एक बार फ़िर महंगा हो सकता है मोबाइल डेटा और कॉलिंग
Monday - January 20, 2020 2:10 pm ,
Category : WTN HINDI
टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में टेलीकॉम कम्पनियां
अपना घाटा पूरा करने टेलीकॉम कम्पनियां जल्द बढ़ा सकती हैं टैरिफ
JAN 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि अभी हाल ही में मोबाइट नेटवर्क कम्पनियों ने अपने टैरिफ में वृद्धि की है, जिसके बाद देश में मोबाइल पर बात करना और इंटरनेट यूज़ करना पहले की तुलना में ज़रा महंगा हो गया है। लेकिन यदि आप सोच रहे हैं कि इस साल अब शायद मोबाइल टैरिफ महंगा नहीं होगा तो आपका सोचना काफ़ी हद तक ग़लत है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, टेलीकॉम कम्पनियां इस साल अपने मोबाइल टैरिफ में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती हैं।
जीहां क्या है यह पूरा मामला, आइये आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों के मुताबिक़, पिछले तीन सालों में भारत में ARPU (Average Revenue per User) में कमी दर्ज़ की गई है। वहीं भारत में मोबाइल पर डेटा और कॉलिंग का ख़र्च दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अभी भी काफ़ी कम है। ऐसे में वोडाफोन-आइडिया और भारती एयरटेल जैसी टेलीकॉम कम्पनियां AGR (Adjusted Gross Revenue) की बाक़ी बची राशि के भुगतान के लिए एक बार फ़िर से टैरिफ बढ़ा सकती हैं।
जानकारों का कहना है कि तमाम टेलीकॉम कम्पनियों में वोडाफोन-आइडिया के लिए मुश्किलें ज़रा ज़्यादा है। कहा यह भी जा रहा है कि यदि कम्पनी AGR का भुगतान करने में असफ़ल रहती है तो आशंका जताई जा रही है कि कम्पनी टेलीकॉम सेक्टर से बाहर भी हो सकती है। और यदि ऐसा होता है तो भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में सरकारी कम्पनी बीएसएनएल को छोड़कर दो अन्य कम्पनियां भारती एयरटेल और रिलायंस जियो ही बचेंगी।
टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों के मुताबिक़, पिछले तीन सालों में मोबाइल यूज़र्स का टेलीकॉम से जुड़ी सर्विसेज पर ख़र्च कम हुआ है। हाल ही में टैरिफ में वृद्धि के बाद भी भारतीय मोबाइल यूज़र्स कम्युनिकेशन की अपनी ज़रूरतों पर अपनी मासिक आमदनी का सिर्फ़ 0.86 प्रतिशत ही ख़र्च करते हैं, जो कि चार साल पहले की तुलना में काफ़ी कम है। बता दें कि आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में कम्युनिकेशन पर यूज़र्स का ख़र्च अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, चीन, फिलीपींस, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है।
और इन्हीं सब कारणों से टेलिकॉम कम्पनियां इस वर्ष टैरिफ में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती हैं। इससे पहले टेलीकॉम कम्पनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो ने हाल ही में प्रीपेड टैरिफ को 14 से 33 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है और तीन सालों में इस तरह की यह पहली वृद्धि थी। यानी कि यदि मोबाइल कम्पनियों के टैरिफ अप्रैल महीने के भीतर बढ़ते हैं तो मोबाइल टैरिफ पिछले साल नवम्बर महीने की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा।
इधर टेलीकॉम कम्पनियां का कहना है कि उनका ARPU मौजूदा 120 रुपये से अगले कुछ तिमाही में बढ़कर क़रीब 160 रुपये पर पहुंच सकता है। ऐसे में यदि वोडफोन-आडडिया को बक़ाया रकम पर सरकार से राहत नहीं मिलती है तो कम्पनी के लिए मुश्किलें काफ़ी ज़्यादा बढ़ जाएंगी। ऐसे में कम्पनी के सामने दो ही विकल्प रहेंगे। पहला विकल्प यह रहेगा कि कम्पनी या तो अपना टैरिफ बढ़ाए, या फ़िर कम्पनी टेलीकॉम सेक्टर से अपना बिजनेस बंद कर दे।
दरअसल, रिलांयस जियो की लॉन्चिंग के बाद से ही भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं। जियो के टेलीकॉम सेक्टर में क़दम रखने के बाद फ्री कॉलिंग और बेहद सस्ते इंटरनेट का जो नया दौर शुरू हुआ, उसने जल्द ही भारत में क्रान्ति ला दी। आंकड़े बताते हैं कि जियो की लॉन्चिंग के बाद भारत में स्मार्टफ़ोन की बिक्री में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है। वहीं जियो द्वारा दी जा रही सस्ती और मुफ़्त कॉलिंग सर्विस के कारण बाक़ी अन्य टेलीकॉम कम्पनियों को भी अपने रेट काफ़ी कम करने पड़े हैं। अब जबकि भारत में मोबाइल फ़ोन यूज़र्स को सस्ते इंटरनेट डेटा और कॉलिंग की आदत लग गई है, ऐसे में टेलीकॉम कम्पनियों को उम्मीद है कि यदि वे अपना घाटा कम करने के लिए एक बार फ़िर से टैरिफ में वृद्धि करती हैं तो भारतीय यूज़र्स को इसे मज़बूरी में ही सही लेकिन स्वीकार करना ही होगा।
