...तो अब मालगाड़ी के लेट होने पर ग्राहकों को मिलेगा हर्जाना!
Monday - January 20, 2020 4:08 pm ,
Category : WTN HINDI
मालगाड़ियों के लिए अलग से ट्रैक बनाने की तैयारी ज़ोरों पर
रेल मंत्री ने दिए संकेत, यदि लेट हुई मालगाड़ी तो ग्राहकों को मिल सकता है हर्जाना
JAN 20 (WTN) – भारतीय रेलवे नेटवर्क में यात्री गाड़ियों का लेट होना कोई नई बात नहीं है। रेलवे के मुताबिक़, टेक्नीकल, मैन्यूअल और कई बार प्राकृतिक कारणों से यात्री गाड़ियां देरी से चलती हैं। हालांकि, समय के साथ रेलवे को अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास हुआ है जिसके कारण पूरी कोशिश की जा रही है कि यात्री गाड़ियां समय पर चलें। इसी कड़ी में रेलवे ने तेजस एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में एक नया प्रयोग शुरू किया है, जिसमें ट्रेन के लेट होने पर यात्रियों को हर्जाना देने का प्रावधान है। कहा जा रहा है कि धीरे-धीरे अन्य रूटों की कुछ गाड़ियों की इस तर्ज़ पर चलाए जाने की योजना में जिसमें ट्रेन के लेट होने पर यात्रियों को जुर्माना दिया जाएगा।
लेकिन जहां तक यात्री गाड़ियों के लेट होने की बात है तो रेलवे की पूरी कोशिश है कि यात्री गाड़ियां सही समय पर चलें। लेकिन यात्री गाड़ियों को समय पर चलाने के चक्कर में मालगाड़ियों की टाइमिंग कभी भी सही नहीं रह पाई है। देखा गया है कि सामान ले जा रहीं मालगाड़ियां अपने गंतव्य स्थान पर काफ़ी देर बाद पहुंचती हैं। जिसके कारण सामान की डिलेवरी होने में देरी हो जाती है। लेकिन अब ख़ुद रेलमंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि तेजस एक्सप्रेस ट्रेन की तर्ज पर मालगाड़ी के भी लेट होने पर प्रभावित ग्राहकों को हर्जाना दिया जा सकता है।
दरअसल, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने यह बात DFCCIL (Dedicated Freight Corridor Corporation of India) यानी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया के स्थापाना दिवस पर कही। रेल मंत्री का यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के लेट होने पर कहना है कि यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के तेज़ परिचालन के लिए दोनों के लिए ही अलग-अलग ट्रैक होने की ज़रूरत है। इस दौरान रेल मत्री ने कहा कि मालगाड़ी के लेट होने पर भी इससे प्रभावित ग्राहकों को हर्जाना देना चाहिए।
रेलमंत्री गोयल के मुताबिक़, “भारतीय रेल को मालगाड़ियों का परिचालन भी रेलपथ का ज़्यादातर इस्तेमाल करने के साथ करना चाहिए और मालगाड़ियों की औसत चाल बढ़ानी चाहिए।” जानकारी के लिए बता दें कि मालगाड़ियों के लिए अलग से ट्रेक का काम देश में लगातार जारी है। इसी कड़ी में DFCCIL ने हाल ही में 500 किलोमीटर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा किया है, और DFCCIL को मार्च, 2020 तक 991 किलोमीटर का लक्ष्य हासिल करना है।
लेकिन मालगाड़ियों का समय पर परिचालन उतना आसान नहीं है। सबसे पहले मालगाड़ियों का परिचालन तय समय-सारणी के अनुसार करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। वैसे DFCCIL इस क्षेत्र में कॉन्सोलिडेशन, डिवेलपमेंट और इम्प्रूवमेंट पर काम कर रहा है जिससे यात्री गाड़ियों के साथ-साथ मालगाड़ियों को भी समय पर चलाया जा सके। अब देखना होगा कि रेलवे अपने इस लक्ष्य को कब तक पूरा कर पाता है और क्या सही में यदि मालगाड़ियां लेट होती हैं तो प्रभावित ग्राहकों को इसका हर्जाना मिलेगा।
