ग़लती से जब अपने ही विमानों को अमेरिका ने बनाया निशाना
Wednesday - January 15, 2020 2:16 pm ,
Category : WTN HINDI
ईरान की तरह अमेरिका भी कर चुका है विमान मार गिराने की ग़लती
जब इंसानी ग़लती से मारे गये विमान में बैठे निर्दोष लोग
JAN 15 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि अमेरिका द्वारा ईरान के मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में हत्या के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। क़ासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए अमेरिका ने इराक़ स्थित अमेरिकी एयरबेसों को मिसाइलों से हमला किया था, और दावा किया था कि इन हमलों में क़रीब 80 अमेरिकी सैनिक मारे गये हैं। लेकिन बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के इन दावों को झूठा क़रार दिया जिसमें 80 सैनिकों की मौत की बात कही जा रही थी। लेकिन इस दौरान ईरान से एक ऐसी ग़लती हो गई जिसके कारण ईरान की सरकार को अपने देश से माफ़ी मांगनी पड़ी।
दरअसल, अमेरिका ठिकानों पर हमले के चक्कर में ईरान ने ग़लती से यूक्रेन के एक यात्री विमान को निशाना बना दिया था जिसमें उसमें सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, ईरान ने कहा कि जो भी हुआ वो सब कुछ धोखे में हुआ। वहीं ईरान ने इस घटना को अपनी तकनीकी और मानवीय भूल बताया है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि जब ग़लती से किसी विमान को निशाना बनाया गया है। इससे पहले कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं जब भूलवश विमामों को मार गिराया गया है, और ख़ुद अमेरिकी सेना भी इस तरह की ग़लतियां कई बार कर चुकी है जिसमें कई निर्दोष लोगों को मौत हो गई।
इतना ही नहीं, युद्ध के हालात में कई बार कुछ देशों ने दुश्मन का विमान समझकर अपने ही देश के प्लेन को आसमान में मार गिराया है। जानकारी के लिए बता दें कि इसी तरह की एक ग़लती अमेरिका से दूसरे विश्वयुद्ध के समय हुई थी जब 1943 में अमेरिका ने अपने ही एक प्लेन को मार गिराया था। बता दें कि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सिसली में जुलाई 1943 में अमेरिका की बड़ी सैन्य टुकड़ी मौजूद थी। इस दौरान 11 जुलाई को अमेरिकी एयरफोर्स ने अपने ही सेना के एक प्लेन को मार गिराया था और इसमें 300 अमेरिकी सैनकों की मौत हो गई थी जबकि यह प्लेन अमेरिकी सैनिकों को रेस्क्यू करने आ रहा था।
इसके बाद साल 1994 में भी अमेरिका ने अपनी ही सेना के एक चॉपर को हवा में उड़ा दिया था। दरअसल, उस समय खाड़ी युद्ध के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम किया जा रहा था और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए कई देशों ने ऑपरेशन चला रखा था। 14 अप्रैल 1994 के दिन अमेरिकी एयरफोर्स के दो एफ-15 फाइटर जेट नो फ्लाई ज़ोन एरिया की पेट्रोलिंग कर रहे थे, लेकिन इस दौरान इन्होंने ग़लती से अपने ही देश के दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को मार गिराया था। बता दें कि इस हादसे में 26 लोग मारे गए थे जिसमें 15 अमेरिकी और 11 अन्य दूसरे देशों के थे।
वहीं इराक़ युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने ग़लती से ब्रिटेन के एक विमान को मार गिराया था। जैसा कि आप जानते हैं कि 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ रखा था। इसी दौरान अमेरिकी सेना ने रॉयल ब्रिटिश एयरफोर्स के एक प्लेन को मिसाइल हमले में मार गिराया था। हालांकि, इस हादसे के बारे में बहुत बाद में मार्च 2003 में ब्रिटेन की तरफ़ से जानकारी दी गई कि लगता है कि हमारा प्लेन अमेरिकी मिसाइल हमले में क्रैश हुआ है। लेकिन पुराने कूटनीतिक सम्बन्ध होने कारण ब्रिटेन ने इसे फ्रेण्डली फायर इंसिडेण्ट मानकर भुला दिया था।
वहीं आपको जानकारी आश्चर्य होगा कि एक बार एक अमेरिकी पायलट ने ग़लती से अपने ही फाइटर प्लेन को उड़ा दिया था। जानकारी के लिए बता दें कि यह घटना 21 सितम्बर 1956 की है, जब एक अमेरिकी पायलट ग्रुमैन एयरक्राफ्ट की टेस्ट फ्लाइंग पर था। अपने उड़ान के दौरान उसे 20 एमएम के कैनन की टेस्ट फायरिंग करना थी। अमेरिकी पायलट ने पहली बार फायर किया और इसके बाद उसने अपने एयरक्राफ्ट की गति और तेज़ कर दी और उसे नीचे ले लाया। पायलट का प्लेन तेज़ी से नीचे की तरफ जाने लगा और इसी दौरान उसने दूसरा फायर किया। लेकिन इस दौरान एयरक्राफ्ट तेज़ी से नीचे जा रहा था और पायलट के फायर की पहली बुलेट ख़ुद उसी के एयरक्राफ्ट को लग गई और प्लेन क्रैश कर गया।
