यदि रहे असावधान तो आप भी हो सकते हैं फास्टैग के जरिए जालसाजी का शिकार
Tuesday - January 21, 2020 1:27 pm ,
Category : WTN HINDI
अब फास्टैग पर जालसाजों की नज़र
फास्टैग के इस्तेमाल में रहें सतर्क नहीं तो ख़ाली हो सकता है बैंक अकाउंट!
JAN 21 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि नेशनल हाइवे पर स्थित टोल प्लाज़ा पर टोल टैक्स भुगतान के लिए अब फास्टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। फास्टैग के ज़रिये सरकार कई लक्ष्यों को एक साथ पूरा करने की कोशिश में है। सरकार का दावा है कि फास्टैग के इस्तेमाल से यात्रियों को टोल प्लाज़ा पर रुकना नहीं पड़ेगा जिससे उनका क़ीमती समय बचेगा। वहीं सरकार का दावा है कि टोल प्लाज़ा पर टोल टैक्स भुगतान के लिए गाड़ियों के ना रुकने से ईंधन की बचत होगी, और गाड़ियों के ना रुकने से प्रदूषण भी कम फ़ैलेगा।
यानी कि एक तरह से फास्टैग यात्रियों की सुविधा के लिए है, और फास्टैग के इस्तेमाल से सरकार को भी काफ़ी फ़ायदा है। लेकिन यदि आपने अपने वाहन में फास्टैग लगाया है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपको सावधान रहने की ज़रूरत है। दरअसल, अब जालसाजों ने फास्टैग के ज़रिये ही लोगों को ठगने का नया तरीक़ा ढूंढ लिया है। यह पढ़कर आप सोच में पढ़ गये होंगे कि आख़िर फास्टैग के ज़रिये जालसाज किसी को कैसे ठग सकते हैं? क्या है यह पूरा मामला, आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फास्टैग के ज़रिए जालसाजी करने वाले बेहद ही प्रोफेशनल तरीक़े से लोगों के साथ जालसाजी कर रहे हैं। दरअसल, जालसाज फास्टैग पंजीकरण कराने, फास्टैग की सर्विस ठीक करने की मदद के बहाने, या फ़िर फास्टैग की सर्विस चेक करने के बहाने UPI के ज़रिए बैंक खातों से पैसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि इस तरह की जालसाजी की पहली घटना आधिकारिक तौर पर हाल ही में सामने आई थी।
दरअसल, बेंगलुरु के एक व्यक्ति को जालसाजों ने फास्टैग के ज़रिए 50,000 रुपये उसके बैंक अकाउंट से उड़ा लिए। जानकारी के मुताबिक़, पीड़ित व्यक्ति ने अपने फास्टैग के सही तरीक़े से काम नहीं करने को लेकर एक निजी बैंक में इसकी शिकायत की थी। बैंक में शिकायत के बाद एक तथाकथित ग्राहक सेवा अधिकारी ने पीड़ित व्यक्ति को उसके मोबाइल फ़ोन पर एक कॉल किया। इस कॉल में फर्जी व्यक्ति ने पीड़ित व्यक्ति से फास्टैग को ठीक करने की मदद करने का कहकर एक ऑनलाइन फॉर्म भरने कहा।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, जालसाज ने फास्टैग ठीक करने और उसके ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के बहाने पीड़ित व्यक्ति से उसका UPI पिन ले लिया। पीड़ित व्यक्ति के मुताबिक़, कॉल करने वाले व्यक्ति ने उसे एक SMS के जरिए एक लिंक भेजा था। इस लिंक को ओपन करने के बाद सम्बन्धित बैंक का फास्टैग फॉर्म ओपन हुआ जिसमें पीड़ित व्यक्ति से उसका नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर और UPI पिन जैसे विवरण मांगे गए थे। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति से उसके मोबाइल फ़ोन पर आए वन-टाइम पासवार्ड (ओटीपी) को मांगा गया जो कि उसने कॉल करने वाले व्यक्ति को दे दिया। पासवर्ड देते ही कुछ ही देर बाद पीड़ित व्यक्ति के बैंक अकाउंट से 50,000 रुपये कट गये।
तो देखा आपने कि फास्टैग सर्विस के नाम पर किस तरह से कोई आपको मूर्ख बना सकता है और आपका बैंक अकाउंट खाली कर सकता है। इसलिए हमारी आपको सलाह है कि आप कभी भी किसी को भी अपना UPI पिन या बैंक से आए किसी भी पासवर्ड को किसी के साथ भी शेयर ना करें। वहीं बता दें कि फास्टैग के पंजीकरण या उसके सही तरीक़े से काम नहीं करने पर उसके लिए आपको कोई भी पासवर्ड या ऑनलाइन बैंकिंग विवरण देने की ज़रूरत नहीं है।
यदि आपका फास्टैग सही तरीक़े से काम नहीं कर रहा है तो इसके लिए आप MyFASTag ऐप का इस्तेमाल करें या फ़िर जिस बैंक से आपने फास्टैग लिया है उस बैंक की निकटतम शाखा पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज़ कराएं। कभी भी कोई भी बैंक फ़ोन के जरिए फास्टैग रजिस्ट्रेशन नहीं करती है और ना ही फ़ोन के जरिए फास्टैग सर्विस के सही तरीक़े से काम नहीं करने पर उसे ठीक करती है। यदि आपको फास्टैग पंजीकरण या फास्टैग सर्विस ठीक कराने से सम्बन्धित कोई भी कॉल आता है तो ऐसे कॉल को तुरन्त डिस्कनेक्ट कर दें और इसकी शिकायत उस बैंक से करें जहां से आपने फास्टैग ख़रीदा है। याद रखिए, आपकी सावधानी से ही आप जालसाजी का शिकार होने से बच सकते हैं।
