जानिए चेक ट्रंकेशन सिस्टम के बारे में विस्तार से
Saturday - February 8, 2020 12:55 pm ,
Category : WTN HINDI
अब पहले की तुलना में आसानी से क्लीयर होंगे चेक
डिजिटाइजेशन की तरफ़ आरबीआई ने उठाया बढ़ा क़दम, जल्द जारी होगा डिजिटल भुगतान सूचकांक
FEB 08 (WTN) – इंटरनेट टेक्नोलॉजी के इस दौर में डिजिटल ट्रांजैक्शन की तरफ़ मोदी सरकार काफ़ी ध्यान दे रही है। दरअसल, मोदी सरकार की मंशा है कि देश में ज़्यादा से ज़्यादा ट्रांजैक्शन डिजिटल तरीक़े से हो, जिससे काले धन पर तो लगाम लगेगी ही साथ ही इससे ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता भी आएगी। इसी कड़ी में अब पूरे देश में चेक द्वारा पेमेंट का तरीक़ा भी डिजिटल होने वाला है। जी हां यदि आप चेक के द्वारा लेन-देन करते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब पूरे देश में ही नया चेक ट्रंकेशन सिस्टम शुरू होने जा रहा है। आख़िर क्या है यह नया चेक ट्रंकेशन सिस्टम? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि देश के केन्द्रीय बैंक यानी भारतीय रिज़र्व बैंक ने सितम्बर 2020 तक पूरे देश में चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) लागू करने की घोषणा की है। यानी यदि आपके पास नॉन सीटीएस चेक (Non-CTS Cheque) होंगे, तो सितम्बर के महीने से बैंक उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि CTS सिस्टम के तहत सम्बन्धित बैंक को चेक वास्तविक रूप से भेजने के बजाए इलेक्ट्रानिक रूप से उसकी तस्वीर के रूप में भेजा जाता है। चेक क्लियरिंग की सीटीएस प्रक्रिया की शुरुआत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में साल 2008 में पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर शुरू की गई थी, जिसके बाद आरबीआई ने इसे देश के अन्य शहरों में लागू करने की दिशा में आगे क़दम बढ़ाया, जिसके तहत चेन्नै में सितम्बर 2011 में, और मुम्बई में अप्रैल 2013 में इसे लागू किया गया था।
जानकारी के लिए बता दें कि चेक ट्रंकेशन सिस्टम में चेक को क्लियर करने के लिए एक बैंक से दूसरे बैंक में भेजने की ज़रूरत नहीं होती है। इस सिस्टम के तहत सिर्फ़ चेक की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी ही पेश की जाती है। रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, यह सिस्टम चेक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में लगने वाली लागत को प्रभावी ठंग से कम करता है। साथ ही इस सिस्टम से चेक को कलेक्ट करने में लगने वाला समय भी बचता है। वहीं दावा किया जा रहा है कि इस सिस्टम से चेक प्रोसेसिंग की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में ज़्यादा आसान होगी। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चेक ट्रंकेशन सिस्टम को दुनिया के कई देशों में अपनाया जा चुका है।
बात दें कि सीटीएस के तहत बैंक चेक सैटलमेंट के लिए चेक की फिजिकल कॉपी की जगह स्कैन्ड कॉपी का इस्तेमाल करते हैं। चुंकि यह पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक हो जाती है, इसलिए सीटीएस में चेक क्लियर होने का समय पहले की तुलना में काफ़ी कम हो जाता है। वहीं देखा गया है कि चेक के फिजिकल क्लियरिंग के दौरान कई बार चेक गुम हो जाते हैं, जिसके कारण चेक सैटलमेंट में देरी हो जाती है, लेकिन अब चेक ट्रंकेशन सिस्टम के कारण चेक गुमने के बाद भी चेक क्लीयर होने में देरी नहीं लगेगी। वैसे अभी पुराने पद्धति से चेक क्लीयर होने में तीन दिन का समय लगता है, लेकिन चेक ट्रंकेशन सिस्टम के बाद चेक 24 घण्टे के अन्दर क्लीयर हो जाने का दावा किया जा रहा है।
