अब होगा सरकार का ख़ुद का एक अलग सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म!
Friday - January 24, 2020 1:25 pm ,
Category : WTN HINDI
व्हाट्सएप की तर्ज पर होगा सरकार का नया GIMS ऐप
सरकार के संवदेनशील और गुप्त सम्वाद को सुरक्षित रखने सरकार ने उठाया बढ़ा क़दम
JAN 24 (WTN) – यदि आपके पास स्मार्टफ़ोन है तो आप उसमें व्हाट्सएप का इस्तेमाल तो ज़रूर करते ही होंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरी दुनिया में व्हाट्सएप सबसे ज़्यादा पॉपुलर इन्सटैंट मैसेजिंग ऐप है जिसके क़रीब 150 करोड़ यूज़र्स हैं जिसमें से क़रीब 40 करोड़ यूज़र्स अकेले भारत में ही हैं। व्हाट्सएप के अलावा वीचैट और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल भी भारत में करोड़ों लोग कर रहे हैं। वैसे आप जानते ही होंगे कि अभी कुछ महीनों पहले भारत में कुछ पत्रकारों समेत कुछ प्रतिष्ठित लोगों के व्हाट्सएप मैसेज हैक होने का मामना सामने आया था। हालांकि, इसके बाद व्हाट्सएप की ओर से सफ़ाई आई थी कि व्हाट्सएप में मैसेजिंग काफ़ी सुरक्षित है, क्योंकि व्हाट्सएप का एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर मैसेज को सुरक्षित रखता है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि व्हाट्सएप समेत अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल मैसेज भेजने के लिए हर कही पर हो रहा है। इसी तरह रॉ, आईबी, सीबीआई, इसरो और परमाणु मिशन से जुड़े अधिकारी और मंत्रालयों के उच्च अधिकारी भी सन्देश और सूचना के लिए व्हाट्सएप समेत अन्य मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि व्हाट्सएप का डेटा भारत में नहीं बल्कि अमेरिका में सेव होता है यानी यदि आप व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी व्हाट्सएप चैटिंग की हर एक जानकारी अमेरिका में स्थित सर्वर में सेव हो रही है।
ऐसे में देश में आधिकारियों के बीच होने वाली संवेदनशील और गुप्त मैसेजिंग को सुरक्षित रखने के लिए व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स की तरह ही भारत सरकार ख़ुद का एक इन्सटैंट मैसेजिंग ऐप लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। बता दें कि इस ऐप का इस्तेमाल आधिकारिक सन्देश भेजने के लिए किया जाएगा। सरकार द्वारा लॉन्च किये जा रहे ख़ुद के मैसेजिंग ऐप का नाम है, गवर्नमेंट इन्सटैंट मैसेजिंग सर्विस (GIMS)। सरकार के ख़ुद के इस ऐप का पूरा सेटअप भारत में ही होगा, जिससे सरकार की किसी भी तरह की संवेदनशील और गुप्त जानकारी देश के बाहर किसी सर्वर में सेव नहीं होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि GIMS एक यूनीफाइड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है जो कि नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा विकसित किया जा रहा है। बता दें कि NIC ही सरकार की ईमेल सर्विस भी सेट-अप करती है। GIMS को एक ओपन सोर्स सोल्यूशन द्वारा बनाया गया है और इसे हिन्दी और अंग्रेजी के अलावा भारत की 11 अन्य भाषाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस ऐप को एण्ड्रॉयड और आईओएस दोनों ही प्लेटफॉर्म पर यूज किया जा सकेगा।
वैसे फ़िलहाल GIMS की टेस्टिंग ओडिशा में हो रही है और ट्रायल के तौर पर GIMS का इस्तेमाल सबसे पहले भारतीय नौसेना करेगी। जल्द ही GIMS ऐप का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारी और सरकारी संस्थाएं आधिकारिक सम्वाद के लिए करेंगी। वैसे फ़िलहाल 17 सरकारी विभाग जैसे विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सीबीआई, नेवी और रेलवे इसकी बीटा टेस्टिंग कर रहे हैं और 6 हज़ार से ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग होने के बाद गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय समेत क़रीब 17 सरकारी विभाग इसका इस्तेमाल करेंगे वहीं ओडिशा और गुजरात जैसे राज्य भी हो सकता है कि इसका इस्तेमाल करें।
सरकार का कहना है कि GIMS कि यह सर्विस काफ़ी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि व्हाट्सएप पर पेगासस जैसे स्पाईवेयर का ख़तरा रहता है। वहीं आज लगभग हर मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच व्हाट्सएप, टेलीग्राम और वीचैट में चर्चा होती है जिसमें अक्सर संवेदनशील और गुप्त बातें होती हैं। लेकिन यदि हैकर्स ने इस तरह की किसी चैटिंग को हैक कर लिया तो हैकर्स के पास संवेदनशील और गुप्त जानकारी चली जाएगी। ऐसे में सरकार का मानना है कि सरकार का ख़ुद का इन्सेटैंट मेसेजिंग ऐप होना काफ़ी ज़रूरी है।
जानकारी के मुताबिक़ GIMS की बीटा टेस्टिंग चल रही है और इस ऐप में अभी तक 20 लाख से ज़्यादा मैसेज जनरेट हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि GIMS ऐप भी एण्ड-टू-एण्ड इंक्रिप्टेड होगा, हालांकि इसका इस्तेमाल सिर्फ़ निजी चैटिंग के लिए किया जाएगा ना कि ग्रुप चैटिंग के लिए। कहा जा रहा है कि जैसे ही यह ऐप औपचारिक रूप से सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों के आधिकारिक काम के लिए शुरू हो जाएगा, तो इसके बाद सरकारी सम्वाद व्हाट्सएप, वीचैट और टेलीग्राम आदि मैसेजिंग ऐप्स पर बंद हो जाएंगे।
