जानिए क्या होती है WHO द्वारा घोषित ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी?
Saturday - February 1, 2020 11:06 am ,
Category : WTN HINDI
ख़तरनाक होता जा रहा है कोरोना वायरस
कोरोना वायरस के चलते भारत समेत दुनिया के सभी देशों में जारी हुई ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
FEB 01 (WTN) – चीन के वुहान शहर से फैली संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस चीन के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी फैल चुकी है। चीन के पड़ोसी देशों भारत, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ अस्पताल में भर्ती हैं। कोरोना वायरस धीरे-धीरे ख़तरनाक होता जा रहा है। अकेले चीन में ही कोरोना वायरस से 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं क़रीब 8000 लोग इसके संदिग्ध मरीज़ हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ-साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है। ऐसे में चीन के दुनिया के अन्य देशों के साथ राजनीतिक और आर्थिक सम्बन्ध हैं।
स्वाभाविक है कि दुनिया के अन्य देशों के लोग बहुतायत में चीन आते हैं, और चीन के लोग दुनिया के अन्य देशों में आते हैं। ऐसे में कोरोना वायरस जैसी संक्रामक बीमारी का दुनिया के अन्य देशों में फैलना स्वाभाविक है। जहां तक भारत की बात है, तो केरल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ की पहचान की गई है। वहीं दिल्ली और इन्दौर में भी इस वायरस से संक्रमित संदिग्ध मरीज़ पाए गए हैं। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए चीन के कई शहर लॉक डाउन हैं यानी इन शहरों के लोग संक्रमण से बचने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हैं।
कोरोना वायरस संक्रमण की गम्भीरता को देखते हुए WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी (Global Health Emergency) घोषित कर दी है। आख़िर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी क्या होती है? क्या कारण है कि इस तरह की इमरेजेंसी WHO द्वारा घोषित की जाती है? इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी भी कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी बीमारी को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तभी घोषित करता है जब उस बीमारी के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलने का ख़तरा पैदा हो जाता है। अब जबकि कोरोना वायरस चीन के अलावा दुनिया के अन्य देशों में फैल चुका है। ऐसे में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक आपात बैठक बुलाई थी, और इसी बैठक में कोरोना वायरस को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का फैसला लिया गया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी बीमारी को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तभी घोषित करता है, जब इसकी रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय क़दम उठाए जाने की ज़रूरत महसूस होती है। जब विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जाती है, तो इस हालात में दुनियाभर के देशों को उस बीमारी से बचाव और उसे फैलने से रोकने के उपाय अपने स्तर पर करने होते हैं। जैसे ही WHO द्वारा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी लागू की जाती है, दुनियाभर के देशों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन सम्बन्धित बीमारी से निपटने और उसकी रोकथाम के लिए ऐहतियातन उपाय करती है। ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद बीमारी की विश्व स्तर पर रोकथाम के लिए WHO के पास आकस्मिक फण्ड होता है, और WHO इस फण्ड का इस्तेमाल प्रभावित इलाक़ों में करता है।
बता दें कि फ़िलहाल WHO के पास कोरोना वायरस से निपटने के लिए 1.8 मिलियन डॉलर का फण्ड है, और यह फण्ड दुनिया के कई देशों से आया है। पूरी दुनिया के 196 देश विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य हैं, और सभी सदस्य देश हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन को फण्ड देते रहते हैं। वहीं WHO के सभी सदस्य देशों को WHO के नियमों को मानना पड़ता है। यानी किसी भी तरह की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित होने पर सदस्य देशों को WHO द्वारा जारी की गई गाइडलाइन को फॉलो करना होता है।
ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के समय और बाक़ी अन्य समय WHO द्वारा सदस्य देशों को तरह-तरह की गाइडलाइन जारी की जाती है। जब ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जाती है, तो इसमें ट्रैवल को लेकर भी बाक़ायदा नियम बनाए गये हैं। किसी भी तरह की संक्रामक बीमारी से प्रभावित इलाक़ों में सफ़र के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक विशेष गाइडलाइन जारी की जाती है। प्रभावित इलाक़ों की सीमा और अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाती है ताकि वायरस के असर वाले लोगों की पहचान करके उनके अलग रहने की व्यवस्था की जाए। वैसे आमतौर पर WHO यात्रा पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाती है। WHO की कोशिश रहती है कि सिर्फ़ प्रभावित इलाक़ों पर ही ज़रा ज़्यादा सर्तकता बरती जाए, और इससे अंतर्राष्ट्रीय ट्रैवलिंग प्रभावित ना हो।
कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से पहले भी कई बार विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जा चुकी है। जानकारी के लिए बता दें कि इस समय एकसाथ दो ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी चल रही हैं। जुलाई 2019 में पूर्वी अफ्रीका से इबोला वायरस के फैलने पर WHO ने हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रखी है। बता दें कि इस वायरस की चपेट में आकर अब तक 3 हज़ार लोगों की जान जा चुकी है। वहीं पोलियो, जिसे एक समय में ख़त्म हुआ मान लिया गया था, अब दोबारा वापस लौट आया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसको लेकर भी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रखी है।
