अपने देश की समस्याओं पर ज़रा ध्यान दीजिए मिस्टर इमरान ख़ान!
Thursday - February 6, 2020 10:52 am ,
Category : WTN HINDI
इमरान ख़ान से नहीं सम्भल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
इमरान ख़ान के राज में महंगाई और क़र्ज़ के बोझ से परेशान हुए पाकिस्तानी
FEB 06 (WTN) – आतंक और आतंकियों को संरक्षण देने और उन्हें बढ़ाने वाला देश पाकिस्तान पूरी दुनिया में एक असफ़ल देश के रूप में पहचाना जाना लगा है। भारत में आतंक फैलाने में व्यस्त रहने वाले देश पाकिस्तान की सरकारों ने कभी भी अपने देश के लोगों की ग़रीबी दूर करने के बारे में गम्भीरता से नहीं सोचा। पाकिस्तान का बस एक ही उद्देश्य रहा है कि किसी ना किसी तरह से भारत को परेशान किया जाए। दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाकर इतनी प्रगति कर लगी है कि भारत अब 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी ज़्यादा बदतर हो चुकी है कि वहां पर लोगों को रोटी तक खाने नसीब नहीं हो पा रही है।
दरअसल, पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार की दिशाहीन आर्थिक नीतियों के कारण पाकिस्तान में महंगाई ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में महंगाई दर बढ़कर 14.6 प्रतिशत हो गई है, जो कि 12 साल में सबसे ज़्यादा है। इस कारण से पाकिस्तान में महंगाई का यह आलम हो गया है कि वहां पर आटे के दाम बढ़ने से ग़रीब और निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के लिए रोटी खाना तक मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान के कई शहरों में नान यानी रोटी बनाने की दुकानें बंद हो गई हैं। अब जबकि महंगाई के कारण जिन लोगों को खाने के लिए रोटियां नसीब नहीं हो पा रही हैं, वे लोग अब चावल पर निर्भर हो गए हैं।
बता दें कि आटे की कमी और उसके महंगा होने के कई कारण हैं। लेकिन आटा और रोटी महंगी होने से पाकिस्तान में लोगों के लिए दो वक़्त का खाना मिलना मुश्किल हो गया है, ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जमाखोरी से निपटने और क़ीमतों को कम करने के लिए कड़े आदेश दिए हैं, लेकिन इसका कुछ भी असर होता नहीं दिख रहा है। वहीं बढ़ती महंगाई का असर पाकिस्तान के शेयर बाज़ार पर पड़ रहा है, और पाकिस्तान का शेयर बाज़ार लगातार नीचे गिरता जा रहा है।
बता दें कि बढ़ती महंगाई के साथ-साथ पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार कई आर्थिक मोर्चों पर घिरी हुई है। दरअसल, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होती पाकिस्तानी करेंसी, निर्यात में गिरावट और विदेशी मुद्रा भण्डार में लगातार कमी के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे में लगातार गिरती अर्थव्यवस्था को सम्भालने के लिए पाकिस्तान सरकार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत अपने मित्र राष्ट्रों से क़र्ज़ लेती रही है, लेकिन पाकिस्तान सरकार का यही क़र्ज़ अब उसके लिए मुसीबत बनता जा रहा है।
जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति क़र्ज़ पिछले वित्त वर्ष के आख़िरी में 28 प्रतिशत बढ़कर एक लाख 53 हजार 689 रुपये हो गया है। इधर, अपनी वार्षिक राजकोषीय नीति 2019-20 में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के मुताबिक़, उसका मौजूदा ख़र्च वित्त वर्ष 2018-19 में 19 साल में सबसे ज़्यादा है। लेकिन वहीं हालत यह है कि आम लोगों के विकास पर होने वाला ख़र्च 11 साल में सबसे कम है। यानी साफ़ ज़ाहिर है कि पाकिस्तान में आम लोगों के विकास पर पैसा कम ख़र्च हो रहा है, लेकिन क़र्ज़ चुकाने समेत हथियारों की ख़रीदी में बेतहाशा पैसा पाकिस्तान की सरकार ख़र्च कर रही है।
एक बार फ़िर बात करें पाकिस्तान में बढ़ रही महंगाई की, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महंगाई के कारण पाकिस्तान के लोगों के पास खाने के कम ही विकल्प बचे हैं। दरअसल, पाकिस्तान में आटा ही नहीं, बल्कि दालें, चीनी, गुड़ और खाद्य तेल के दामों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। वहीं किराना सामान ही नहीं, बल्कि सब्ज़ियां और फल भी महंगे हो गए हैं। साथ ही रसोई गैस सिलेण्डर के दामों में भी बेतहाशा वृद्धि हो गई है, और रसोई गैस के दाम साल 2013 के बाद सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। साफ़ ज़ाहिर है कि पाकिस्तानी लोगों पर महंगाई की मार चारों तरफ़ से पड़ रही है।
जिस तरह से पाकिस्तान की जनता महंगाई के कारण परेशान है, उससे तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह से फेल हो गई है। ऐसे में इमरान ख़ान की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने देश की लोगों की मुश्किलों को दूर करें, लेकिन इससे अलग वे भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी करते रहते हैं। कश्मीर, सीएए, एनआरसी और दिल्ली विधानसभा चुनाव जैसे भारत के आंतरिक मामलों पर ही बस इमरान ख़ान बयानबाजी करते रहे हैं, या फ़िर विदेश में जाकर भारत के ख़िलाफ़ लॉबिंग करने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन मोदी सरकार की सफ़ल कूटनीति के चलते इमरान ख़ान को सफ़लता हासिल नहीं हो पाती है। ख़ैर बजाए भारत में आतंक फैलाने, और भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी देने के, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को अपने देश के लोगों की ग़रीबी को दूर करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए।
