भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित होगी मोदी सरकार की इलेक्ट्रिक हाइवे परियोजना
Friday - January 31, 2020 11:09 am ,
Category : WTN HINDI
अब बिजली से चलेंगे ट्रक और बस!
इलेक्ट्रिक हाइवे: बदलाव की दिशा में मोदी सरकार का बड़ा क़दम
JAN 31 (WTN) – बिजली से चलने वाले ट्रेनों के इंजन, और उस इंजन के सहारे दौड़ती यात्री गाड़ियों और माल गाड़ियों को तो आपने देखा ही होगा। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि निकट भविष्य में ट्रक और बस भी इलेक्ट्रिक केबल से चलेंगी, तो यह पढ़कर आप चौक गए होंगे। आपका चौकना स्वाभाविक है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जल्द ही देश में ऐसा हाइवे बनने वाला है जिसमें पेट्रोल, ड़ीजल या सीएनजी से चलने वाले वाहनों के साथ ही बिजली से चलने वाले वाहन भी दौड़ते नज़र आएंगे। क्या है यह पूरा मामला? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, मोदी सरकार ने दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर एक इलेक्ट्रिक हाइवे बनाने की योजना तैयार की है। जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार जर्मनी, स्वीडन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तर्ज़ पर भारत में भी सामान्य हाइवे को इलेक्ट्रिक हाइवे में बदलने की योजना पर काम कर रही है।
सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रिक हाइवे से लॉजिस्टिक कॉस्ट में कमी आएगी, और देश का क़ीमती विदेशी धन बचेगा। दरअसल, डीज़ल और पेट्रोल के लिए आयात के लिए भारत सरकार को काफ़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा ख़र्च करना पड़ती है। बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि ट्रक और बस इलेक्ट्रिक केबल से चलेंगे तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। जानकारी के लिए बता दें कि भारत हर साल 7 लाख करोड़ रुपयों का कच्चा तेल आयात करता है।
वैसे अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर इलेक्ट्रिक हाइवे में किस तरह से काम होगा, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इलेक्ट्रिक हाइवे पर ट्रक या बस भी मेट्रो की तरह ऊपर लगे इलेक्ट्रिक केबल के जरिये चलेंगे। इलेक्ट्रिक हाइवे में दोनों तरफ़ बिजली की लाइन बिछाई जाएगी जिन पर 80 टन तक वजन ढोने वाले ट्रक 100 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति से दौड़ सकेंगे।
स्वाभाविक है कि जब बड़ी तादात में ट्रक और बस बिजली से चलेंगे, तो इससे प्रदूषण नहीं फैलेगा। लेकिन फ़िर भी इस प्रस्तावित इलेक्ट्रिक हाइवे के दोनों तरफ़ क़रीब 10 लाख पेड़ लगाने की योजना है, जिससे किसी भी तरह के प्रदूषण से निपटा जा सके। वहीं प्रस्तावित इलेक्ट्रिक हाइवे पर वाटर हार्वेस्टिंग करने भी योजना है, जिससे इस पानी को आसपास के खेतों में सिंचाई के काम लिया जा सके।
लेकिन इलेक्ट्रिक हाइवे की यह योजना जितनी आसान लग रही है यह उतनी ही महंगी है। सरकार को इलेक्ट्रिक हाइवे के लिए भारी निवेश की ज़रूरत पड़ेगी। वैसे सरकार ने इलेक्ट्रिक हाइवे के लिए भूमि अधिग्रहण के काम को पूरा कर लिया है, और सरकार को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक हाइवे का काम अगले दो साल में पूरा हो जाएगा। वहीं परियोजना पर ख़र्च घटाने के लिए हाइवे के रास्ते के लिए ग्रामीण और आदिवासी इलाक़ों को चुना गया है।
