राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र मोदी सरकार उठाने जा रही बड़ा क़दम!
Thursday - January 30, 2020 3:49 pm ,
Category : WTN HINDI
फ़ोन टैपिंग के लिए होगा व्यवस्था में बदलाव
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब फ़ोन टैपिंग होगी आसान, मोदी सरकार कर रही क़ानून में बदलाव
JAN 30 (WTN) – दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में फ़ोन टैपिंग पर हमेशा से ही विवाद होता आया है। हमेशा से ही सत्ता पक्ष पर विपक्षी पार्टियां फ़ोन टैपिंग का आरोप लगाती रहती हैं। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को फ़ोन टैपिंग का अधिकार है। लेकिन एक समय ऐसा था जब मोबाइल फ़ोन तकनीक नहीं थी, और देश में चुनिंदा लोगों के पास ही लैण्डलाइन फ़ोन होता था। और इसी कारण से किसी की भी फ़ोन टैपिंग करना आसान था। लेकिन अब टेक्नोलॉजी के इस दौर में करोड़ों लोगों के पास मोबाइल फ़ोन हैं, ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग के लिए वर्तमान में जारी व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत महसूस की जाने लगी है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, देश की सुरक्षा के मद्देनज़र और देश में होने वाली अनहोनी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार जल्द ही ऐसा क़ानून बनाने जा रही जिससे कोई भी अधिकृत अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र किसी का भी फ़ोन टैप कर सकेगा। किसी सक्षम अधिकारी को इस तरह के अधिकार देने के लिए दूरसंचार विभाग, टेलीग्राफ एक्ट में सेक्शन 419 B जोड़ने की तैयारी कर रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी फ़िलहाल टेलीग्राफ एक्ट के सेक्शन 419 A के तहत फ़ोन टैपिंग का प्रावधान है। टेलीग्राफ एक्ट के सेक्शन 419 A के तहत अभी सिर्फ़ केन्द्रीय गृह सचिव और राज्यों के गृह सचिव की मन्जूरी से ही फ़ोन टैपिंग हो सकती है।
टेलीग्राफ एक्ट में सेक्शन 419 B जोड़ने के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा रूल्स का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है, और गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा। खुफिया विभाग और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि यदि मोदी सरकार फ़ोन टैपिंग से सम्बन्धित क़ानून में बदलाव कर रही है, तो यह एक काफ़ी अच्छा क़दम है। दरअसल, फ़ोन टैपिंग की जो व्यवस्था वर्तमान में है वह काफ़ी पेचीदा और लम्बी है, और इसी कारण से कई बार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की फ़ोन टैपिंग होने में समय लग जाता है। इसलिए मोदी सरकार की कोशिश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग जल्द से जल्द हो सके इसके लिए वर्तमान व्यवस्था में बदलाव ज़रूरी है।
फ़ोन टैपिंग के लिए जो ज़रूरी बदलाव किये जा रहे हैं उनके मुताबिक़, केन्द्रीय गृह सचिव और राज्यों के गृह सचिव के अलावा अब कोई भी अधिकृत अधिकारी ज़रूरत पड़ने पर फ़ोन टैंपिग करा सकेगा। वहीं अधिकृत अधिकारी टेलीकॉम की लाइसेंसिंग शर्तों के मद्देनज़र किसी के भी मैसेज को स्टोर कर सकेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जांच एज़ेंसियों के साथ बाक़ायदा सूचनाएं साझा होंगी। अभी फ़िलहाल दिल्ली और मुम्बई में सेन्ट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम हैं, और क़ानून में संशोधन होने के बाद अब सेन्ट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम के ज़रिए निगरानी होगी।
वहीं मोदी सरकार की कोशिश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग आसान तो बनाई जाई, लेकिन फ़ोन टैपिंग का दुरूपयोग ना हो। दरअसल, अभी जो व्यवस्था है उसमें बदलाव काफ़ी ज़रूरी है, क्योंकि अभी जो व्यवस्था है उससे तुरन्त कार्रवाई नहीं हो पाती है, और इसी कारण से राष्ट्र विरोधी तत्वों को लाभ मिलता है। फ़ोन टैपिंग आसान बनाने के लिए मोदी सरकार क़ानून में संशोधन कर रही है, लेकिन मोदी सरकार की यह कोशिश भी है कि इस अधिकार का किसी भी तरह से दुरुपयोग ना हो सके। सरकार पूरी कोशिश करेगी कि फ़ोन टैपिंग की इज़ाज़त किसी बड़े ज़िम्मेदारी अधिकारी दी जाएगी, जिससे इस अधिकार का दुरुपयोग ना हो सके।
इस बारे में विशेषज्ञों की राय है कि फ़ोन टैपिंग के लिए पुलिस में डीआईजी या स्पेशल कमिश्नर लेबल के, और ज़िले में ज़िलाधिकारी स्तर के अधिकारियों को ही इसके लिए अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही फ़ोन टैपिंग जैसे संवेदनशील मामले में छुट्टी के दिन भी ज़रूरत पड़ने पर फ़ोन टैपिंग के लिए सक्षम अधिकारी उपलब्ध होना चाहिए, जिससे फ़ोन टैपिंग की लिए इज़ाज़त हर समय मिल सके। तो कहा जा सकता है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग की व्यवस्था को पहले की तुलना में और भी ज़्यादा आसान बनाने जा रही है, लेकिन वहीं सरकार को चाहिए कि वो ध्यान रखे कि फ़ोन टैपिंग का दुरुपयोग ना हो सके।
