आर्थिक नीतियां बनाने में काफ़ी मददगार साबित होगा 'व्यापारी जनसंख्या अभियान'
Thursday - January 30, 2020 11:01 am ,
Category : WTN HINDI
पूरे देश के व्यापारियों का तैयार होगा डेटा
जल्द तैयार होगी पूरे देश के व्यापारियों की सारी जानकारी
JAN 30 (WTN) – किसी भी देश के विकास के लिए किसानों के साथ-साथ व्यापारी भी काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। जहां तक भारत की बात है, तो भारत सदियों से किसानों और व्यापारियों का देश रहा है। प्राचीन काल से ही भारत के दुनिया के कई देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध थे। यदि आज की बात की जाए, तो NSSO (National Sample Survey Office) के एक सर्वे के मुताबिक़, आज की तारीख़ में भारत में क़रीब 7 करोड़ व्यापारी हैं जो कि क़रीब 45 करोड़ लोगों को रोज़गार देते हैं। भारत के यह क़रीब 7 करोड़ व्यापारी साल भर में क़रीब 45 लाख करोड़ रुपयों का व्यापार करते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि देश के विकास में रिटेल व्यापारियों का काफ़ी योगदान रहा है। लेकिन करोड़ों की तादात में व्यापारी होने के बाद भी देश के सभी व्यापारियों की पुख्ता जानकारी सरकार और व्यापारिक संगठनों के पास नहीं है। ऐसे में अब मोदी सरकार की पहल पर पूरे देश के व्यापारियों का एक डेटा तैयार किया जा रहा है। दरअसल, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (National Population Register, NPR) की तर्ज़ पर CAIT (Confederation of All India Traders) यानी कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इण्डिया ट्रेडर्स देश भर के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के व्यापारियों एवं उनके यहां काम करने वाले कर्मचारियों का एक डेटा (Data) तैयार करने जा रहा है।
कहा जा रहा है कि इस डेटा से सरकार और व्यापारिक संगठनों को काफ़ी जानकारियां हासिल हो सकेंगी। वहीं दावा किया जा रहा है कि व्यापारियों और उनके यहां काम कर रहे कर्मचारियों का डेटा तैयार होने से व्यापारियों और कर्मचारियों की बुनियादी समस्याओं को बेहतर तरीक़े से सरकार के सामने रखा जा सकेगा, और सरकार उस डेटा के आधार पर व्यापारी वर्ग के लिए नीतियां बना सकेगी। जानकारी के लिए बता दें कि व्यापारियों का इस तरह का डेटा CAIT, केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के उस सुझाव पर तैयार कर कर रहा है।
CAIT का मानना है कि वित्त मंत्री पीयूष गोयल का सुझाव बेहद तार्किक और लाभप्रद है। CAIT के मुताबिक़, पूरे देश के व्यापारियों का डेटा तैयार होने से देश के रिटेल व्यापार के लिए केन्द्र एवं अन्य राज्यों में सरकारों से सुविधाओं के अधिकार को मांगने, और व्यापार के लिए समर्थन नीति बनवाने में इस डेटा का सहारा लिया जा सकेगा। मोदी सरकार के इस क़दम की व्यापारियों ने प्रशंसा की है। व्यापारियों के मुताबिक़, देश की अर्तव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले रिटेल व्यापारियों की जानकारी एकत्रित करने के बारे में आजतक किसी सरकार ने गम्भीरता से नहीं सोचा था जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