JAN 20 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि अभी हाल ही में मोबाइट नेटवर्क कम्पनियों ने अपने टैरिफ में वृद्धि की है, जिसके बाद देश में मोबाइल पर बात करना और इंटरनेट यूज़ करना पहले की तुलना में ज़रा महंगा हो गया है। लेकिन यदि आप सोच रहे हैं कि इस साल अब शायद मोबाइल टैरिफ महंगा नहीं होगा तो आपका सोचना काफ़ी हद तक ग़लत है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, टेलीकॉम कम्पनियां इस साल अपने मोबाइल टैरिफ में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती हैं।
जीहां क्या है यह पूरा मामला, आइये आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों के मुताबिक़, पिछले तीन सालों में भारत में ARPU (Average Revenue per User) में कमी दर्ज़ की गई है। वहीं भारत में मोबाइल पर डेटा और कॉलिंग का ख़र्च दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अभी भी काफ़ी कम है। ऐसे में वोडाफोन-आइडिया और भारती एयरटेल जैसी टेलीकॉम कम्पनियां AGR (Adjusted Gross Revenue) की बाक़ी बची राशि के भुगतान के लिए एक बार फ़िर से टैरिफ बढ़ा सकती हैं।
जानकारों का कहना है कि तमाम टेलीकॉम कम्पनियों में वोडाफोन-आइडिया के लिए मुश्किलें ज़रा ज़्यादा है। कहा यह भी जा रहा है कि यदि कम्पनी AGR का भुगतान करने में असफ़ल रहती है तो आशंका जताई जा रही है कि कम्पनी टेलीकॉम सेक्टर से बाहर भी हो सकती है। और यदि ऐसा होता है तो भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में सरकारी कम्पनी बीएसएनएल को छोड़कर दो अन्य कम्पनियां भारती एयरटेल और रिलायंस जियो ही बचेंगी।
टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों के मुताबिक़, पिछले तीन सालों में मोबाइल यूज़र्स का टेलीकॉम से जुड़ी सर्विसेज पर ख़र्च कम हुआ है। हाल ही में टैरिफ में वृद्धि के बाद भी भारतीय मोबाइल यूज़र्स कम्युनिकेशन की अपनी ज़रूरतों पर अपनी मासिक आमदनी का सिर्फ़ 0.86 प्रतिशत ही ख़र्च करते हैं, जो कि चार साल पहले की तुलना में काफ़ी कम है। बता दें कि आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में कम्युनिकेशन पर यूज़र्स का ख़र्च अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर, चीन, फिलीपींस, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है।
और इन्हीं सब कारणों से टेलिकॉम कम्पनियां इस वर्ष टैरिफ में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती हैं। इससे पहले टेलीकॉम कम्पनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो ने हाल ही में प्रीपेड टैरिफ को 14 से 33 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है और तीन सालों में इस तरह की यह पहली वृद्धि थी। यानी कि यदि मोबाइल कम्पनियों के टैरिफ अप्रैल महीने के भीतर बढ़ते हैं तो मोबाइल टैरिफ पिछले साल नवम्बर महीने की तुलना में 40 से 50 प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा।
इधर टेलीकॉम कम्पनियां का कहना है कि उनका ARPU मौजूदा 120 रुपये से अगले कुछ तिमाही में बढ़कर क़रीब 160 रुपये पर पहुंच सकता है। ऐसे में यदि वोडफोन-आडडिया को बक़ाया रकम पर सरकार से राहत नहीं मिलती है तो कम्पनी के लिए मुश्किलें काफ़ी ज़्यादा बढ़ जाएंगी। ऐसे में कम्पनी के सामने दो ही विकल्प रहेंगे। पहला विकल्प यह रहेगा कि कम्पनी या तो अपना टैरिफ बढ़ाए, या फ़िर कम्पनी टेलीकॉम सेक्टर से अपना बिजनेस बंद कर दे।
दरअसल, रिलांयस जियो की लॉन्चिंग के बाद से ही भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं। जियो के टेलीकॉम सेक्टर में क़दम रखने के बाद फ्री कॉलिंग और बेहद सस्ते इंटरनेट का जो नया दौर शुरू हुआ, उसने जल्द ही भारत में क्रान्ति ला दी। आंकड़े बताते हैं कि जियो की लॉन्चिंग के बाद भारत में स्मार्टफ़ोन की बिक्री में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है। वहीं जियो द्वारा दी जा रही सस्ती और मुफ़्त कॉलिंग सर्विस के कारण बाक़ी अन्य टेलीकॉम कम्पनियों को भी अपने रेट काफ़ी कम करने पड़े हैं। अब जबकि भारत में मोबाइल फ़ोन यूज़र्स को सस्ते इंटरनेट डेटा और कॉलिंग की आदत लग गई है, ऐसे में टेलीकॉम कम्पनियों को उम्मीद है कि यदि वे अपना घाटा कम करने के लिए एक बार फ़िर से टैरिफ में वृद्धि करती हैं तो भारतीय यूज़र्स को इसे मज़बूरी में ही सही लेकिन स्वीकार करना ही होगा।