JAN 30 (WTN) – दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में फ़ोन टैपिंग पर हमेशा से ही विवाद होता आया है। हमेशा से ही सत्ता पक्ष पर विपक्षी पार्टियां फ़ोन टैपिंग का आरोप लगाती रहती हैं। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को फ़ोन टैपिंग का अधिकार है। लेकिन एक समय ऐसा था जब मोबाइल फ़ोन तकनीक नहीं थी, और देश में चुनिंदा लोगों के पास ही लैण्डलाइन फ़ोन होता था। और इसी कारण से किसी की भी फ़ोन टैपिंग करना आसान था। लेकिन अब टेक्नोलॉजी के इस दौर में करोड़ों लोगों के पास मोबाइल फ़ोन हैं, ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग के लिए वर्तमान में जारी व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत महसूस की जाने लगी है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, देश की सुरक्षा के मद्देनज़र और देश में होने वाली अनहोनी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार जल्द ही ऐसा क़ानून बनाने जा रही जिससे कोई भी अधिकृत अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र किसी का भी फ़ोन टैप कर सकेगा। किसी सक्षम अधिकारी को इस तरह के अधिकार देने के लिए दूरसंचार विभाग, टेलीग्राफ एक्ट में सेक्शन 419 B जोड़ने की तैयारी कर रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी फ़िलहाल टेलीग्राफ एक्ट के सेक्शन 419 A के तहत फ़ोन टैपिंग का प्रावधान है। टेलीग्राफ एक्ट के सेक्शन 419 A के तहत अभी सिर्फ़ केन्द्रीय गृह सचिव और राज्यों के गृह सचिव की मन्जूरी से ही फ़ोन टैपिंग हो सकती है।
टेलीग्राफ एक्ट में सेक्शन 419 B जोड़ने के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा रूल्स का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है, और गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा। खुफिया विभाग और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि यदि मोदी सरकार फ़ोन टैपिंग से सम्बन्धित क़ानून में बदलाव कर रही है, तो यह एक काफ़ी अच्छा क़दम है। दरअसल, फ़ोन टैपिंग की जो व्यवस्था वर्तमान में है वह काफ़ी पेचीदा और लम्बी है, और इसी कारण से कई बार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की फ़ोन टैपिंग होने में समय लग जाता है। इसलिए मोदी सरकार की कोशिश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग जल्द से जल्द हो सके इसके लिए वर्तमान व्यवस्था में बदलाव ज़रूरी है।
फ़ोन टैपिंग के लिए जो ज़रूरी बदलाव किये जा रहे हैं उनके मुताबिक़, केन्द्रीय गृह सचिव और राज्यों के गृह सचिव के अलावा अब कोई भी अधिकृत अधिकारी ज़रूरत पड़ने पर फ़ोन टैंपिग करा सकेगा। वहीं अधिकृत अधिकारी टेलीकॉम की लाइसेंसिंग शर्तों के मद्देनज़र किसी के भी मैसेज को स्टोर कर सकेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जांच एज़ेंसियों के साथ बाक़ायदा सूचनाएं साझा होंगी। अभी फ़िलहाल दिल्ली और मुम्बई में सेन्ट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम हैं, और क़ानून में संशोधन होने के बाद अब सेन्ट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम के ज़रिए निगरानी होगी।
वहीं मोदी सरकार की कोशिश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग आसान तो बनाई जाई, लेकिन फ़ोन टैपिंग का दुरूपयोग ना हो। दरअसल, अभी जो व्यवस्था है उसमें बदलाव काफ़ी ज़रूरी है, क्योंकि अभी जो व्यवस्था है उससे तुरन्त कार्रवाई नहीं हो पाती है, और इसी कारण से राष्ट्र विरोधी तत्वों को लाभ मिलता है। फ़ोन टैपिंग आसान बनाने के लिए मोदी सरकार क़ानून में संशोधन कर रही है, लेकिन मोदी सरकार की यह कोशिश भी है कि इस अधिकार का किसी भी तरह से दुरुपयोग ना हो सके। सरकार पूरी कोशिश करेगी कि फ़ोन टैपिंग की इज़ाज़त किसी बड़े ज़िम्मेदारी अधिकारी दी जाएगी, जिससे इस अधिकार का दुरुपयोग ना हो सके।
इस बारे में विशेषज्ञों की राय है कि फ़ोन टैपिंग के लिए पुलिस में डीआईजी या स्पेशल कमिश्नर लेबल के, और ज़िले में ज़िलाधिकारी स्तर के अधिकारियों को ही इसके लिए अधिकृत किया जाना चाहिए। साथ ही फ़ोन टैपिंग जैसे संवेदनशील मामले में छुट्टी के दिन भी ज़रूरत पड़ने पर फ़ोन टैपिंग के लिए सक्षम अधिकारी उपलब्ध होना चाहिए, जिससे फ़ोन टैपिंग की लिए इज़ाज़त हर समय मिल सके। तो कहा जा सकता है कि मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र फ़ोन टैपिंग की व्यवस्था को पहले की तुलना में और भी ज़्यादा आसान बनाने जा रही है, लेकिन वहीं सरकार को चाहिए कि वो ध्यान रखे कि फ़ोन टैपिंग का दुरुपयोग ना हो सके।