...तो फ़िर सरकारी राशन की दुकानों पर भी बिकेंगे आलू, प्याज़ और टमाटर
Saturday - January 18, 2020 11:03 am ,
Category : WTN HINDI
आलू, प्याज़ और टमाटर को पीडीएस के तहत लाने की तैयारी
आम आदमी को महंगाई से राहत देने मोदी सरकार ले सकता है एक बड़ा फ़ैसला
JAN 18 (WTN) – एक आम मध्यमवर्गीय भारतीय व्यक्ति को अपनी पूरी ज़िन्दगी में महंगाई से मुक़ाबला करना ही पड़ता है। पेट्रोल-डीज़ल से लेकर किराने का सामान और सब्ज़ियों से लेकर आम ज़रूरी वस्तुओं के महंगा होने से एक आम आदमी का बजट गड़बड़ा जाता है। लेकिन जहां तक सब्ज़ियों की बात है तो सब्ज़ियां हर दिन की ज़रूरत है। हर दिन किचन में सब्ज़ियों की ज़रूरत तो पड़ती ही है। लेकिन आप जानते ही हैं कि महंगी सब्ज़ियों और ख़ासकर महंगी प्याज़ के कारण देश में राजनीतिक उठापटक तक हो चुकी है। महंगी प्याज विपक्ष के लिए सत्ता पक्ष के ख़िलाफ़ जनता से जुड़ा एक बहुत बड़ा मुद्दा होता है जिसके दम पर विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करती रहती है।
दरअसल, देखा गया है कि प्याज़, टमाटर और आलू जैसी सब्ज़ियों लगभग हर रोज़ खाने में इस्तेमाल की जाती हैं, और इसलिए इनके महंगा होने से एक मध्यमवर्गीय परिवार का मासिक बजट गड़बड़ा जाता है। बता दें कि बाढ़ और सूखा आदि प्राकृतिक आपदाओं और परिवहन महंगा होने समेत कुछ अन्य कारणों से प्याज़, टमाटर और आलू जैसी बारहमासी सब्ज़ियों के दामों पर असर पड़ता रहता है और यह सब्ज़ियां महंगी हो जाती हैं। लेकिन आम आदमी को महंगाई से राहत देने के लिए मोदी सरकार जल्द ही इन सब्ज़ियों के सम्बन्ध में एक बड़ा फ़ैसला ले सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, नीति आयोग ने केन्द्र सरकार को सुझाव दिया है कि प्याज़, टमाटर और आलू जैसी सब्ज़ियों की क़ीमतों पर नियंत्रण के लिए इन्हें पीडीएस के तहत लाना चाहिए। और हो सकता है कि इस बार बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खाने-पीने की वस्तुओं से जुड़ी महंगाई से निपटने के लिए इस तरह की कोई नीति प्रस्तावित करें जिसमें आलू, प्याज़ और टमाटर के दाम नियंत्रित रह सकें।
दरअसल, खाने-पीने के सामान का सस्ता होना काफ़ी ज़रूरी होता है। क्योंकि एक आंकड़े के मुताबिक़, एक आम व्यक्ति अपने ख़र्च का क़रीब 40 से 50 प्रतिशत खाने-पीने पर ही ख़र्च करता है। अब यदि खाने-पीने का सामान महंगा होगा तो इससे आम व्यक्ति का मासिक बजट गड़बड़ा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्याज़ और आलू समेत अन्य सब्ज़ियों के महंगा होने से दिसम्बर के महीने में रिटेल महंगाई दर चालू वित्त वर्ष के उच्चतम स्तर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि आलू, प्याज़ और टमाटर एक आम भारतीय किचन की सबसे ज़रूरी सब्ज़ियों में से हैं। समय-समय पर प्याज़ महंगी होने से सरकारों पर जनता और विपक्ष का काफ़ी दबाव रहता है। और इसलिए मोदी सरकार प्याज़, आलू और टमाटर जैसी ज़रूरी सब्ज़ियों को पीडीएस यानी जन वितरण प्रणाली के तहत लाने का विचार कर रही है। जीहां हो सकता है कि प्याज़, आलू और टमाटर जैसी सब्ज़ियों पर अब सरकारी नियंत्रण हो जिससे इनके दाम नियंत्रित रह सकें और इनके महंगा होने से लोगों का मासिक बजट ना बिगड़े।
