2000 रुपये के नोटों पर अभी भी जारी है ‘संशय’
Friday - January 17, 2020 10:41 am ,
Category : WTN HINDI
नोटबंदी के बाद सबसे ज़्यादा ज़ब्त हुए 2000 रुपये के नक़ली नोट
ज़ब्त नक़ली नोटों में सबसे ज़्यादा बरामद हुए 2000 रुपये के नोट, सरकार और रिज़र्व बैंक के दावों पर खड़े हुए सवाल
JAN 17(WTN) – नवम्बर 2016 में हुई नोटबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। नोटबंदी के बाद भारत सरकार ने उस समय प्रचलित 1000 रूपये और 500 रुपये के नोटों को प्रचलन से बाहर कर दिया था। राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में ख़ुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि ब्लैक मनी और भ्रष्ट्राचार पर शिकंजा कसने के लिए नोटबंदी एक बहुत ही लाभकारी फ़ैसला साबित होगा। नोटबंदी के बाद रिज़र्व बैंक ने 500 रुपये के नये नोटों के साथ ही 2000 रुपये के नये नोटों को जारी किया था। वैसे जब 2000 रुपया का नोट बाज़ार में आया था तो सरकार और रिज़र्व बैंक की ओर से यह दावा किया गया था कि 2000 रुपये के नोट में इतने सारे सिक्योरिटी फ़ीचर्स हैं कि इनके नक़ली नोट बनाना आसान नहीं है।
लेकिन वक़्त के साथ हकीक़त सामने आती जा रही है। आपकी जानकारी के लिये बता दें कि ख़ुद सरकार के अपने ही आंकड़े बता रहे हैं कि 500 और 2000 रुपये के नक़ली नोट बनाना कोई कठिन काम नहीं है। वहीं जिस 2000 रुपये के नोट के बारे में दावे किये जा रहे थे कि इसकी कॉपी करना काफ़ी मुश्किल है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोटबंदी के बाद से 2000 रुपये के नक़ली नोट ही सबसे ज़्यादा पकड़े गए हैं।
NCRB (National Crime Records Bureau) यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के नये आंकड़ों के मुताबिक़, नोटबंदी के बाद सबसे ज़्यादा 2000 रुपये के नोट ही ज़ब्त हुए हैं। साल 2017 और 2018 में पकड़े गए नक़ली नोटों में से ज़्यादातर नोट 2000 रुपये के ही हैं। NCRB के डाटा के अनुसार, साल 2017 में जब्त किए गए कुल नक़ली नोटों में 53.3 प्रतिशत 2000 रुपये के नक़ली नोट थे। वहीं साल 2018 में जब्त नक़ली नोटों में 2000 रुपये के नक़ली नोटों का प्रतिशत बढ़कर 61.01 प्रतिशत हो गया।
यानी NCRB द्वारा 2000 रुपये के नक़ली नोटों के बारे में जारी किए गए आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि सरकार और रिज़र्व बैंक के वे दावे खोखले साबित हो रहे हैं जिसमें कहा गया था कि 2000 रुपये के नोटों की कॉपी करना काफ़ी मुश्किल है। ख़ुद NCRB की रिपोर्ट बताती है कि नोटबंदी के बाद साल 2017 और 2018 में कुल 46.6 करोड़ रुपये मूल्य की नक़ली करेंसी बरामद हुई जिसमें सबसे ज़्यादा 56 प्रतिशत 2000 रुपये के नक़ली नोट थे। आंकड़ों के मुताबिक़, नोटबंदी के बाद से गुजरात राज्य में सबसे ज़्यादा 2000 रुपये के नक़ली नोट बरामद हुए हैं। बता दें कि नोटबंदी के बाद से गुजरात में 2000 रुपये के कुल 34,680 नकली नोट पकड़े गए जो कि पूरे देश में जब्त किये गये 2000 रुपये के नक़ली नोटों का 26.28 प्रतिशत है।
गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा 2000 रुपये के नक़ली नोट जब्त हुए हैं। बात करें पश्चिम बंगाल की तो यहां पर नोटबंदी के बाद 3.5 करोड़ रुपये के, तमिलनाडु में 2.8 करोड़ रुपये के और उत्तर प्रदेश में 2.6 करोड़ रुपए मूल्य के 2000 रुपये के नक़ली नोट पकड़े गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक़, देश के 27 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों से 2000 रुपये के नक़ली नोट बरामद हुए हैं। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि नोटबंदी के 10 दिन बाद ही मार्केट में 2000 रुपये के नक़ली नोट बरामद होने लगे थे। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के 10 दिन बाद यानी 18 नवम्बर 2016 को कर्नाटक के मैसूर से 2000 रुपये के 44 नक़ली नोट बरामद हुए थे।
