भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डालेगा कोरोनावायरस
Tuesday - January 28, 2020 10:51 am ,
Category : WTN HINDI
कोरोनावायरस से चीन की अर्थव्यवस्था को लगा झटका
कोरोनावायरस से चीन की अर्थव्यवस्था को लगे झटके से भारतीय अर्थव्यवस्था भी होगी प्रभावित
JAN 28 (WTN) – चीन से फ़ैला कोरोनावायरस धीरे-धीरे पूरी दुनिया में अपने पैर पसार रहा है। चीन के शहर वुहान से फ़ैला नोवल कोरोनावायरस (nCoV) चीन सरकार के लिए एक चुनौती बनता जा रहा है। चीन में फ़ैले कोरोनावायरस के कारण भारत समेत चीन की सीमा से लगे देशों में चिन्ता का माहौल है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोवल कोरोनावायरस के हमले से लोगों को सार्स की भयावह यादें ताज़ा हो गई हैं। बता दें कि चीन से शुरू हुए सार्स के कारण 32 देशों के 775 लोगों की जान चली गई थी।
लेकिन जहां तक कोरोनावायरस की बात है, तो कहा जा रहा है कि दिसम्बर, 2019 में सी-फूड के ज़रिये कोरोनावायरस सांपों से इंसानों में पहुंचा था। वहीं अब कोरोनावायरस इंसानों से इंसानों में तेज़ी से फैल रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि चीन के अलावा हॉन्ग कॉन्ग, वियतनाम, थाइलैण्ड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, नेपाल, जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और कनाड़ा जैसे देश कोरोनावायरस की चपेट में आ चुके हैं। भारत में भी कोरोनावायरस के कुछ संदिग्ध मरीज़ पाये गये हैं जो कि चीन से लौटे हैं।
कोरोनावायरस फ़ैलने के इंसानों की मौत तो हो ही रही है, लेकिन इसके साथ ही इससे चीन की अर्थव्यवस्था पर विपरित असर भी पड़ रहा है। अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के कारण आर्थिक सुस्ती का सामना कर चुके चीन के लिए कोरोनावायरस भी आर्थिक सुस्ती ला सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि कोरोनावायरस से प्रभावित चीन के 10 शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, शंघाई डिज़्नीलैण्ड, द ग्रेट वॉल और द फॉरबिडेन सिटी जैसे पर्यटक स्थलों को भी बंद कर दिया गया है।
पिछले सप्ताह चीन ने घरेलू पर्यटकों को इन जगहों पर जाने से प्रतिबंधित कर दिया था वहीं इसके बाद अब 27 जनवरी से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के आने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। बता दें कि कोरोनावायरस ने चीन में ठीक ऐसे समय हमला किया है जब चीन अपना नया साल मनाने जा रहा है। चीन में नया साल मनाने के दौरान विदेश में रहने वाले लाखों चीनी लोग अपने परिवार से मिलने चीन वापस आते हैं। स्वाभाविक है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं तो इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
जानकारी के लिए बता दें कि कोरोनावायरस के कारण चीन से यात्रा करने वालों की संख्या में जबरदस्त कमी आएगी। इससे सिंगापुर, थाइलैण्ड और हॉन्ग कॉन्ग के टूरिज्म सेक्टर पर सबसे बुरा असर पड़ सकता है। भारतीय पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, साल 2018 में चीन से 2,81,768 यात्री भारत आए थे। एक अनुमान के अनुसार, एक विदेशी यात्री हर यात्रा पर क़रीब 2 लाख रुपये ख़र्च करता है। इस तरह चीनी पर्यटक भारतीय अर्थव्यवस्था में 76 करोड़ डॉलर का योगदान करते हैं। लेकिन कोरोनावायरस के कारण यदि चीनी पर्यटक भारत नहीं आएंगे तो स्वाभाविक है कि इससे भारत के पर्यटन उद्योग को नुकसान होगा।
दरअसल, सार्स और कोरोनावायरस जैसी संक्रामक बीमारियों के कारण प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्था पर विपरित असर पड़ता है। बता दें कि सार्स के हमले के दौरान सिंगापुर की जीडीपी को 0.5 प्रतिशत और हॉन्ग कॉन्ग की जीडीपी को 2.5 प्रतिशत का नुकसान हुआ था। इसी तरह कोरोनावायरस के कारण भारत और चीन के बीच व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। बता दें कि वित्त वर्ष 2018-19 में चीन को भारत का निर्यात 16.75 अरब डॉलर था जो कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 25.6 प्रतिशत ज़्यादा था। इसी को देखते हुए वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत ने निर्यात लक्ष्य को 4 प्रतिशत बढ़ा दिया था। लेकिन कोरोनावायरस के कारण चीन के शहरों में लोग डर के कारण लम्बे समय तक घरों में रहे, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ओर से कच्चे माल की मांग कम होगी और इससे चीन को होने वाले आयात और निर्यात दोनों पर असर पड़ेगा।