दरअसल, नीति आयोग का मानना है कि आलू, प्याज़ और टमाटर को पीडीएस के तहत लाने से ना सिर्फ़ इनके दामों के उतार-चढ़ाव पर काबू पाया जा सकता है बल्कि सरकार की तरफ से इस मोर्चे पर दी जा रही सब्सिडी का भी बेहतर तरीक़े से इस्तेमाल किया जा सकता है। हो सकता है कि इस बार के अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री आलू, प्याज़ और टमाटर को पीडीएस के तहत लाने वाली नई व्यवस्था की रूपरेखा का ज़िक्र मात्र करें और बाद में अगले वित्त वर्ष में योजना को अमली जामा पहनाने पर काम शुरू किया जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीति आयोग ने क़ीमतों में उतार चढ़ाव से निपटने के लिए स्थायी समाधान का सुझाव दिया है। नीति आयोग का मानना है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल के अभाव के कारण आम लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ता है। बता दें कि देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़, सब्ज़ियों के दामों में हुई वृद्धि को देखते हुए जनवरी महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है, लेकिन यदि सब्ज़ियों के दाम नियंत्रित रहते हैं तो इसके नरम पड़ने की उम्मीद है।
दरअसल, वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक प्रभावित हुई है। आर्थिक सुस्ती के कारण भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को काफ़ी झटका लगा है। और इसी कारण से दिसम्बर 2019 में खुदरा महंगाई दर 94 महीनों के उच्च स्तर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई है जो कि नवम्बर के महीने में 5.54 प्रतिशत थी। ऐसे में यदि सब्ज़ियों के दाम नियंत्रित रहेंगे तो मध्यमवर्गीय लोगों का मासिक बजट नहीं बिगढ़ेगा और सब्ज़ियां सस्ते दामों पर लोगों को मुहैया हो सकेंगी।
JAN 18 (WTN) – एक आम मध्यमवर्गीय भारतीय व्यक्ति को अपनी पूरी ज़िन्दगी में महंगाई से मुक़ाबला करना ही पड़ता है। पेट्रोल-डीज़ल से लेकर किराने का सामान और सब्ज़ियों से लेकर आम ज़रूरी वस्तुओं के महंगा होने से एक आम आदमी का बजट गड़बड़ा जाता है। लेकिन जहां तक सब्ज़ियों की बात है तो सब्ज़ियां हर दिन की ज़रूरत है। हर दिन किचन में सब्ज़ियों की ज़रूरत तो पड़ती ही है। लेकिन आप जानते ही हैं कि महंगी सब्ज़ियों और ख़ासकर महंगी प्याज़ के कारण देश में राजनीतिक उठापटक तक हो चुकी है। महंगी प्याज विपक्ष के लिए सत्ता पक्ष के ख़िलाफ़ जनता से जुड़ा एक बहुत बड़ा मुद्दा होता है जिसके दम पर विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करती रहती है।
दरअसल, देखा गया है कि प्याज़, टमाटर और आलू जैसी सब्ज़ियों लगभग हर रोज़ खाने में इस्तेमाल की जाती हैं, और इसलिए इनके महंगा होने से एक मध्यमवर्गीय परिवार का मासिक बजट गड़बड़ा जाता है। बता दें कि बाढ़ और सूखा आदि प्राकृतिक आपदाओं और परिवहन महंगा होने समेत कुछ अन्य कारणों से प्याज़, टमाटर और आलू जैसी बारहमासी सब्ज़ियों के दामों पर असर पड़ता रहता है और यह सब्ज़ियां महंगी हो जाती हैं। लेकिन आम आदमी को महंगाई से राहत देने के लिए मोदी सरकार जल्द ही इन सब्ज़ियों के सम्बन्ध में एक बड़ा फ़ैसला ले सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, नीति आयोग ने केन्द्र सरकार को सुझाव दिया है कि प्याज़, टमाटर और आलू जैसी सब्ज़ियों की क़ीमतों पर नियंत्रण के लिए इन्हें पीडीएस के तहत लाना चाहिए। और हो सकता है कि इस बार बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खाने-पीने की वस्तुओं से जुड़ी महंगाई से निपटने के लिए इस तरह की कोई नीति प्रस्तावित करें जिसमें आलू, प्याज़ और टमाटर के दाम नियंत्रित रह सकें।
