जानिए क्यों इमरान ख़ान को याद आया भारत?
Thursday - January 23, 2020 4:04 pm ,
Category : WTN HINDI
इमरान ख़ान को भारत के साथ सम्बन्ध सुधरने की आशा
इशारों इशारों में इमरान ख़ान की भारत से सम्बन्ध सुधारने की गुज़ारिश
JAN 23 (WTN) – गहन और विस्तृत विश्लेषण के साथ यह ज़िम्मेदारी के साथ कहा जा सकता है कि एक देश के रूप में पाकिस्तान असफ़ल साबित हुआ है। भारत से अलग होकर एक नए देश के रूप में पाकिस्तान यदि चाहता तो काफ़ी कुछ हासिल कर सकता था, लेकिन धार्मिक कट्टरता को अपनाने और आतंक का गढ़ बन चुके पाकिस्तान के लोगों ने ही ख़ुद के देश का बर्बाद कर लिया है। आज पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर हो चुकी है यहां तक की एक-एक रोटी के लिए तक पाकिस्तान में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पाकिस्तान की जनता यदि चाहती तो भारत के साथ अच्छे सन्बन्ध रखकर ख़ुद को प्रगति के रास्ते पर ले जा सकती थी, लेकिन पाकिस्तानी की जनता ने धार्मिक कट्टरता और आतंक को चुना और इसी का परिणाम है कि आज की तारीख़ में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भगवान भरोसे हो गई है। बढ़ती महंगाई, लगातार कम होता निर्यात, डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी करेंसी रुपये में लगातार जारी गिरावट और बढ़ते विदेशी क़र्ज़ के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी दुनिया में मजाक का विषय बन गई है।
यह सभी जानते हैं कि पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दिन रात एक किये रहता है। पाकिस्तानी की सेना और आईएसआई के इशारे पर पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर पिछले साल आतंकी हमला हुआ था, जिसके बाद भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तान पर जबरदस्त कार्रवाई की थी और पाकिस्तान के साथ व्यापार पर कई तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए थे। भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ व्यापार पर प्रतिबन्ध लगाए जाने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को तो कुछ नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसके कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ज़रूर पटरी से उतर गई।
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों के जानकारों के मुताबिक़, भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध रखना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी ज़रूरी है और यदि जल्द ही पाकिस्तान के भारत के साथ पुराने सम्बन्ध फ़िर से बहाल नहीं हुए तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत और भी ज़्यादा ख़राब हो सकती है। भारत के साथ एक बार फ़िर से पुराने सम्बन्ध स्थापित करना पाकिस्तान के लिए कितना ज़रूरी है, इसको ख़ुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने क़बूल कर लिया है।
विश्व आर्थिक मंच 2020 में एक चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान कहा कि जब भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्ध सामान्य हो जाएंगे तो तब दुनिया को पाकिस्तान की वास्तविक रणनीतिक आर्थिक सम्भावनाओं के बारे में पता चलेगा। यानी इमरान ख़ान के बयान से साफ़ ज़ाहिर होता है कि पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली तभी ठीक हो सकती है जब पाकिस्तान के सम्बन्ध भारत के साथ फ़िर से अच्छे हों। इमरान ख़ान के बयान से साफ़ लगता है कि उनकी इच्छा है कि भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्धों मे सुधार हो। इमरान ख़ान के मुताबिक़, “मेरा दृष्टिकोण पाकिस्तान को एक कल्याणकारी देश बनाने का है, और शान्ति और स्थिरता के बिना आर्थिक वृद्धि सम्भव नहीं है। पाकिस्तान सिर्फ़ शान्ति के लिए किसी भी अन्य देश के साथ भागीदारी करने को तैयार है।”