1250 किलोमीटर लम्बे और 120 मीटर चौड़े इस प्रस्तावित इलेक्ट्रिक हाइवे को बनाने में कुल लागत 1.03 लाख करोड़ रुपये आएगी। वैसे सरकार के मुताबिक़, इस मेगा परियोजना के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि सरकार को 30 साल के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर लोन की अनुमति दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक़, देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक समेत 6 बैंक सरकार को इस मेगा परियोजना के लिए क़र्ज़ देने के लिए तैयार हैं। वहीं सरकार इस हाइवे के पूरा होने के दो साल बाद से टोल टैक्स वसूलेगी जिससे इस परियोजना का ख़र्च निकाला जा सके।
सरकार की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक हाइवे परियोजना के लिए ऑटो कम्पनियां भी उत्साहित हैं, और ऑटो कम्पनियां इलेक्ट्रिक हाईवे के लिए ख़ास ट्रक और बसें डिजाइन कर रही हैं। सरकार का दावा है कि साल 2020 के आख़िरी तक देश में करीब 10,000 ईवी बसें होंगी। ऑटो कम्पनियों द्वारा जो इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाए जा रहे हैं वे बिजली और बैट्री दोनों से चलेंगे।
वहीं यह हाइवे जिन पिछड़े इलाक़ों से गुजरेगा वहां पर विकास के लिए यह हाइवे एक वरदान साबित हो सकता है। इस हाइवे के दोनों तरफ़ कई तरह की व्यवसायिक गतिविधियां होंगी जिसका लाभ ग्रामीण और आदिवासी इलाक़ों के लोगों को मिलेगा। सरकार का दावा है कि इस हाइवे के बनने से जहां से यह हाइवे गुजरेगा वहां के स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलेगा।
आंकड़े बताते हैं कि एक ट्रक, एक लीटर डीज़ल में अधिकतम 6 से 10 किलोमीटर का सफ़र पूरा करता है, लेकिन वहीं इलेक्ट्रिक ट्रक 12 से 15 रुपये की बिजली में 20 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इतना ही नहीं, इस दौरान ट्रक की बैटरी भी चार्ज होती रहेगी जिसके बाद ट्रक बैटरी से चलेगा। वहीं बैटरी ख़त्म होने पर ट्रक फ़िर से इलेक्ट्रिक केबल से चलेगा। वहीं इलेक्ट्रिक ट्रक एक सामान्य ट्रक की तुलना में कहीं ज़्यादा माल ढोएगा, और ऐसा होने से दिल्ली से मुम्बई के बीच माल ढुलाई के खर्च में क़रीब पांच गुना कमी आएगी। वहीं ट्रक ही नहीं, बल्कि बसें भी यदि इलेक्ट्रिक हाइवे पर बिजली से चलेंगी, तो इससे यात्री किराया भी पहली की तुलना में कम हो जाएगा।
दावा किया जा रहा है कि इस हाइवे से दिल्ली से मुम्बई के बीच की दूरी सिर्फ़ 12 घण्टे में पूरी कर ली जाएगी। बता दें कि इस हाइवे पर सिर्फ़ बिजली से चलने वाली बसें और ट्रक ही नहीं चलेगीं, बल्कि यहां पर पेट्रोल, डीज़ल, बैटरी और सीएनजी से चलने वाली कारें भी चलेंगी। मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से देश की अर्थव्यवस्था का काफ़ी सहारा मिलने जा रहा है। इलेक्ट्रिक हाइवे से सबसे बड़ा फ़ायदा यह होगा कि देश को पहली की तुलना में कम कच्चा तेल विदेश से आयात करना पड़ेगा जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
इस हाइवे के निर्माण से माल भाड़े और यात्री किराए में कमी आएगी। वहीं जब ट्रक बिजली से चलेंगे, तो इससे पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों का असर माल ढुलाई पर नहीं पड़ेगा, और रोजमर्रा के उपयोग का सामान महंगा नहीं होगा। वहीं ऑटो इण्डस्ट्री समेत हाइवे के किनारे व्यवसायिक गतिविधियां शुरू होने से लाखों लोगों को रोज़गार मिलेगा। साथ भी बिजली से गाड़ियां चलने से प्रदूषण पर भी काफ़ी हद तक नियंत्रण लग जाएगा। तो कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की इलेक्ट्रिक हाइवे योजना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होगी।
