यदि की ‘यह’ ग़लती तो इनकम टैक्स विभाग लगा सकता है तगड़ा जुर्माना
Saturday - January 25, 2020 10:50 am ,
Category : WTN HINDI
टीडीएस के लिए पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी देना ज़रूरी
2.5 लाख रुपये से ज़्यादा वार्षिक आय वालों के लिए आया इनकम टैक्स का नया नियम
JAN 25 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि इनकम टैक्स विभाग समय-समय पर अपने नियमों में संशोधन करता रहता है या फ़िर नये नियम लागू करता रहता है। यदि आप एक जागरूक नागरिक हैं तो आपकी जिम्मेदारी है कि इनकम टैक्स विभाग के उन नियमों के बारे में आपको पता होना चाहिए जो कि आपसे सम्बन्धित हैं। लेकिन भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में आम इंसान के पास इतना समय नहीं होता है कि वो इस सब पर ध्यान दे सके। लेकिन फ़िर भी आपका अलर्ट रहना ज़रूरी है। ख़ैर यदि आप अलर्ट नहीं हैं तो इनकम टैक्स विभाग से जुड़े एक नये नियम के बारे में हम आपको विस्तार से बताते हैं जो कि आपके काफ़ी काम का है।
इनकम टैक्स विभाग का नया नियम उस लोगों को जानना काफ़ी ज़रूरी है जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज़्यादा है। जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज़्यादा है और आपने इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट के इस नए नियम का पालन नहीं किया तो आप पर आपकी आय का 20 प्रतिशत टैक्स जुर्माने के रूप में लग सकता है। क्या है यह नया नियम और आप इसके जुर्माने से किस तरह से बच सकते हैं, आइये इसके बारे में आपको बताते हैं।
दरअसल, 16 जनवरी से लागू सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्स यानी CBDT के नए नियम उन सभी व्यक्तियों पर लागू होंगे जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज़्यादा है। CBDT के नए नियम के मुताबिक़, “यदि कोई कर्मचारी अपने नियोक्ता या कम्पनी को TDS (Tax Deduction at Source ) यानी आय स्तोत्र पर कर कटौती के लिए पैन कार्ड और आधार कार्ड की पूरी जानकारी नहीं देता है तो उसे अपनी आय का 20 प्रतिशत टैक्स के रूप में देना पड़ सकता है।” हालांकि, 20 प्रतिशत की दर से यदि टीडीएस काटा जाता है तो फ़िर 4 प्रतिशत की दर से स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर की कटौती करने की ज़रूरत नहीं होगी।
अब आप सोच रहे हैं कि आख़िर टीडीएस क्या होता है? तो इसके बारे में भी आपको बता देते हैं। दरअसल, जब किसी व्यक्ति की वार्षिक आय से टैक्स काटकर उसे जो बाक़ी राशि दी जाती है उसे ही टीडीएस कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति का टीडीएस उसके इनकम टैक्स से ज़्यादा होता है तो वो रिफण्ड के लिए क्लेम कर सकता है। वहीं टीडीएस राशि यदि इनकम टैक्स से कम है तो सम्बन्धित व्यक्ति को एडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स जमा करना होता है। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टीडीएस हर आय या लेन-देन पर लागू नहीं होता है। CBDT के आयकर क़ानून के मुताबिक़, टीडीएस के अलग-अलग रेट हैं और यह भुगतान की प्रकृति पर निर्भर करता है।
बता दें कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 206AA के तहत पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन यदि वहीं आपकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है तो आपको कोई भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इनकम टैक्स मामलों के जानकारों का कहना है कि CBDT का यह सर्कुलर ऐसे समय में आया है जब सरकार टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफ़ी मुश्किलों का सामना कर रही है क्योंकि काफ़ी लम्बे समय से देश आर्थिक सुस्ती का सामना कर रहा है।
दरअसल, आर्थिक सुस्ती से परेशान कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने के लिए सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की थी। कारपोरेट टैक्स में कमी का उद्देश्य निवेश को प्रोत्साहन देना और अर्थव्यवस्था को आर्थिक सुस्ती से उबारना था। बता दें कि कॉरपोरेट टैक्स में कमी से सरकार को क़रीब 1.40 लाख करोड़ रुपयों की हानि की आशंका है, ऐसे में सरकार अन्य तरीक़ों से टैक्स कलेक्शन कर इस राजस्व कमी को पूरा करने की कोशिश में है। अब देखना होगा कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद राजस्व को हुए नुकसान की पूर्ति सरकार कर पाती है कि नहीं?
JAN 25 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि इनकम टैक्स विभाग समय-समय पर अपने नियमों में संशोधन करता रहता है या फ़िर नये नियम लागू करता रहता है। यदि आप एक जागरूक नागरिक हैं तो आपकी जिम्मेदारी है कि इनकम टैक्स विभाग के उन नियमों के बारे में आपको पता होना चाहिए जो कि आपसे सम्बन्धित हैं। लेकिन भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में आम इंसान के पास इतना समय नहीं होता है कि वो इस सब पर ध्यान दे सके। लेकिन फ़िर भी आपका अलर्ट रहना ज़रूरी है। ख़ैर यदि आप अलर्ट नहीं हैं तो इनकम टैक्स विभाग से जुड़े एक नये नियम के बारे में हम आपको विस्तार से बताते हैं जो कि आपके काफ़ी काम का है।
इनकम टैक्स विभाग का नया नियम उस लोगों को जानना काफ़ी ज़रूरी है जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज़्यादा है। जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज़्यादा है और आपने इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट के इस नए नियम का पालन नहीं किया तो आप पर आपकी आय का 20 प्रतिशत टैक्स जुर्माने के रूप में लग सकता है। क्या है यह नया नियम और आप इसके जुर्माने से किस तरह से बच सकते हैं, आइये इसके बारे में आपको बताते हैं।
दरअसल, 16 जनवरी से लागू सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्स यानी CBDT के नए नियम उन सभी व्यक्तियों पर लागू होंगे जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज़्यादा है। CBDT के नए नियम के मुताबिक़, “यदि कोई कर्मचारी अपने नियोक्ता या कम्पनी को TDS (Tax Deduction at Source ) यानी आय स्तोत्र पर कर कटौती के लिए पैन कार्ड और आधार कार्ड की पूरी जानकारी नहीं देता है तो उसे अपनी आय का 20 प्रतिशत टैक्स के रूप में देना पड़ सकता है।” हालांकि, 20 प्रतिशत की दर से यदि टीडीएस काटा जाता है तो फ़िर 4 प्रतिशत की दर से स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर की कटौती करने की ज़रूरत नहीं होगी।
अब आप सोच रहे हैं कि आख़िर टीडीएस क्या होता है? तो इसके बारे में भी आपको बता देते हैं। दरअसल, जब किसी व्यक्ति की वार्षिक आय से टैक्स काटकर उसे जो बाक़ी राशि दी जाती है उसे ही टीडीएस कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति का टीडीएस उसके इनकम टैक्स से ज़्यादा होता है तो वो रिफण्ड के लिए क्लेम कर सकता है। वहीं टीडीएस राशि यदि इनकम टैक्स से कम है तो सम्बन्धित व्यक्ति को एडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स जमा करना होता है। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टीडीएस हर आय या लेन-देन पर लागू नहीं होता है। CBDT के आयकर क़ानून के मुताबिक़, टीडीएस के अलग-अलग रेट हैं और यह भुगतान की प्रकृति पर निर्भर करता है।
बता दें कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 206AA के तहत पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन यदि वहीं आपकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है तो आपको कोई भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इनकम टैक्स मामलों के जानकारों का कहना है कि CBDT का यह सर्कुलर ऐसे समय में आया है जब सरकार टैक्स कलेक्शन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफ़ी मुश्किलों का सामना कर रही है क्योंकि काफ़ी लम्बे समय से देश आर्थिक सुस्ती का सामना कर रहा है।
दरअसल, आर्थिक सुस्ती से परेशान कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने के लिए सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की थी। कारपोरेट टैक्स में कमी का उद्देश्य निवेश को प्रोत्साहन देना और अर्थव्यवस्था को आर्थिक सुस्ती से उबारना था। बता दें कि कॉरपोरेट टैक्स में कमी से सरकार को क़रीब 1.40 लाख करोड़ रुपयों की हानि की आशंका है, ऐसे में सरकार अन्य तरीक़ों से टैक्स कलेक्शन कर इस राजस्व कमी को पूरा करने की कोशिश में है। अब देखना होगा कि कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद राजस्व को हुए नुकसान की पूर्ति सरकार कर पाती है कि नहीं?