यदि आप भी करते हैं डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल तो रहें ज़रा सावधान!
Wednesday - January 22, 2020 10:38 am ,
Category : WTN HINDI
भारत में बढ़ रहे हैं डेटिंग ऐप्स के यूज़र्स
आपकी जानकारी के बिना आपकी निजी जानकारियां बेच रहे हैं कई ऐप्स
JAN 22 (WTN) – टेक्नोलॉजी के इस दौर में आप ख़ुद को स्मार्टफ़ोन से दूर नहीं रख सकते हैं। दरअसल, मोबाइल फ़ोन आज की सबसे बड़ी ज़रूरतों में से एक ज़रूरत बन गया है। हर वो ज़रूरी काम जिसके लिए पहले आपको लाइनों में लगना पड़ता था और अपना क़ीमती समय ख़राब करना पड़ता था, आजकल वहीं काम मोबाइल फ़ोन पर ऑनलाइन हो जाते हैं। लेकिन यह बात भी सही है कि टेक्नोलॉजी की इस दुनिया में इंसान पहले की तुलना में ख़ुद को कुछ ज़्यादा ही अकेला महसूस करने लगा है।
आधुनिक व्यस्त ज़िन्दगी में आम इंसान के पास ख़ुद के लिए ही वक़्त नहीं है तो अपने रिश्तेदारों और मित्रों के लिए उसके पास समय कहां से बचेगा। ऐसे में देखा गया है कि दौड़ती भागती ज़िन्दगी में अपनेपन की तलाश में लोग डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक सर्वे के मुताबिक़ भारत में डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। डेटिंग ऐप्स के ज़रिए साथी ढूंढने का कल्चर धीरे-धीरे भारतीय लोगों को पसन्द आ रहा है। लेकिन यदि आप भी डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, या फ़िर डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें यह दावा किया जा रहा है कि डेटिंग ऐप्स में यूज़र्स का डेटा ख़तरे में है।
डेटिंग ऐप्स में यूज़र्स का डेटा ख़तरे में हैं, यह पढ़कर आप सोच में पढ़ गए होंगे और आपको डर भी लग रहा होगा। दरअसल, इन दिनों यूज़र्स के बीच प्रचलित डेटिंग ऐप्स टिंडर, (tinder), ग्रिंडर, (Grindr) और ओकेक्युपिड (OkCupid) जैसे ऐप्स में यूज़र्स का डेटा ख़तरे में है। जानकारी के लिए बता दें कि नार्वे कंज्यूमर काउन्सिल का दावा है कि इन ऐप्स पर मौजूद यूज़र्स की निजी जानकारियां एडवरटाइजिंग टेक्नोलॉजी कम्पनियों के साथ शेयर की जा रही हैं। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि Period tracker ऐप और Virtual makeup app Perfect 365 जैसे ऐप्स भी यूज़र्स के निजी डेटा को विज्ञापन कम्पनियों के साथ शेयर कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार, डेटिंग ऐप्स से यूज़र्स का पर्सनल डेटा दूसरी कम्पनियों के साथ शेयर करना यूरोपियन डेटा प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है, लेकिन फ़िर भी डेटिंग ऐप्स ऐसा कर रहे हैं। बता दें कि नार्वे कंज्यूमर काउन्सिल सरकार की मदद से चलने वाला एक नॉनप्रॉफिट ग्रुप है। काउन्सिल के मुताबिक़, ऑनलाइन विज्ञापन का काम करने वाली कम्पनियां स्मार्टफ़ोन यूज़र्स की प्रोफाइल को ट्रैक कर रही हैं। नार्वे की इस काउन्सिल ने एक साइबर सिक्योरिटी कम्पनी Mnemonic के साथ मिलकर 10 एण्ड्रॉयड ऐप्स के अध्ययन के बाद यह दावा किया है कि यह ऐप्स 135 अलग-अलग थर्ड पार्टी विज्ञापन कम्पनियों के साथ अपना डेटा शेयर कर रहे हैं।