दरअसल, देश के करोड़ों रिटेल व्यापारी देश के व्यापार का एक बड़ा आधार हैं। लेकिन देश का रिटेल व्यापार चलाने वाले करोड़ों व्यापारियों के लिए ना तो कोई नीति है, और ना ही कोई अलग से मंत्रालय। कहा जा रहा है कि रिटेल व्यापारियों का डेटा तैयार होने के बाद CAIT, मोदी सरकार से मांग कर सकता है कि रिटेल व्यापारियों के अलग से एक विभाग या मंत्रालय का गठन किया जाए। CAIT के मुताबिक़, राष्ट्रीय 'व्यापारी जनसंख्या अभियान' 1 मार्च से शुरू होगा और 30 सितम्बर तक देश भर में चलेगा। व्यापारियों का विवरण एकत्रित करने के लिए कैट बाक़ायदा एक मोबाइल ऐप बनाएगी जिसके ज़रिये देश भर के व्यापारी अपना विवरण उसमे दर्ज़ करा सकेंगे।
व्यापारियों की गणना का यह अभियान देश भर में फैले 40 हज़ार से ज़्यादा व्यापारी संगठनों की मदद से चलाया जाएगा। इस डेटा में व्यापारी से कई तरह की जानकारी हासिल की जाएगी, जैसे व्यापारी की दुकान का नाम, दुकान के मालिक का नाम, व्यापारी के परिवार को लोगों की संख्या, व्यापारी की दुकान और घर का पता, लैण्डलाइन और मोबाइल नम्बर, दुकान का प्रकार, दुकान की मेल आईडी, और यदि दुकान की कोई वेबसाइट है तो उसकी जानकारी। इतना ही नहीं, व्यापारी की दुकान पर कितने कर्मचारी काम करते हैं, और कर्मचारी के घर में कितने सदस्य हैं इसके बारे में भी जानकारी हासिल की जाएगी। व्यापारियों के डेटा कलेक्शन पर CAIT का कहना है कि जुटाया गया सारा डेटा बेहद गोपनीय रहेगा, और ज़रूरत के मुताबिक़ इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
ज़ाहिर है कि पूरे देश के व्यापारियों का डेटा कलेक्ट करने के बाद सरकार को यह पता चल सकेगा कि रिटेल व्यापारियों की कितनी संख्या देश में हैं, और इनके द्वारा कितने लोगों को रोज़गार मुहैया कराया गया है। इस डेटा के आधार पर ही सरकार व्यापारियों के हित में नीतियां बना सकेगी। किसानों और नौकरीपेशा लोगों का डेटा तो सरकार के पास होता है, लेकिन अब 'व्यापारी जनसंख्या अभियान' से सरकार के पास व्यापारियों का डेटा भी उपलब्ध रहेगा। स्वाभाविक है कि इस डेटा के आधार पर ही सरकार को सही आर्थिक नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
JAN 30 (WTN) – किसी भी देश के विकास के लिए किसानों के साथ-साथ व्यापारी भी काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। जहां तक भारत की बात है, तो भारत सदियों से किसानों और व्यापारियों का देश रहा है। प्राचीन काल से ही भारत के दुनिया के कई देशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध थे। यदि आज की बात की जाए, तो NSSO (National Sample Survey Office) के एक सर्वे के मुताबिक़, आज की तारीख़ में भारत में क़रीब 7 करोड़ व्यापारी हैं जो कि क़रीब 45 करोड़ लोगों को रोज़गार देते हैं। भारत के यह क़रीब 7 करोड़ व्यापारी साल भर में क़रीब 45 लाख करोड़ रुपयों का व्यापार करते हैं।
आंकड़े बताते हैं कि देश के विकास में रिटेल व्यापारियों का काफ़ी योगदान रहा है। लेकिन करोड़ों की तादात में व्यापारी होने के बाद भी देश के सभी व्यापारियों की पुख्ता जानकारी सरकार और व्यापारिक संगठनों के पास नहीं है। ऐसे में अब मोदी सरकार की पहल पर पूरे देश के व्यापारियों का एक डेटा तैयार किया जा रहा है। दरअसल, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (National Population Register, NPR) की तर्ज़ पर CAIT (Confederation of All India Traders) यानी कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इण्डिया ट्रेडर्स देश भर के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के व्यापारियों एवं उनके यहां काम करने वाले कर्मचारियों का एक डेटा (Data) तैयार करने जा रहा है।