JAN 31 (WTN) – बिजली से चलने वाले ट्रेनों के इंजन, और उस इंजन के सहारे दौड़ती यात्री गाड़ियों और माल गाड़ियों को तो आपने देखा ही होगा। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि निकट भविष्य में ट्रक और बस भी इलेक्ट्रिक केबल से चलेंगी, तो यह पढ़कर आप चौक गए होंगे। आपका चौकना स्वाभाविक है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जल्द ही देश में ऐसा हाइवे बनने वाला है जिसमें पेट्रोल, ड़ीजल या सीएनजी से चलने वाले वाहनों के साथ ही बिजली से चलने वाले वाहन भी दौड़ते नज़र आएंगे। क्या है यह पूरा मामला? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, मोदी सरकार ने दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर एक इलेक्ट्रिक हाइवे बनाने की योजना तैयार की है। जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार जर्मनी, स्वीडन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तर्ज़ पर भारत में भी सामान्य हाइवे को इलेक्ट्रिक हाइवे में बदलने की योजना पर काम कर रही है।
सरकार का दावा है कि इलेक्ट्रिक हाइवे से लॉजिस्टिक कॉस्ट में कमी आएगी, और देश का क़ीमती विदेशी धन बचेगा। दरअसल, डीज़ल और पेट्रोल के लिए आयात के लिए भारत सरकार को काफ़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा ख़र्च करना पड़ती है। बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि ट्रक और बस इलेक्ट्रिक केबल से चलेंगे तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। जानकारी के लिए बता दें कि भारत हर साल 7 लाख करोड़ रुपयों का कच्चा तेल आयात करता है।
वैसे अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर इलेक्ट्रिक हाइवे में किस तरह से काम होगा, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इलेक्ट्रिक हाइवे पर ट्रक या बस भी मेट्रो की तरह ऊपर लगे इलेक्ट्रिक केबल के जरिये चलेंगे। इलेक्ट्रिक हाइवे में दोनों तरफ़ बिजली की लाइन बिछाई जाएगी जिन पर 80 टन तक वजन ढोने वाले ट्रक 100 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति से दौड़ सकेंगे।
स्वाभाविक है कि जब बड़ी तादात में ट्रक और बस बिजली से चलेंगे, तो इससे प्रदूषण नहीं फैलेगा। लेकिन फ़िर भी इस प्रस्तावित इलेक्ट्रिक हाइवे के दोनों तरफ़ क़रीब 10 लाख पेड़ लगाने की योजना है, जिससे किसी भी तरह के प्रदूषण से निपटा जा सके। वहीं प्रस्तावित इलेक्ट्रिक हाइवे पर वाटर हार्वेस्टिंग करने भी योजना है, जिससे इस पानी को आसपास के खेतों में सिंचाई के काम लिया जा सके।
लेकिन इलेक्ट्रिक हाइवे की यह योजना जितनी आसान लग रही है यह उतनी ही महंगी है। सरकार को इलेक्ट्रिक हाइवे के लिए भारी निवेश की ज़रूरत पड़ेगी। वैसे सरकार ने इलेक्ट्रिक हाइवे के लिए भूमि अधिग्रहण के काम को पूरा कर लिया है, और सरकार को उम्मीद है कि इलेक्ट्रिक हाइवे का काम अगले दो साल में पूरा हो जाएगा। वहीं परियोजना पर ख़र्च घटाने के लिए हाइवे के रास्ते के लिए ग्रामीण और आदिवासी इलाक़ों को चुना गया है।