काउन्सिल के मुताबिक़ नियमों के मुताबिक़ यह पूरी स्थिति नियंत्रण से बाहर है। डेटिंग ऐप्स द्वारा यूज़र्स की पर्सनल जानकारी विज्ञापन कम्पनियों को शेयर करने पर काउन्सिल ने यूरोपियन रेगूलेटर्स से अपील की है कि वे इस बारे में संज्ञान लेकर सख़्त से सख़्त जनरल डेटा प्राइवेसी रेगूलेशन (GDPR) क़ानून को लागू करें। दरअसल, यूरोप के देशों में निजता काफ़ी प्रमुख और संवेदनशील मुद्दा रहा है। वहां पर ऐप्स बनाने वाली कम्पनियों को सख़्त हिदायत होती है कि उनके ऐप्स के जरिए किसी की भी निजता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए, और ऐप्स किसी के भी साथ यूज़र्स के पर्सनल डेटा को शेयर नहीं करेंगे।
वैसे हमारी भी आपको सलाह है कि अपने स्मार्टफ़ोन में कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले उस ऐप के बारे में पूरी जानकारी पता करें। साथ ही ऐप को डाउनलोड करते समय ऐप के नियम और शर्तों को ज़रूर पढ़ें। वहीं स्मार्टफ़ोन में किसी भी ऐप को डाउनलोड करते समय ऐप द्वारा कई तरह की ऐक्सेस मांगी जाती हैं, ऐसे में आपको ध्यान रखना चाहिए कि ऐप द्वारा कौन-कौन सी ऐक्सेस ली जा रही हैं। वहीं समय-समय पर पता करते रहिए कि जो ऐप आपने डाउनलोड किया है उस ऐप की टेक्नोलॉजी वर्ल्ड में क्या इमेज और रिपोर्ट है। यदि आपने असावधानी बरती तो हो सकता है इस तरह के ऐप्स आपके निजी डेटा को किसी कम्पनी के साथ शेयर करते रहें और आपको इसका पता ही नहीं चले।
JAN 22 (WTN) – टेक्नोलॉजी के इस दौर में आप ख़ुद को स्मार्टफ़ोन से दूर नहीं रख सकते हैं। दरअसल, मोबाइल फ़ोन आज की सबसे बड़ी ज़रूरतों में से एक ज़रूरत बन गया है। हर वो ज़रूरी काम जिसके लिए पहले आपको लाइनों में लगना पड़ता था और अपना क़ीमती समय ख़राब करना पड़ता था, आजकल वहीं काम मोबाइल फ़ोन पर ऑनलाइन हो जाते हैं। लेकिन यह बात भी सही है कि टेक्नोलॉजी की इस दुनिया में इंसान पहले की तुलना में ख़ुद को कुछ ज़्यादा ही अकेला महसूस करने लगा है।
आधुनिक व्यस्त ज़िन्दगी में आम इंसान के पास ख़ुद के लिए ही वक़्त नहीं है तो अपने रिश्तेदारों और मित्रों के लिए उसके पास समय कहां से बचेगा। ऐसे में देखा गया है कि दौड़ती भागती ज़िन्दगी में अपनेपन की तलाश में लोग डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक सर्वे के मुताबिक़ भारत में डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। डेटिंग ऐप्स के ज़रिए साथी ढूंढने का कल्चर धीरे-धीरे भारतीय लोगों को पसन्द आ रहा है। लेकिन यदि आप भी डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, या फ़िर डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें यह दावा किया जा रहा है कि डेटिंग ऐप्स में यूज़र्स का डेटा ख़तरे में है।
