़, चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से नवम्बर महीने के दौरान IIP ग्रोथ सिर्फ़ 0.60 प्रतिशत रही है। जबकि, पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में यह 5 प्रतिशत थी। साफ़ ज़ाहिर है कि आर्थिक सुस्ती के कारण डिमाण्ड कम रहने से औद्योगिक उत्पादन पर काफ़ी असर पड़ा है। आर्थिक सुस्ती के कारण कई कारखानों और मिलों को कुछ दिनों के लिए उत्पादन बंद करना पड़ा था, या फ़िर उत्पादन कम करना पड़ा था।
जानकारों के मुताबिक़, औद्योगिक उत्पादन ग्रोट रेट में रिकवरी उत्पादन गतिविधियां बढ़ने से आई है। आंकड़ों के मुताबिक़, साल 2018 की तुलना में उत्पादन ग्रोथ -0.7 से बढ़कर 2.7 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, इलेक्ट्रिसिटी फील्ड में ग्रोथ नहीं आना अभी भी बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। दरअसल, यह इस बात का सन्केत है कि मौजूदा ग्रोथ टिकाऊ नहीं है, और हो सकता है कि आने वाले समय में ग्रोथ रेट में एक बार फ़िर से कमी हो जाये।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर आर्थिक सुस्ती का कितना नकारात्मक असर हुआ है यह आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर होता है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक सुस्ती के भंवरजाल से निकल जायेगी, और जीडीपी ग्रोथ रेट एक बार फ़िर से 6 प्रतिशत के आसपास होगी। जानकारों के मुताबिक़, मार्च और अप्रैल के महीने से आर्थिक सुस्ती का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा, और इसी कारण से भारत में औद्योगिक उत्पादन की दर एक बार फ़िर से गति पकड़ने लगेगी।