यदि हुए ‘यह परिवर्तन’ तो देश में बढ़ जाएगा इलेक्ट्रिक गाडियों का इस्तेमाल
Saturday - February 1, 2020 1:19 pm ,
Category : WTN HINDI
इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल में फ़िलहाल हिचक रहे हैं लोग
इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रति लोगों की शंकाओं को दूर करने की कोशिश में जुटी मोदी सरकार
FEB 01 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार योजनाबद्ध तरीक़े से साल 2030 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही है। दरअसल, डीज़ल और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों से काफ़ी प्रदूषण फैलता है। वहीं विदेश से पेट्रोल-डीज़ल के आयात पर देश को हर साल क़रीब 7 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा ख़र्च करना पड़ती है। ऐसे में मोदी सरकार की कोशिश है कि लोग ज़्यादा से ज़्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल करें। लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर जनता के बीच काफ़ी संशय है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर सबसे पहला संशय तो लोगों के बीच यह है कि पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में बैटरी से चलने वाली गाड़ियां यानी इलेक्ट्रिक गाड़ियां महंगी हैं। वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी फ़िलहाल महंगी है जिस कारण से हर साल बैटरी बदलने के ख़र्च से लोग बचना चाह रहे हैं। वहीं लोगों के मन में सवाल है कि यदि इलेट्रिक गाड़ी की बैटरी रास्ते में कम या बंद हो गई, तो इसे चार्ज कहां पर किया जाएगा?
वैसे यह स्वाभाविक है कि जब भी कोई परिवर्तन होता है, तो इसके बारे में संशय और सवाल होते ही हैं, और कुछ ऐसा ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ हो रहा है। आइये आज हम आपको बताते हैं कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर जो संशय लोगों के मन में हैं उसके बारे में सरकार की क्या राय है? और क्या कुछ योजना सरकार इस संशयों को दूर करने के लिए बना रही है?
जानकारी के लिए बता दें कि नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के मुताबिक़, यह भ्रम है कि पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियां महंगी होंगी। अमिताभ कांत के अनुसार, "आने वाले तीन सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की क़ीमत में क़रीब 51 प्रतिशत की गिरावट की उम्मीद है, और ऐसा होते ही इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाले वाहनों के तुलना में सस्ते हो जाएंगे।" कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की जो वर्तमान क़ीमत 156 डॉलर प्रति किलोवाट घण्टा है, वो तीन साल के अन्दर 76 डॉलर प्रति किलोवाट घण्टा हो जाने की उम्मीद है।
इतना ही नहीं, आने वाले समय में इलेक्ट्रिक गाडियों के ज़्यादा इस्तेमाल से पर्यावरण प्रदूषण कम होगा, और इसका लाभ सभी को मिलेगा। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ ही सीएनजी और एलनजी से चलने वाली गाड़ियां भी चलेंगी। साथ ही आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन में ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का भी इस्तेमाल हो सकता है। दरअसल, सड़क जैसे अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने की काफ़ी ज़रूरत है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
समय के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियां आज की तुलना में सस्ती होंगी, लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के सस्ते होने की चिंन्ता से ज़्यादा चिंता लोगों को यह है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन्स अभी पर्याप्त नहीं हैं। दरअसल, ऐसा नहीं है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां लोगों को पसंद नहीं आ रही हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन्स की कमी और सही इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव होने के कारण लोग इस समय इलेक्ट्रिक गाड़ियों को ख़रीदने में फ़िलहाल हिचक रहे हैं।
लेकिन इस दिशा में भी सरकार काम कर रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चार्जिंग स्टेशन्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की दो कम्पनियां EESL (Energy Efficiency Services Limited) यानी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड और BHEL (Bharat Heavy Electricals Limited ) यानी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के बीच एक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत, देश भर में विभिन्न राजमार्गों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सम्बन्धित ढांचागत सुविधा स्थापित करने के लिए भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) को तकनीकी सहायता देगा। दरअसल, EESL और BHEL दोनों ही देश में तेज़ी से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के अवसरों को तलाशेंगी। समझौते के तहत BHEL, इंजीनियरिंग, ख़रीद और निर्माण (ईपीसी) समाधान पेश करेगी जबकि EESL सेवाओं, परिचालन और रखरखाव से सम्बन्धित सभी शुरुआती निवेश करेगी।
दरअसल, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा बेहद ज़रूरी। यदि हाइवे पर ज़्यादा से ज़्यादा चार्जिंग स्टेशन लगेंगे, तो इससे लोग इलेक्ट्रिक वाहनों के ज़रिए एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। एक अध्ययन के मुताबिक़, यदि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी सस्ती होती है, तो इलेक्ट्रिक वाहन से सफ़र करना पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में काफ़ी सस्ता पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक़, साल 2025 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी भी सस्ती हो जाएगी, और वहीं चार्जिंग स्टेशन्स की संख्या बढ़ने से इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल बहुत बढ़ जाएगा। ऐसे होने से एक तो पर्यवारण प्रदूषण पर नियंत्रण लगेगा वहीं पेट्रोल और डीज़ल ख़रीदी के लिए देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा ख़र्च नहीं करना पड़ेगी।
FEB 01 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार योजनाबद्ध तरीक़े से साल 2030 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही है। दरअसल, डीज़ल और पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों से काफ़ी प्रदूषण फैलता है। वहीं विदेश से पेट्रोल-डीज़ल के आयात पर देश को हर साल क़रीब 7 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा ख़र्च करना पड़ती है। ऐसे में मोदी सरकार की कोशिश है कि लोग ज़्यादा से ज़्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल करें। लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर जनता के बीच काफ़ी संशय है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर सबसे पहला संशय तो लोगों के बीच यह है कि पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में बैटरी से चलने वाली गाड़ियां यानी इलेक्ट्रिक गाड़ियां महंगी हैं। वहीं इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी फ़िलहाल महंगी है जिस कारण से हर साल बैटरी बदलने के ख़र्च से लोग बचना चाह रहे हैं। वहीं लोगों के मन में सवाल है कि यदि इलेट्रिक गाड़ी की बैटरी रास्ते में कम या बंद हो गई, तो इसे चार्ज कहां पर किया जाएगा?