कहा जा रहा है कि इस डेटा से सरकार और व्यापारिक संगठनों को काफ़ी जानकारियां हासिल हो सकेंगी। वहीं दावा किया जा रहा है कि व्यापारियों और उनके यहां काम कर रहे कर्मचारियों का डेटा तैयार होने से व्यापारियों और कर्मचारियों की बुनियादी समस्याओं को बेहतर तरीक़े से सरकार के सामने रखा जा सकेगा, और सरकार उस डेटा के आधार पर व्यापारी वर्ग के लिए नीतियां बना सकेगी। जानकारी के लिए बता दें कि व्यापारियों का इस तरह का डेटा CAIT, केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के उस सुझाव पर तैयार कर कर रहा है।
CAIT का मानना है कि वित्त मंत्री पीयूष गोयल का सुझाव बेहद तार्किक और लाभप्रद है। CAIT के मुताबिक़, पूरे देश के व्यापारियों का डेटा तैयार होने से देश के रिटेल व्यापार के लिए केन्द्र एवं अन्य राज्यों में सरकारों से सुविधाओं के अधिकार को मांगने, और व्यापार के लिए समर्थन नीति बनवाने में इस डेटा का सहारा लिया जा सकेगा। मोदी सरकार के इस क़दम की व्यापारियों ने प्रशंसा की है। व्यापारियों के मुताबिक़, देश की अर्तव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले रिटेल व्यापारियों की जानकारी एकत्रित करने के बारे में आजतक किसी सरकार ने गम्भीरता से नहीं सोचा था जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
दरअसल, देश के करोड़ों रिटेल व्यापारी देश के व्यापार का एक बड़ा आधार हैं। लेकिन देश का रिटेल व्यापार चलाने वाले करोड़ों व्यापारियों के लिए ना तो कोई नीति है, और ना ही कोई अलग से मंत्रालय। कहा जा रहा है कि रिटेल व्यापारियों का डेटा तैयार होने के बाद CAIT, मोदी सरकार से मांग कर सकता है कि रिटेल व्यापारियों के अलग से एक विभाग या मंत्रालय का गठन किया जाए। CAIT के मुताबिक़, राष्ट्रीय 'व्यापारी जनसंख्या अभियान' 1 मार्च से शुरू होगा और 30 सितम्बर तक देश भर में चलेगा। व्यापारियों का विवरण एकत्रित करने के लिए कैट बाक़ायदा एक मोबाइल ऐप बनाएगी जिसके ज़रिये देश भर के व्यापारी अपना विवरण उसमे दर्ज़ करा सकेंगे।
व्यापारियों की गणना का यह अभियान देश भर में फैले 40 हज़ार से ज़्यादा व्यापारी संगठनों की मदद से चलाया जाएगा। इस डेटा में व्यापारी से कई तरह की जानकारी हासिल की जाएगी, जैसे व्यापारी की दुकान का नाम, दुकान के मालिक का नाम, व्यापारी के परिवार को लोगों की संख्या, व्यापारी की दुकान और घर का पता, लैण्डलाइन और मोबाइल नम्बर, दुकान का प्रकार, दुकान की मेल आईडी, और यदि दुकान की कोई वेबसाइट है तो उसकी जानकारी। इतना ही नहीं, व्यापारी की दुकान पर कितने कर्मचारी काम करते हैं, और कर्मचारी के घर में कितने सदस्य हैं इसके बारे में भी जानकारी हासिल की जाएगी। व्यापारियों के डेटा कलेक्शन पर CAIT का कहना है कि जुटाया गया सारा डेटा बेहद गोपनीय रहेगा, और ज़रूरत के मुताबिक़ इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
ज़ाहिर है कि पूरे देश के व्यापारियों का डेटा कलेक्ट करने के बाद सरकार को यह पता चल सकेगा कि रिटेल व्यापारियों की कितनी संख्या देश में हैं, और इनके द्वारा कितने लोगों को रोज़गार मुहैया कराया गया है। इस डेटा के आधार पर ही सरकार व्यापारियों के हित में नीतियां बना सकेगी। किसानों और नौकरीपेशा लोगों का डेटा तो सरकार के पास होता है, लेकिन अब 'व्यापारी जनसंख्या अभियान' से सरकार के पास व्यापारियों का डेटा भी उपलब्ध रहेगा। स्वाभाविक है कि इस डेटा के आधार पर ही सरकार को सही आर्थिक नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।