JAN 21 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि नेशनल हाइवे पर स्थित टोल प्लाज़ा पर टोल टैक्स भुगतान के लिए अब फास्टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। फास्टैग के ज़रिये सरकार कई लक्ष्यों को एक साथ पूरा करने की कोशिश में है। सरकार का दावा है कि फास्टैग के इस्तेमाल से यात्रियों को टोल प्लाज़ा पर रुकना नहीं पड़ेगा जिससे उनका क़ीमती समय बचेगा। वहीं सरकार का दावा है कि टोल प्लाज़ा पर टोल टैक्स भुगतान के लिए गाड़ियों के ना रुकने से ईंधन की बचत होगी, और गाड़ियों के ना रुकने से प्रदूषण भी कम फ़ैलेगा।
यानी कि एक तरह से फास्टैग यात्रियों की सुविधा के लिए है, और फास्टैग के इस्तेमाल से सरकार को भी काफ़ी फ़ायदा है। लेकिन यदि आपने अपने वाहन में फास्टैग लगाया है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपको सावधान रहने की ज़रूरत है। दरअसल, अब जालसाजों ने फास्टैग के ज़रिये ही लोगों को ठगने का नया तरीक़ा ढूंढ लिया है। यह पढ़कर आप सोच में पढ़ गये होंगे कि आख़िर फास्टैग के ज़रिये जालसाज किसी को कैसे ठग सकते हैं? क्या है यह पूरा मामला, आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फास्टैग के ज़रिए जालसाजी करने वाले बेहद ही प्रोफेशनल तरीक़े से लोगों के साथ जालसाजी कर रहे हैं। दरअसल, जालसाज फास्टैग पंजीकरण कराने, फास्टैग की सर्विस ठीक करने की मदद के बहाने, या फ़िर फास्टैग की सर्विस चेक करने के बहाने UPI के ज़रिए बैंक खातों से पैसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि इस तरह की जालसाजी की पहली घटना आधिकारिक तौर पर हाल ही में सामने आई थी।
दरअसल, बेंगलुरु के एक व्यक्ति को जालसाजों ने फास्टैग के ज़रिए 50,000 रुपये उसके बैंक अकाउंट से उड़ा लिए। जानकारी के मुताबिक़, पीड़ित व्यक्ति ने अपने फास्टैग के सही तरीक़े से काम नहीं करने को लेकर एक निजी बैंक में इसकी शिकायत की थी। बैंक में शिकायत के बाद एक तथाकथित ग्राहक सेवा अधिकारी ने पीड़ित व्यक्ति को उसके मोबाइल फ़ोन पर एक कॉल किया। इस कॉल में फर्जी व्यक्ति ने पीड़ित व्यक्ति से फास्टैग को ठीक करने की मदद करने का कहकर एक ऑनलाइन फॉर्म भरने कहा।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, जालसाज ने फास्टैग ठीक करने और उसके ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के बहाने पीड़ित व्यक्ति से उसका UPI पिन ले लिया। पीड़ित व्यक्ति के मुताबिक़, कॉल करने वाले व्यक्ति ने उसे एक SMS के जरिए एक लिंक भेजा था। इस लिंक को ओपन करने के बाद सम्बन्धित बैंक का फास्टैग फॉर्म ओपन हुआ जिसमें पीड़ित व्यक्ति से उसका नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर और UPI पिन जैसे विवरण मांगे गए थे। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति से उसके मोबाइल फ़ोन पर आए वन-टाइम पासवार्ड (ओटीपी) को मांगा गया जो कि उसने कॉल करने वाले व्यक्ति को दे दिया। पासवर्ड देते ही कुछ ही देर बाद पीड़ित व्यक्ति के बैंक अकाउंट से 50,000 रुपये कट गये।
तो देखा आपने कि फास्टैग सर्विस के नाम पर किस तरह से कोई आपको मूर्ख बना सकता है और आपका बैंक अकाउंट खाली कर सकता है। इसलिए हमारी आपको सलाह है कि आप कभी भी किसी को भी अपना UPI पिन या बैंक से आए किसी भी पासवर्ड को किसी के साथ भी शेयर ना करें। वहीं बता दें कि फास्टैग के पंजीकरण या उसके सही तरीक़े से काम नहीं करने पर उसके लिए आपको कोई भी पासवर्ड या ऑनलाइन बैंकिंग विवरण देने की ज़रूरत नहीं है।
यदि आपका फास्टैग सही तरीक़े से काम नहीं कर रहा है तो इसके लिए आप MyFASTag ऐप का इस्तेमाल करें या फ़िर जिस बैंक से आपने फास्टैग लिया है उस बैंक की निकटतम शाखा पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज़ कराएं। कभी भी कोई भी बैंक फ़ोन के जरिए फास्टैग रजिस्ट्रेशन नहीं करती है और ना ही फ़ोन के जरिए फास्टैग सर्विस के सही तरीक़े से काम नहीं करने पर उसे ठीक करती है। यदि आपको फास्टैग पंजीकरण या फास्टैग सर्विस ठीक कराने से सम्बन्धित कोई भी कॉल आता है तो ऐसे कॉल को तुरन्त डिस्कनेक्ट कर दें और इसकी शिकायत उस बैंक से करें जहां से आपने फास्टैग ख़रीदा है। याद रखिए, आपकी सावधानी से ही आप जालसाजी का शिकार होने से बच सकते हैं।