जानिए आख़िर क्यों आटे और रोटी के लिए पाकिस्तान में मचा है ‘हाहाकार’?
Wednesday - January 22, 2020 1:34 pm ,
Category : WTN HINDI
पाकिस्तान में काफ़ी महंगा हुआ आटा
इमरान ख़ान सरकार की बदइंतजामी से रोटी के लिए ‘तरसे’ पाकिस्तानी
JAN 22 (WTN) – भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को किस तरह से बढ़ावा देता है यह पूरी दुनिया जानती है। भारत में आतंक फ़ैलाने के लिए आतंकवादियों को प्रशिक्षण देना और उन्हें हथियारों की सहायता देने से लेकर उन्हें आर्थिक मदद करने में पाकिस्तान सालों से पैसा ख़र्च करता आ रहा है। लेकिन इसी पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों दिन इतनी ख़राब होती जा रही है कि पाकिस्तान में लोगों को खाने के लिए रोटियां तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। जी हां, पहले से ही आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लोग अब आटे की कमी का सामना कर रहे हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान के कई राज्यों में लोगों को आटा तक नसीब नहीं हो पा रहा है और इसलिए उन्हें खाने के लिए काफ़ी महंगे दामों पर रोटियां मिल रही हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन दिनों पाकिस्तान के पंजाब, बलुचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान के लोग आटे की कमी का सामना कर रहे हैं। इन राज्यों में कई जगहों पर आटे की इतनी ज़्यादा किल्लत हो गई है कि काफ़ी लोग रोटी और नान ना मिल पाने के कारण सिर्फ़ चावल खाकर ही गुजारा कर रहे हैं। ख़बर है कि आटे की कमी का ऐसा असर हुआ है कि खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में नान बनाने वाली कई दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। इतना ही नहीं, आटे की कमी और दाम बढ़ने के कारण नान तैयार करने वाले नानबाई हड़ताल पर चले गए हैं।
हालांकि, लोगों को खाने के लिए रोटी नहीं मिलने के सवाल पर प्रशासन का कहना है कि आटा या गेहूं की कमी नहीं है बल्कि सरकार को बदनाम करने और लाभ कमाने के लिए जान बूझकर आटे का संकट पैदा किया जा रहा है। वहीं सरकार का यह भी कहना है कि आटे के भाव में तेज़ी का सबसे बड़ा कारण हाल के दिनों में ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल है। सरकार के मुताबिक़, हड़ताल की वजह से मिलों को समय पर गेहूं की सप्लाई नहीं हो सकी है, और सप्लाई कम होने और मांग बढ़ने से क़ीमतों में तेज़ी देखने को मिल रही है।
हालांकि स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आटे की कई किल्लत नहीं है बल्कि मुनाफ़ा कमाने और सरकार का बदनाम करने के लिए सुनियोजित तरीक़े से आटे की कालाबाज़ारी की जा रही है। लेकिन आटे की कमी से बढ़ती लोगों की नाराज़गी को ध्यान रखते हुए इमरान ख़ान सरकार ने आटे की कमी को जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में क़दम बढ़ाए हैं। जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान की सरकार ने 3 लाख टन गेहूं के आयात को मन्ज़ूरी दे दी है, लेकिन विदेश से आयात की पहले खेप आने में 15 फरवरी तक का समय लग सकता है। हालांकि, पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने ये साफ़ नहीं किया है कि वह किस देश से गेहूं ख़रीदेगी। वैसे पाकिस्तान की निजी कम्पनियां जिस देश से भी चाहें गेहूं आयात कर सकती हैं।
पाकिस्तान में आटे की कमी के कारण आटे और रोटी के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो गई है और इसलिए जनता की नाराज़गी को देखते हुए पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार दुकानदारों पर दबाव डाल रही है कि वे कम दाम में रोटी और आटा बेचे। दरअसल, पाकिस्तान में गेहूं, आटे और रोटी की कमी के पीछे इमरान ख़ान सरकार की बदइंतजामी ज़्यादा ज़िम्मेदार है। पाकिस्तान मे गेहूं का उत्पादन होता है, लेकिन इतना ज़्यादा नहीं होता है कि वो इसे निर्यात करे।
ज़रूरत के मुताबिक़ ही उत्पादन होने के बाद भी साल 2018 के आख़िर से लेकर जून 2019 के बीच तक पाकिस्तान ने 6 लाख मिट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया था। लेकिन देश में गेहूं की कमी की शिकायतें मिलने के बाद जुलाई 2019 में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी गई। लेकिन गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने के बाद भी अक्टूबर के महीने तक क़रीब 48 हज़ार टन गेहूं निर्यात किया गया। रोक के बाद भी गेहूं का निर्यात होने पर विपक्षी पार्टियों ने इस पर सरकार का विरोध किया था और जांच की मांग भी की थी। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि गेहूं के नाम पर पाकिस्तान में बड़ा घोटाला हुआ है और जानबूझ कर गेहूं और आटे की कमी पैदा की जा रही है जिससे चुनिन्दा लोग मुनाफ़ा कमा सकें।
इधर आटे की कमी से परेशानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जमाखोरी से निपटने और क़ीमतों को कम करने के लिए सख्त आदेश दिए हैं। लेकिन सरकार के इस आदेश का उल्टा असर हो गया है। खैबर पख्तूनख्वाह की एक संस्था ने सरकार के इस फ़ैसले के विरोध में हड़ताल करने का ऐलान किया है। वहीं पंजाब प्रांत की कई अन्य संस्थाओं ने सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर सरकार उन्हें आटे की क़ीमतें नहीं बढ़ाने देती है तो वे भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
वहीं होटल संचालकों की एसोसिएशन ने इमरान ख़ान सरकार से पुराने रेट पर आटा उपलब्ध कराने को कहा है। इनका कहना है कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो उन्हें नान और रोटी की क़ीमतों को बढ़ाने की इजाज़त दी जाए। साफ़ है कि इमरान ख़ान सरकार की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण पाकिस्तान में आटे की क़ीमतें इतनी ज़्यादा बढ़ गई हैं कि लोगों को रोटी खाने तक के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बेहतर होगा कि भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने में ध्यान देने के बजाए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अपने देश की जनता को दो वक़्त की रोटी मुहैया कराएं।
JAN 22 (WTN) – भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को किस तरह से बढ़ावा देता है यह पूरी दुनिया जानती है। भारत में आतंक फ़ैलाने के लिए आतंकवादियों को प्रशिक्षण देना और उन्हें हथियारों की सहायता देने से लेकर उन्हें आर्थिक मदद करने में पाकिस्तान सालों से पैसा ख़र्च करता आ रहा है। लेकिन इसी पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों दिन इतनी ख़राब होती जा रही है कि पाकिस्तान में लोगों को खाने के लिए रोटियां तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। जी हां, पहले से ही आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लोग अब आटे की कमी का सामना कर रहे हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान के कई राज्यों में लोगों को आटा तक नसीब नहीं हो पा रहा है और इसलिए उन्हें खाने के लिए काफ़ी महंगे दामों पर रोटियां मिल रही हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन दिनों पाकिस्तान के पंजाब, बलुचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान के लोग आटे की कमी का सामना कर रहे हैं। इन राज्यों में कई जगहों पर आटे की इतनी ज़्यादा किल्लत हो गई है कि काफ़ी लोग रोटी और नान ना मिल पाने के कारण सिर्फ़ चावल खाकर ही गुजारा कर रहे हैं। ख़बर है कि आटे की कमी का ऐसा असर हुआ है कि खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में नान बनाने वाली कई दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। इतना ही नहीं, आटे की कमी और दाम बढ़ने के कारण नान तैयार करने वाले नानबाई हड़ताल पर चले गए हैं।
हालांकि, लोगों को खाने के लिए रोटी नहीं मिलने के सवाल पर प्रशासन का कहना है कि आटा या गेहूं की कमी नहीं है बल्कि सरकार को बदनाम करने और लाभ कमाने के लिए जान बूझकर आटे का संकट पैदा किया जा रहा है। वहीं सरकार का यह भी कहना है कि आटे के भाव में तेज़ी का सबसे बड़ा कारण हाल के दिनों में ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल है। सरकार के मुताबिक़, हड़ताल की वजह से मिलों को समय पर गेहूं की सप्लाई नहीं हो सकी है, और सप्लाई कम होने और मांग बढ़ने से क़ीमतों में तेज़ी देखने को मिल रही है।
हालांकि स्थानीय प्रशासन का कहना है कि आटे की कई किल्लत नहीं है बल्कि मुनाफ़ा कमाने और सरकार का बदनाम करने के लिए सुनियोजित तरीक़े से आटे की कालाबाज़ारी की जा रही है। लेकिन आटे की कमी से बढ़ती लोगों की नाराज़गी को ध्यान रखते हुए इमरान ख़ान सरकार ने आटे की कमी को जल्द से जल्द पूरा करने की दिशा में क़दम बढ़ाए हैं। जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान की सरकार ने 3 लाख टन गेहूं के आयात को मन्ज़ूरी दे दी है, लेकिन विदेश से आयात की पहले खेप आने में 15 फरवरी तक का समय लग सकता है। हालांकि, पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने ये साफ़ नहीं किया है कि वह किस देश से गेहूं ख़रीदेगी। वैसे पाकिस्तान की निजी कम्पनियां जिस देश से भी चाहें गेहूं आयात कर सकती हैं।
पाकिस्तान में आटे की कमी के कारण आटे और रोटी के दामों में बेतहाशा वृद्धि हो गई है और इसलिए जनता की नाराज़गी को देखते हुए पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार दुकानदारों पर दबाव डाल रही है कि वे कम दाम में रोटी और आटा बेचे। दरअसल, पाकिस्तान में गेहूं, आटे और रोटी की कमी के पीछे इमरान ख़ान सरकार की बदइंतजामी ज़्यादा ज़िम्मेदार है। पाकिस्तान मे गेहूं का उत्पादन होता है, लेकिन इतना ज़्यादा नहीं होता है कि वो इसे निर्यात करे।
ज़रूरत के मुताबिक़ ही उत्पादन होने के बाद भी साल 2018 के आख़िर से लेकर जून 2019 के बीच तक पाकिस्तान ने 6 लाख मिट्रिक टन गेहूं का निर्यात किया था। लेकिन देश में गेहूं की कमी की शिकायतें मिलने के बाद जुलाई 2019 में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी गई। लेकिन गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने के बाद भी अक्टूबर के महीने तक क़रीब 48 हज़ार टन गेहूं निर्यात किया गया। रोक के बाद भी गेहूं का निर्यात होने पर विपक्षी पार्टियों ने इस पर सरकार का विरोध किया था और जांच की मांग भी की थी। विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि गेहूं के नाम पर पाकिस्तान में बड़ा घोटाला हुआ है और जानबूझ कर गेहूं और आटे की कमी पैदा की जा रही है जिससे चुनिन्दा लोग मुनाफ़ा कमा सकें।
इधर आटे की कमी से परेशानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जमाखोरी से निपटने और क़ीमतों को कम करने के लिए सख्त आदेश दिए हैं। लेकिन सरकार के इस आदेश का उल्टा असर हो गया है। खैबर पख्तूनख्वाह की एक संस्था ने सरकार के इस फ़ैसले के विरोध में हड़ताल करने का ऐलान किया है। वहीं पंजाब प्रांत की कई अन्य संस्थाओं ने सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर सरकार उन्हें आटे की क़ीमतें नहीं बढ़ाने देती है तो वे भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
वहीं होटल संचालकों की एसोसिएशन ने इमरान ख़ान सरकार से पुराने रेट पर आटा उपलब्ध कराने को कहा है। इनका कहना है कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो उन्हें नान और रोटी की क़ीमतों को बढ़ाने की इजाज़त दी जाए। साफ़ है कि इमरान ख़ान सरकार की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण पाकिस्तान में आटे की क़ीमतें इतनी ज़्यादा बढ़ गई हैं कि लोगों को रोटी खाने तक के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बेहतर होगा कि भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने में ध्यान देने के बजाए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अपने देश की जनता को दो वक़्त की रोटी मुहैया कराएं।