सावधान! सी-फूड से फैल सकती है ख़तरनाक बीमारी
Saturday - January 18, 2020 1:25 pm ,
Category : WTN HINDI
चीन में सी-फूड मार्केट से फैली जानलेवा बीमारी
यदि जा रहे हैं चीन तो रहें ज़रा सावधान!
JAN 18 (WTN) – दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन में एक गम्भीर बीमारी इन दिनों परेशानी का कारण बनी हुई है। इस बीमारी के कारण पूरे चीन में लोग बीमार हो रहे हैं। वहीं चीन के पड़ोसी देशों में भी इस बीमारी के फैलने की आशंका जताई जा रही है, और इसके कारण चीन के पड़ोसी देशों ने एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। आख़िर क्या है यह बीमारी और कैसे यह बीमारी फैल रही है, इसके बारे में आपको हम विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में फैली यह बीमारी नोवेल कोरोना वायरस से दिसम्बर महीने के अन्तिम सप्ताह से फैल रही है। पहले तो चीन के डॉक्टर्स को यह समझ में ही नहीं आया कि निमोनिया की तरह लगने वाली ये संक्रामक बीमारी आख़िरकार क्या है। लेकिन बाद में जर्मनी के वैज्ञानिकों ने इस बीमारी के वायरस का पता लगाया। जर्मनी के वैज्ञानिकों के मुताबिक़, इस बीमारी का कारण नोवेल कोरोना वायरस है और यह वायरस पहली बार चीन में ही देखा गया है।
बड़ी बात यह है कि टेक्नोलॉजी में विकसित चीन जैसे देश की कोई भी लैबोरेटरी इस वायरस को पहचान नहीं पाई, जिसके बाद रोगियों के नमूने जर्मनी भेजे गए। जर्मनी में एक ख़ास लैब में इस वायरस का पता लगाया गया। जानकारी के लिए बता दें कि चीन में इस बीमारी से क़रीब 200 लोग शिकार हो चुके हैं और इसमें से दो लोगों की मौत तक हो चुकी है।
जर्मनी की सेन्टर फॉर इंफेक्शन रिसर्च लेबोरेटरी के मुताबिक़, कोरोना वायरस की एक बड़ी फैमिली है और उसी फैमिली से विकसित हुआ यह वायरस पहली बार चीन के वूहान प्रांत में उभरा है। बता दें कि दिसम्बर महीने में मध्य चीन के वूहान प्रांत से ख़बरें आने लगीं कि लोग अजीबोगरीब बीमारी के शिकार हो रहे हैं, जिसमें उन्हें खांसी के साथ तेज़ बुखार आता है साथ ही उन्हें सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जब चीन में डॉक्टर्स ने इन मरीजों की रेडियोग्राफी कराई तो पता चला कि ज़्यादातार मरीजों के फेफड़े क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इस बीमारी के लक्षण देखने के बाद शुरू में चीन में डॉक्टर्स को लगा कि यह बीमारी सार्स फ्लू हो सकती है लेकिन चीनी डॉक्टर्स की आशंका ग़लत साबित हुई।
बता दें कि यह बीमारी अब मध्य चीन के वूहान प्रांत से निकलकर दूसरे प्रांतों में भी फैल रही है। इतना ही नहीं, हॉन्ग कॉन्ग में भी इसके कुछ मरीजों का पता लगा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह बीमारी एक सी-फूड मार्केट से शुरू हुई है। जांच के बाद पता चला कि इस बीमारी से बीमार होने वाले ज़्यादातार लोग या तो इस सी-फूड मार्केट गए थे या फ़िर उन्होंने इसी बाज़ार से सी-फूड ख़रीदकर उसका इस्तेमाल किया था। वैसे सरकार ने इस सी-फूड मार्केट को तुरन्त ही बंद करा दिया है। लेकिन तब तक यह बीमारी कई लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी थी।
इस बीमारी के बारे में चीन के वैज्ञानिकों को लगा था कि यह बीमारी पशु-पक्षियों से मनुष्यों में संक्रमित हो रही है, लेकिन मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलेगी। लेकिन बाद में चीनी वैज्ञानिकों को पता चला कि यह बीमारी मनुष्य से मनुष्य में फैल सकती है। यानी साफ़ है कि चीन में फैली यह बीमारी ख़तरनाक है, इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यह बीमारी चीन के पड़ोसी देशों में भी फैल सकती है और इसी कारण से चीन के पड़ोसी देशों को सतर्क रहने की ज़रूरत है। दरअसल, इस बीमारी के एक केस का थाईलैण्ड में होने का पता लगा है तो एक अन्य केस की पुष्टि जापान में भी हो चुकी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोवोल कोरोना वायरस की एक लम्बी चौड़ी फैमिली है। इनमें से कुछ वायरस लोगों को बीमार करते हैं, लेकिन कुछ वायरस जानवरों को अपना शिकार बनाते हैं। हालांकि हो सकता है कि जानवरों में फैलने वाला कोरोना वायरस किसी अन्य तरीक़े से मनुष्यों को अपना शिकार बनाता रहा हो, लेकिन इस बार माना जा रहा है कि जानवरों में रहने वाला यह वायरस एक नए तरीक़े से विकसित हुआ है और इसने मनुष्यों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।
तो जैसा कि हमने आपको बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन के पड़ोसी देशों को इस बीमारी के कारण अलर्ट कर दिया है। ऐसे में लगभग सभी एशियाई देशों में एयरपोर्ट पर सतर्कता बरती जा रही है और साथ ही थर्मल स्कैनर से जांच हो रही है। जहां तक भारत की बात है तो केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चीन से आ रहे यात्रियों की दिल्ली, मुम्बई और कोलकाता हवाई अड्डों पर थर्मल स्कैनर से जांच करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, भारत सरकार चीन जाने के लिए ट्रैवल एडवाइज़री भी जारी की है।
