आर्थिक सुस्ती से उबरने मोदी सरकार बजट में दे सकती है बड़ी सौगात
Monday - January 27, 2020 12:55 pm ,
Category : WTN HINDI
विकास दर बढ़ाने के लिए बाज़ार में डिमाण्ड बढ़ना ज़रूरी
बाज़ार में डिमाण्ड बढ़ाने मोदी सरकार बजट में ले सकती है बड़े फ़ैसले
JAN 27 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बीच सभी की निगाहें मोदी सरकार के आम बजट पर टिकी हुई हैं। चालू वित्त वर्ष में लगातार कम होती जीडीपी ग्रोथ रेट के चलते मोदी सरकार के सामने इस बार का बजट किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से काफ़ी उम्मीदें देश की जनता लगाए बैठे है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर समेत कई अन्य कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी लम्बे समय से आर्थिक सुस्ती का करना पड़ रहा है। ऐसे में बाज़ार में मांग की कमी के चलते उद्योग जगत को नुकसान उठाना पड़ रहा है। आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर ऑटो मोबाइल सेक्टर पर पड़ा है जहां पर पिछले 18 महीनों से मंदी का दौर चल रहा है।
अब जबकि देश आर्थिक सुस्ती के दौर से धीरे-धीरे उबर रहा है ऐसे में मोदी सरकार के बजट से आम लोगों के साथ-साथ उद्योग जगत को काफ़ी उम्मीदें हैं। सभी चाहते हैं कि मोदी सरकार इस बार के बजट में कुछ ऐसे उपाय करे जिससे आर्थिक सुस्ती से उबर रहे लोगों को राहत मिले और बाज़ार में जारी सुस्ती का दौर ख़त्म हो। इसी के चलते कहा जा रहा है कि इस बार के बजट में बाज़ार में तेज़ी लाने के लिए मोदी सरकार मध्यम वर्ग को आयकर छूट की सीमा बढ़ा सकती है।
बता दें कि अर्थशास्त्रियों के अनुसार इस समय अर्थव्यवस्था में सबसे ज़्यादा ज़रूरत मांग और खपत बढ़ाने की है। स्वाभाविक है कि मांग बढ़ने से ही आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आएगी लेकिन मांग और खपत बढ़ाने के लिए पूंजीगत ख़र्च बढ़ाने के साथ ही आम आदमी की जेब में ज़्यादा पैसा होना ज़रूरी है। आर्थिक मामलों के जानकारों के मुताबिक़, आर्थिक सुस्ती के चलते बाज़ार में आई मंदी से निपटने के लिए बजट में मांग और खपत बढ़ाने के लिये सरकार 5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर सकती है।
वैसे तो आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए सरकार पूंजीगत ख़र्च के मोर्चे पर कई ढांचागत योजनाओं पर काम कर रही है। लेकिन इसके साथ ही मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स में राहत दी जा सकती है जिससे उनके पास ज़्यादा पैसा बचे और वे उस पैसे का इस्तेमाल ख़रीदी में करें जिससे बाज़ार में मांग बढ़े। वहीं कहा जा रहा है कि इस बार के बजट में सरकार रोज़गार बढ़ाने के उपाय करेगी और साथ ही पूंजीगत ख़र्च बढ़ाने का प्रयास करेगी जिससे लोगों के पास ज़्यादा पैसा आए।
दरअसल, इस समय अर्थव्यवस्था में मौजूदा सुस्ती का कारण मांग में कमी है न कि आपूर्ति। उद्योगों द्वारा लगातार उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन आर्थिक सुस्ती के कारण लोग कम ख़र्च कर रहे हैं जिसके कारण बाज़ार में माल कम बिक रहा है। अब लोगों की तरफ़ से ख़रीदी की मांग बढ़े इसलिए सरकार चाहती है कि लोगों के पास ज़्यादा से ज़्यादा पैसा बचे। स्वाभाविक है कि लोग ज़्यादा से ज़्यादा ख़र्च जब ही करेंगे जब उनके पास पैसा बचेगा। ऐसे में मध्यम वर्ग को ख़र्च के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मोदी सरकार आयकर छूट की मौजूदा 2.50 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती है। इसके अलावा मोदी सरकार इस बार बजट में टैक्स स्लैब में भी परिवर्तन कर सकती है। बता दें कि अर्थशास्त्रियों का मानना रहा है कि सरकार को वेतन भोगियों पर प्रत्यक्ष कर का बोझ कम करना चाहिए।