FEB 06 (WTN) – आतंक और आतंकियों को संरक्षण देने और उन्हें बढ़ाने वाला देश पाकिस्तान पूरी दुनिया में एक असफ़ल देश के रूप में पहचाना जाना लगा है। भारत में आतंक फैलाने में व्यस्त रहने वाले देश पाकिस्तान की सरकारों ने कभी भी अपने देश के लोगों की ग़रीबी दूर करने के बारे में गम्भीरता से नहीं सोचा। पाकिस्तान का बस एक ही उद्देश्य रहा है कि किसी ना किसी तरह से भारत को परेशान किया जाए। दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाकर इतनी प्रगति कर लगी है कि भारत अब 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी ज़्यादा बदतर हो चुकी है कि वहां पर लोगों को रोटी तक खाने नसीब नहीं हो पा रही है।
दरअसल, पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार की दिशाहीन आर्थिक नीतियों के कारण पाकिस्तान में महंगाई ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में महंगाई दर बढ़कर 14.6 प्रतिशत हो गई है, जो कि 12 साल में सबसे ज़्यादा है। इस कारण से पाकिस्तान में महंगाई का यह आलम हो गया है कि वहां पर आटे के दाम बढ़ने से ग़रीब और निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के लिए रोटी खाना तक मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान के कई शहरों में नान यानी रोटी बनाने की दुकानें बंद हो गई हैं। अब जबकि महंगाई के कारण जिन लोगों को खाने के लिए रोटियां नसीब नहीं हो पा रही हैं, वे लोग अब चावल पर निर्भर हो गए हैं।
बता दें कि आटे की कमी और उसके महंगा होने के कई कारण हैं। लेकिन आटा और रोटी महंगी होने से पाकिस्तान में लोगों के लिए दो वक़्त का खाना मिलना मुश्किल हो गया है, ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जमाखोरी से निपटने और क़ीमतों को कम करने के लिए कड़े आदेश दिए हैं, लेकिन इसका कुछ भी असर होता नहीं दिख रहा है। वहीं बढ़ती महंगाई का असर पाकिस्तान के शेयर बाज़ार पर पड़ रहा है, और पाकिस्तान का शेयर बाज़ार लगातार नीचे गिरता जा रहा है।
बता दें कि बढ़ती महंगाई के साथ-साथ पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार कई आर्थिक मोर्चों पर घिरी हुई है। दरअसल, अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होती पाकिस्तानी करेंसी, निर्यात में गिरावट और विदेशी मुद्रा भण्डार में लगातार कमी के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे में लगातार गिरती अर्थव्यवस्था को सम्भालने के लिए पाकिस्तान सरकार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत अपने मित्र राष्ट्रों से क़र्ज़ लेती रही है, लेकिन पाकिस्तान सरकार का यही क़र्ज़ अब उसके लिए मुसीबत बनता जा रहा है।
जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति क़र्ज़ पिछले वित्त वर्ष के आख़िरी में 28 प्रतिशत बढ़कर एक लाख 53 हजार 689 रुपये हो गया है। इधर, अपनी वार्षिक राजकोषीय नीति 2019-20 में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के मुताबिक़, उसका मौजूदा ख़र्च वित्त वर्ष 2018-19 में 19 साल में सबसे ज़्यादा है। लेकिन वहीं हालत यह है कि आम लोगों के विकास पर होने वाला ख़र्च 11 साल में सबसे कम है। यानी साफ़ ज़ाहिर है कि पाकिस्तान में आम लोगों के विकास पर पैसा कम ख़र्च हो रहा है, लेकिन क़र्ज़ चुकाने समेत हथियारों की ख़रीदी में बेतहाशा पैसा पाकिस्तान की सरकार ख़र्च कर रही है।
एक बार फ़िर बात करें पाकिस्तान में बढ़ रही महंगाई की, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महंगाई के कारण पाकिस्तान के लोगों के पास खाने के कम ही विकल्प बचे हैं। दरअसल, पाकिस्तान में आटा ही नहीं, बल्कि दालें, चीनी, गुड़ और खाद्य तेल के दामों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। वहीं किराना सामान ही नहीं, बल्कि सब्ज़ियां और फल भी महंगे हो गए हैं। साथ ही रसोई गैस सिलेण्डर के दामों में भी बेतहाशा वृद्धि हो गई है, और रसोई गैस के दाम साल 2013 के बाद सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। साफ़ ज़ाहिर है कि पाकिस्तानी लोगों पर महंगाई की मार चारों तरफ़ से पड़ रही है।
जिस तरह से पाकिस्तान की जनता महंगाई के कारण परेशान है, उससे तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह से फेल हो गई है। ऐसे में इमरान ख़ान की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने देश की लोगों की मुश्किलों को दूर करें, लेकिन इससे अलग वे भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी करते रहते हैं। कश्मीर, सीएए, एनआरसी और दिल्ली विधानसभा चुनाव जैसे भारत के आंतरिक मामलों पर ही बस इमरान ख़ान बयानबाजी करते रहे हैं, या फ़िर विदेश में जाकर भारत के ख़िलाफ़ लॉबिंग करने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन मोदी सरकार की सफ़ल कूटनीति के चलते इमरान ख़ान को सफ़लता हासिल नहीं हो पाती है। ख़ैर बजाए भारत में आतंक फैलाने, और भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी देने के, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को अपने देश के लोगों की ग़रीबी को दूर करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए।