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हर सर्विस के लिए बैंक आपसे वसूलता है चार्ज

Monday - January 27, 2020 3:30 pm , Category : WTN HINDI
बैंकों द्वारा लगाए जाते हैं कई तरह के चार्जज
बैंकों द्वारा लगाए जाते हैं कई तरह के चार्जज

सालभर में बैंक को आप चुकाते हैं कई तरह के चार्जेज

JAN 27 (WTN) – स्वाभाविक है कि आपका किसी ना किसी बैंक में अकाउंट तो ज़रूर ही होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बैंक में अकाउंट मेंटेन रखने के लिए आपको कई तरह के चार्जेज देने पड़ते हैं? सरकारी बैंकों से लेकर निजी बैंक तक अपने उपभोक्ताओं से तरह-तरह के चार्ज वसूलती हैं। बैंक अकाउंट होल्डर होने के नाते आपका यह जानना काफ़ी ज़रूरी है कि बैंक आपसे किस तरह के चार्जेज वसूलते हैं। यदि आप नहीं जानते हैं कि बैंक अपने उपभोक्ताओं से कौन-कौन से चार्जेज वसूलते हैं तो आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
 
वैसे भारत के केन्द्रीय बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक के एक आदेश के बाद NEFT और RTGS के जरिए फण्ड ट्रांसफर करने पर लगने वाले चार्जेज को पूरी तरह से हटा दिया गया है और यह नियम इसी साल एक जनवरी से पूरी तरह से प्रभावी भी हो गया है। लेकिन NEFT और RTGS चार्जेज के अलावा कई अन्य तरह के चार्जेज हैं जो कि बैंक द्वारा सेवा प्रदान करने पर उपभोक्ताओं से वसूले जाते हैं। चलिए जानते हैं कि बैंकों द्वारा अपने उपभोक्ताओं से किस तरह के चार्जेज वसूले जाते हैं।
 
सबसे पहले तो आपको अपने बैंक अकाउंट में मिनिमन बैलेंस रखना ज़रूरी है। यदि आपने अपने बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं रखा है तो बैंक आप पर कुछ फाइन चार्ज करता है। इसलिए हमारी आपको सलाह है कि अपने बैंक अकाउंट में मिनिमम बैलेंस ज़रूर रखें जिससे आपको इससे सम्बन्धित चार्ज ना देना पड़ा। वहीं यदि आप बैंक से चेकबुक इश्यू कराते हैं तो भी आपको इसके लिए चार्ज देना पड़ता है। हर बैंक चेकबुक के पन्नों के हिसाब से अपने उपभोक्ताओं से चार्ज वसूलता है।

बता दें कि यदि आप अपना बैंक अकाउंट बंद करना चाहते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपने अकाउंट खुलवाने के 6 महीने के अन्दर अपना अकाउंट बंद किया, तो इसके लिए बैंक आपसे चार्ज वसूलती है। वहीं यदि आप अपने बैंक अकाउंट से किसी तरह का कोई भी ट्रांजैक्शन एक निश्चित समयावधि तक नहीं किया है तो इसके लिए भी बैंक आपसे चार्ज ले सकती है। इसलिए हमारी आपको सलाह है कि समय-समय पर अपने बैंक अकाउंट से ट्रांजैक्शन करते रहें।
 
वहीं बैंक अपने उपभोक्ताओं से डेबिट और क्रेडिट का सालाना शुल्क भी लेते हैं। साथ ही एटीएम से पैसा निकालने के लिए भी आपको सालाना शुल्क बैंक को अदा करना पड़ता है। जैसा कि हमने आपको बताया कि रिज़र्व बैंक ने NEFT और RTGS के ज़रिए फण्ड ट्रांसफर को निशुल्क कर दिया है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में उपभोक्ताओं के लिए IMPS के जरिए सिर्फ 2 लाख रुपये तक का फण्ड ट्रांसफर करना ही निशुल्क होता है। यदि आपने 2 लाख रुपये से ज़्यादा का फण्ड ट्रांसफर किया तो आपको इसके लिए चार्ज देना पड़ेगा।

एटीएम से पैसा निकालने के भी कुछ नियम हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा निर्देशों के मुताबिक़, किसी अन्य बैंक के एटीएम से उपभोक्ता एक महीने में अधिकतम 5 बार बिना चार्ज के कैश निकाल सकता है। लेकिन 5 बार से ज़्यादा पैसे निकालने पर बैंक आपसे चार्ज वसूलता है। जैसा कि आप जानते हैं कि बैंक द्वारा अपने अकाउंट होल्डर के अकाउंट ट्रांजैक्शन की सारी जानकारियां एसएमएस के ज़रिए दी जाती हैं। इन एसएमएस के ज़रिए ही उपभोक्ताओं का पता चलता है कि उनके अकाउंट से क्या लेनदेन हो रहा है। लेकिन ट्रांजैक्शन अलर्ट की जानकारी के लिए बैंकों द्वारा अपने उपभोक्ताओं से एक निर्धारित राशि वसूली जाती है।

वहीं यदि आप अपने बैंक की होम या नॉन-होम ब्रांच से कैश का लेन-देन करते हैं, तो उसके लिए भी कुछ चार्ज देना पड़ता है। जानकारी के मुताबिक़ अलग-अलग बैंक रक़म के हिसाब से अलग-अलग चार्ज वसूल करते हैं। यानी यदि आपने होम ब्रांच या नॉन-होम ब्रांच से एक तय सीमा से ज़्यादा बार ट्रांजैक्शन किया, तो बैंक आपसे चार्ज वसूलते हैं। लेकिन यह नियम सिर्फ़ सेविंग अकाउंट के लिए ही है। यह तो वे कॉमन चार्जेज हैं जो कि बैंकों द्वारा अपने उपभोक्ताओं से वसूले जाते हैं, लेकिन अलग-अलग बैंक अपने उपभोक्ताओं से अलग-अलग चार्ज वसूसती हैं। ऐसे में आप हक़ से अपने बैंक से यहा पता कीजिए कि किस सेवा के लिए वे कितना चार्ज वसूलती हैं।