वहीं चीन में कोरोनावायरस फैलने के बाद से कच्चे तेल की क़ीमतों में काफ़ी समय के बाद गिरावट आई है। जानकारों के मुताबिक़, कोरोनावारस फैलने के साथ कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट का दौर जारी रह सकता है। अनुमान के अनुसार कोरोनावायरस के कारण चीन में उपभोग घटता है तो तेल की मांग भी उसी अनुपात में कम होगी। बता दें कि कच्चे तेल की क़ीमतें पिछले शुक्रवार को लगातार तीसरे सप्ताह 2.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60.63 डॉलर प्रति बैरल रहीं। इस सप्ताह इसकी क़ीमतों में कुल 7.6 प्रतिशत और अप्रैल, 2019 से 12 महीनों के लिए करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
लेकिन यदि चीन में फ़ैले कोरोनावायरस के कारण कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो इसका फ़ायदा भारत को मिल सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की क़ीमतों में कमी आएगी, तो इससे महंगाई नियंत्रित रहेगी और चालू खाता घाटा नहीं बढ़ेगा। वहीं स्वाभाविक है कि इन्हीं सब कारणों से भारतीय करेंसी रुपये में मज़बूती आएगी। चुंकि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत डॉलर में तय होती है, तो ऐसे में भारत को तेल ख़रीदने के लिए कम रुपये खर्च करने होंगे।
जानकारों के मुताबिक़, कच्चे तेल की क़ीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की कमी से भारत का चालू खाता घाटा क़रीब 9.2 अरब डॉलर कम हो जाएगा। लेकिन वहीं बता दें कि रिफाइण्ड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स निर्यात के मामले में भारत दुनिया का छठा बड़ा देश है और इससे भारत को हर साल क़रीब 60 अरब डॉलर की कमाई होती है। पर मांग में कमी और क़ीमतों में गिरावट से भारत को इस क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वाभाविक है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में फ़ैले कोरोनावायरस से चीन के साथ-साथ कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
JAN 28 (WTN) – चीन से फ़ैला कोरोनावायरस धीरे-धीरे पूरी दुनिया में अपने पैर पसार रहा है। चीन के शहर वुहान से फ़ैला नोवल कोरोनावायरस (nCoV) चीन सरकार के लिए एक चुनौती बनता जा रहा है। चीन में फ़ैले कोरोनावायरस के कारण भारत समेत चीन की सीमा से लगे देशों में चिन्ता का माहौल है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोवल कोरोनावायरस के हमले से लोगों को सार्स की भयावह यादें ताज़ा हो गई हैं। बता दें कि चीन से शुरू हुए सार्स के कारण 32 देशों के 775 लोगों की जान चली गई थी।
लेकिन जहां तक कोरोनावायरस की बात है, तो कहा जा रहा है कि दिसम्बर, 2019 में सी-फूड के ज़रिये कोरोनावायरस सांपों से इंसानों में पहुंचा था। वहीं अब कोरोनावायरस इंसानों से इंसानों में तेज़ी से फैल रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि चीन के अलावा हॉन्ग कॉन्ग, वियतनाम, थाइलैण्ड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, नेपाल, जापान, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और कनाड़ा जैसे देश कोरोनावायरस की चपेट में आ चुके हैं। भारत में भी कोरोनावायरस के कुछ संदिग्ध मरीज़ पाये गये हैं जो कि चीन से लौटे हैं।
कोरोनावायरस फ़ैलने के इंसानों की मौत तो हो ही रही है, लेकिन इसके साथ ही इससे चीन की अर्थव्यवस्था पर विपरित असर भी पड़ रहा है। अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के कारण आर्थिक सुस्ती का सामना कर चुके चीन के लिए कोरोनावायरस भी आर्थिक सुस्ती ला सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि कोरोनावायरस से प्रभावित चीन के 10 शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं, शंघाई डिज़्नीलैण्ड, द ग्रेट वॉल और द फॉरबिडेन सिटी जैसे पर्यटक स्थलों को भी बंद कर दिया गया है।
