...तो आर्थिक सुस्ती से उबर गई है भारतीय ऑटो इण्डस्ट्री
Wednesday - January 29, 2020 10:37 am ,
Category : WTN HINDI
मारुति सुजुकी के शुद्ध मुनाफे में हुई वृद्धि
ऑटो सेक्टर में आई राहत की ख़बर, मारुति सुजुकी की बिक्री में हुआ इज़ाफ़ा
JAN 29 (WTN) – भारत की तेज़ी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने काफ़ी महीनों तक प्रभावित किया है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर से शुरू हुई आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना बहुत ही नकारात्मक असर डाला है। लेकिन आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर ऑटो सेक्टर पर देखने को मिला है। देश में जब भी आर्थिक सुस्ती की बात हुई, तो गाड़ियों की कम बिक्री को आर्थिक सुस्ती के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह सही भी है कि पिछले 18 महीनों से ऑटो सेक्टर पर आर्थिक सुस्ती का इतना ज़्यादा असर पड़ा है कि गाड़ियों की बिक्री में ऐतिहासिक रूप से गिरावट दर्ज़ की गई।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक सुस्ती ने किसी ना किसी तरह से प्रभावित किया है। लेकिन अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील के बाद आर्थिक सुस्ती का असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, और भारतीय ऑटो सेक्टर भी ऐसे ही सन्केत दे रहा है। बता दें कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कम्पनी मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2019-20 की अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही के दौरान कुल 1587.4 करोड़ के शुद्ध मुनाफे की घोषणा की है़ जो कि पिछले साल की समान अवधि से 4.13 प्रतिशत ज़्यादा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही में मारुति सुजुकी कम्पनी को 1524.5 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। बता दें कि मारुति सुजुकी की भारतीय कार बाज़ार में क़रीब 53 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। ऐसे में मारुति सुजुकी के बढ़े हुए लाभ के आधार पर कहा जा सकता है कि धीरे-धीरे ऑटो सेक्टर में सुस्ती ख़त्म होती जा रही है।
जानकारी के लिए बता दें कि मारुत सुजुकी ने मौजूदा वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही के दौरान कुल 4,37,361 कारें बेची हैं जिसमें कम्पनी ने 23,663 कारों का निर्यात किया है, और 4,13,698 कारों को भारतीय बाज़ार में बेचा है। आंकड़ों के मुताबिक़, घरेलू बाज़ार में इस बार कारों की बिक्री पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में 2 प्रतिशत ज़्यादा है। वहीं बता दें कि परिचालन से होने वाले कंसॉलिडेटेड रिवेन्यु में भी मारुति सुजुकी कम्पनी ने 5.29 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। बता दें कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कम्पनी का कंसॉलिडेटेड रिवेन्यु 20721.8 करोड़ रुपये रहा है वहीं पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 19680.7 करोड़ रुपये रहा था।
गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि पर मारुति सुजुकी का कहना है कि गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रमोशन पर काफ़ी पैसा ख़र्च किया गया है। वहीं कम्पनी का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान लाभ कमाने के लिए कई उपाय किये गये थे जैसे लागत में कटौती और ऑपरेटिंग ख़र्च घटाना आदि। वहीं कच्चे माल की क़ीमतों में कमी होने और कॉरपोरेट टैक्स घटने के कारण कम्पनी को इस तिमाही में मुनाफा हुआ है। हालांकि, कम्पनी को लगता है कि उसकी उम्मीद के मुताबिक़ मुनाफा कम रहा है, और कम्पनी को उम्मीद थी कि शुद्ध मुनाफा 1647 करोड़ रुपये के आसपास रहेगा। वैसे कम्पनी ख़त्म हुई तिमाही में अपने प्रदर्शन से उत्साहित है, क्योंकि कम्पनी ने यह मुनाफा ऐसे समय में कमाया है जब चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में ऑटो लोन की शर्तों में सख्ती हुई है और इंश्योरेंस कॉस्ट में भी वृद्धि हुई है।