साफ़ ज़ाहिर है कि इशारों इशारों में इमरान ख़ान ने भारत से सम्बन्ध सुधारने की गुज़ारिश की है। ख़ैर वैसे तो यह सभी जानते हैं कि पाकिस्तान कितनी भी शान्ति की बातें कर ले, पाकिस्तान की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। लेकिन फ़िर भी दुनिया के सामने शान्ति का मसीहा बनने का दिखावा करते हुए इमरान ख़ान ने पूरी दुनिया को कहा कि शान्ति और स्थिरता के बिना आर्थिक वृद्धि सम्भव नहीं है। आगे इमरान ख़ान ने कहा, “कई कारणों से पाकिस्तान की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे में हमने फ़ैसला किया है कि सिर्फ शान्ति के लिए हम किसी दूसरे देश के साथ भागीदारी करेंगे। हमने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटाने के लिए प्रयास किया। तालिबान को अफगानिस्तान से भगाने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ भागीदारी की।”
जैसा कि आप जानते ही हैं कि मोदी सरकार की आक्रामक कूटनीति के बाद से पाकिस्तान पूरी दुनिया में अकेला सा पड़ गया है। पाकिस्तान को चीन, तुर्की और मलेशिया के अलावा किसी अन्य देश का साथ कश्मीर मुद्दे पर नहीं मिल पा रहा है। इमरान ख़ान भारत की अहमियत जानते हैं और इसलिए उनको पूरी दुनिया के सामने विश्व आर्थिक मंच से यह कहना पड़ा, “पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा पड़ोसी भारत है, लेकिन दुर्भाग्य से भारत से हमारे सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं। मैं उन सब बातों में नहीं जाना चाहता हूं लेकिन एक बार भारत के साथ हमारे रिश्ते सामान्य होने के बाद दुनिया को पाकिस्तान की वास्तविक रणनीतिक उपयोगिता का पता चलेगा।”
स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान को अहसास हो चुका है कि भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध रखना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी ज़रूरी है। पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार द्वारा की गई एयरस्ट्राइक और अन्य कूटनीतिक गतिविधियों के बाद पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया था। भारत के साथ व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखना पाकिस्तान की मजबूरी है, नहीं तो भारत के साथ व्यापारिक सम्बन्ध ना होने के बाद पाकिस्तान की आर्थिक हालत क्या हो गई है यह सभी देख चुके हैं। अब जबकि पाकिस्तान में लोग रोटी तक के लिए मोहताज होते जा रहे हैं, ऐसे में पाकिस्तान चाह रहा है कि भारत के साथ जल्द से जल्द सम्बन्धों में सुधार हो जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था फ़िर से पटरी पर लौट सके।
JAN 23 (WTN) – गहन और विस्तृत विश्लेषण के साथ यह ज़िम्मेदारी के साथ कहा जा सकता है कि एक देश के रूप में पाकिस्तान असफ़ल साबित हुआ है। भारत से अलग होकर एक नए देश के रूप में पाकिस्तान यदि चाहता तो काफ़ी कुछ हासिल कर सकता था, लेकिन धार्मिक कट्टरता को अपनाने और आतंक का गढ़ बन चुके पाकिस्तान के लोगों ने ही ख़ुद के देश का बर्बाद कर लिया है। आज पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर हो चुकी है यहां तक की एक-एक रोटी के लिए तक पाकिस्तान में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पाकिस्तान की जनता यदि चाहती तो भारत के साथ अच्छे सन्बन्ध रखकर ख़ुद को प्रगति के रास्ते पर ले जा सकती थी, लेकिन पाकिस्तानी की जनता ने धार्मिक कट्टरता और आतंक को चुना और इसी का परिणाम है कि आज की तारीख़ में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भगवान भरोसे हो गई है। बढ़ती महंगाई, लगातार कम होता निर्यात, डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी करेंसी रुपये में लगातार जारी गिरावट और बढ़ते विदेशी क़र्ज़ के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी दुनिया में मजाक का विषय बन गई है।
यह सभी जानते हैं कि पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दिन रात एक किये रहता है। पाकिस्तानी की सेना और आईएसआई के इशारे पर पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर पिछले साल आतंकी हमला हुआ था, जिसके बाद भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तान पर जबरदस्त कार्रवाई की थी और पाकिस्तान के साथ व्यापार पर कई तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए थे। भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ व्यापार पर प्रतिबन्ध लगाए जाने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को तो कुछ नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसके कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ज़रूर पटरी से उतर गई।
