कोरोना वायरस ने दिया चीन की विशाल अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका
Monday - February 3, 2020 3:10 pm ,
Category : WTN HINDI
चीन में क़हर बन गया है कोरोना वायरस
कोरोना वायरस से चीन को क़रीब 136 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान
FEB 03 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती से भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती के लिए ज़िम्मेदार कई कारणों में अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर भी एक बहुत बड़ा कारण था, और इसी कारण से चीन की अर्थव्यवस्था को काफ़ी बड़ा झटका लगा था। लेकिन अभी हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच हुई ट्रेड डील के बाद आशा की जा रही थी कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश चीन आर्थिक मंदी से उबरकर एक बार फ़िर से तेज़ी से विकास करेगा। लेकिन चीन की सारी आशाओं पर जानलेवा कोरोना वायरस ने पानी फेर दिया है, और कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को लाखों करोड़ रुपयों का नुकसान हो चुका है।
जानकारी के लिए बता दें कि चीन के वुहान शहर से फैली जानलेवा संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस से अभी तक चीन में 361 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं 17 हज़ार से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। चीन ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की पहचान हो चुकी है। कोरोना वायरस का क़हर चीनी लोगों की जान तो ले ही रहा है साथ ही कोरोना वायरस से चीन की विशाल अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, चीन की कम्पनियों को साल 2019 में चार साल में सबसे कम मुनाफा हुआ है। बता दें कि चीन में औद्योगिक मुनाफ़ा 3.3 प्रतिशत गिरकर 897 अरब डॉलर पर आ गया हैं जो कि साल 2015 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, और तब चीनी कम्पनियों के मुनाफ़े में 2.3 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय ट्रेडिंग के जानकारों के अनुसार, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण चीनी फैक्ट्रियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। आर्थिक मंदी समेत अन्य कारणों से चीन पिछले 30 साल के सबसे कमज़ोर आर्थिक दौर से गुजर रहा है। इन्ही सब काऱणों से चीन की औद्योगिक कम्पनियों के मुनाफे में भी एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं कोरोना वायरस से प्रभावित चीन में पिछले 30 दिनों के दौरान शेयर बाजार में निवेशकों के क़रीब 30 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं।
बता दें कि नए साल के शुरुआत से ही चीन के शेयर बाज़ार में भारी गिरावट का दौर जारी है। नए साल से लेकर अभी तक दौरान शेयर बाज़ार 9 प्रतिशत से नीचे जा चुका है, और इसी कारण से निवेशकों के क़रीब 30 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। इतना ही नहीं, कई कारणों के चलते चीन की करेंसी युआन भी अमेरिकी डॉलर की तुलना में साल 2020 में अभी तक 1.2 प्रतिशत कमज़ोर हो गई है, और इस सबके पीछे जानलेवा संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस को एक सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।
कोरोना वायरस से प्रभावित होती चीन की अर्थव्यवस्था वहां की सरकार के लिए एक चुनौती बन गई है। चीन की अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए चीन सरकार की ओर से मार्केट में कैश बढ़ाकर, और लोन में इज़ाफ़ा कर मांग को बढ़ाने के प्रयास किए जा सकते हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के कारण 2020 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार की कम ही उम्मीद है। जानकारों के मुताबिक़, कोरोना वायरस चीन और अन्य देशों के आर्थिक विकास के लिए भी एक नया जोखिम है।
जिस तरह से कोरोना वायरस के कारण चीन के कई शहरों में लोग घरों में छिपे हुए हैं, और काम धंधे ठप पड़े हुए है. ऐसे में कहा जा रहा है कि चीन में कम से कम निकट भविष्य में उत्पादन निश्चित तौर पर और भी गिरेगा। वहीं यदि चीन में उत्पादन कम होता है, तो इसका असर भारत, रूस, जापान, और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की उत्पादन पर भी पड़ सकता है। वहीं यदि कोरोना वायरस संक्रमण को चीन की सरकार रोकने में नाकामयाब रही, तो आने वाले समय में चीन में औद्योगिक उत्पादन और भी गिर सकता है, और 2020 की पहली छमाही में चीन की आर्थिक विकास दर उम्मीद से काफ़ी कम रह सकती है।
लेकिन कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर दुनिया के अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। दरअसल, कोरोना वायरस की दहशत के कारण दुनिया के कई देशों ने चीन के लिए अपनी एयरलाइंस सेवाएं बंद कर दी हैं, और इसी कारण से दुनिया के कई देशों की इस समय चीन के साथ व्यापारिक गतिविधियां ठप से पड़ गई हैं। वहीं दुनियाभर की कई बड़ी कम्पनियों ने चीन में अपनी फैक्ट्रियों को कोरोना वायरस के क़हर के कारण आगामी आदेश तक के लिए बंद कर दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि चीन से दुनिया के कई देशों को बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात होता है। ऐसे में यदि चीन में औद्योगिक गतिविधियां ठप पड़ती हैं, तो इसका असर दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ना स्वाभाविक है। एक रिपोर्ट के शुरुआती अनुमान के अनुसार, कोरोना वायरस के कारण चीन की विकास दर 0.5 से 1.0 प्रतिशत तक घट सकती है। यानी चीन की विकास दर यदि एक प्रतिशत कम होती है, तो इससे चीन की अर्थव्यवस्था को 136 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान होगा।
FEB 03 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती से भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को काफ़ी हद तक प्रभावित किया है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती के लिए ज़िम्मेदार कई कारणों में अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर भी एक बहुत बड़ा कारण था, और इसी कारण से चीन की अर्थव्यवस्था को काफ़ी बड़ा झटका लगा था। लेकिन अभी हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच हुई ट्रेड डील के बाद आशा की जा रही थी कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश चीन आर्थिक मंदी से उबरकर एक बार फ़िर से तेज़ी से विकास करेगा। लेकिन चीन की सारी आशाओं पर जानलेवा कोरोना वायरस ने पानी फेर दिया है, और कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को लाखों करोड़ रुपयों का नुकसान हो चुका है।
जानकारी के लिए बता दें कि चीन के वुहान शहर से फैली जानलेवा संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस से अभी तक चीन में 361 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं 17 हज़ार से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। चीन ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की पहचान हो चुकी है। कोरोना वायरस का क़हर चीनी लोगों की जान तो ले ही रहा है साथ ही कोरोना वायरस से चीन की विशाल अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, चीन की कम्पनियों को साल 2019 में चार साल में सबसे कम मुनाफा हुआ है। बता दें कि चीन में औद्योगिक मुनाफ़ा 3.3 प्रतिशत गिरकर 897 अरब डॉलर पर आ गया हैं जो कि साल 2015 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है, और तब चीनी कम्पनियों के मुनाफ़े में 2.3 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय ट्रेडिंग के जानकारों के अनुसार, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के कारण चीनी फैक्ट्रियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। आर्थिक मंदी समेत अन्य कारणों से चीन पिछले 30 साल के सबसे कमज़ोर आर्थिक दौर से गुजर रहा है। इन्ही सब काऱणों से चीन की औद्योगिक कम्पनियों के मुनाफे में भी एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं कोरोना वायरस से प्रभावित चीन में पिछले 30 दिनों के दौरान शेयर बाजार में निवेशकों के क़रीब 30 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं।
बता दें कि नए साल के शुरुआत से ही चीन के शेयर बाज़ार में भारी गिरावट का दौर जारी है। नए साल से लेकर अभी तक दौरान शेयर बाज़ार 9 प्रतिशत से नीचे जा चुका है, और इसी कारण से निवेशकों के क़रीब 30 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। इतना ही नहीं, कई कारणों के चलते चीन की करेंसी युआन भी अमेरिकी डॉलर की तुलना में साल 2020 में अभी तक 1.2 प्रतिशत कमज़ोर हो गई है, और इस सबके पीछे जानलेवा संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस को एक सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।
कोरोना वायरस से प्रभावित होती चीन की अर्थव्यवस्था वहां की सरकार के लिए एक चुनौती बन गई है। चीन की अर्थव्यवस्था में तेज़ी लाने के लिए चीन सरकार की ओर से मार्केट में कैश बढ़ाकर, और लोन में इज़ाफ़ा कर मांग को बढ़ाने के प्रयास किए जा सकते हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के कारण 2020 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में सुधार की कम ही उम्मीद है। जानकारों के मुताबिक़, कोरोना वायरस चीन और अन्य देशों के आर्थिक विकास के लिए भी एक नया जोखिम है।
जिस तरह से कोरोना वायरस के कारण चीन के कई शहरों में लोग घरों में छिपे हुए हैं, और काम धंधे ठप पड़े हुए है. ऐसे में कहा जा रहा है कि चीन में कम से कम निकट भविष्य में उत्पादन निश्चित तौर पर और भी गिरेगा। वहीं यदि चीन में उत्पादन कम होता है, तो इसका असर भारत, रूस, जापान, और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की उत्पादन पर भी पड़ सकता है। वहीं यदि कोरोना वायरस संक्रमण को चीन की सरकार रोकने में नाकामयाब रही, तो आने वाले समय में चीन में औद्योगिक उत्पादन और भी गिर सकता है, और 2020 की पहली छमाही में चीन की आर्थिक विकास दर उम्मीद से काफ़ी कम रह सकती है।
लेकिन कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर दुनिया के अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। दरअसल, कोरोना वायरस की दहशत के कारण दुनिया के कई देशों ने चीन के लिए अपनी एयरलाइंस सेवाएं बंद कर दी हैं, और इसी कारण से दुनिया के कई देशों की इस समय चीन के साथ व्यापारिक गतिविधियां ठप से पड़ गई हैं। वहीं दुनियाभर की कई बड़ी कम्पनियों ने चीन में अपनी फैक्ट्रियों को कोरोना वायरस के क़हर के कारण आगामी आदेश तक के लिए बंद कर दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि चीन से दुनिया के कई देशों को बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात होता है। ऐसे में यदि चीन में औद्योगिक गतिविधियां ठप पड़ती हैं, तो इसका असर दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ना स्वाभाविक है। एक रिपोर्ट के शुरुआती अनुमान के अनुसार, कोरोना वायरस के कारण चीन की विकास दर 0.5 से 1.0 प्रतिशत तक घट सकती है। यानी चीन की विकास दर यदि एक प्रतिशत कम होती है, तो इससे चीन की अर्थव्यवस्था को 136 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान होगा।