बीएस-6 मानक के लिए सरकार और ऑटो इण्डस्ट्री पूरी तरह तैयार
Wednesday - January 22, 2020 3:56 pm ,
Category : WTN HINDI
एक अप्रैल 2020 से लागू होंगे बीएस-6 मानक
थोड़ी महंगी हैं लेकिन 80 प्रतिशत तक प्रदूषण कम करेंगी बीएस-6 मानक वाली गाड़ियां
JAN 22 (WTN) – यदि आप गाड़ी ख़रीदने की तैयारी में हैं तो क्या आपने बीएस-6 गाड़ियों के बारे में सुना है? यदि आप बीएस-6 कैटेगरी की गाड़ियों के बारे में नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको विस्तार से बताते हैं कि आख़िर क्या है गाड़ियों की बीएस-6 कैटेगरी और क्या हैं इनके फ़ायदे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि BS यानी Bharat Stage मोटर वाहनों के लिए एक उत्सर्जन मानक नियमन हैं, जिसका उद्देश्य मोटर वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना और उन्हें कम करना है।
बीएस-6 मानकों को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। भारत सरकार ने साल 2000 से बीएस उत्सर्जन मानक की शुरुआत की थी। बीएस यानी भारत स्टैण्डर्ड मानदण्ड यूरोपीय नियमों पर आधारित है। देश में बीएस-4 के बाद अब सीधे बीएस-6 मानक लागू करने की तैयारी है। वहीं इस बारे में सरकार और ऑटो इण्डस्ट्री का दावा है कि एक अप्रैल 2020 की समयसीमा के अन्दर भारत-चरण-6 (BS-6) मानक वाले ईंधन और वाहन बाज़ार में उतारने के लिए वे पूरी तरह से तैयार हैं।
दरअसल, बीएस-6 एक नया उत्सर्जन मानक है, जिसे एक अप्रैल 2020 से देश के सभी वाहनों को अपनाना होगा। इधर सरकार भी बीएस-6 वाहनों के लिए अनुकूल बीएस-6 ईंधन लाने की तैयारी में है। बता दें कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने EPCA {Environment Pollution (Prevention and Control) Authority} यानी पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण को बताया है कि बीएस-6 ईंधन एक अप्रैल से उपलब्ध होगा।
इधर ऑटो इंडस्ट्री ने ईपीसीए से कहा है कि उन्होंने समयसीमा के अन्दर बीएस-6 मानक वाले वाहन बनाने का काम पूरा करने के लिए काफ़ी प्रयास किये हैं। बीएस-6 इंजन वाले वाहनों के मॉडल पहले ही पेश किए जा चुके हैं और कुछ अन्य मॉडल को भी जल्द ही पेश किया जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि बीएस-4 ईंधन मानक वाले नए वाहनों का पंजीकरण एक अप्रैल को बंद कर दिया जाएगा।
दावा किया जा रहा है कि बीएस-6 मानक वाले वाहनों के काफ़ी फ़ायदे हैं। कहा जा रहा है कि बीएस-6 वाहनों के इस्तेमाल से हवा में प्रदूषण कम होगा। इन वाहनों के इस्तेमाल से हवा में जहरीले तत्व कम उत्सर्जित होंगे, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दावा किया ज रहा है कि बीएस-4 की तुलना में बीएस-6 में प्रदूषण फ़ैलाने वाले ख़तरनाक पदार्थ कम उत्सर्जित होंगे।
वहीं बीएस-6 ईंधन की बात करें तो नाइट्रोजन डाइऑक्साइड,कार्बन मोनोऑक्साइड,सल्फर डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर के मामले में बीएस-6 ग्रेड का डीज़ल काफी अच्छा होगा। बता दें कि बीएस-4 औऱ बीएस-3 ईंधन में सल्फर की मात्रा 50 पीपीएम होती है, लेकिन बीएस-6 मानकों में यह 50 से घटकर सिर्फ 10 पीपीएम ही रह जाएगी। यानी कि बीएस-6 ईंधन और इंजन के इस्तेमाल से प्रदूषण काफ़ी कम किया जा सकेगा। लेकिन जानकारी के बता दें कि बीएस-6 मानक गाड़ियों की क़ीमत बीएस-4 से ज़्यादा रहने वाली है। अनुमान के मुताबिक़, बीएस-6 मानक वाली पेट्रोल गाड़ियां 3 से 5 प्रतिशत तो डीज़ल गाड़ियां 8 से 10 प्रतिशत महंगी हो सकती हैं।
