मोदी सरकार ने निकाली मलेशियाई प्रधानमंत्री की पूरी अकड़!
Tuesday - January 21, 2020 3:36 pm ,
Category : WTN HINDI
भारत विरोधी बयानबाजी कर बुरे फंसे मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद
मलेशिया से पाम ऑइल आयात पर मोदी सरकार के कड़े फ़ैसले से मलेशिया की अर्थव्यवस्था को लगा ‘झटका’
JAN 21 (WTN) – अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों को देखते हुए किसी भी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को काफ़ी सोच समझकर बयान देना चाहिए। क्योंकि एक ग़लत बयान किसी भी देश के लिए मुसीबत का कारण बन सकता है। इतिहास पर नज़र डाली जाए तो कई बार कुछ देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने ऐसे बयान दिये हैं जो कि उनके देश के लिए मुसीबत का कारण बन चुके हैं। लेकिन जिस तरह की ग़लती मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने भारत के ख़िलाफ़ एक बयान देकर की है, वैसी ग़लती मलेशिया जैसे छोटे देश के राष्ट्राध्यक्ष को नहीं करना चाहिए। दरअसल, महातिर मोहम्मद की भारत विरोधी बयानबाजी का ख़ामियाजा मलेशिया को लाखों डॉलर्स के नुकसान से उठाना पड़ रहा है।
दरअसल, मुस्लिम देशों के बीच नेता बनने का सपना देखने की चाहत रखने वाले मलेशिया ने प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को भारत की मोदी सरकार द्वारा लिए गये ऐतिहासिक फ़ैसलों पर बयानबाजी करना महंगा पड़ रहा है। मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर ने भारत के राज्य जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को कमज़ोर किए जाने और नागरिकता संशोधन क़ानून पर भारत सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर बयानबाजी की थी। जोश-जोश में महातिर मोहम्मद बयानबाजी तो कर गए, लेकिन उनकी इस बयानबाजी को मोदी सरकार ने गम्भीरता से ले लिया।
मोदी सरकार ने पूरी दुनिया के सामने पहले ही साफ़ कर दिया था कि भारत के राज्य जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 का शिथिलकरण और नागरिकता क़ानून भारत के आंतरिक मामले हैं और इस पर किसी भी देश को दखल लेने या इसके विरोथ में बयान देने का कोई भी हक़ नहीं है। लेकिन मलेशिया के प्रधानमंत्री ने पूरी दुनिया के मुस्लिमों का नेता बनने की चाहत में कश्मीर और नागरिकता क़ानून के विरोध में बयानबाजी कर तो दी, जिसके बाद मोदी सरकार ने मलेशिया को सबक सिखाने का फ़ैसला कर लिया।
मलेशिया को उसके प्रधानमंत्री की ग़लत बयानबाजी का सबक सिखाने के लिए मोदी सरकार ने मलेशिया से पाम ऑइल के आयात पर नियंत्रण लगा दिया। मोदी सरकार के इस कूटनीतिक फ़ैसले के बाद मलेशिया में हड़कम्प मच गया। अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, आयात पर लगे नियंत्रण के बाद भारतीय बंदरगाहों पर मलेशिया का हज़ारों टन पाम तेल फंसा हुआ है। जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार ने 8 जनवरी को मलेशिया से रिफाइंड तेल के आयात पर नियंत्रण लगाने की घोषणा की थी जिससे घरेलू रिफाइनरियों की मदद की जा सके।
बता दें कि साबुन बनाने समेत कुछ अन्य कामों के लिए पाम ऑइल का इस्तेमाल किया जाता है और भारत पूरी तरह से पाम ऑइल के आयात पर निर्भर है। वैसे पिछले पांच सालों में मलेशिया के लिए भारत पाम ऑइल का सबसे बड़ा बाज़ार रहा है, लेकिन मलेशियाई प्रधानमंत्री की भारत विरोधी बयानबाजी के कारण मलेशिया को भारत के साथ व्यापारिक सम्बन्धों में नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मोदी सरकार ने मलेशिया से पाम ऑइल का आयात नियंत्रित कर अब इण्डोनेशिया से पाम ऑइल का आयात शुरू कर दिया है। भारत सरकार के इस क़दम के बाद मलेशियाई पाम फ्यूचर की क़ीमतों में पिछले 11 सालों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज़ की गई है। अब जबकि भारत सरकार ने मलेशिया से पाम ऑइल के आयात पर नियंत्रण लगा दिया है, ऐसे में भारतीय बंदरगाहों पर क़रीब 30,000 टन से ज़्यादा पाम ऑइल से भरे कंटेनर अटके हुए हैं। दरअसल, यह सभी जहाज आयात पर नियंत्रण लगने से पहले ही रवाना हुए थे।