इधर मारुत सुजुकी की कारों के उत्साहजनक बिक्री के आंकड़ों के बाद इस क्षेत्र के जानकारों की राय है कि मारुति सुजुकी कम्पनी के तिमाही आंकड़े बहुत उत्साहित करने वाले तो नहीं हैं, लेकिन इन आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ऑटो सेक्टर के बुरे दिन ख़त्म हो चुके हैं। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष के बाक़ी बचे समय में भी ऑटो सेक्टर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैसे कहा जा रहा है कि ऑटो सेक्टर में बिक्री किस तरह से जारी रहने वाली है इसका सही पता नये वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देखने को मिलेगा।
दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि केन्द्र सरकार इस कोशिश में है कि डीज़ल और पेट्रोल गाड़ियों की जगह पर लोग ज़्यादा से ज़्यादा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को ख़रीदें। हो सकता है कि इस साल के बजट में सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल ख़रीदी पर रजिस्ट्रेशन में रियायत आदि देने का ऐलान कर सकती है। इधर, ऑटो सेक्टर भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दरअसल, एक तरफ ऑटो कम्पनियां BS-IV से सीधे BS-VI का रुख कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ उन पर इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर भी दबाव है।
वैसे मारुति सुजुकी की चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के बिक्री के आंकड़े ऑटो सेक्टर के लिए काफ़ी उत्साहजनक हैं। पिछले काफ़ी समय से ऑटो सेक्टर पर आर्थिक सुस्ती का काफ़ी नकारात्मक असर पड़ा है। इस दौरान गाड़ियों की बिक्री इतनी कम हो गई थी कि कुछ ऑटो कम्पनियों को आर्थिक सुस्ती के कारण अपने उत्पादन में कटौती करना पड़ा थी, या फ़िर कुछ दिनों के लिए उत्पादन रोक देना पड़ा था। आर्थिक सुस्ती का असर ऑटो सेक्टर के जॉब पर भी पड़ा था, और हज़ारों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी। हालांकि, अब जबकि ऑटो सेक्टर आर्थिक सुस्ती के असर से उबर चुका है, तो ऐसे में आशा की जाना चाहिए कि इससे ऑटो कम्पनियों का मुनाफा बढ़ेगा और एक बार फ़िर से इस सेक्टर में रोज़गार के असवर बढ़ेंगे।
JAN 29 (WTN) – भारत की तेज़ी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने काफ़ी महीनों तक प्रभावित किया है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर से शुरू हुई आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना बहुत ही नकारात्मक असर डाला है। लेकिन आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर ऑटो सेक्टर पर देखने को मिला है। देश में जब भी आर्थिक सुस्ती की बात हुई, तो गाड़ियों की कम बिक्री को आर्थिक सुस्ती के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह सही भी है कि पिछले 18 महीनों से ऑटो सेक्टर पर आर्थिक सुस्ती का इतना ज़्यादा असर पड़ा है कि गाड़ियों की बिक्री में ऐतिहासिक रूप से गिरावट दर्ज़ की गई।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, भारत समेत दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक सुस्ती ने किसी ना किसी तरह से प्रभावित किया है। लेकिन अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील के बाद आर्थिक सुस्ती का असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, और भारतीय ऑटो सेक्टर भी ऐसे ही सन्केत दे रहा है। बता दें कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कम्पनी मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2019-20 की अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही के दौरान कुल 1587.4 करोड़ के शुद्ध मुनाफे की घोषणा की है़ जो कि पिछले साल की समान अवधि से 4.13 प्रतिशत ज़्यादा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही में मारुति सुजुकी कम्पनी को 1524.5 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। बता दें कि मारुति सुजुकी की भारतीय कार बाज़ार में क़रीब 53 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। ऐसे में मारुति सुजुकी के बढ़े हुए लाभ के आधार पर कहा जा सकता है कि धीरे-धीरे ऑटो सेक्टर में सुस्ती ख़त्म होती जा रही है।