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों के जानकारों के मुताबिक़, भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध रखना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी ज़रूरी है और यदि जल्द ही पाकिस्तान के भारत के साथ पुराने सम्बन्ध फ़िर से बहाल नहीं हुए तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत और भी ज़्यादा ख़राब हो सकती है। भारत के साथ एक बार फ़िर से पुराने सम्बन्ध स्थापित करना पाकिस्तान के लिए कितना ज़रूरी है, इसको ख़ुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने क़बूल कर लिया है।
विश्व आर्थिक मंच 2020 में एक चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान कहा कि जब भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्ध सामान्य हो जाएंगे तो तब दुनिया को पाकिस्तान की वास्तविक रणनीतिक आर्थिक सम्भावनाओं के बारे में पता चलेगा। यानी इमरान ख़ान के बयान से साफ़ ज़ाहिर होता है कि पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली तभी ठीक हो सकती है जब पाकिस्तान के सम्बन्ध भारत के साथ फ़िर से अच्छे हों। इमरान ख़ान के बयान से साफ़ लगता है कि उनकी इच्छा है कि भारत के साथ पाकिस्तान के सम्बन्धों मे सुधार हो। इमरान ख़ान के मुताबिक़, “मेरा दृष्टिकोण पाकिस्तान को एक कल्याणकारी देश बनाने का है, और शान्ति और स्थिरता के बिना आर्थिक वृद्धि सम्भव नहीं है। पाकिस्तान सिर्फ़ शान्ति के लिए किसी भी अन्य देश के साथ भागीदारी करने को तैयार है।”
साफ़ ज़ाहिर है कि इशारों इशारों में इमरान ख़ान ने भारत से सम्बन्ध सुधारने की गुज़ारिश की है। ख़ैर वैसे तो यह सभी जानते हैं कि पाकिस्तान कितनी भी शान्ति की बातें कर ले, पाकिस्तान की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। लेकिन फ़िर भी दुनिया के सामने शान्ति का मसीहा बनने का दिखावा करते हुए इमरान ख़ान ने पूरी दुनिया को कहा कि शान्ति और स्थिरता के बिना आर्थिक वृद्धि सम्भव नहीं है। आगे इमरान ख़ान ने कहा, “कई कारणों से पाकिस्तान की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे में हमने फ़ैसला किया है कि सिर्फ शान्ति के लिए हम किसी दूसरे देश के साथ भागीदारी करेंगे। हमने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटाने के लिए प्रयास किया। तालिबान को अफगानिस्तान से भगाने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ भागीदारी की।”
जैसा कि आप जानते ही हैं कि मोदी सरकार की आक्रामक कूटनीति के बाद से पाकिस्तान पूरी दुनिया में अकेला सा पड़ गया है। पाकिस्तान को चीन, तुर्की और मलेशिया के अलावा किसी अन्य देश का साथ कश्मीर मुद्दे पर नहीं मिल पा रहा है। इमरान ख़ान भारत की अहमियत जानते हैं और इसलिए उनको पूरी दुनिया के सामने विश्व आर्थिक मंच से यह कहना पड़ा, “पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा पड़ोसी भारत है, लेकिन दुर्भाग्य से भारत से हमारे सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं। मैं उन सब बातों में नहीं जाना चाहता हूं लेकिन एक बार भारत के साथ हमारे रिश्ते सामान्य होने के बाद दुनिया को पाकिस्तान की वास्तविक रणनीतिक उपयोगिता का पता चलेगा।”
स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान को अहसास हो चुका है कि भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध रखना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी ज़रूरी है। पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार द्वारा की गई एयरस्ट्राइक और अन्य कूटनीतिक गतिविधियों के बाद पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया था। भारत के साथ व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखना पाकिस्तान की मजबूरी है, नहीं तो भारत के साथ व्यापारिक सम्बन्ध ना होने के बाद पाकिस्तान की आर्थिक हालत क्या हो गई है यह सभी देख चुके हैं। अब जबकि पाकिस्तान में लोग रोटी तक के लिए मोहताज होते जा रहे हैं, ऐसे में पाकिस्तान चाह रहा है कि भारत के साथ जल्द से जल्द सम्बन्धों में सुधार हो जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था फ़िर से पटरी पर लौट सके।