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कमज़ोर पासवर्ड पर हुआ एक बड़ा खुलासा!

Thursday - January 23, 2020 10:53 am , Category : WTN HINDI
हैकर्स के निशाने पर रहते हैं कमज़ोर पासवर्ड
हैकर्स के निशाने पर रहते हैं कमज़ोर पासवर्ड

साइबर अपराध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर मिनट 29 लाख डॉलर के नुकसान का अनुमान

JAN 23 (WTN) – टेक्नोलॉजी के इस दौर में आप इंटरनेट का इस्तेमाल तो ज़रूर करते ही होंगे। डेस्कटॉप, लैपटॉप और स्मार्टफ़ोन में इंटरनेट का इस्तेमाल करना आजकल आम बात है। वहीं स्वाभाविक है कि आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो आपको कई तरह के पासवर्ड का इस्तेमाल भी करना ही पड़ता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, इंटरनेट का दैनिक इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को कम से कम 15 पासवर्ड याद रखने होते हैं। लेकिन कई बार देखा गया है कि याद रखने के लिए ज़्यादातर लोग अपने पासवर्ड्स को काफ़ी कमज़ोर बनाते हैं और इसी कारण से उनका डेटा चोरी हो सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनियाभर में साइबर अपराध और डेटा चोरी की बढ़ती घटनाओं के बीच एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पासवर्ड चोरी होने का सबसे बड़ा कारण है पासवर्ड का कमज़ोर होना। जीहां यदि आपने आपके किसी भी पासवर्ड को कमज़ोर बनाया है तो आपको सावधान रहने की ज़रूरत है, क्योंकि आपके कमज़ोर पासवर्ड का फ़ायदा उठाकर हैकर्स आपके पर्सनल डेटा को चुरा सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि WEF (World Economic Forum) यानी विश्व आर्थिक मंच ने यह रिपोर्ट एफआईडीओ अलायंस के साथ मिलकर तैयार की है।
 
रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि कमज़ोर पासवर्ड होने से ज़्यादा बेहतर है कि पासवर्ड ही ना रखा जाए, क्योंकि हैकर्स की नज़र सबसे पहले कमज़ोर पासवर्ड पर ही होती है। WEF (World Economic Forum) ने साल 2020 की वार्षिक बैठक के दौरान यह रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर डेटा चोरी होने की पांच घटनाओं में से चार घटनाओं का कारण पासवर्ड का कमज़ोर होना या उसका चोरी हो जाना होता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2020 में साइबर अपराध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर मिनट क़रीब 29 लाख डॉलर का नुकसान आर्थिक साइबर हमलों से उठाना पड़ेगा, और इसमें क़रीब 80 प्रतिशत साइबर हमले पासवर्ड से जुड़े होंगे।
 
जानकारी के लिए बता दें कि विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक़, याददाश्त पर आधारित कोई भी पिन या पासवर्ड कभी भी ज़्यादा सुरक्षित नहीं रहता है। इस तरह के पिन और पासवर्ड्स यूज़र और कम्पनियों दोनों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी कम्पनियों के आईटी हेल्प डेस्क की क़रीब 50 प्रतिशत लागत सिर्फ़ पासवर्ड के रीसेट करने में ही ख़र्च होती है और यह काम करने वाले कर्मचारियों पर कम्पनियों को औसतन 10 लाख डॉलर वार्षिक ख़र्च करना पड़ता है।
 
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पासवर्ड रहित प्रमाणीकरण को बढ़ावा दिया जाए, क्योंकि डिजिटल वर्ल्ड की सभी सुरक्षा बाधाओं को अभी नहीं हटाया गया है। दरअसल, कमज़ोर पासवर्ड और उसे हैक होने से बचाने के लिए ऐसा सिस्टम विकसित करना चाहिए जो AI (Artificial intelligence) यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या मशीन लर्निंग पर आधारित हो जिससे कम्पनी के वक़्त और पैसों की बचत हो सके।

दरअसल साइबर सुरक्षा और डिजिटल भरोसे के भविष्य को आकार देने के लिए बायोमीट्रिक्स की बढ़ती उपलब्धता और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के चलते उपभोक्ता और भी बेहतर डिजिटल अनुभव और ऑनलाइन सुरक्षा की मांग करने लगे हैं। इसमें पासवर्ड रहित प्रमाणीकरण के लिए पांच प्रमुख प्रौद्योगिकियों को अपनाने के सुझाव दिए गए हैं, जिसमें बायोमीट्रिक्स (आंख और उंगली पर आधारित पहचान), BA (Behavioral Analytics) यानी व्यवहार आधारित पहचान, ज़ीरो नॉलेज प्रूफ्स (क्रिप्टोग्राफी में इस्तेमाल), क्यूआर कोड्स (बार कोड आधारित) और सिक्यूरिटी कीज (दो तरह के कारकों पर आधारित पहचान प्रणाली से संबंधित उपकरण)।

तो यदि आपने भी किसी भी तरह का कोई भी कमज़ोर पासवर्ड बनाया है तो हमारी आपको सलाह है कि जल्द से जल्द कोई सॉलिड पासवर्ड बनाएं, क्योंकि पासवर्ड कमज़ोर होने पर यह हैकर्स के निशाने पर हमेशा रहेगा। जब भी पासवर्ड बनाएं तो उसे ऐसा बनाएं जो कि काफ़ी कठिन हो। वैसे कम्पनियों को भी चाहिए कि वे अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में ज़रा ज़्यादा प्रभावी करें जिससे हैकर्स पासवर्ड हैक करने में सफ़ल साबित ना हो सकें।