दरअसल, खाने-पीने के सामान का सस्ता होना काफ़ी ज़रूरी होता है। क्योंकि एक आंकड़े के मुताबिक़, एक आम व्यक्ति अपने ख़र्च का क़रीब 40 से 50 प्रतिशत खाने-पीने पर ही ख़र्च करता है। अब यदि खाने-पीने का सामान महंगा होगा तो इससे आम व्यक्ति का मासिक बजट गड़बड़ा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्याज़ और आलू समेत अन्य सब्ज़ियों के महंगा होने से दिसम्बर के महीने में रिटेल महंगाई दर चालू वित्त वर्ष के उच्चतम स्तर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
जैसा कि हमने आपको बताया कि आलू, प्याज़ और टमाटर एक आम भारतीय किचन की सबसे ज़रूरी सब्ज़ियों में से हैं। समय-समय पर प्याज़ महंगी होने से सरकारों पर जनता और विपक्ष का काफ़ी दबाव रहता है। और इसलिए मोदी सरकार प्याज़, आलू और टमाटर जैसी ज़रूरी सब्ज़ियों को पीडीएस यानी जन वितरण प्रणाली के तहत लाने का विचार कर रही है। जीहां हो सकता है कि प्याज़, आलू और टमाटर जैसी सब्ज़ियों पर अब सरकारी नियंत्रण हो जिससे इनके दाम नियंत्रित रह सकें और इनके महंगा होने से लोगों का मासिक बजट ना बिगड़े।
दरअसल, नीति आयोग का मानना है कि आलू, प्याज़ और टमाटर को पीडीएस के तहत लाने से ना सिर्फ़ इनके दामों के उतार-चढ़ाव पर काबू पाया जा सकता है बल्कि सरकार की तरफ से इस मोर्चे पर दी जा रही सब्सिडी का भी बेहतर तरीक़े से इस्तेमाल किया जा सकता है। हो सकता है कि इस बार के अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री आलू, प्याज़ और टमाटर को पीडीएस के तहत लाने वाली नई व्यवस्था की रूपरेखा का ज़िक्र मात्र करें और बाद में अगले वित्त वर्ष में योजना को अमली जामा पहनाने पर काम शुरू किया जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीति आयोग ने क़ीमतों में उतार चढ़ाव से निपटने के लिए स्थायी समाधान का सुझाव दिया है। नीति आयोग का मानना है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल के अभाव के कारण आम लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ता है। बता दें कि देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़, सब्ज़ियों के दामों में हुई वृद्धि को देखते हुए जनवरी महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 8 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है, लेकिन यदि सब्ज़ियों के दाम नियंत्रित रहते हैं तो इसके नरम पड़ने की उम्मीद है।
दरअसल, वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक प्रभावित हुई है। आर्थिक सुस्ती के कारण भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को काफ़ी झटका लगा है। और इसी कारण से दिसम्बर 2019 में खुदरा महंगाई दर 94 महीनों के उच्च स्तर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई है जो कि नवम्बर के महीने में 5.54 प्रतिशत थी। ऐसे में यदि सब्ज़ियों के दाम नियंत्रित रहेंगे तो मध्यमवर्गीय लोगों का मासिक बजट नहीं बिगढ़ेगा और सब्ज़ियां सस्ते दामों पर लोगों को मुहैया हो सकेंगी।