डेटिंग ऐप्स में यूज़र्स का डेटा ख़तरे में हैं, यह पढ़कर आप सोच में पढ़ गए होंगे और आपको डर भी लग रहा होगा। दरअसल, इन दिनों यूज़र्स के बीच प्रचलित डेटिंग ऐप्स टिंडर, (tinder), ग्रिंडर, (Grindr) और ओकेक्युपिड (OkCupid) जैसे ऐप्स में यूज़र्स का डेटा ख़तरे में है। जानकारी के लिए बता दें कि नार्वे कंज्यूमर काउन्सिल का दावा है कि इन ऐप्स पर मौजूद यूज़र्स की निजी जानकारियां एडवरटाइजिंग टेक्नोलॉजी कम्पनियों के साथ शेयर की जा रही हैं। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि Period tracker ऐप और Virtual makeup app Perfect 365 जैसे ऐप्स भी यूज़र्स के निजी डेटा को विज्ञापन कम्पनियों के साथ शेयर कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार, डेटिंग ऐप्स से यूज़र्स का पर्सनल डेटा दूसरी कम्पनियों के साथ शेयर करना यूरोपियन डेटा प्राइवेसी कानून का उल्लंघन है, लेकिन फ़िर भी डेटिंग ऐप्स ऐसा कर रहे हैं। बता दें कि नार्वे कंज्यूमर काउन्सिल सरकार की मदद से चलने वाला एक नॉनप्रॉफिट ग्रुप है। काउन्सिल के मुताबिक़, ऑनलाइन विज्ञापन का काम करने वाली कम्पनियां स्मार्टफ़ोन यूज़र्स की प्रोफाइल को ट्रैक कर रही हैं। नार्वे की इस काउन्सिल ने एक साइबर सिक्योरिटी कम्पनी Mnemonic के साथ मिलकर 10 एण्ड्रॉयड ऐप्स के अध्ययन के बाद यह दावा किया है कि यह ऐप्स 135 अलग-अलग थर्ड पार्टी विज्ञापन कम्पनियों के साथ अपना डेटा शेयर कर रहे हैं।
काउन्सिल के मुताबिक़ नियमों के मुताबिक़ यह पूरी स्थिति नियंत्रण से बाहर है। डेटिंग ऐप्स द्वारा यूज़र्स की पर्सनल जानकारी विज्ञापन कम्पनियों को शेयर करने पर काउन्सिल ने यूरोपियन रेगूलेटर्स से अपील की है कि वे इस बारे में संज्ञान लेकर सख़्त से सख़्त जनरल डेटा प्राइवेसी रेगूलेशन (GDPR) क़ानून को लागू करें। दरअसल, यूरोप के देशों में निजता काफ़ी प्रमुख और संवेदनशील मुद्दा रहा है। वहां पर ऐप्स बनाने वाली कम्पनियों को सख़्त हिदायत होती है कि उनके ऐप्स के जरिए किसी की भी निजता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए, और ऐप्स किसी के भी साथ यूज़र्स के पर्सनल डेटा को शेयर नहीं करेंगे।
वैसे हमारी भी आपको सलाह है कि अपने स्मार्टफ़ोन में कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले उस ऐप के बारे में पूरी जानकारी पता करें। साथ ही ऐप को डाउनलोड करते समय ऐप के नियम और शर्तों को ज़रूर पढ़ें। वहीं स्मार्टफ़ोन में किसी भी ऐप को डाउनलोड करते समय ऐप द्वारा कई तरह की ऐक्सेस मांगी जाती हैं, ऐसे में आपको ध्यान रखना चाहिए कि ऐप द्वारा कौन-कौन सी ऐक्सेस ली जा रही हैं। वहीं समय-समय पर पता करते रहिए कि जो ऐप आपने डाउनलोड किया है उस ऐप की टेक्नोलॉजी वर्ल्ड में क्या इमेज और रिपोर्ट है। यदि आपने असावधानी बरती तो हो सकता है इस तरह के ऐप्स आपके निजी डेटा को किसी कम्पनी के साथ शेयर करते रहें और आपको इसका पता ही नहीं चले।