जानकारी के लिए बता दें कि मारुत सुजुकी ने मौजूदा वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही के दौरान कुल 4,37,361 कारें बेची हैं जिसमें कम्पनी ने 23,663 कारों का निर्यात किया है, और 4,13,698 कारों को भारतीय बाज़ार में बेचा है। आंकड़ों के मुताबिक़, घरेलू बाज़ार में इस बार कारों की बिक्री पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही की तुलना में 2 प्रतिशत ज़्यादा है। वहीं बता दें कि परिचालन से होने वाले कंसॉलिडेटेड रिवेन्यु में भी मारुति सुजुकी कम्पनी ने 5.29 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। बता दें कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कम्पनी का कंसॉलिडेटेड रिवेन्यु 20721.8 करोड़ रुपये रहा है वहीं पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 19680.7 करोड़ रुपये रहा था।
गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि पर मारुति सुजुकी का कहना है कि गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रमोशन पर काफ़ी पैसा ख़र्च किया गया है। वहीं कम्पनी का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान लाभ कमाने के लिए कई उपाय किये गये थे जैसे लागत में कटौती और ऑपरेटिंग ख़र्च घटाना आदि। वहीं कच्चे माल की क़ीमतों में कमी होने और कॉरपोरेट टैक्स घटने के कारण कम्पनी को इस तिमाही में मुनाफा हुआ है। हालांकि, कम्पनी को लगता है कि उसकी उम्मीद के मुताबिक़ मुनाफा कम रहा है, और कम्पनी को उम्मीद थी कि शुद्ध मुनाफा 1647 करोड़ रुपये के आसपास रहेगा। वैसे कम्पनी ख़त्म हुई तिमाही में अपने प्रदर्शन से उत्साहित है, क्योंकि कम्पनी ने यह मुनाफा ऐसे समय में कमाया है जब चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में ऑटो लोन की शर्तों में सख्ती हुई है और इंश्योरेंस कॉस्ट में भी वृद्धि हुई है।
इधर मारुत सुजुकी की कारों के उत्साहजनक बिक्री के आंकड़ों के बाद इस क्षेत्र के जानकारों की राय है कि मारुति सुजुकी कम्पनी के तिमाही आंकड़े बहुत उत्साहित करने वाले तो नहीं हैं, लेकिन इन आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ऑटो सेक्टर के बुरे दिन ख़त्म हो चुके हैं। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष के बाक़ी बचे समय में भी ऑटो सेक्टर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैसे कहा जा रहा है कि ऑटो सेक्टर में बिक्री किस तरह से जारी रहने वाली है इसका सही पता नये वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देखने को मिलेगा।
दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि केन्द्र सरकार इस कोशिश में है कि डीज़ल और पेट्रोल गाड़ियों की जगह पर लोग ज़्यादा से ज़्यादा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को ख़रीदें। हो सकता है कि इस साल के बजट में सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल ख़रीदी पर रजिस्ट्रेशन में रियायत आदि देने का ऐलान कर सकती है। इधर, ऑटो सेक्टर भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दरअसल, एक तरफ ऑटो कम्पनियां BS-IV से सीधे BS-VI का रुख कर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ़ उन पर इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर भी दबाव है।
वैसे मारुति सुजुकी की चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के बिक्री के आंकड़े ऑटो सेक्टर के लिए काफ़ी उत्साहजनक हैं। पिछले काफ़ी समय से ऑटो सेक्टर पर आर्थिक सुस्ती का काफ़ी नकारात्मक असर पड़ा है। इस दौरान गाड़ियों की बिक्री इतनी कम हो गई थी कि कुछ ऑटो कम्पनियों को आर्थिक सुस्ती के कारण अपने उत्पादन में कटौती करना पड़ा थी, या फ़िर कुछ दिनों के लिए उत्पादन रोक देना पड़ा था। आर्थिक सुस्ती का असर ऑटो सेक्टर के जॉब पर भी पड़ा था, और हज़ारों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी। हालांकि, अब जबकि ऑटो सेक्टर आर्थिक सुस्ती के असर से उबर चुका है, तो ऐसे में आशा की जाना चाहिए कि इससे ऑटो कम्पनियों का मुनाफा बढ़ेगा और एक बार फ़िर से इस सेक्टर में रोज़गार के असवर बढ़ेंगे।