आप सोच रहे होंगे कि आपकी चेक बुक सीटीएस वाली है कि नहीं यह कैसे पता करें? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपकी चेक बुक के चेक पर CTS-2010 Cheque नहीं लिखा है, तो इसका मतलब यह नॉन-सीटीएस चेक बुक है। तो तुरन्त ही चेक कीजिए कि कहीं आपके पास भी पुरानी चेक बुक तो नहीं है। और यदि आपके पास पुरानी चेक बुक है, तो आप बैंक जाकर पुरानी चेक बुक के बदले बैंक से नई सीटीएस वाली चेक बुक ले सकते हैं, और इसके लिए बैंक आपसे कोई चार्ज भी नहीं लेगा। वैसे बता दें कि अधिकांश बैंकों ने पहले ही 1 जनवरी, 2020 से नॉन-सीटीएस चेक को क्लीयर करना बंद कर दिया है।
रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, भारत में डिजिटल भुगतान तेज़ी से बढ़ रहा है, और इसी कारण से जल्द ही डिजिटल भुगतान सूचकांक (डीपीआई) जारी किया जाएगा। कहा जा रहा है कि रिज़र्व बैंक द्वारा नियमित अवधि पर डीपीआई तैयार किया जाएगा और उसे प्रकाशित किया जाएगा, जिससे प्रभावी तरीक़े से भुगतान में डिजिटलीकरण का पता लगाया जा सके। कहा जा सकता है कि रिज़र्व बैंक के इस क़दम से चेक क्लीयर होने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान और तेज़ गति से होगी। वहीं इस सिस्टम के अपनाने से चेक का फर्जी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। साथ ही पेपर क्लियरिंग को लेकर होने वाली रिस्क से भी छुटकारा मिलेगा। तो कहा जा सकता है कि पूरे देश में चेक ट्रंकेशन सिस्टम लागू होने से बैंकों और उपभोक्ताओं को दोनों को पहले की तुलना में सहूलियत होगी।
FEB 08 (WTN) – इंटरनेट टेक्नोलॉजी के इस दौर में डिजिटल ट्रांजैक्शन की तरफ़ मोदी सरकार काफ़ी ध्यान दे रही है। दरअसल, मोदी सरकार की मंशा है कि देश में ज़्यादा से ज़्यादा ट्रांजैक्शन डिजिटल तरीक़े से हो, जिससे काले धन पर तो लगाम लगेगी ही साथ ही इससे ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता भी आएगी। इसी कड़ी में अब पूरे देश में चेक द्वारा पेमेंट का तरीक़ा भी डिजिटल होने वाला है। जी हां यदि आप चेक के द्वारा लेन-देन करते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब पूरे देश में ही नया चेक ट्रंकेशन सिस्टम शुरू होने जा रहा है। आख़िर क्या है यह नया चेक ट्रंकेशन सिस्टम? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि देश के केन्द्रीय बैंक यानी भारतीय रिज़र्व बैंक ने सितम्बर 2020 तक पूरे देश में चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) लागू करने की घोषणा की है। यानी यदि आपके पास नॉन सीटीएस चेक (Non-CTS Cheque) होंगे, तो सितम्बर के महीने से बैंक उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि CTS सिस्टम के तहत सम्बन्धित बैंक को चेक वास्तविक रूप से भेजने के बजाए इलेक्ट्रानिक रूप से उसकी तस्वीर के रूप में भेजा जाता है। चेक क्लियरिंग की सीटीएस प्रक्रिया की शुरुआत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में साल 2008 में पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर शुरू की गई थी, जिसके बाद आरबीआई ने इसे देश के अन्य शहरों में लागू करने की दिशा में आगे क़दम बढ़ाया, जिसके तहत चेन्नै में सितम्बर 2011 में, और मुम्बई में अप्रैल 2013 में इसे लागू किया गया था।