वैसे यह स्वाभाविक है कि जब भी कोई परिवर्तन होता है, तो इसके बारे में संशय और सवाल होते ही हैं, और कुछ ऐसा ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ हो रहा है। आइये आज हम आपको बताते हैं कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर जो संशय लोगों के मन में हैं उसके बारे में सरकार की क्या राय है? और क्या कुछ योजना सरकार इस संशयों को दूर करने के लिए बना रही है?
जानकारी के लिए बता दें कि नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के मुताबिक़, यह भ्रम है कि पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियां महंगी होंगी। अमिताभ कांत के अनुसार, "आने वाले तीन सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की क़ीमत में क़रीब 51 प्रतिशत की गिरावट की उम्मीद है, और ऐसा होते ही इलेक्ट्रिक वाहन पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाले वाहनों के तुलना में सस्ते हो जाएंगे।" कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की जो वर्तमान क़ीमत 156 डॉलर प्रति किलोवाट घण्टा है, वो तीन साल के अन्दर 76 डॉलर प्रति किलोवाट घण्टा हो जाने की उम्मीद है।
इतना ही नहीं, आने वाले समय में इलेक्ट्रिक गाडियों के ज़्यादा इस्तेमाल से पर्यावरण प्रदूषण कम होगा, और इसका लाभ सभी को मिलेगा। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ ही सीएनजी और एलनजी से चलने वाली गाड़ियां भी चलेंगी। साथ ही आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन में ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का भी इस्तेमाल हो सकता है। दरअसल, सड़क जैसे अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने की काफ़ी ज़रूरत है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
समय के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियां आज की तुलना में सस्ती होंगी, लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों के सस्ते होने की चिंन्ता से ज़्यादा चिंता लोगों को यह है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन्स अभी पर्याप्त नहीं हैं। दरअसल, ऐसा नहीं है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां लोगों को पसंद नहीं आ रही हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन्स की कमी और सही इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव होने के कारण लोग इस समय इलेक्ट्रिक गाड़ियों को ख़रीदने में फ़िलहाल हिचक रहे हैं।
लेकिन इस दिशा में भी सरकार काम कर रही है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चार्जिंग स्टेशन्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की दो कम्पनियां EESL (Energy Efficiency Services Limited) यानी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड और BHEL (Bharat Heavy Electricals Limited ) यानी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के बीच एक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत, देश भर में विभिन्न राजमार्गों पर इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सम्बन्धित ढांचागत सुविधा स्थापित करने के लिए भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) को तकनीकी सहायता देगा। दरअसल, EESL और BHEL दोनों ही देश में तेज़ी से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने के अवसरों को तलाशेंगी। समझौते के तहत BHEL, इंजीनियरिंग, ख़रीद और निर्माण (ईपीसी) समाधान पेश करेगी जबकि EESL सेवाओं, परिचालन और रखरखाव से सम्बन्धित सभी शुरुआती निवेश करेगी।
दरअसल, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचा बेहद ज़रूरी। यदि हाइवे पर ज़्यादा से ज़्यादा चार्जिंग स्टेशन लगेंगे, तो इससे लोग इलेक्ट्रिक वाहनों के ज़रिए एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। एक अध्ययन के मुताबिक़, यदि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी सस्ती होती है, तो इलेक्ट्रिक वाहन से सफ़र करना पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों की तुलना में काफ़ी सस्ता पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक़, साल 2025 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी भी सस्ती हो जाएगी, और वहीं चार्जिंग स्टेशन्स की संख्या बढ़ने से इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल बहुत बढ़ जाएगा। ऐसे होने से एक तो पर्यवारण प्रदूषण पर नियंत्रण लगेगा वहीं पेट्रोल और डीज़ल ख़रीदी के लिए देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा ख़र्च नहीं करना पड़ेगी।