साफ़ है कि जब लोगों पर टैक्स का बोझ कम होगा तो उनके पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा। अब जब लोगों के पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा तो वे इसका इस्तेमाल ख़रीदी में करेंगे और जब लोग ख़रीदी करेंगे तो इससे मार्केट में डिमाण्ड बढ़ेगी। सरकार यही चाहती है कि लोग ज़्यादा से ज़्यादा ख़र्च करें जिससे बाज़ार में पूंजी आए और उद्योगों द्वारा उत्पादित माल बिके। यदि मांग बढ़ेगी तो आपूर्ति भी उसी हिसाब से बढ़ेगी ऐसे में पैसों का सर्कल चलेगा जिससे अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से बूम करेगी।
इनकम टैक्स छूट में मांग के अलावा लोगों की एक मांग और है कि इनकम टैक्स क़ानून की धारा 80C के तहत जीवन बीमा प्रीमियम, ट्यूशन फीस और अन्य बचत पर मौजूदा 1.50 लाख रुपये की छूट की सीमा को बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये किया जाना चाहिए। ऐसा करने से मध्यम वर्ग को काफ़ी राहत मिलेगी और वेतनभोगी लोगों के पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा और वे इन पैसों का इस्तेमाल ख़र्च में कर सकेंगे। आर्थिक सुस्ती के दौर से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को इस समय बाज़ार में लोगों की ख़रीदी बढ़ाने की ज़रूरत है। उद्योगों द्वारा सामान तैयार है, लेकिन उस सामान को ख़रीददार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में इनकम टैक्स में छूट से लोगों के पास ज़्यादा पैसा बचेगा और यदि इन पैसों का इस्तेमाल जनता ने ख़रीदी में किया तो एक बार फ़िर से भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में एक होगी।
JAN 27 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बीच सभी की निगाहें मोदी सरकार के आम बजट पर टिकी हुई हैं। चालू वित्त वर्ष में लगातार कम होती जीडीपी ग्रोथ रेट के चलते मोदी सरकार के सामने इस बार का बजट किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से काफ़ी उम्मीदें देश की जनता लगाए बैठे है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर समेत कई अन्य कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी लम्बे समय से आर्थिक सुस्ती का करना पड़ रहा है। ऐसे में बाज़ार में मांग की कमी के चलते उद्योग जगत को नुकसान उठाना पड़ रहा है। आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर ऑटो मोबाइल सेक्टर पर पड़ा है जहां पर पिछले 18 महीनों से मंदी का दौर चल रहा है।
अब जबकि देश आर्थिक सुस्ती के दौर से धीरे-धीरे उबर रहा है ऐसे में मोदी सरकार के बजट से आम लोगों के साथ-साथ उद्योग जगत को काफ़ी उम्मीदें हैं। सभी चाहते हैं कि मोदी सरकार इस बार के बजट में कुछ ऐसे उपाय करे जिससे आर्थिक सुस्ती से उबर रहे लोगों को राहत मिले और बाज़ार में जारी सुस्ती का दौर ख़त्म हो। इसी के चलते कहा जा रहा है कि इस बार के बजट में बाज़ार में तेज़ी लाने के लिए मोदी सरकार मध्यम वर्ग को आयकर छूट की सीमा बढ़ा सकती है।