JAN 24 (WTN) – यदि आपके पास स्मार्टफ़ोन है तो आप उसमें व्हाट्सएप का इस्तेमाल तो ज़रूर करते ही होंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरी दुनिया में व्हाट्सएप सबसे ज़्यादा पॉपुलर इन्सटैंट मैसेजिंग ऐप है जिसके क़रीब 150 करोड़ यूज़र्स हैं जिसमें से क़रीब 40 करोड़ यूज़र्स अकेले भारत में ही हैं। व्हाट्सएप के अलावा वीचैट और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल भी भारत में करोड़ों लोग कर रहे हैं। वैसे आप जानते ही होंगे कि अभी कुछ महीनों पहले भारत में कुछ पत्रकारों समेत कुछ प्रतिष्ठित लोगों के व्हाट्सएप मैसेज हैक होने का मामना सामने आया था। हालांकि, इसके बाद व्हाट्सएप की ओर से सफ़ाई आई थी कि व्हाट्सएप में मैसेजिंग काफ़ी सुरक्षित है, क्योंकि व्हाट्सएप का एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन फ़ीचर मैसेज को सुरक्षित रखता है।
जैसा कि आप जानते ही हैं कि व्हाट्सएप समेत अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल मैसेज भेजने के लिए हर कही पर हो रहा है। इसी तरह रॉ, आईबी, सीबीआई, इसरो और परमाणु मिशन से जुड़े अधिकारी और मंत्रालयों के उच्च अधिकारी भी सन्देश और सूचना के लिए व्हाट्सएप समेत अन्य मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि व्हाट्सएप का डेटा भारत में नहीं बल्कि अमेरिका में सेव होता है यानी यदि आप व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी व्हाट्सएप चैटिंग की हर एक जानकारी अमेरिका में स्थित सर्वर में सेव हो रही है।
ऐसे में देश में आधिकारियों के बीच होने वाली संवेदनशील और गुप्त मैसेजिंग को सुरक्षित रखने के लिए व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स की तरह ही भारत सरकार ख़ुद का एक इन्सटैंट मैसेजिंग ऐप लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। बता दें कि इस ऐप का इस्तेमाल आधिकारिक सन्देश भेजने के लिए किया जाएगा। सरकार द्वारा लॉन्च किये जा रहे ख़ुद के मैसेजिंग ऐप का नाम है, गवर्नमेंट इन्सटैंट मैसेजिंग सर्विस (GIMS)। सरकार के ख़ुद के इस ऐप का पूरा सेटअप भारत में ही होगा, जिससे सरकार की किसी भी तरह की संवेदनशील और गुप्त जानकारी देश के बाहर किसी सर्वर में सेव नहीं होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि GIMS एक यूनीफाइड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है जो कि नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा विकसित किया जा रहा है। बता दें कि NIC ही सरकार की ईमेल सर्विस भी सेट-अप करती है। GIMS को एक ओपन सोर्स सोल्यूशन द्वारा बनाया गया है और इसे हिन्दी और अंग्रेजी के अलावा भारत की 11 अन्य भाषाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस ऐप को एण्ड्रॉयड और आईओएस दोनों ही प्लेटफॉर्म पर यूज किया जा सकेगा।
वैसे फ़िलहाल GIMS की टेस्टिंग ओडिशा में हो रही है और ट्रायल के तौर पर GIMS का इस्तेमाल सबसे पहले भारतीय नौसेना करेगी। जल्द ही GIMS ऐप का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारी और सरकारी संस्थाएं आधिकारिक सम्वाद के लिए करेंगी। वैसे फ़िलहाल 17 सरकारी विभाग जैसे विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सीबीआई, नेवी और रेलवे इसकी बीटा टेस्टिंग कर रहे हैं और 6 हज़ार से ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग होने के बाद गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय समेत क़रीब 17 सरकारी विभाग इसका इस्तेमाल करेंगे वहीं ओडिशा और गुजरात जैसे राज्य भी हो सकता है कि इसका इस्तेमाल करें।
सरकार का कहना है कि GIMS कि यह सर्विस काफ़ी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि व्हाट्सएप पर पेगासस जैसे स्पाईवेयर का ख़तरा रहता है। वहीं आज लगभग हर मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच व्हाट्सएप, टेलीग्राम और वीचैट में चर्चा होती है जिसमें अक्सर संवेदनशील और गुप्त बातें होती हैं। लेकिन यदि हैकर्स ने इस तरह की किसी चैटिंग को हैक कर लिया तो हैकर्स के पास संवेदनशील और गुप्त जानकारी चली जाएगी। ऐसे में सरकार का मानना है कि सरकार का ख़ुद का इन्सेटैंट मेसेजिंग ऐप होना काफ़ी ज़रूरी है।
जानकारी के मुताबिक़ GIMS की बीटा टेस्टिंग चल रही है और इस ऐप में अभी तक 20 लाख से ज़्यादा मैसेज जनरेट हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि GIMS ऐप भी एण्ड-टू-एण्ड इंक्रिप्टेड होगा, हालांकि इसका इस्तेमाल सिर्फ़ निजी चैटिंग के लिए किया जाएगा ना कि ग्रुप चैटिंग के लिए। कहा जा रहा है कि जैसे ही यह ऐप औपचारिक रूप से सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों के आधिकारिक काम के लिए शुरू हो जाएगा, तो इसके बाद सरकारी सम्वाद व्हाट्सएप, वीचैट और टेलीग्राम आदि मैसेजिंग ऐप्स पर बंद हो जाएंगे।