पिछले सप्ताह चीन ने घरेलू पर्यटकों को इन जगहों पर जाने से प्रतिबंधित कर दिया था वहीं इसके बाद अब 27 जनवरी से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के आने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। बता दें कि कोरोनावायरस ने चीन में ठीक ऐसे समय हमला किया है जब चीन अपना नया साल मनाने जा रहा है। चीन में नया साल मनाने के दौरान विदेश में रहने वाले लाखों चीनी लोग अपने परिवार से मिलने चीन वापस आते हैं। स्वाभाविक है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं तो इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
जानकारी के लिए बता दें कि कोरोनावायरस के कारण चीन से यात्रा करने वालों की संख्या में जबरदस्त कमी आएगी। इससे सिंगापुर, थाइलैण्ड और हॉन्ग कॉन्ग के टूरिज्म सेक्टर पर सबसे बुरा असर पड़ सकता है। भारतीय पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, साल 2018 में चीन से 2,81,768 यात्री भारत आए थे। एक अनुमान के अनुसार, एक विदेशी यात्री हर यात्रा पर क़रीब 2 लाख रुपये ख़र्च करता है। इस तरह चीनी पर्यटक भारतीय अर्थव्यवस्था में 76 करोड़ डॉलर का योगदान करते हैं। लेकिन कोरोनावायरस के कारण यदि चीनी पर्यटक भारत नहीं आएंगे तो स्वाभाविक है कि इससे भारत के पर्यटन उद्योग को नुकसान होगा।
दरअसल, सार्स और कोरोनावायरस जैसी संक्रामक बीमारियों के कारण प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्था पर विपरित असर पड़ता है। बता दें कि सार्स के हमले के दौरान सिंगापुर की जीडीपी को 0.5 प्रतिशत और हॉन्ग कॉन्ग की जीडीपी को 2.5 प्रतिशत का नुकसान हुआ था। इसी तरह कोरोनावायरस के कारण भारत और चीन के बीच व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। बता दें कि वित्त वर्ष 2018-19 में चीन को भारत का निर्यात 16.75 अरब डॉलर था जो कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 25.6 प्रतिशत ज़्यादा था। इसी को देखते हुए वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत ने निर्यात लक्ष्य को 4 प्रतिशत बढ़ा दिया था। लेकिन कोरोनावायरस के कारण चीन के शहरों में लोग डर के कारण लम्बे समय तक घरों में रहे, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ओर से कच्चे माल की मांग कम होगी और इससे चीन को होने वाले आयात और निर्यात दोनों पर असर पड़ेगा।
वहीं चीन में कोरोनावायरस फैलने के बाद से कच्चे तेल की क़ीमतों में काफ़ी समय के बाद गिरावट आई है। जानकारों के मुताबिक़, कोरोनावारस फैलने के साथ कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट का दौर जारी रह सकता है। अनुमान के अनुसार कोरोनावायरस के कारण चीन में उपभोग घटता है तो तेल की मांग भी उसी अनुपात में कम होगी। बता दें कि कच्चे तेल की क़ीमतें पिछले शुक्रवार को लगातार तीसरे सप्ताह 2.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60.63 डॉलर प्रति बैरल रहीं। इस सप्ताह इसकी क़ीमतों में कुल 7.6 प्रतिशत और अप्रैल, 2019 से 12 महीनों के लिए करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
लेकिन यदि चीन में फ़ैले कोरोनावायरस के कारण कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो इसका फ़ायदा भारत को मिल सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की क़ीमतों में कमी आएगी, तो इससे महंगाई नियंत्रित रहेगी और चालू खाता घाटा नहीं बढ़ेगा। वहीं स्वाभाविक है कि इन्हीं सब कारणों से भारतीय करेंसी रुपये में मज़बूती आएगी। चुंकि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत डॉलर में तय होती है, तो ऐसे में भारत को तेल ख़रीदने के लिए कम रुपये खर्च करने होंगे।
जानकारों के मुताबिक़, कच्चे तेल की क़ीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की कमी से भारत का चालू खाता घाटा क़रीब 9.2 अरब डॉलर कम हो जाएगा। लेकिन वहीं बता दें कि रिफाइण्ड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स निर्यात के मामले में भारत दुनिया का छठा बड़ा देश है और इससे भारत को हर साल क़रीब 60 अरब डॉलर की कमाई होती है। पर मांग में कमी और क़ीमतों में गिरावट से भारत को इस क्षेत्र में नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वाभाविक है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में फ़ैले कोरोनावायरस से चीन के साथ-साथ कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।