...तो क्या फ़िर एक क्रान्ति की तरफ़ बढ़ रहा है ईरान?
Monday - January 13, 2020 3:52 pm ,
Category : WTN HINDI
ईरान में लोगों के निशाने पर आए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई
ईरान में पहली बार सर्वोच्च नेता के ख़िलाफ़ उठी आवाज़ें!
JAN 13 (WTN) – खाड़ी का एक महत्वपूर्ण देश ईरान इन दिनों परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। शिया बाहुल्य आबादी वाले इस देश की अमेरिका से दुश्मनी के बारे में तो सभी जानते हैं, वहीं यह भी सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी की सबसे बड़ी वजहों में से एक वजह रहे हैं ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता। जो ईरान की राजनीति के बारे में जानते हैं, वो भलीभांति जानते हैं कि ईरान में वहां के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामनेई का क़द कितना बढ़ा है। ईरान की अंदरूनी राजनीति और विदेशी नीति का कोई भी फ़ैसला खामनेई की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाता है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि पिछले दिनों अमेरिका ने ईरान के मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मार गिराया था। सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने अमेरिका से बदला लेने की बात खुलेआम की थी, और ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने भी अमेरिका को सुलेमानी की हत्या का परिणाम भुगतने की बात कही थी। जिसके बाद ईरान ने इराक़ स्थित अमेरिका के दो एयरबेसों को निशाना बनाते हुए क़रीब दो दर्जन मिसाइलों से हमला किया था, और दावा किया था कि इन हमलों में क़रीब 80 अमेरिकी सैनिक मारे गये हैं। हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के इस दावे को झूठा साबित करते हुए कहा था कि मिसाइल हमलों में एक भी अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया है।
लेकिन क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान के लोगों में अमेरिका के ख़िलाफ़ जो माहौल बना था, अब वो माहौल धीरे-धीरे ईरान की सरकार के ख़िलाफ़ ही बनता जा रहा है। दरअसल, ईरान की राजधानी तेहरान से यूक्रेन की राजधानी कीव जा रहे यात्री विमान को मार गिराये की ज़िम्मेदारी जब से ईरान की सरकार ने ली है, तब से ही तेहरान में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। तेहरान में कल यानी रविवार को पूरे दिन तेहरान विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाये। लेकिन आपको पढ़कर आश्चर्य होगा कि तेहरान में प्रदर्शनकारियों का एक ग्रुप नारे लगा रहा था, “हमारा दुश्मन अमेरिका में नहीं बल्कि यहां है।” वहीं आपको और भी ज़्यादा आश्चर्य होगा कि प्रदर्शनकारियों का दुश्मन की तरफ़ इशारा देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की तरफ़ था!
यात्री विमान गिराये जाने के बाद से ईरान में लोगों का गुस्सा ईरान की सरकार के ख़िलाफ़ भड़क गया है, और तेहरान में प्रदर्शनकारी अयातुल्ला अली खामनेई का इस्तीफ़ा मांगने लगे हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो के अनुसार, प्रदर्शकारियों ने तेहरान के आज़ादी स्क्वायर से एक प्रदर्शन यात्रा निकाली। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पहले तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से गुज़ारिश की कि वे भी प्रदर्शन में शामिल हो जाएं, लेकिन बाद में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस, प्रशासन और सरकार पर गुस्सा निकालना शुरू कर दिया।
ईरान जैसे धार्मिक कट्टरता वाले देश में ही यदि सर्वोच्च धार्मिक नेता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठने लगें तो यह अपने आप में काफ़ी क्रान्तिकारी घटना है। बता दें कि तेहरान में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी अयातुल्ला अली खामनेई की तरफ इशारा करके 'तानाशाही मुर्दाबाद' के नारे लगाने लगे हैं। दरअसल, ईरानी लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि अमेरिका से बदला लेने की जल्दबाज़ी में ईरान की सरकार ने अपने ही निर्दोष नागरिकों को मार दिया है।
यूक्रेन के यात्री विमान के क्रैश होने के बाद अमेरिका और कनाडा जैसे देशों ने साफ़तौर पर कहा था कि विमान को ईरान ने ही मार गिराया है। लेकिन काफ़ी समय तक ईरानी सेना और सरकार इस बात की ज़िम्मेदारी नहीं ले रही थी। लेकिन प्लैन क्रैश का वीडियो वायरल होने के बाद जब ईरानी सेना ने विमान को ग़लती से मार गिराये जाने की बात स्वीकारी, तो इसके बाद से ईरान में लोगों का गुस्सा सरकार और सेना के ख़िलाफ़ फूट पड़ा।