वैसे जानकारी के मुताबिक़, कस्टम अधिकारी नियमों में बदलाव से पहले आए हुए जहाजों को ख़ाली करने की आमतौर पर इजाज़त दे देते हैं, लेकिन पाम ऑइल के मामले में थोड़ा संशय बना हुआ है और यही कारण है कि भारतीय बंदरगाहों पर बड़ी तादात में पाम ऑइल के कंटेनर खड़े हुए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार के पाम ऑइल आयात पर नियंत्रण का मतलब है कि आयातकों को अब नया लाइसेंस ख़रीदना होगा और इस नए लाइसेंस का इस्तेमाल मलेशिया से आ रहे जहाजों के सामान को लेने से मना करने या देरी करने के लिए किया जा सकता है।
मोदी सरकार के कूटनीतिक क़दम से मलेशिया को बड़ा झटका लगा है। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को इस बात का अहसास हो गया है कि भारत के आंतरिक मामलों में बयानबाजी कर उनसे ग़लती हो गई है। मोदी सरकार के पाम ऑइल पर लिए गये कूटनीतिक फ़ैसले के बाद महातिर मोहम्मद का कहना है, “मलेशिया भारत के ख़िलाफ़ किसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, क्योंकि हम भारत के ख़िलाफ़ कोई जवाबी कार्रवाई करने के लिए बहुत छोटे देश हैं। हमें इस समस्या से बाहर निकलने के लिए दूसरे तरीक़ों और साधनों का इस्तेमाल करना होगा।”
हालांकि, मोदी सरकार के पाम ऑइल पर लिए गए फ़ैसले से मलेशिया को काफ़ी नुकसान हुआ है। लेकिन अभी भी मलेशिया के 94 साल के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद मुस्लिम देशों के बीच नेता बनने की कोशिश में हैं। महातिर का कहना है, “मैं भारत सरकार के आयात पर प्रतिबंध के फ़ैसले को लेकर चिंतित हूं, लेकिन मैं ग़लत फ़ैसलों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहूंगा और इसके लिए मुझे कोई भी क़ीमत चुकानी पड़े।”
मोदी सरकार के कड़े फ़ैसले के बाद मलेशिया को आर्थिक रूप से काफ़ी नुकसान उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। दरअसल, मलेशिया से सबसे ज़्यादा पाम ऑइल का आयातक देश भारत ही है। साल 2019 में भारत मलेशिया के पॉम ऑइल का सबसे बड़ा ख़रीददार था। साल 2019 में भारत ने मलेशिया से 40 लाख टन तेल आयात किया था। कहा जा रहा है कि यदि भारत और मलेशिया के बीच सम्बन्धों में सुधार नहीं आता है तो आने वाले समय में मलेशिया के साथ पाम ऑइल का आयात 10 लाख टन से भी नीचे जा सकता है।
JAN 21 (WTN) – अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों को देखते हुए किसी भी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को काफ़ी सोच समझकर बयान देना चाहिए। क्योंकि एक ग़लत बयान किसी भी देश के लिए मुसीबत का कारण बन सकता है। इतिहास पर नज़र डाली जाए तो कई बार कुछ देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने ऐसे बयान दिये हैं जो कि उनके देश के लिए मुसीबत का कारण बन चुके हैं। लेकिन जिस तरह की ग़लती मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने भारत के ख़िलाफ़ एक बयान देकर की है, वैसी ग़लती मलेशिया जैसे छोटे देश के राष्ट्राध्यक्ष को नहीं करना चाहिए। दरअसल, महातिर मोहम्मद की भारत विरोधी बयानबाजी का ख़ामियाजा मलेशिया को लाखों डॉलर्स के नुकसान से उठाना पड़ रहा है।
दरअसल, मुस्लिम देशों के बीच नेता बनने का सपना देखने की चाहत रखने वाले मलेशिया ने प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को भारत की मोदी सरकार द्वारा लिए गये ऐतिहासिक फ़ैसलों पर बयानबाजी करना महंगा पड़ रहा है। मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर ने भारत के राज्य जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को कमज़ोर किए जाने और नागरिकता संशोधन क़ानून पर भारत सरकार के ख़िलाफ़ खुलकर बयानबाजी की थी। जोश-जोश में महातिर मोहम्मद बयानबाजी तो कर गए, लेकिन उनकी इस बयानबाजी को मोदी सरकार ने गम्भीरता से ले लिया।
मोदी सरकार ने पूरी दुनिया के सामने पहले ही साफ़ कर दिया था कि भारत के राज्य जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 का शिथिलकरण और नागरिकता क़ानून भारत के आंतरिक मामले हैं और इस पर किसी भी देश को दखल लेने या इसके विरोथ में बयान देने का कोई भी हक़ नहीं है। लेकिन मलेशिया के प्रधानमंत्री ने पूरी दुनिया के मुस्लिमों का नेता बनने की चाहत में कश्मीर और नागरिकता क़ानून के विरोध में बयानबाजी कर तो दी, जिसके बाद मोदी सरकार ने मलेशिया को सबक सिखाने का फ़ैसला कर लिया।