JAN 18 (WTN) – दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश चीन में एक गम्भीर बीमारी इन दिनों परेशानी का कारण बनी हुई है। इस बीमारी के कारण पूरे चीन में लोग बीमार हो रहे हैं। वहीं चीन के पड़ोसी देशों में भी इस बीमारी के फैलने की आशंका जताई जा रही है, और इसके कारण चीन के पड़ोसी देशों ने एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। आख़िर क्या है यह बीमारी और कैसे यह बीमारी फैल रही है, इसके बारे में आपको हम विस्तार से बताते हैं।
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में फैली यह बीमारी नोवेल कोरोना वायरस से दिसम्बर महीने के अन्तिम सप्ताह से फैल रही है। पहले तो चीन के डॉक्टर्स को यह समझ में ही नहीं आया कि निमोनिया की तरह लगने वाली ये संक्रामक बीमारी आख़िरकार क्या है। लेकिन बाद में जर्मनी के वैज्ञानिकों ने इस बीमारी के वायरस का पता लगाया। जर्मनी के वैज्ञानिकों के मुताबिक़, इस बीमारी का कारण नोवेल कोरोना वायरस है और यह वायरस पहली बार चीन में ही देखा गया है।
बड़ी बात यह है कि टेक्नोलॉजी में विकसित चीन जैसे देश की कोई भी लैबोरेटरी इस वायरस को पहचान नहीं पाई, जिसके बाद रोगियों के नमूने जर्मनी भेजे गए। जर्मनी में एक ख़ास लैब में इस वायरस का पता लगाया गया। जानकारी के लिए बता दें कि चीन में इस बीमारी से क़रीब 200 लोग शिकार हो चुके हैं और इसमें से दो लोगों की मौत तक हो चुकी है।
जर्मनी की सेन्टर फॉर इंफेक्शन रिसर्च लेबोरेटरी के मुताबिक़, कोरोना वायरस की एक बड़ी फैमिली है और उसी फैमिली से विकसित हुआ यह वायरस पहली बार चीन के वूहान प्रांत में उभरा है। बता दें कि दिसम्बर महीने में मध्य चीन के वूहान प्रांत से ख़बरें आने लगीं कि लोग अजीबोगरीब बीमारी के शिकार हो रहे हैं, जिसमें उन्हें खांसी के साथ तेज़ बुखार आता है साथ ही उन्हें सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जब चीन में डॉक्टर्स ने इन मरीजों की रेडियोग्राफी कराई तो पता चला कि ज़्यादातार मरीजों के फेफड़े क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इस बीमारी के लक्षण देखने के बाद शुरू में चीन में डॉक्टर्स को लगा कि यह बीमारी सार्स फ्लू हो सकती है लेकिन चीनी डॉक्टर्स की आशंका ग़लत साबित हुई।
बता दें कि यह बीमारी अब मध्य चीन के वूहान प्रांत से निकलकर दूसरे प्रांतों में भी फैल रही है। इतना ही नहीं, हॉन्ग कॉन्ग में भी इसके कुछ मरीजों का पता लगा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह बीमारी एक सी-फूड मार्केट से शुरू हुई है। जांच के बाद पता चला कि इस बीमारी से बीमार होने वाले ज़्यादातार लोग या तो इस सी-फूड मार्केट गए थे या फ़िर उन्होंने इसी बाज़ार से सी-फूड ख़रीदकर उसका इस्तेमाल किया था। वैसे सरकार ने इस सी-फूड मार्केट को तुरन्त ही बंद करा दिया है। लेकिन तब तक यह बीमारी कई लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी थी।
इस बीमारी के बारे में चीन के वैज्ञानिकों को लगा था कि यह बीमारी पशु-पक्षियों से मनुष्यों में संक्रमित हो रही है, लेकिन मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलेगी। लेकिन बाद में चीनी वैज्ञानिकों को पता चला कि यह बीमारी मनुष्य से मनुष्य में फैल सकती है। यानी साफ़ है कि चीन में फैली यह बीमारी ख़तरनाक है, इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यह बीमारी चीन के पड़ोसी देशों में भी फैल सकती है और इसी कारण से चीन के पड़ोसी देशों को सतर्क रहने की ज़रूरत है। दरअसल, इस बीमारी के एक केस का थाईलैण्ड में होने का पता लगा है तो एक अन्य केस की पुष्टि जापान में भी हो चुकी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोवोल कोरोना वायरस की एक लम्बी चौड़ी फैमिली है। इनमें से कुछ वायरस लोगों को बीमार करते हैं, लेकिन कुछ वायरस जानवरों को अपना शिकार बनाते हैं। हालांकि हो सकता है कि जानवरों में फैलने वाला कोरोना वायरस किसी अन्य तरीक़े से मनुष्यों को अपना शिकार बनाता रहा हो, लेकिन इस बार माना जा रहा है कि जानवरों में रहने वाला यह वायरस एक नए तरीक़े से विकसित हुआ है और इसने मनुष्यों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।
तो जैसा कि हमने आपको बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन के पड़ोसी देशों को इस बीमारी के कारण अलर्ट कर दिया है। ऐसे में लगभग सभी एशियाई देशों में एयरपोर्ट पर सतर्कता बरती जा रही है और साथ ही थर्मल स्कैनर से जांच हो रही है। जहां तक भारत की बात है तो केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चीन से आ रहे यात्रियों की दिल्ली, मुम्बई और कोलकाता हवाई अड्डों पर थर्मल स्कैनर से जांच करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, भारत सरकार चीन जाने के लिए ट्रैवल एडवाइज़री भी जारी की है।