JAN 20 (WTN) – भारतीय रेलवे नेटवर्क में यात्री गाड़ियों का लेट होना कोई नई बात नहीं है। रेलवे के मुताबिक़, टेक्नीकल, मैन्यूअल और कई बार प्राकृतिक कारणों से यात्री गाड़ियां देरी से चलती हैं। हालांकि, समय के साथ रेलवे को अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास हुआ है जिसके कारण पूरी कोशिश की जा रही है कि यात्री गाड़ियां समय पर चलें। इसी कड़ी में रेलवे ने तेजस एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में एक नया प्रयोग शुरू किया है, जिसमें ट्रेन के लेट होने पर यात्रियों को हर्जाना देने का प्रावधान है। कहा जा रहा है कि धीरे-धीरे अन्य रूटों की कुछ गाड़ियों की इस तर्ज़ पर चलाए जाने की योजना में जिसमें ट्रेन के लेट होने पर यात्रियों को जुर्माना दिया जाएगा।
लेकिन जहां तक यात्री गाड़ियों के लेट होने की बात है तो रेलवे की पूरी कोशिश है कि यात्री गाड़ियां सही समय पर चलें। लेकिन यात्री गाड़ियों को समय पर चलाने के चक्कर में मालगाड़ियों की टाइमिंग कभी भी सही नहीं रह पाई है। देखा गया है कि सामान ले जा रहीं मालगाड़ियां अपने गंतव्य स्थान पर काफ़ी देर बाद पहुंचती हैं। जिसके कारण सामान की डिलेवरी होने में देरी हो जाती है। लेकिन अब ख़ुद रेलमंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि तेजस एक्सप्रेस ट्रेन की तर्ज पर मालगाड़ी के भी लेट होने पर प्रभावित ग्राहकों को हर्जाना दिया जा सकता है।
दरअसल, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने यह बात DFCCIL (Dedicated Freight Corridor Corporation of India) यानी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इण्डिया के स्थापाना दिवस पर कही। रेल मंत्री का यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के लेट होने पर कहना है कि यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के तेज़ परिचालन के लिए दोनों के लिए ही अलग-अलग ट्रैक होने की ज़रूरत है। इस दौरान रेल मत्री ने कहा कि मालगाड़ी के लेट होने पर भी इससे प्रभावित ग्राहकों को हर्जाना देना चाहिए।
रेलमंत्री गोयल के मुताबिक़, “भारतीय रेल को मालगाड़ियों का परिचालन भी रेलपथ का ज़्यादातर इस्तेमाल करने के साथ करना चाहिए और मालगाड़ियों की औसत चाल बढ़ानी चाहिए।” जानकारी के लिए बता दें कि मालगाड़ियों के लिए अलग से ट्रेक का काम देश में लगातार जारी है। इसी कड़ी में DFCCIL ने हाल ही में 500 किलोमीटर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा किया है, और DFCCIL को मार्च, 2020 तक 991 किलोमीटर का लक्ष्य हासिल करना है।
लेकिन मालगाड़ियों का समय पर परिचालन उतना आसान नहीं है। सबसे पहले मालगाड़ियों का परिचालन तय समय-सारणी के अनुसार करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। वैसे DFCCIL इस क्षेत्र में कॉन्सोलिडेशन, डिवेलपमेंट और इम्प्रूवमेंट पर काम कर रहा है जिससे यात्री गाड़ियों के साथ-साथ मालगाड़ियों को भी समय पर चलाया जा सके। अब देखना होगा कि रेलवे अपने इस लक्ष्य को कब तक पूरा कर पाता है और क्या सही में यदि मालगाड़ियां लेट होती हैं तो प्रभावित ग्राहकों को इसका हर्जाना मिलेगा।