मलेशिया को उसके प्रधानमंत्री की ग़लत बयानबाजी का सबक सिखाने के लिए मोदी सरकार ने मलेशिया से पाम ऑइल के आयात पर नियंत्रण लगा दिया। मोदी सरकार के इस कूटनीतिक फ़ैसले के बाद मलेशिया में हड़कम्प मच गया। अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, आयात पर लगे नियंत्रण के बाद भारतीय बंदरगाहों पर मलेशिया का हज़ारों टन पाम तेल फंसा हुआ है। जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार ने 8 जनवरी को मलेशिया से रिफाइंड तेल के आयात पर नियंत्रण लगाने की घोषणा की थी जिससे घरेलू रिफाइनरियों की मदद की जा सके।
बता दें कि साबुन बनाने समेत कुछ अन्य कामों के लिए पाम ऑइल का इस्तेमाल किया जाता है और भारत पूरी तरह से पाम ऑइल के आयात पर निर्भर है। वैसे पिछले पांच सालों में मलेशिया के लिए भारत पाम ऑइल का सबसे बड़ा बाज़ार रहा है, लेकिन मलेशियाई प्रधानमंत्री की भारत विरोधी बयानबाजी के कारण मलेशिया को भारत के साथ व्यापारिक सम्बन्धों में नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मोदी सरकार ने मलेशिया से पाम ऑइल का आयात नियंत्रित कर अब इण्डोनेशिया से पाम ऑइल का आयात शुरू कर दिया है। भारत सरकार के इस क़दम के बाद मलेशियाई पाम फ्यूचर की क़ीमतों में पिछले 11 सालों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज़ की गई है। अब जबकि भारत सरकार ने मलेशिया से पाम ऑइल के आयात पर नियंत्रण लगा दिया है, ऐसे में भारतीय बंदरगाहों पर क़रीब 30,000 टन से ज़्यादा पाम ऑइल से भरे कंटेनर अटके हुए हैं। दरअसल, यह सभी जहाज आयात पर नियंत्रण लगने से पहले ही रवाना हुए थे।
वैसे जानकारी के मुताबिक़, कस्टम अधिकारी नियमों में बदलाव से पहले आए हुए जहाजों को ख़ाली करने की आमतौर पर इजाज़त दे देते हैं, लेकिन पाम ऑइल के मामले में थोड़ा संशय बना हुआ है और यही कारण है कि भारतीय बंदरगाहों पर बड़ी तादात में पाम ऑइल के कंटेनर खड़े हुए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार के पाम ऑइल आयात पर नियंत्रण का मतलब है कि आयातकों को अब नया लाइसेंस ख़रीदना होगा और इस नए लाइसेंस का इस्तेमाल मलेशिया से आ रहे जहाजों के सामान को लेने से मना करने या देरी करने के लिए किया जा सकता है।
मोदी सरकार के कूटनीतिक क़दम से मलेशिया को बड़ा झटका लगा है। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को इस बात का अहसास हो गया है कि भारत के आंतरिक मामलों में बयानबाजी कर उनसे ग़लती हो गई है। मोदी सरकार के पाम ऑइल पर लिए गये कूटनीतिक फ़ैसले के बाद महातिर मोहम्मद का कहना है, “मलेशिया भारत के ख़िलाफ़ किसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, क्योंकि हम भारत के ख़िलाफ़ कोई जवाबी कार्रवाई करने के लिए बहुत छोटे देश हैं। हमें इस समस्या से बाहर निकलने के लिए दूसरे तरीक़ों और साधनों का इस्तेमाल करना होगा।”
हालांकि, मोदी सरकार के पाम ऑइल पर लिए गए फ़ैसले से मलेशिया को काफ़ी नुकसान हुआ है। लेकिन अभी भी मलेशिया के 94 साल के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद मुस्लिम देशों के बीच नेता बनने की कोशिश में हैं। महातिर का कहना है, “मैं भारत सरकार के आयात पर प्रतिबंध के फ़ैसले को लेकर चिंतित हूं, लेकिन मैं ग़लत फ़ैसलों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहूंगा और इसके लिए मुझे कोई भी क़ीमत चुकानी पड़े।”
मोदी सरकार के कड़े फ़ैसले के बाद मलेशिया को आर्थिक रूप से काफ़ी नुकसान उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। दरअसल, मलेशिया से सबसे ज़्यादा पाम ऑइल का आयातक देश भारत ही है। साल 2019 में भारत मलेशिया के पॉम ऑइल का सबसे बड़ा ख़रीददार था। साल 2019 में भारत ने मलेशिया से 40 लाख टन तेल आयात किया था। कहा जा रहा है कि यदि भारत और मलेशिया के बीच सम्बन्धों में सुधार नहीं आता है तो आने वाले समय में मलेशिया के साथ पाम ऑइल का आयात 10 लाख टन से भी नीचे जा सकता है।