ईरान जैसे कट्टर धार्मिक मान्यताओं वाले देश में एतेमाद नामक एक उदारवारी अख़बार ने तो बाक़ायदा ईरान की सरकार से माफ़ी और इस्तीफ़े की मांग तक कर डाली है। अख़बार का कहना है कि लोग मांग कर रहे हैं कि जो भी यात्री विमान को मार गिराये जाने के पीछे ज़िम्मेदार हैं, उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिये। दरअसल, ईरान में इस नये प्रदर्शन और आन्दोलन से ईरानी सरकार काफ़ी उलझन में है। एक तरफ़ ईरानी सरकार को जहां क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद बड़ा झटका लगा था, वहीं अब सरकार विरोधी प्रदर्शन होने से ईरानी सरकार असमंजस में है।
ईरान में सरकार के ख़िलाफ़ तो कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन इस बार सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों ने सभी को चौका दिया है। बात यहां तक बढ़ गई है कि प्रदर्शनकारी खामनेई और ईरान की सरकार को ही देश का दुश्मन बता रहे हैं। बता दें कि ईरान इन दिनों मुश्किलों से गुजर रहा है। पिछले साल ईरान में ईंधन का मूल्य बढ़ाए जाने के मुद्दे पर बड़ा आन्दोलन हुआ था जिसमें क़रीब 1,500 लोगों के मारे जाने की ख़बर थी। ईरान में पिछले साल हुआ यह आन्दोलन इस्लामिक ईरान के चालीस साल के इतिहास में सबसे बड़ा आन्दोलन माना जाता है।
अब जबकि ईरान में सर्वोच्च नेता, सरकार और सेना के ख़िलाफ़ ही ईरानी जनता आवाज़ उठा रही है, तो इसका साफ़ मतलब है कि ईरान में सभी कुछ सही नहीं चल रहा है। ईरान में अन्दर ही अन्दर जनता के बीच विद्रोह पनप रहा है जो कि कभी भी क्रान्ति का रूप से सकता है। विदेशी मीडिया के मुताबिक़, 1979 से पहले ईरान काफ़ी आज़ाद विचारों वाले देश था जहां पर महिलाओं को काफ़ी आज़ादी थी। लेकिन इस्लामिक क्रान्ति के बाद से ईरान में धार्मिक कट्टरता ने लोगों की आज़ादी छीन ली है। लेकिन बदलते परिवेश में ईरानी जनता एक बार फ़िर से आज़ादी चाहती है, और सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामनेई के ख़िलाफ़ उठती आवाज़ें इसी का एक उदाहरण है।
JAN 13 (WTN) – खाड़ी का एक महत्वपूर्ण देश ईरान इन दिनों परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। शिया बाहुल्य आबादी वाले इस देश की अमेरिका से दुश्मनी के बारे में तो सभी जानते हैं, वहीं यह भी सभी अच्छी तरह से जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी की सबसे बड़ी वजहों में से एक वजह रहे हैं ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता। जो ईरान की राजनीति के बारे में जानते हैं, वो भलीभांति जानते हैं कि ईरान में वहां के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामनेई का क़द कितना बढ़ा है। ईरान की अंदरूनी राजनीति और विदेशी नीति का कोई भी फ़ैसला खामनेई की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाता है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि पिछले दिनों अमेरिका ने ईरान के मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मार गिराया था। सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने अमेरिका से बदला लेने की बात खुलेआम की थी, और ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने भी अमेरिका को सुलेमानी की हत्या का परिणाम भुगतने की बात कही थी। जिसके बाद ईरान ने इराक़ स्थित अमेरिका के दो एयरबेसों को निशाना बनाते हुए क़रीब दो दर्जन मिसाइलों से हमला किया था, और दावा किया था कि इन हमलों में क़रीब 80 अमेरिकी सैनिक मारे गये हैं। हालांकि, बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के इस दावे को झूठा साबित करते हुए कहा था कि मिसाइल हमलों में एक भी अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया है।
लेकिन क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान के लोगों में अमेरिका के ख़िलाफ़ जो माहौल बना था, अब वो माहौल धीरे-धीरे ईरान की सरकार के ख़िलाफ़ ही बनता जा रहा है। दरअसल, ईरान की राजधानी तेहरान से यूक्रेन की राजधानी कीव जा रहे यात्री विमान को मार गिराये की ज़िम्मेदारी जब से ईरान की सरकार ने ली है, तब से ही तेहरान में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। तेहरान में कल यानी रविवार को पूरे दिन तेहरान विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाये। लेकिन आपको पढ़कर आश्चर्य होगा कि तेहरान में प्रदर्शनकारियों का एक ग्रुप नारे लगा रहा था, “हमारा दुश्मन अमेरिका में नहीं बल्कि यहां है।” वहीं आपको और भी ज़्यादा आश्चर्य होगा कि प्रदर्शनकारियों का दुश्मन की तरफ़ इशारा देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की तरफ़ था!