दरअसल, नोटबंदी के बाद जारी हुए 2000 के नोट हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं। शुरूआत में 2000 रुपये के नोटों के बारे में कहा जा रहा था कि इन नोटों में एक चिप लगी है जिससे इन नोटों की लोकेशन के बारे में पता लगाया जा सकेगा। हालांकि, 2000 रुपये के नोट में चिप की बात को रिज़र्व बैंक ने बाद में ख़ारिज कर दिया था। वहीं समय-समय पर 2000 रुपये के नोटों के बारे में यह अफ़वाह फ़ैलती रहती है कि 2000 रुपये के नोटों को सरकार वापस लेने का विचार कर रही है। हालांकि, इसे भी बाद में रिज़र्व बैंक ने अफवाह ही क़रार दिया था। पिछले साल के शुरूआत में ही जनवरी महीने में सरकार ने स्पष्ट किया था कि 2000 रुपये के नोट वर्तमान में प्रचलित नोटों की कुल संख्या का 35 प्रतिशत है और इन्हें चरणबद्ध तरीक़े से चलन से बाहर नहीं किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, आरबीआई के कुछ सूत्रों के हवाले से मीडिया में ये रिपोर्ट भी आई थी कि इस साल रिज़र्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट नहीं छापे हैं। वहीं पिछले दिनों एक बात यह भी लोगों ने नोटिस की है कि एटीएम से 2000 रुपये के नोट नहीं निकल रहे हैं। वैसे क्या सही में सरकार ने 2000 रुपये के नोटों की छपाई पर रोक लगा दी है? यह वह सवाल है जो कि सभी के मन में उठ रहा है। लेकिन फ़िर भी सरकार और रिज़र्व बैंक कितने भी दावे करे, लोगों के बीच 2000 रुपये के नोटों के बारे में अभी भी संशय बना हुआ है। आशा की जाना चाहिए कि सरकार और रिज़र्व बैंक जल्द ही इस बात को स्पष्ट करें कि क्या चरणबद्ध तरीक़े से धीरे-धीरे 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद की जा रही है?
JAN 17(WTN) – नवम्बर 2016 में हुई नोटबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है। नोटबंदी के बाद भारत सरकार ने उस समय प्रचलित 1000 रूपये और 500 रुपये के नोटों को प्रचलन से बाहर कर दिया था। राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में ख़ुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि ब्लैक मनी और भ्रष्ट्राचार पर शिकंजा कसने के लिए नोटबंदी एक बहुत ही लाभकारी फ़ैसला साबित होगा। नोटबंदी के बाद रिज़र्व बैंक ने 500 रुपये के नये नोटों के साथ ही 2000 रुपये के नये नोटों को जारी किया था। वैसे जब 2000 रुपया का नोट बाज़ार में आया था तो सरकार और रिज़र्व बैंक की ओर से यह दावा किया गया था कि 2000 रुपये के नोट में इतने सारे सिक्योरिटी फ़ीचर्स हैं कि इनके नक़ली नोट बनाना आसान नहीं है।
लेकिन वक़्त के साथ हकीक़त सामने आती जा रही है। आपकी जानकारी के लिये बता दें कि ख़ुद सरकार के अपने ही आंकड़े बता रहे हैं कि 500 और 2000 रुपये के नक़ली नोट बनाना कोई कठिन काम नहीं है। वहीं जिस 2000 रुपये के नोट के बारे में दावे किये जा रहे थे कि इसकी कॉपी करना काफ़ी मुश्किल है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोटबंदी के बाद से 2000 रुपये के नक़ली नोट ही सबसे ज़्यादा पकड़े गए हैं।
NCRB (National Crime Records Bureau) यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के नये आंकड़ों के मुताबिक़, नोटबंदी के बाद सबसे ज़्यादा 2000 रुपये के नोट ही ज़ब्त हुए हैं। साल 2017 और 2018 में पकड़े गए नक़ली नोटों में से ज़्यादातर नोट 2000 रुपये के ही हैं। NCRB के डाटा के अनुसार, साल 2017 में जब्त किए गए कुल नक़ली नोटों में 53.3 प्रतिशत 2000 रुपये के नक़ली नोट थे। वहीं साल 2018 में जब्त नक़ली नोटों में 2000 रुपये के नक़ली नोटों का प्रतिशत बढ़कर 61.01 प्रतिशत हो गया।