JAN 15 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि अमेरिका द्वारा ईरान के मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में हत्या के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। क़ासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए अमेरिका ने इराक़ स्थित अमेरिकी एयरबेसों को मिसाइलों से हमला किया था, और दावा किया था कि इन हमलों में क़रीब 80 अमेरिकी सैनिक मारे गये हैं। लेकिन बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के इन दावों को झूठा क़रार दिया जिसमें 80 सैनिकों की मौत की बात कही जा रही थी। लेकिन इस दौरान ईरान से एक ऐसी ग़लती हो गई जिसके कारण ईरान की सरकार को अपने देश से माफ़ी मांगनी पड़ी।
दरअसल, अमेरिका ठिकानों पर हमले के चक्कर में ईरान ने ग़लती से यूक्रेन के एक यात्री विमान को निशाना बना दिया था जिसमें उसमें सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, ईरान ने कहा कि जो भी हुआ वो सब कुछ धोखे में हुआ। वहीं ईरान ने इस घटना को अपनी तकनीकी और मानवीय भूल बताया है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि जब ग़लती से किसी विमान को निशाना बनाया गया है। इससे पहले कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं जब भूलवश विमामों को मार गिराया गया है, और ख़ुद अमेरिकी सेना भी इस तरह की ग़लतियां कई बार कर चुकी है जिसमें कई निर्दोष लोगों को मौत हो गई।
इतना ही नहीं, युद्ध के हालात में कई बार कुछ देशों ने दुश्मन का विमान समझकर अपने ही देश के प्लेन को आसमान में मार गिराया है। जानकारी के लिए बता दें कि इसी तरह की एक ग़लती अमेरिका से दूसरे विश्वयुद्ध के समय हुई थी जब 1943 में अमेरिका ने अपने ही एक प्लेन को मार गिराया था। बता दें कि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सिसली में जुलाई 1943 में अमेरिका की बड़ी सैन्य टुकड़ी मौजूद थी। इस दौरान 11 जुलाई को अमेरिकी एयरफोर्स ने अपने ही सेना के एक प्लेन को मार गिराया था और इसमें 300 अमेरिकी सैनकों की मौत हो गई थी जबकि यह प्लेन अमेरिकी सैनिकों को रेस्क्यू करने आ रहा था।
इसके बाद साल 1994 में भी अमेरिका ने अपनी ही सेना के एक चॉपर को हवा में उड़ा दिया था। दरअसल, उस समय खाड़ी युद्ध के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम किया जा रहा था और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए कई देशों ने ऑपरेशन चला रखा था। 14 अप्रैल 1994 के दिन अमेरिकी एयरफोर्स के दो एफ-15 फाइटर जेट नो फ्लाई ज़ोन एरिया की पेट्रोलिंग कर रहे थे, लेकिन इस दौरान इन्होंने ग़लती से अपने ही देश के दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को मार गिराया था। बता दें कि इस हादसे में 26 लोग मारे गए थे जिसमें 15 अमेरिकी और 11 अन्य दूसरे देशों के थे।
वहीं इराक़ युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने ग़लती से ब्रिटेन के एक विमान को मार गिराया था। जैसा कि आप जानते हैं कि 9/11 हमले के बाद अमेरिका ने इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ रखा था। इसी दौरान अमेरिकी सेना ने रॉयल ब्रिटिश एयरफोर्स के एक प्लेन को मिसाइल हमले में मार गिराया था। हालांकि, इस हादसे के बारे में बहुत बाद में मार्च 2003 में ब्रिटेन की तरफ़ से जानकारी दी गई कि लगता है कि हमारा प्लेन अमेरिकी मिसाइल हमले में क्रैश हुआ है। लेकिन पुराने कूटनीतिक सम्बन्ध होने कारण ब्रिटेन ने इसे फ्रेण्डली फायर इंसिडेण्ट मानकर भुला दिया था।
वहीं आपको जानकारी आश्चर्य होगा कि एक बार एक अमेरिकी पायलट ने ग़लती से अपने ही फाइटर प्लेन को उड़ा दिया था। जानकारी के लिए बता दें कि यह घटना 21 सितम्बर 1956 की है, जब एक अमेरिकी पायलट ग्रुमैन एयरक्राफ्ट की टेस्ट फ्लाइंग पर था। अपने उड़ान के दौरान उसे 20 एमएम के कैनन की टेस्ट फायरिंग करना थी। अमेरिकी पायलट ने पहली बार फायर किया और इसके बाद उसने अपने एयरक्राफ्ट की गति और तेज़ कर दी और उसे नीचे ले लाया। पायलट का प्लेन तेज़ी से नीचे की तरफ जाने लगा और इसी दौरान उसने दूसरा फायर किया। लेकिन इस दौरान एयरक्राफ्ट तेज़ी से नीचे जा रहा था और पायलट के फायर की पहली बुलेट ख़ुद उसी के एयरक्राफ्ट को लग गई और प्लेन क्रैश कर गया।