बता दें कि अर्थशास्त्रियों के अनुसार इस समय अर्थव्यवस्था में सबसे ज़्यादा ज़रूरत मांग और खपत बढ़ाने की है। स्वाभाविक है कि मांग बढ़ने से ही आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आएगी लेकिन मांग और खपत बढ़ाने के लिए पूंजीगत ख़र्च बढ़ाने के साथ ही आम आदमी की जेब में ज़्यादा पैसा होना ज़रूरी है। आर्थिक मामलों के जानकारों के मुताबिक़, आर्थिक सुस्ती के चलते बाज़ार में आई मंदी से निपटने के लिए बजट में मांग और खपत बढ़ाने के लिये सरकार 5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर सकती है।
वैसे तो आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए सरकार पूंजीगत ख़र्च के मोर्चे पर कई ढांचागत योजनाओं पर काम कर रही है। लेकिन इसके साथ ही मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स में राहत दी जा सकती है जिससे उनके पास ज़्यादा पैसा बचे और वे उस पैसे का इस्तेमाल ख़रीदी में करें जिससे बाज़ार में मांग बढ़े। वहीं कहा जा रहा है कि इस बार के बजट में सरकार रोज़गार बढ़ाने के उपाय करेगी और साथ ही पूंजीगत ख़र्च बढ़ाने का प्रयास करेगी जिससे लोगों के पास ज़्यादा पैसा आए।
दरअसल, इस समय अर्थव्यवस्था में मौजूदा सुस्ती का कारण मांग में कमी है न कि आपूर्ति। उद्योगों द्वारा लगातार उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन आर्थिक सुस्ती के कारण लोग कम ख़र्च कर रहे हैं जिसके कारण बाज़ार में माल कम बिक रहा है। अब लोगों की तरफ़ से ख़रीदी की मांग बढ़े इसलिए सरकार चाहती है कि लोगों के पास ज़्यादा से ज़्यादा पैसा बचे। स्वाभाविक है कि लोग ज़्यादा से ज़्यादा ख़र्च जब ही करेंगे जब उनके पास पैसा बचेगा। ऐसे में मध्यम वर्ग को ख़र्च के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मोदी सरकार आयकर छूट की मौजूदा 2.50 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती है। इसके अलावा मोदी सरकार इस बार बजट में टैक्स स्लैब में भी परिवर्तन कर सकती है। बता दें कि अर्थशास्त्रियों का मानना रहा है कि सरकार को वेतन भोगियों पर प्रत्यक्ष कर का बोझ कम करना चाहिए।
साफ़ है कि जब लोगों पर टैक्स का बोझ कम होगा तो उनके पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा। अब जब लोगों के पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा तो वे इसका इस्तेमाल ख़रीदी में करेंगे और जब लोग ख़रीदी करेंगे तो इससे मार्केट में डिमाण्ड बढ़ेगी। सरकार यही चाहती है कि लोग ज़्यादा से ज़्यादा ख़र्च करें जिससे बाज़ार में पूंजी आए और उद्योगों द्वारा उत्पादित माल बिके। यदि मांग बढ़ेगी तो आपूर्ति भी उसी हिसाब से बढ़ेगी ऐसे में पैसों का सर्कल चलेगा जिससे अर्थव्यवस्था एक बार फ़िर से बूम करेगी।
इनकम टैक्स छूट में मांग के अलावा लोगों की एक मांग और है कि इनकम टैक्स क़ानून की धारा 80C के तहत जीवन बीमा प्रीमियम, ट्यूशन फीस और अन्य बचत पर मौजूदा 1.50 लाख रुपये की छूट की सीमा को बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये किया जाना चाहिए। ऐसा करने से मध्यम वर्ग को काफ़ी राहत मिलेगी और वेतनभोगी लोगों के पास पहले की तुलना में ज़्यादा पैसा बचेगा और वे इन पैसों का इस्तेमाल ख़र्च में कर सकेंगे। आर्थिक सुस्ती के दौर से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को इस समय बाज़ार में लोगों की ख़रीदी बढ़ाने की ज़रूरत है। उद्योगों द्वारा सामान तैयार है, लेकिन उस सामान को ख़रीददार नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में इनकम टैक्स में छूट से लोगों के पास ज़्यादा पैसा बचेगा और यदि इन पैसों का इस्तेमाल जनता ने ख़रीदी में किया तो एक बार फ़िर से भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में एक होगी।