1250 किलोमीटर लम्बे और 120 मीटर चौड़े इस प्रस्तावित इलेक्ट्रिक हाइवे को बनाने में कुल लागत 1.03 लाख करोड़ रुपये आएगी। वैसे सरकार के मुताबिक़, इस मेगा परियोजना के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि सरकार को 30 साल के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर लोन की अनुमति दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक़, देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक समेत 6 बैंक सरकार को इस मेगा परियोजना के लिए क़र्ज़ देने के लिए तैयार हैं। वहीं सरकार इस हाइवे के पूरा होने के दो साल बाद से टोल टैक्स वसूलेगी जिससे इस परियोजना का ख़र्च निकाला जा सके।
सरकार की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक हाइवे परियोजना के लिए ऑटो कम्पनियां भी उत्साहित हैं, और ऑटो कम्पनियां इलेक्ट्रिक हाईवे के लिए ख़ास ट्रक और बसें डिजाइन कर रही हैं। सरकार का दावा है कि साल 2020 के आख़िरी तक देश में करीब 10,000 ईवी बसें होंगी। ऑटो कम्पनियों द्वारा जो इलेक्ट्रिक बस और ट्रक बनाए जा रहे हैं वे बिजली और बैट्री दोनों से चलेंगे।
वहीं यह हाइवे जिन पिछड़े इलाक़ों से गुजरेगा वहां पर विकास के लिए यह हाइवे एक वरदान साबित हो सकता है। इस हाइवे के दोनों तरफ़ कई तरह की व्यवसायिक गतिविधियां होंगी जिसका लाभ ग्रामीण और आदिवासी इलाक़ों के लोगों को मिलेगा। सरकार का दावा है कि इस हाइवे के बनने से जहां से यह हाइवे गुजरेगा वहां के स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोज़गार मिलेगा।
आंकड़े बताते हैं कि एक ट्रक, एक लीटर डीज़ल में अधिकतम 6 से 10 किलोमीटर का सफ़र पूरा करता है, लेकिन वहीं इलेक्ट्रिक ट्रक 12 से 15 रुपये की बिजली में 20 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। इतना ही नहीं, इस दौरान ट्रक की बैटरी भी चार्ज होती रहेगी जिसके बाद ट्रक बैटरी से चलेगा। वहीं बैटरी ख़त्म होने पर ट्रक फ़िर से इलेक्ट्रिक केबल से चलेगा। वहीं इलेक्ट्रिक ट्रक एक सामान्य ट्रक की तुलना में कहीं ज़्यादा माल ढोएगा, और ऐसा होने से दिल्ली से मुम्बई के बीच माल ढुलाई के खर्च में क़रीब पांच गुना कमी आएगी। वहीं ट्रक ही नहीं, बल्कि बसें भी यदि इलेक्ट्रिक हाइवे पर बिजली से चलेंगी, तो इससे यात्री किराया भी पहली की तुलना में कम हो जाएगा।
दावा किया जा रहा है कि इस हाइवे से दिल्ली से मुम्बई के बीच की दूरी सिर्फ़ 12 घण्टे में पूरी कर ली जाएगी। बता दें कि इस हाइवे पर सिर्फ़ बिजली से चलने वाली बसें और ट्रक ही नहीं चलेगीं, बल्कि यहां पर पेट्रोल, डीज़ल, बैटरी और सीएनजी से चलने वाली कारें भी चलेंगी। मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से देश की अर्थव्यवस्था का काफ़ी सहारा मिलने जा रहा है। इलेक्ट्रिक हाइवे से सबसे बड़ा फ़ायदा यह होगा कि देश को पहली की तुलना में कम कच्चा तेल विदेश से आयात करना पड़ेगा जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
इस हाइवे के निर्माण से माल भाड़े और यात्री किराए में कमी आएगी। वहीं जब ट्रक बिजली से चलेंगे, तो इससे पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमतों का असर माल ढुलाई पर नहीं पड़ेगा, और रोजमर्रा के उपयोग का सामान महंगा नहीं होगा। वहीं ऑटो इण्डस्ट्री समेत हाइवे के किनारे व्यवसायिक गतिविधियां शुरू होने से लाखों लोगों को रोज़गार मिलेगा। साथ भी बिजली से गाड़ियां चलने से प्रदूषण पर भी काफ़ी हद तक नियंत्रण लग जाएगा। तो कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की इलेक्ट्रिक हाइवे योजना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होगी।