यात्री विमान गिराये जाने के बाद से ईरान में लोगों का गुस्सा ईरान की सरकार के ख़िलाफ़ भड़क गया है, और तेहरान में प्रदर्शनकारी अयातुल्ला अली खामनेई का इस्तीफ़ा मांगने लगे हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो के अनुसार, प्रदर्शकारियों ने तेहरान के आज़ादी स्क्वायर से एक प्रदर्शन यात्रा निकाली। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पहले तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से गुज़ारिश की कि वे भी प्रदर्शन में शामिल हो जाएं, लेकिन बाद में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस, प्रशासन और सरकार पर गुस्सा निकालना शुरू कर दिया।
ईरान जैसे धार्मिक कट्टरता वाले देश में ही यदि सर्वोच्च धार्मिक नेता के ख़िलाफ़ आवाज़ उठने लगें तो यह अपने आप में काफ़ी क्रान्तिकारी घटना है। बता दें कि तेहरान में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी अयातुल्ला अली खामनेई की तरफ इशारा करके 'तानाशाही मुर्दाबाद' के नारे लगाने लगे हैं। दरअसल, ईरानी लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि अमेरिका से बदला लेने की जल्दबाज़ी में ईरान की सरकार ने अपने ही निर्दोष नागरिकों को मार दिया है।
यूक्रेन के यात्री विमान के क्रैश होने के बाद अमेरिका और कनाडा जैसे देशों ने साफ़तौर पर कहा था कि विमान को ईरान ने ही मार गिराया है। लेकिन काफ़ी समय तक ईरानी सेना और सरकार इस बात की ज़िम्मेदारी नहीं ले रही थी। लेकिन प्लैन क्रैश का वीडियो वायरल होने के बाद जब ईरानी सेना ने विमान को ग़लती से मार गिराये जाने की बात स्वीकारी, तो इसके बाद से ईरान में लोगों का गुस्सा सरकार और सेना के ख़िलाफ़ फूट पड़ा।
ईरान जैसे कट्टर धार्मिक मान्यताओं वाले देश में एतेमाद नामक एक उदारवारी अख़बार ने तो बाक़ायदा ईरान की सरकार से माफ़ी और इस्तीफ़े की मांग तक कर डाली है। अख़बार का कहना है कि लोग मांग कर रहे हैं कि जो भी यात्री विमान को मार गिराये जाने के पीछे ज़िम्मेदार हैं, उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिये। दरअसल, ईरान में इस नये प्रदर्शन और आन्दोलन से ईरानी सरकार काफ़ी उलझन में है। एक तरफ़ ईरानी सरकार को जहां क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद बड़ा झटका लगा था, वहीं अब सरकार विरोधी प्रदर्शन होने से ईरानी सरकार असमंजस में है।
ईरान में सरकार के ख़िलाफ़ तो कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन इस बार सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों ने सभी को चौका दिया है। बात यहां तक बढ़ गई है कि प्रदर्शनकारी खामनेई और ईरान की सरकार को ही देश का दुश्मन बता रहे हैं। बता दें कि ईरान इन दिनों मुश्किलों से गुजर रहा है। पिछले साल ईरान में ईंधन का मूल्य बढ़ाए जाने के मुद्दे पर बड़ा आन्दोलन हुआ था जिसमें क़रीब 1,500 लोगों के मारे जाने की ख़बर थी। ईरान में पिछले साल हुआ यह आन्दोलन इस्लामिक ईरान के चालीस साल के इतिहास में सबसे बड़ा आन्दोलन माना जाता है।
अब जबकि ईरान में सर्वोच्च नेता, सरकार और सेना के ख़िलाफ़ ही ईरानी जनता आवाज़ उठा रही है, तो इसका साफ़ मतलब है कि ईरान में सभी कुछ सही नहीं चल रहा है। ईरान में अन्दर ही अन्दर जनता के बीच विद्रोह पनप रहा है जो कि कभी भी क्रान्ति का रूप से सकता है। विदेशी मीडिया के मुताबिक़, 1979 से पहले ईरान काफ़ी आज़ाद विचारों वाले देश था जहां पर महिलाओं को काफ़ी आज़ादी थी। लेकिन इस्लामिक क्रान्ति के बाद से ईरान में धार्मिक कट्टरता ने लोगों की आज़ादी छीन ली है। लेकिन बदलते परिवेश में ईरानी जनता एक बार फ़िर से आज़ादी चाहती है, और सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामनेई के ख़िलाफ़ उठती आवाज़ें इसी का एक उदाहरण है।