FEB 01 (WTN) – चीन के वुहान शहर से फैली संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस चीन के अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी फैल चुकी है। चीन के पड़ोसी देशों भारत, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ अस्पताल में भर्ती हैं। कोरोना वायरस धीरे-धीरे ख़तरनाक होता जा रहा है। अकेले चीन में ही कोरोना वायरस से 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं क़रीब 8000 लोग इसके संदिग्ध मरीज़ हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ-साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है। ऐसे में चीन के दुनिया के अन्य देशों के साथ राजनीतिक और आर्थिक सम्बन्ध हैं।
स्वाभाविक है कि दुनिया के अन्य देशों के लोग बहुतायत में चीन आते हैं, और चीन के लोग दुनिया के अन्य देशों में आते हैं। ऐसे में कोरोना वायरस जैसी संक्रामक बीमारी का दुनिया के अन्य देशों में फैलना स्वाभाविक है। जहां तक भारत की बात है, तो केरल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ की पहचान की गई है। वहीं दिल्ली और इन्दौर में भी इस वायरस से संक्रमित संदिग्ध मरीज़ पाए गए हैं। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए चीन के कई शहर लॉक डाउन हैं यानी इन शहरों के लोग संक्रमण से बचने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हैं।
कोरोना वायरस संक्रमण की गम्भीरता को देखते हुए WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी (Global Health Emergency) घोषित कर दी है। आख़िर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी क्या होती है? क्या कारण है कि इस तरह की इमरेजेंसी WHO द्वारा घोषित की जाती है? इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी भी कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी बीमारी को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तभी घोषित करता है जब उस बीमारी के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलने का ख़तरा पैदा हो जाता है। अब जबकि कोरोना वायरस चीन के अलावा दुनिया के अन्य देशों में फैल चुका है। ऐसे में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक आपात बैठक बुलाई थी, और इसी बैठक में कोरोना वायरस को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का फैसला लिया गया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी बीमारी को लेकर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी तभी घोषित करता है, जब इसकी रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय क़दम उठाए जाने की ज़रूरत महसूस होती है। जब विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जाती है, तो इस हालात में दुनियाभर के देशों को उस बीमारी से बचाव और उसे फैलने से रोकने के उपाय अपने स्तर पर करने होते हैं। जैसे ही WHO द्वारा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी लागू की जाती है, दुनियाभर के देशों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन सम्बन्धित बीमारी से निपटने और उसकी रोकथाम के लिए ऐहतियातन उपाय करती है। ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद बीमारी की विश्व स्तर पर रोकथाम के लिए WHO के पास आकस्मिक फण्ड होता है, और WHO इस फण्ड का इस्तेमाल प्रभावित इलाक़ों में करता है।
बता दें कि फ़िलहाल WHO के पास कोरोना वायरस से निपटने के लिए 1.8 मिलियन डॉलर का फण्ड है, और यह फण्ड दुनिया के कई देशों से आया है। पूरी दुनिया के 196 देश विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य हैं, और सभी सदस्य देश हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन को फण्ड देते रहते हैं। वहीं WHO के सभी सदस्य देशों को WHO के नियमों को मानना पड़ता है। यानी किसी भी तरह की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित होने पर सदस्य देशों को WHO द्वारा जारी की गई गाइडलाइन को फॉलो करना होता है।
ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी के समय और बाक़ी अन्य समय WHO द्वारा सदस्य देशों को तरह-तरह की गाइडलाइन जारी की जाती है। जब ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जाती है, तो इसमें ट्रैवल को लेकर भी बाक़ायदा नियम बनाए गये हैं। किसी भी तरह की संक्रामक बीमारी से प्रभावित इलाक़ों में सफ़र के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक विशेष गाइडलाइन जारी की जाती है। प्रभावित इलाक़ों की सीमा और अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाती है ताकि वायरस के असर वाले लोगों की पहचान करके उनके अलग रहने की व्यवस्था की जाए। वैसे आमतौर पर WHO यात्रा पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाती है। WHO की कोशिश रहती है कि सिर्फ़ प्रभावित इलाक़ों पर ही ज़रा ज़्यादा सर्तकता बरती जाए, और इससे अंतर्राष्ट्रीय ट्रैवलिंग प्रभावित ना हो।
कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से पहले भी कई बार विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जा चुकी है। जानकारी के लिए बता दें कि इस समय एकसाथ दो ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी चल रही हैं। जुलाई 2019 में पूर्वी अफ्रीका से इबोला वायरस के फैलने पर WHO ने हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रखी है। बता दें कि इस वायरस की चपेट में आकर अब तक 3 हज़ार लोगों की जान जा चुकी है। वहीं पोलियो, जिसे एक समय में ख़त्म हुआ मान लिया गया था, अब दोबारा वापस लौट आया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसको लेकर भी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रखी है।