सवालों के घेरे में शी जिनपिंग और चीन की वामपंथी सरकार
Saturday - February 8, 2020 10:53 am ,
Category : WTN HINDI
कोरोना वायरस से सही तरीक़े से निपटने में नाकाम रही जिनपिंग की सरकार
जानिए आख़िर क्यों चीन की वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ चीन लोगों में भड़का है गुस्सा?
FEB 08 (WTN) – चीन के वुहान शहर से फैली जानलेवा संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस चीन में अब महामारी बन चुकी है। जानकारी के मुताबिक़, अभी तक चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 722 हो गई है, वहीं कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या क़रीब 30 हज़ार हो सकती है। हालांकि, कोरोना वायरस से मरने वालों और संक्रमित मरीज़ों की संख्या चीन सरकार द्वारा जारी की गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या इससे कई गुना ज़्यादा हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस से जुड़ी हर सच्चाई को दुनिया के सामने छिपाने का प्रयास कर रही है। ऐसे में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस की स्थिति चीन में काफ़ी भयावह हो गई है, लेकिन चीन इसे दुनिया के सामने छिपा रहा है।
दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में कोरोना वायरस के क़हर से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी सरकार विवादों में आ गए हैं। वहीं चीन के राष्ट्रपति के नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे हैं। सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरी दुनिया चीन सरकार के उस दावे पर ही विश्वास नहीं कर रही है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस का संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हो सकता है कि वुहान शहर में स्थित वायरोलॉजी लैब से यह वायरस फैला है। आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि चीन की वामपंथी सरकार वुहान शहर में स्थित वायरोलॉजी लैब में गुप्त तरीक़े से जैविक हथियार बना रही थी। ऐसे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर सवाल उठना लाजिमी है कि मानव संहार के लिए जैविक हथियार बनाने में क्या उनकी भी सहमति है?
ख़ैर यदि मान लिया जाए कि कोरोना वायरस का संक्रमण सीफूड मार्केट से फैला है, तो इस पर भी चीन की वामपंथी सरकार सवालों के घेरे में है। दरअसल, आरोप है कि कोरोना वायरस फैलने की जानकारी मिलने के बाद भी चीन सरकार ने इस मामले को दबाए रखा, और इसी कारण से कोरोना वायरस इतना ज़्यादा फैल गया। आरोप तो यह तक है कि चीन की सरकार ने उस डॉक्टर को हिरासत में ले लिया, जिसने सबसे पहले बताया था कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा है। चीन में डॉक्टर्स पर ऐसा दबाव बनाया गया कि वे कोरोना वायरस की सच्चाई को लोगों से छिपाएं, लेकिन चीन सरकार की इसी तानाशाही के कारण कोरोना वायरस के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।
इधर, कोरोना वायरस ने चीन की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से झटका दिया है। चीन की अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़, कोरोना वायरस से चीन की जीडीपी को बड़ा झटका लगने वाला है, और इस कारण से चीन को क़रीब 140 अरब डॉलर का नुकसान इस वित्त वर्ष में हो सकता है। कोरोना वायरस फैलने के बाद दुनिया की नामी कम्पनियों के चीन में चल रहे प्लांट्स बंद हैं। वहीं कई देशों ने चीन के साथ आयात और निर्यात पर फ़िलहाल रोक लगा दी है। यहां तक की चीन के कई शहरों में लॉक डाउन की स्थिति है, और लाखों लोग अपने घरों में क़ैद होने को मजबूर हैं। साफ़ है कि कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को काफ़ी पीछे कर दिया है।
इस सबके बीच, चीन की जनता अपने राष्ट्रपति और वामपंथी सरकार के रवैये से नाखुश नज़र आ रही है। चीनी लोगों का आरोप है कि कोरोना वायरस जैसी ख़तरनाक जानलेवा बीमारी को छिपाने का जो प्रयास सरकार ने किया है वो जानलेवा साबित हो गया। चीनी लोग गुस्से में हैं कि सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को गम्भीरता से नहीं लिया, और देखते ही देखते ही कोरोना वायरस पूरी चीन में महामारी बन गया। चीनी लोगों को इस बात पर सबसे ज़्यादा गुस्सा है कि जिस डॉक्टर से सबसे पहले कोरोना वायरस के बारे में जानकारी दी, उसे ही पुलिस ने प्रताड़ित करने की कोशिश की जिससे मामला दबाया जा सके।
कोरोना वायरस के क़हर के बाद चीन की जनता अपनी सरकार और राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने की आज़ादी चाहती है, क्योंकि चीन की जनता को लगने लगा है कि उनकी सरकार ने देश की जनता के साथ धोखा किया है। हालांकि, कोरोना वायरस से निपटने से लिए चीन सरकार के युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं, लेकिन चीन सरकार ने यह प्रयास तब शुरू किए जब कोरोना वायरस चीन में बुरी तरह से फैल चुका था। लोगों को इस बात का और भी ज़्यादा गुस्सा है कि सरकार ने आख़िर किस कारण से कोरोना वायरस की बात को छिपाया?
