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जानिए भारत को क्या है नफ़ा-नुकसान ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने का?

Friday - January 31, 2020 3:57 pm , Category : WTN HINDI
आख़िरकार यूरोपीय यूनियन से अलग हुआ ब्रिटेन
आख़िरकार यूरोपीय यूनियन से अलग हुआ ब्रिटेन

भारत की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी असर डालेगा ब्रिक्जेट

JAN 31 (WTN) – ब्रेक्जिट यानी यूरोपीय यूनियन (ईयू) से ब्रिटेन का बाहर होना विश्व इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना है। चार साल तक चली लम्बी जद्दोजहद के बाद बुधवार को यूरोपीय यूनियन की संसद ने 49 के मुक़ाबले 621 मतों के बहुमत से ब्रेक्जिट समझौते को मान्य कर दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि ब्रेक्जिट समझौते को ब्रिटिश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पिछले साल के आख़िरी में यूरोपीय यूनियन के 27 अन्य नेताओं के साथ चर्चा के बाद अन्तिम रूप दिया था। वैसे तो ब्रेक्जिट का राजनीतिक घटनाक्रम यूरोप में घट रहा है, लेकिन ब्रेक्जिट का भारत पर भी असर पड़ने वाला है। आख़िर ब्रेक्जिट का क्या असर भारत और भारत की कम्पनियों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है? आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
 
यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने का काफ़ी बड़ा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्रिटेन में 800 से ज़्यादा भारतीय कम्पनियां हैं जो कि क़रीब एक लाख लोगों को रोज़गार देती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक़, ब्रेक्जिट यानी यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग हो जाने के बाद ब्रिटेन की करेंसी पाउण्ड में गिरावट की आशंका है। स्वाभाविक है कि यदि पाउण्ड की क़ीमत में गिरावट आएगी, तो इससे ब्रिटेन में कारोबार कर रहीं भारतीय कम्पनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा।
 
हालांकि, ब्रिटेन इस साल के अंत तक यूरोपीय यूनियन की आर्थिक व्यवस्था में बना रहेगा, लेकिन ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन के नीतिगत मामलों में कोई दखल नहीं होगा। बता दें कि भारत के विकास के लिए यूरोप और ब्रिटेन दोनों ही अहम हैं, क्योंकि यूरोप और ब्रिटेन को निर्यात से भारत को काफ़ी विदेशी मुद्रा मिलती है। जहां तक ब्रिटेन का सवाल है, तो यूरोपीय यूनियन की जीडीपी में ब्रिटेन की हिस्सेदारी क़रीब 18 प्रतिशत है। ऐसे में यदि ब्रिटेन, यूरोपीय संघ से अलग होता है, और ब्रिटेन की करेंसी पाउण्ड की क़ीमत कम होती है, तो ब्रिटेन को होने वाले व्यापार से भारत को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने से भारत को फ़ायदा ही होगा। दरअसल, ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने से ब्रिटेन के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता हो सकता है, और इससे ब्रिटेन के साथ भारत का व्यापार बढ़ेगा। वहीं वैसे तो ब्रिटेन एक छोटा से देश है, लेकिन पुर्तगाल और ग्रीस जैसे देशों के लिए यह एक सेन्ट्रल मार्केट है। यदि ब्रिटेन के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता होता है, तो इससे भारत को ब्रिटेन में एक विशाल बाज़ार मिल सकेगा। वैसे यूरोपीय संघ के साथ भी भारत ने मुक्त व्यापार समझौते की कोशिश की थी, लेकिन इसमें सफ़लता हासिल ना हो सके।
 
ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने का एक बड़ा फ़ायदा भारत की बड़ी कम्पनियों को मिल सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय कम्पनियां दुनिया की अन्य बड़ी कम्पनियों का अधिग्रहण कर तेज़ी से विदेशों में विस्तार कर रही हैं। वहीं वर्तमान में भारतीय कम्पनियों का यूरोप की तुलना में यूके को निर्यात अधिक होता है, तो ऐसे में ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने का फ़ायदा भारतीय कम्पनियों को मिल सकता है।
 
रेटिंग एजेंसी बैंक ऑफ़ अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने से ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन दोनों को ही भविष्य में घाटा हो सकता है। ऐसे में दोनों ही को एक दूसरे ही विकल्प की ज़रूरत होगी, और भारत दोनों के लिए ही इस विकल्प की भूमिका में खरा उतर सकता है। भारत टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, डिफेंस और फाइनेंस में दोनों का ही एक बड़ा बड़ा भागीदार बन सकता है।
 
लेकिन ब्रेक्जिट से भारतीय कम्पनियों की एक परेशानी बढ़ जाएगी। दरअसल, जब तक ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन का हिस्सा था, ब्रिटेन के लोग यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों में बिना रुकावट और बिना वीज़ा के यात्रा कर रहे थे, लेकिन ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने पर अब ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन के अन्य देशों में व्यापार कर रहीं भारतीय कम्पनियों को अपने कर्मचारियों की यात्रा के लिए वीज़ा पर पैसा ख़र्च करना होगा। वहीं भारतीय कम्पनियां अभी ब्रिटेन के ज़रिए यूरोप के देशों में पैठ बना रही थीं, लेकिन ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने पर भारतीय कम्पनियों को यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों से नए क़रार करने होंगे। स्वाभाविक कि इससे भारतीय कम्पनियों का ख़र्च बढ़ेगा।