यानी NCRB द्वारा 2000 रुपये के नक़ली नोटों के बारे में जारी किए गए आंकड़ों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि सरकार और रिज़र्व बैंक के वे दावे खोखले साबित हो रहे हैं जिसमें कहा गया था कि 2000 रुपये के नोटों की कॉपी करना काफ़ी मुश्किल है। ख़ुद NCRB की रिपोर्ट बताती है कि नोटबंदी के बाद साल 2017 और 2018 में कुल 46.6 करोड़ रुपये मूल्य की नक़ली करेंसी बरामद हुई जिसमें सबसे ज़्यादा 56 प्रतिशत 2000 रुपये के नक़ली नोट थे। आंकड़ों के मुताबिक़, नोटबंदी के बाद से गुजरात राज्य में सबसे ज़्यादा 2000 रुपये के नक़ली नोट बरामद हुए हैं। बता दें कि नोटबंदी के बाद से गुजरात में 2000 रुपये के कुल 34,680 नकली नोट पकड़े गए जो कि पूरे देश में जब्त किये गये 2000 रुपये के नक़ली नोटों का 26.28 प्रतिशत है।
गुजरात के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा 2000 रुपये के नक़ली नोट जब्त हुए हैं। बात करें पश्चिम बंगाल की तो यहां पर नोटबंदी के बाद 3.5 करोड़ रुपये के, तमिलनाडु में 2.8 करोड़ रुपये के और उत्तर प्रदेश में 2.6 करोड़ रुपए मूल्य के 2000 रुपये के नक़ली नोट पकड़े गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक़, देश के 27 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों से 2000 रुपये के नक़ली नोट बरामद हुए हैं। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि नोटबंदी के 10 दिन बाद ही मार्केट में 2000 रुपये के नक़ली नोट बरामद होने लगे थे। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के 10 दिन बाद यानी 18 नवम्बर 2016 को कर्नाटक के मैसूर से 2000 रुपये के 44 नक़ली नोट बरामद हुए थे।
दरअसल, नोटबंदी के बाद जारी हुए 2000 के नोट हमेशा से ही सुर्खियों में रहे हैं। शुरूआत में 2000 रुपये के नोटों के बारे में कहा जा रहा था कि इन नोटों में एक चिप लगी है जिससे इन नोटों की लोकेशन के बारे में पता लगाया जा सकेगा। हालांकि, 2000 रुपये के नोट में चिप की बात को रिज़र्व बैंक ने बाद में ख़ारिज कर दिया था। वहीं समय-समय पर 2000 रुपये के नोटों के बारे में यह अफ़वाह फ़ैलती रहती है कि 2000 रुपये के नोटों को सरकार वापस लेने का विचार कर रही है। हालांकि, इसे भी बाद में रिज़र्व बैंक ने अफवाह ही क़रार दिया था। पिछले साल के शुरूआत में ही जनवरी महीने में सरकार ने स्पष्ट किया था कि 2000 रुपये के नोट वर्तमान में प्रचलित नोटों की कुल संख्या का 35 प्रतिशत है और इन्हें चरणबद्ध तरीक़े से चलन से बाहर नहीं किया जा रहा है।
इतना ही नहीं, आरबीआई के कुछ सूत्रों के हवाले से मीडिया में ये रिपोर्ट भी आई थी कि इस साल रिज़र्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट नहीं छापे हैं। वहीं पिछले दिनों एक बात यह भी लोगों ने नोटिस की है कि एटीएम से 2000 रुपये के नोट नहीं निकल रहे हैं। वैसे क्या सही में सरकार ने 2000 रुपये के नोटों की छपाई पर रोक लगा दी है? यह वह सवाल है जो कि सभी के मन में उठ रहा है। लेकिन फ़िर भी सरकार और रिज़र्व बैंक कितने भी दावे करे, लोगों के बीच 2000 रुपये के नोटों के बारे में अभी भी संशय बना हुआ है। आशा की जाना चाहिए कि सरकार और रिज़र्व बैंक जल्द ही इस बात को स्पष्ट करें कि क्या चरणबद्ध तरीक़े से धीरे-धीरे 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद की जा रही है?