इधर, जनता के बीच बढ़ते गुस्से के कारण चीनी प्रशासन ने इस हफ्ते एक आपातकालीन बैठक की थी। इस मीटिंग में कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में रह गई कमियों और मुश्किलों पर विस्तार से चर्चा की गई है। हालांकि, इस मीटिंग की अध्यक्षता खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी, लेकिन चुंकि चीन में वामपंथी सरकार है, ऐसे में डर के कारण ना तो किसी ने सरकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया, और ना ही सरकार से इस बारे में सवाल पूछे गये।
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में चीन की वामपंथी सरकार की अक्षमता पूरी दुनिया के सामने प्रकट हो गई है। बोलने की आज़ादी ना होने के कारण चीनी लोग दबी जुबान में ही अपनी सरकार से बुरी तरह से नाराज़ हैं। लोगों के मन में गुस्सा है कि चीन की वामपंथी सरकार ने अपने ही देश के लोगों के मरने की चिन्ता नहीं की, और इसी कारण से 700 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है। कहा जा रहा है कि यदि जल्द ही कोरोना वायरस से निपटने में चीन सरकार सफ़ल नहीं रही, तो 1989 में चीन सरकार के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शन की ही तरह एक बड़ा प्रदर्शन शी जिनपिंग की सत्ता के ख़िलाफ़ हो सकता है। हालांकि, चीनी लोगों में डर है कि यदि सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो इसके गम्भीर परिणाम उन्हें भुगतने पड़ सकते हैं। लेकिन इतना सब होने के बाद भी चीन की जनता अपने देश की वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़ा आन्दोलन कर सकती है।
FEB 08 (WTN) – चीन के वुहान शहर से फैली जानलेवा संक्रामक बीमारी कोरोना वायरस चीन में अब महामारी बन चुकी है। जानकारी के मुताबिक़, अभी तक चीन में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 722 हो गई है, वहीं कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या क़रीब 30 हज़ार हो सकती है। हालांकि, कोरोना वायरस से मरने वालों और संक्रमित मरीज़ों की संख्या चीन सरकार द्वारा जारी की गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या इससे कई गुना ज़्यादा हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन की वामपंथी सरकार कोरोना वायरस से जुड़ी हर सच्चाई को दुनिया के सामने छिपाने का प्रयास कर रही है। ऐसे में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस की स्थिति चीन में काफ़ी भयावह हो गई है, लेकिन चीन इसे दुनिया के सामने छिपा रहा है।
दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन में कोरोना वायरस के क़हर से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी सरकार विवादों में आ गए हैं। वहीं चीन के राष्ट्रपति के नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे हैं। सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरी दुनिया चीन सरकार के उस दावे पर ही विश्वास नहीं कर रही है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस का संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हो सकता है कि वुहान शहर में स्थित वायरोलॉजी लैब से यह वायरस फैला है। आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि चीन की वामपंथी सरकार वुहान शहर में स्थित वायरोलॉजी लैब में गुप्त तरीक़े से जैविक हथियार बना रही थी। ऐसे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर सवाल उठना लाजिमी है कि मानव संहार के लिए जैविक हथियार बनाने में क्या उनकी भी सहमति है?
