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ट्रांसपोर्टेशन सस्ता करने मोदी सरकार ला सकती है नई लॉजिस्टिक पॉलिसी

Tuesday - January 28, 2020 12:59 pm , Category : WTN HINDI
दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में महंगा है ट्रांसपोर्टेशन
दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में महंगा है ट्रांसपोर्टेशन

महंगी माल ढुलाई से जल्द मिल सकती है निजात

JAN 28 (WTN) – मोदी सरकार साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लेने के लिए मशहूर रही है। जहां तक अर्थव्यवस्था से जुड़े निर्णयों की बात है, तो नोटबंदी और जीएसटी मोदी सरकार के साहसिक आर्थिक निर्णय माने जाते हैं। इधर आर्थिक सुस्ती से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था नये वित्त वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। ऐसे में मोदी सरकार काफ़ी कुछ नये फ़ैसले भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लेने जा रही है जिसका फ़ायदा देश की जनता को हो सकता है। एक फरवरी को जब निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी, तो इस बार हो सकता है कि लॉजिस्टिक पॉलिसी को लेकर कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है जिससे देश में माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन का ख़र्चा कम हो सके।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस बार बजट में मोदी सरकार नई नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी (National Logistics Policy) का ऐलान कर सकती है। जानकारी के अनुसार, लॉजिस्टिक पॉलिसी में माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन को कम ख़र्चीला बनाने पर पूरा ज़ोर दिया जा सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में लॉजिस्टिक पॉलिसी पर एक बैठक हुई थी जिसके बाद क़यास लगाए जा रहे हैं कि इस बार बजट में नई लॉजिस्टिक पॉलिसी का ऐलान हो सकता है।
 
जानकारी के मुताबिक़, नई नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी में सभी तरह की लॉजिस्टिक्स के लिए सिंगल प्लेटफॉर्म बनाने का ऐलान हो सकता है जिससे लॉजिस्टिक की लागत कम हो सकेगी। हो सकता है कि नई पॉलिसी में माल ढुलाई के लिए काग़ज़ी कार्रवाई आसान करने का भी प्रस्ताव हो। इतना ही नहीं, नई पॉलिसी में कारोबारियों और आयात-निर्यात के लिए विशेष सुविधाओं का भी ऐलान हो सकता है। वहीं नई नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी में बिना किसी रुकावट के ट्रांसपोर्टेशन पर ज़ोर दिया जा सकता है। सम्भावित पॉलिसी के प्रस्ताव के अनुसार, ट्रांसपोर्टेशन की झंझटों को ख़त्म करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस को अपनाया जा सकता है।
 
सम्भावित नई पॉलिसी में लॉजिस्टिक्स सेक्टर को आसान शर्तों पर बुनियादी सुविधाएं देने का प्रस्ताव भी है। वहीं टेक्नोलॉजी के इस दौर में लॉजिस्टिक में बेहतर तकनीक पर ज़ोर दिया जा सकता है। जानकारों के अनुसार, सरकार की मंशा है कि लॉजिस्टिक कॉस्ट को GDP के 9 से 10 प्रतिशत तक सीमित किया जाए जो कि वर्तमान में 13 से 14 प्रतिशत है। दरअसल, भारत में लॉजिस्टिक कॉस्ट दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा है। चीन, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में लॉजिस्टिक्स कॉस्ट जीडीपी के 5 प्रतिशत से भी कम है।
 
सम्भावित नई लॉजिस्टिक पॉलिसी में देश में अहम स्थानों पर वेयरहाउस की संख्या को बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया जा सकता है। इतना ही नहीं, देश में लॉजिस्टिक कॉस्ट को कम करने के लिए सरकार रेलवे या इनलैण्ड वाटरवेज पर ट्रांसपोर्टेशन को अधिक से अधिक अपनाए जाने पर भी ज़ोर दे सकती है और इसी के लिए दोनों दिशा में ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तेज़ी से तैयार किया जा रहा है।

इसके अलावा इस नई पॉलिसी में एक नेशनल ई-मार्केट प्लेस का प्रस्ताव दिया गया है जो आयातकों और निर्यातकों के लिए एक वन स्टॉक मार्केटप्लेस के तौर पर काम करेगा। वहीं पॉलिसी में लॉजिस्टिक सेक्टर के स्टार्टअप के लिए अलग फण्ड मुहैया कराने और इस सेक्टर में रोज़गार को दोगुना करने की बात कही जा सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार इस तरह कि लॉजिस्टिक पॉलिसी का ऐलान करती है और उसको अमलीजामा पहनाने के लिए ठोस क़दम उठाती है तो इससे भारत की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इण्डेक्स रैंकिंग में सुधार होगा और भारत में ट्रांसपोर्टेशन पहले की तुलना में सस्ता हो जाएगा।