जानकारी के लिए बता दें कि चेक ट्रंकेशन सिस्टम में चेक को क्लियर करने के लिए एक बैंक से दूसरे बैंक में भेजने की ज़रूरत नहीं होती है। इस सिस्टम के तहत सिर्फ़ चेक की इलेक्ट्रॉनिक कॉपी ही पेश की जाती है। रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, यह सिस्टम चेक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में लगने वाली लागत को प्रभावी ठंग से कम करता है। साथ ही इस सिस्टम से चेक को कलेक्ट करने में लगने वाला समय भी बचता है। वहीं दावा किया जा रहा है कि इस सिस्टम से चेक प्रोसेसिंग की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में ज़्यादा आसान होगी। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चेक ट्रंकेशन सिस्टम को दुनिया के कई देशों में अपनाया जा चुका है।
बात दें कि सीटीएस के तहत बैंक चेक सैटलमेंट के लिए चेक की फिजिकल कॉपी की जगह स्कैन्ड कॉपी का इस्तेमाल करते हैं। चुंकि यह पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक हो जाती है, इसलिए सीटीएस में चेक क्लियर होने का समय पहले की तुलना में काफ़ी कम हो जाता है। वहीं देखा गया है कि चेक के फिजिकल क्लियरिंग के दौरान कई बार चेक गुम हो जाते हैं, जिसके कारण चेक सैटलमेंट में देरी हो जाती है, लेकिन अब चेक ट्रंकेशन सिस्टम के कारण चेक गुमने के बाद भी चेक क्लीयर होने में देरी नहीं लगेगी। वैसे अभी पुराने पद्धति से चेक क्लीयर होने में तीन दिन का समय लगता है, लेकिन चेक ट्रंकेशन सिस्टम के बाद चेक 24 घण्टे के अन्दर क्लीयर हो जाने का दावा किया जा रहा है।
आप सोच रहे होंगे कि आपकी चेक बुक सीटीएस वाली है कि नहीं यह कैसे पता करें? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपकी चेक बुक के चेक पर CTS-2010 Cheque नहीं लिखा है, तो इसका मतलब यह नॉन-सीटीएस चेक बुक है। तो तुरन्त ही चेक कीजिए कि कहीं आपके पास भी पुरानी चेक बुक तो नहीं है। और यदि आपके पास पुरानी चेक बुक है, तो आप बैंक जाकर पुरानी चेक बुक के बदले बैंक से नई सीटीएस वाली चेक बुक ले सकते हैं, और इसके लिए बैंक आपसे कोई चार्ज भी नहीं लेगा। वैसे बता दें कि अधिकांश बैंकों ने पहले ही 1 जनवरी, 2020 से नॉन-सीटीएस चेक को क्लीयर करना बंद कर दिया है।
रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, भारत में डिजिटल भुगतान तेज़ी से बढ़ रहा है, और इसी कारण से जल्द ही डिजिटल भुगतान सूचकांक (डीपीआई) जारी किया जाएगा। कहा जा रहा है कि रिज़र्व बैंक द्वारा नियमित अवधि पर डीपीआई तैयार किया जाएगा और उसे प्रकाशित किया जाएगा, जिससे प्रभावी तरीक़े से भुगतान में डिजिटलीकरण का पता लगाया जा सके। कहा जा सकता है कि रिज़र्व बैंक के इस क़दम से चेक क्लीयर होने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान और तेज़ गति से होगी। वहीं इस सिस्टम के अपनाने से चेक का फर्जी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। साथ ही पेपर क्लियरिंग को लेकर होने वाली रिस्क से भी छुटकारा मिलेगा। तो कहा जा सकता है कि पूरे देश में चेक ट्रंकेशन सिस्टम लागू होने से बैंकों और उपभोक्ताओं को दोनों को पहले की तुलना में सहूलियत होगी।