ख़ैर यदि मान लिया जाए कि कोरोना वायरस का संक्रमण सीफूड मार्केट से फैला है, तो इस पर भी चीन की वामपंथी सरकार सवालों के घेरे में है। दरअसल, आरोप है कि कोरोना वायरस फैलने की जानकारी मिलने के बाद भी चीन सरकार ने इस मामले को दबाए रखा, और इसी कारण से कोरोना वायरस इतना ज़्यादा फैल गया। आरोप तो यह तक है कि चीन की सरकार ने उस डॉक्टर को हिरासत में ले लिया, जिसने सबसे पहले बताया था कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा है। चीन में डॉक्टर्स पर ऐसा दबाव बनाया गया कि वे कोरोना वायरस की सच्चाई को लोगों से छिपाएं, लेकिन चीन सरकार की इसी तानाशाही के कारण कोरोना वायरस के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।
इधर, कोरोना वायरस ने चीन की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से झटका दिया है। चीन की अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़, कोरोना वायरस से चीन की जीडीपी को बड़ा झटका लगने वाला है, और इस कारण से चीन को क़रीब 140 अरब डॉलर का नुकसान इस वित्त वर्ष में हो सकता है। कोरोना वायरस फैलने के बाद दुनिया की नामी कम्पनियों के चीन में चल रहे प्लांट्स बंद हैं। वहीं कई देशों ने चीन के साथ आयात और निर्यात पर फ़िलहाल रोक लगा दी है। यहां तक की चीन के कई शहरों में लॉक डाउन की स्थिति है, और लाखों लोग अपने घरों में क़ैद होने को मजबूर हैं। साफ़ है कि कोरोना वायरस के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को काफ़ी पीछे कर दिया है।
इस सबके बीच, चीन की जनता अपने राष्ट्रपति और वामपंथी सरकार के रवैये से नाखुश नज़र आ रही है। चीनी लोगों का आरोप है कि कोरोना वायरस जैसी ख़तरनाक जानलेवा बीमारी को छिपाने का जो प्रयास सरकार ने किया है वो जानलेवा साबित हो गया। चीनी लोग गुस्से में हैं कि सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को गम्भीरता से नहीं लिया, और देखते ही देखते ही कोरोना वायरस पूरी चीन में महामारी बन गया। चीनी लोगों को इस बात पर सबसे ज़्यादा गुस्सा है कि जिस डॉक्टर से सबसे पहले कोरोना वायरस के बारे में जानकारी दी, उसे ही पुलिस ने प्रताड़ित करने की कोशिश की जिससे मामला दबाया जा सके।
कोरोना वायरस के क़हर के बाद चीन की जनता अपनी सरकार और राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने की आज़ादी चाहती है, क्योंकि चीन की जनता को लगने लगा है कि उनकी सरकार ने देश की जनता के साथ धोखा किया है। हालांकि, कोरोना वायरस से निपटने से लिए चीन सरकार के युद्ध स्तर पर प्रयास जारी हैं, लेकिन चीन सरकार ने यह प्रयास तब शुरू किए जब कोरोना वायरस चीन में बुरी तरह से फैल चुका था। लोगों को इस बात का और भी ज़्यादा गुस्सा है कि सरकार ने आख़िर किस कारण से कोरोना वायरस की बात को छिपाया?
इधर, जनता के बीच बढ़ते गुस्से के कारण चीनी प्रशासन ने इस हफ्ते एक आपातकालीन बैठक की थी। इस मीटिंग में कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में रह गई कमियों और मुश्किलों पर विस्तार से चर्चा की गई है। हालांकि, इस मीटिंग की अध्यक्षता खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी, लेकिन चुंकि चीन में वामपंथी सरकार है, ऐसे में डर के कारण ना तो किसी ने सरकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया, और ना ही सरकार से इस बारे में सवाल पूछे गये।
दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में चीन की वामपंथी सरकार की अक्षमता पूरी दुनिया के सामने प्रकट हो गई है। बोलने की आज़ादी ना होने के कारण चीनी लोग दबी जुबान में ही अपनी सरकार से बुरी तरह से नाराज़ हैं। लोगों के मन में गुस्सा है कि चीन की वामपंथी सरकार ने अपने ही देश के लोगों के मरने की चिन्ता नहीं की, और इसी कारण से 700 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है। कहा जा रहा है कि यदि जल्द ही कोरोना वायरस से निपटने में चीन सरकार सफ़ल नहीं रही, तो 1989 में चीन सरकार के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शन की ही तरह एक बड़ा प्रदर्शन शी जिनपिंग की सत्ता के ख़िलाफ़ हो सकता है। हालांकि, चीनी लोगों में डर है कि यदि सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो इसके गम्भीर परिणाम उन्हें भुगतने पड़ सकते हैं। लेकिन इतना सब होने के बाद भी चीन की जनता अपने देश की वामपंथी सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़ा आन्दोलन कर सकती है।