JAN 22 (WTN) – यदि आप गाड़ी ख़रीदने की तैयारी में हैं तो क्या आपने बीएस-6 गाड़ियों के बारे में सुना है? यदि आप बीएस-6 कैटेगरी की गाड़ियों के बारे में नहीं जानते हैं, तो आज हम आपको विस्तार से बताते हैं कि आख़िर क्या है गाड़ियों की बीएस-6 कैटेगरी और क्या हैं इनके फ़ायदे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि BS यानी Bharat Stage मोटर वाहनों के लिए एक उत्सर्जन मानक नियमन हैं, जिसका उद्देश्य मोटर वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना और उन्हें कम करना है।
बीएस-6 मानकों को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। भारत सरकार ने साल 2000 से बीएस उत्सर्जन मानक की शुरुआत की थी। बीएस यानी भारत स्टैण्डर्ड मानदण्ड यूरोपीय नियमों पर आधारित है। देश में बीएस-4 के बाद अब सीधे बीएस-6 मानक लागू करने की तैयारी है। वहीं इस बारे में सरकार और ऑटो इण्डस्ट्री का दावा है कि एक अप्रैल 2020 की समयसीमा के अन्दर भारत-चरण-6 (BS-6) मानक वाले ईंधन और वाहन बाज़ार में उतारने के लिए वे पूरी तरह से तैयार हैं।
दरअसल, बीएस-6 एक नया उत्सर्जन मानक है, जिसे एक अप्रैल 2020 से देश के सभी वाहनों को अपनाना होगा। इधर सरकार भी बीएस-6 वाहनों के लिए अनुकूल बीएस-6 ईंधन लाने की तैयारी में है। बता दें कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने EPCA {Environment Pollution (Prevention and Control) Authority} यानी पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण को बताया है कि बीएस-6 ईंधन एक अप्रैल से उपलब्ध होगा।
इधर ऑटो इंडस्ट्री ने ईपीसीए से कहा है कि उन्होंने समयसीमा के अन्दर बीएस-6 मानक वाले वाहन बनाने का काम पूरा करने के लिए काफ़ी प्रयास किये हैं। बीएस-6 इंजन वाले वाहनों के मॉडल पहले ही पेश किए जा चुके हैं और कुछ अन्य मॉडल को भी जल्द ही पेश किया जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि बीएस-4 ईंधन मानक वाले नए वाहनों का पंजीकरण एक अप्रैल को बंद कर दिया जाएगा।
दावा किया जा रहा है कि बीएस-6 मानक वाले वाहनों के काफ़ी फ़ायदे हैं। कहा जा रहा है कि बीएस-6 वाहनों के इस्तेमाल से हवा में प्रदूषण कम होगा। इन वाहनों के इस्तेमाल से हवा में जहरीले तत्व कम उत्सर्जित होंगे, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दावा किया ज रहा है कि बीएस-4 की तुलना में बीएस-6 में प्रदूषण फ़ैलाने वाले ख़तरनाक पदार्थ कम उत्सर्जित होंगे।
वहीं बीएस-6 ईंधन की बात करें तो नाइट्रोजन डाइऑक्साइड,कार्बन मोनोऑक्साइड,सल्फर डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर के मामले में बीएस-6 ग्रेड का डीज़ल काफी अच्छा होगा। बता दें कि बीएस-4 औऱ बीएस-3 ईंधन में सल्फर की मात्रा 50 पीपीएम होती है, लेकिन बीएस-6 मानकों में यह 50 से घटकर सिर्फ 10 पीपीएम ही रह जाएगी। यानी कि बीएस-6 ईंधन और इंजन के इस्तेमाल से प्रदूषण काफ़ी कम किया जा सकेगा। लेकिन जानकारी के बता दें कि बीएस-6 मानक गाड़ियों की क़ीमत बीएस-4 से ज़्यादा रहने वाली है। अनुमान के मुताबिक़, बीएस-6 मानक वाली पेट्रोल गाड़ियां 3 से 5 प्रतिशत तो डीज़ल गाड़ियां 8 से 10 प्रतिशत महंगी हो सकती हैं।